NATIONAL : सुपरटेक इकोविलेज में 13वीं से सातवीं मंजिल तक गिरी लिफ्ट, महिला का चार जगह से पैर टूटा

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ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सुपरटेक इकोविलेज-1 सोसायटी में 13वीं मंजिल से लिफ्ट अचानक नीचे गिर गई, जिसमें 65 वर्षीय रीना प्रसाद अपने दो नाती-नातिन के साथ सवार थीं. हादसे में महिला के पैर में चार फ्रैक्चर हो गए. परिजनों ने मौके पर व्हीलचेयर न मिलने का भी आरोप लगाया. सोसायटी में 97 लिफ्ट होने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं.

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एक नामचीन हाईराइज सोसायटी में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक लिफ्ट अचानक झटके के साथ नीचे आ गिरी. लिफ्ट में सवार 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला अपने दो नाती-नातिन के साथ थीं. घटना इतनी अचानक हुई कि तीनों संभल भी नहीं पाए. हादसे में महिला के पैर में चार जगह फ्रैक्चर हो गया, जबकि दोनों बच्चे बाल-बाल बच गए. यह घटना सुपरटेक इकोविलेज 1 सोसायटी की बताई जा रही है. परिवार और स्थानीय निवासियों ने सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

जानकारी के मुताबिक, रीना प्रसाद (65) एफ-7 टावर में अपने परिवार के साथ रहती हैं. उनके पति उमेश्वर प्रसाद ने बताया कि उनके 11 वर्षीय नाती और 7 वर्षीय नातिन पास ही स्थित जी-5 टावर में ट्यूशन पढ़ने जाते हैं. सोमवार को शाम करीब पांच बजे रीना प्रसाद बच्चों को लेने के लिए गई थीं. बच्चों को लेकर जब वे लिफ्ट से वापस अपने टावर की ओर लौट रही थीं, तभी 13वीं मंजिल पर पहुंचते ही अचानक बिजली चली गई. सामान्य स्थिति में बिजली जाने पर लिफ्ट यूपीएस के सहारे नजदीकी फ्लोर पर रुककर दरवाजा खोल देती है, लेकिन इस बार कुछ और ही हुआ.

परिवार के अनुसार, बिजली जाते ही लिफ्ट अचानक तेज झटके के साथ नीचे की ओर खिसक गई. बताया जा रहा है कि वह 13वीं मंजिल से सीधे सातवीं या आठवीं मंजिल तक आ गिरी. इस दौरान लिफ्ट के भीतर खड़े तीनों लोग संतुलन खो बैठे और फ्लोर पर गिर पड़े. रीना प्रसाद को सबसे ज्यादा चोट आई. बच्चों के मुताबिक, लिफ्ट कुछ क्षणों के लिए अंधेरे में डूबी रही और उन्हें समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या है. किसी तरह लिफ्ट आगे बढ़ी और ग्राउंड फ्लोर पर पहुंची.

ग्राउंड फ्लोर पर पहुंचने के बाद रीना प्रसाद लिफ्ट से बाहर निकलने की स्थिति में नहीं थीं. उनके पैर में तेज दर्द था और वह खड़ी भी नहीं हो पा रही थीं. बच्चे घबराए हुए थे और मदद के लिए इधर-उधर देखने लगे. परिजनों का आरोप है कि मौके पर व्हीलचेयर तक उपलब्ध नहीं थी. गार्ड से मदद मांगी गई, लेकिन टावर में व्हीलचेयर नहीं मिली. किसी तरह सहारे से उन्हें घर तक पहुंचाया गया. बाद में परिवार के सदस्य उन्हें अस्पताल लेकर गए.

अस्पताल में कराए गए एक्सरे में पता चला कि उनके पैर में चार जगह फ्रैक्चर है. डॉक्टरों ने प्लास्टर चढ़ाया और आराम की सलाह दी. उमेश्वर प्रसाद ने बताया कि घटना के बाद अभी तक थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है. बता दें कि प्रदेश में लिफ्ट और एस्केलेटर की सुरक्षा को लेकर नियम सख्त किए गए हैं. एक्ट के तहत सभी लिफ्ट का पंजीकरण और नियमित निरीक्षण अनिवार्य है. इसके बावजूद निवासियों का आरोप है कि सोसायटी में लिफ्ट से जुड़ी शिकायतें पहले भी आती रही हैं. इकोविलेज-1 सोसायटी में कुल 52 टावर हैं और करीब 97 लिफ्ट संचालित हैं. सभी लिफ्ट में यूपीएस सिस्टम लगा है. तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली जाने की स्थिति में यूपीएस की मदद से लिफ्ट को नजदीकी फ्लोर तक सुरक्षित पहुंचना चाहिए और दरवाजा खुल जाना चाहिए. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस मामले में तकनीकी खराबी थी, मेंटेनेंस में चूक हुई या फिर कोई और वजह?

हादसे के बाद सोसायटी के अन्य निवासियों में भी दहशत का माहौल है. कई लोगों का कहना है कि हाईराइज इमारतों में लिफ्ट जीवनरेखा की तरह होती है. यदि वही असुरक्षित हो जाए, तो रोजमर्रा का जीवन जोखिम भरा हो जाता है. कुछ निवासियों ने बताया कि पहले भी लिफ्ट अचानक रुकने या झटके से चलने की शिकायतें आई थीं. हालांकि बड़े हादसे की यह पहली घटना बताई जा रही है.

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