Monday, February 9, 2026
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DeepSeek AI ने ला दी Nvidia के शेयरों में तबाही, MCap $593 अरब घटा, निवेशकों की बढ़ी चिंता

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सोमवार को दुनिया के 500 सबसे अमीर लोगों को कुल 108 अरब डॉलर का भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस नुकसान में Nvidia के को-फाउंडर जेनसन हुआंग (Jensen Huang) का नाम भी शामिल है। नुकसान की यह बड़ी वजह चीनी एआई डेवलपर DeepSeek के उभरने और सस्ते एआई मॉडल्स के आने की आशंका है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इस डर के कारण टेक शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। Nasdaq इंडेक्स 3.1% तक गिर गया, जबकि चिपमेकर Nvidia का शेयर 17% टूट गया, जिससे कंपनी का बाजार पूंजीकरण महज एक दिन में 593 अरब डॉलर घट गया।

टेक शेयरों में आया भूचाल

इसकी वजह से सोमवार को Nasdaq 3.1% गिर गया। Nvidia के शेयरों में लगभग 17% की गिरावट देखी गई, जिससे कंपनी के मार्केट कैप (MCap) में रिकॉर्ड 593 अरब डॉलर की गिरावट आई। यह वॉल स्ट्रीट के इतिहास में किसी भी कंपनी के लिए एक दिन में सबसे बड़ी हानि है। सोमवार को Nvidia ने जितना नुकसान झेला, वह पिछले साल सितंबर में हुई कंपनी की एक दिन की गिरावट से दोगुना से ज्यादा था।

Nasdaq में Broadcom Inc को दूसरा सबसे बड़ा झटका लगा, जिसके शेयर 17.4% गिर गए। इसके बाद ChatGPT समर्थक Microsoft के शेयर 2.1% नीचे आ गए और Google की पेरेंट कंपनी Alphabet के शेयर 4.2% की गिरावट के साथ बंद हुए।

दुनिया के टॉप अमीरों के डूब गए 108 अरब डॉलर

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी संपत्ति वाले अरबपतियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, एनवीडिया के को-फाउंडर जेनसन हुआंग की संपत्ति में 20.1 अरब डॉलर की गिरावट आई, जो उनकी कुल संपत्ति का 20 प्रतिशत है। वहीं, ओरेकल कॉर्प के को-फाउंडर लैरी एलिसन (Larry Ellison) ने 22.6 अरब डॉलर का नुकसान झेला, जो उनकी संपत्ति का 12 प्रतिशत है।

डेल इंक के माइकल डेल (Michael Dell) को 13 अरब डॉलर और Binance Holdings Ltd के को-फाउंडर चांगपेंग “सीजेड” झाओ को 12.1 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।

एशिया से शुरू हुई बिकवाली का असर दुनियाभर के बाजारों पर दिखा

फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स में 9.2% की गिरावट आई, जो मार्च 2020 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। इस इंडेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान Marvell Technology को हुआ, जिसके शेयर 19.1% तक गिर गए।

अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट एशिया से शुरू हुई बिकवाली के बाद देखने को मिली। जापान की सॉफ्टबैंक ग्रुप के शेयर 8.3% गिरकर बंद हुए। इसके बाद यूरोप में ASML के शेयरों में 7% की गिरावट दर्ज की गई।

DeepSeek की एंट्री से घट सकती है चिप और डेटा सेंटर की मांग

पिछले सप्ताह, चीनी स्टार्टअप DeepSeek ने एक फ्री AI असिस्टेंट लॉन्च किया। कंपनी का दावा है कि यह AI असिस्टेंट कम डेटा और बेहद कम लागत पर काम करता है। सोमवार, 27 जनवरी तक, इस असिस्टेंट ने Apple के ऐप स्टोर पर अमेरिकी AI टूल ChatGPT को डाउनलोड के मामले में पीछे छोड़ दिया।

विस्कॉन्सिन के मेनोमोनी फॉल्स में Annex Wealth Management के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन जैकबसेन ने कहा, “अगर यह सच है कि DeepSeek एक बेहतर विकल्प है, तो यह पूरे एआई (AI) के उस नैरेटिव को प्रभावित कर सकता है, जिसने पिछले दो वर्षों में बाजारों को आगे बढ़ाने में मदद की है।”

उन्होंने कहा, “इसका मतलब यह हो सकता है कि चिप की मांग कम हो जाएगी, इन मॉडलों को चलाने के लिए बड़े पैमाने पर ऊर्जा उत्पादन की आवश्यकता कम होगी, और बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर की जरूरत भी घट जाएगी।” AI को लेकर बने उत्साह ने पिछले 18 महीनों में इक्विटी में बड़े पैमाने पर कैपिटल फ्लो को प्रेरित किया है, जिससे वैल्यूएशन बढ़े और स्टॉक मार्केट नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए।

Stock Market Update: सेंसेक्स में 600 अंक से ज्यादा की तेजी, 76,030 पर कर रहा कारोबार, Nifty भी 148 अंक मजबूत

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शेयर बाजार में आज यानी 28 जनवरी को बढ़त देखने को मिल रही है। सेंसेक्स 660 अंक से ज्यादा की तेजी के साथ 76,030 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं निफ्टी में भी करीब 148 अंक की तेजी है, ये 22,977 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 17 में तेजी और 13 में गिरावट देखने को मिल रही है। आज बैंकिंग और IT शेयर्स में आज बढ़त देखने को मिल रही है। वहीं FMCG और ऑटो शेयर्स में आज गिरावट है।

जापान के निक्‍केई में 0.65% की गिरावट

  • एशियाई बाजार में जापान के निक्‍केई में 0.65% की गिरावट देखने को मिल रही है। वहीं चीन का शंघाई कम्पोजिट इंडेक्स और कोरिया का कोस्पी आज बंद है।
  • NSE के डेटा के अनुसार, 27 जनवरी को विदेशी निवेशकों (FIIs) ने 5,015 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। इस दौरान घरेलू निवेशकों (DIIs) ने 6,642 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे।
  • 27 जनवरी को अमेरिका का डाओ जोंस 0.65% की बढ़त के साथ 44,713 पर बंद हुआ। S&P 500 इंडेक्स 1.46% गिरकर 6,012 पर बंद हुआ। नैस्डैक इंडेक्स में 3.07% की गिरावट रही।

कल बाजार में रही थी गिरावट

इससे पहले कल यानी 27 जनवरी को शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली थी। सेंसेक्स 824 अंक की गिरावट के साथ 75,366 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी में भी 263 अंक की गिरावट रही, ये 22,829 के स्तर पर बंद हुआ था।

दुनिया के टॉप 500 अमीरों को 108 बिलियन डॉलर का नुकसान, Zuckerberg और Bezos को हुआ फायदा

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चीनी एआई डेवलपर डीपसीक (DeepSeek) ने 24 घंटे में दुनिया के टॉप अमीरों का बड़ा नुकसान कर दिया। डीपसीक के कारण अमेरिका समेत दुनियाभर की शेयर मार्केट में गिरावट आई। सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिकी शेयर मार्केट हुआ। इस गिरावट के कारण दुनिया के टॉप 500 अमीर लोगों की नेटवर्थ संयुक्त रूप से 108 अरब डॉलर (करीब 9.34 लाख करोड़ रुपए) कम हो गई। बता दें कि सोमवार को अमेरिका मार्केट नास्डैक कंपोजिट इंडेक्स में 3.1% की गिरावट आई।

ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स (Bloomberg Billionaires Index) के अनुसार के अनुसार सबसे ज्यादा नुकसान उन अरबपतियों को हुआ जिनका करोबार एआई से जुड़ा है। इसमें ओरेकल कॉर्प (Oracle Corp.) के को-फाउंडर लैरी एलिसन (Larry Ellison) और एनवीडिया कॉर्प (Nvidia Corp.) के को-फाउंडर जेन्सन हुआंग (Jensen Huang) को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।

किसे कितना हुआ नुकसान?

24 घंटे में हुआंग की नेटवर्थ में 20.1 अरब डॉलर यानी 20% की गिरावट आई। इस गिरावट के साथ उनकी संपत्ति 101 अरब डॉलर रह गई है। वहीं लैरी एलिसन की नेटवर्थ को 12% यानी 22.6 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। अब उनकी नेटवर्थ 171 अरब डॉलर रह गई।

इस गिरावट के कारण डेल इंक के माइकल डेल ने 13 अरब डॉलर और बिनेंस होल्डिंग्स लिमिटेड के को-फाउंडर चांगपेंग ‘सीजेड’ झाओ ने 12.1 अरब डॉलर खो दिए। टेक-सेक्टर के दिग्गजों को 94 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।

अन्य टेक अरबपतियों को हुआ फायदा

सोमवार को मार्केट में बड़ी गिरावट के बाद भी कई टेक कंपनियां बच गईं। इससे इनके अरबपति फाउंडर या को-फाउंडर की नेटवर्थ में भी इजाफा हुआ। सोमवार को मेटा के शुरुआती सत्र में गिरावट से उबरने के बाद मार्क जुकरबर्ग की कुल संपत्ति 4.3 अरब डॉलर बढ़ गई। वहीं अमेजन के जेफ बेजोस की संपत्ति में करीब 632 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इनके अलावा बिल गेट्स की नेटवर्थ में भी 438 मिलियन डॉलर का इजाफा हुआ

पंजाब बोर्ड के Exams को लेकर अहम खबर, जारी हई नई Guidelines

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पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने सत्र 2024-25 के दौरान नॉन-बोर्ड कक्षाओं (छठी, 7वीं, 9वीं और 11वीं) के लिए अंग्रेजी विषय की वार्षिक परीक्षाओं में नई आंतरिक मूल्यांकन (आई.एन.ए.) और सतत समग्र मूल्यांकन (सी.सी.ई.) प्रणाली लागू की है। इस नई प्रणाली का उद्देश्य विद्यार्थियों की भाषा कौशल को मजबूत करना और समग्र विकास सुनिश्चित करना है। बोर्ड ने इस संबंध में स्कूल प्रमुखों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह मूल्यांकन 3 से 15 फरवरी तक स्कूल स्तर पर आयोजित किया जाएगा। शिक्षकों को ऑडियो क्लिप, प्रश्न बैंक और वर्कशीट जैसी सामग्री बोर्ड द्वारा प्रदान की जाएगी। शिक्षकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि मूल्यांकन प्रक्रिया में सभी विद्यार्थी सक्रिय रूप से भाग लें।

* लिसनिंग टैस्ट (6 अंक): विद्यार्थियों को ऑडियो क्लिप सुनाई जाएगी और 10 प्रश्न दिए जाएंगे, जिनमें से 6 का सही उत्तर देने पर प्रत्येक सही उत्तर के लिए 1 अंक मिलेगा।
* स्पीकिंग टेस्ट (4 अंक): विद्यार्थियों को दी गई तस्वीर देखकर कम से कम 4 वाक्य बोलने होंगे या प्रश्नों के सही उत्तर देने होंगे।
* कक्षा प्रदर्शन और अनुशासन (2 अंक): कक्षा में छात्रों के सहयोग और अनुशासन के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा।
* प्री-बोर्ड/टर्म परीक्षा (2 अंक): इन परीक्षाओं में प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाएंगे।
* नोटबुक और असाइनमैंट (6 अंक): नियमित कार्य और परियोजनाओं पर आधारित मूल्यांकन।

9वीं और 11वीं कक्षा के लिए अंग्रेजी विषय का आईएनए भी 20 अंकों का होगा। इसमें शामिल घटक और उनके अंक निम्नलिखित हैं:
* लिसनिंग टेस्ट (9 अंक): विद्यार्थियों को ऑडियो क्लिप सुनाई जाएगी और 10 प्रश्न दिए जाएंगे, जिनमें से 9 का सही उत्तर देने पर प्रत्येक सही उत्तर के लिए 1 अंक मिलेगा।
* स्पीकिंग टेस्ट (6 अंक): विद्यार्थियों को वर्कशीट आधारित सिचुएशन या क्यू कार्ड दिए जाएंगे, जिन पर बोलने के लिए मूल्यांकन किया जाएगा। मूल्यांकन उच्चारण, हाव-भाव और वाक्य संरचना के आधार पर होगा।
* प्री-बोर्ड/टर्म परीक्षा (3 अंक): इन परीक्षाओं के प्रदर्शन पर आधारित अंक।
* बुक बैंक और अन्य गतिविधियां (2 अंक): पुराने किताबों को लौटाने और अन्य गतिविधियों में भागीदारी के आधार पर अंक।

उत्तरी New England में महसूस किए गए भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.8

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बीती रात उत्तरी न्यू इंग्लैंड के कई इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। यह भूकंप रिक्टर स्केल पर 3.8 तीव्रता का था। भूकंप का केंद्र दक्षिणी मेन के यॉर्क हार्बर से लगभग 6 मील दक्षिण-पूर्व की दिशा में था। सर्वेक्षण में बताया गया कि यह भूकंप जमीन के 8 मील की गहराई पर था।

दूर-दूर तक महसूस किए गए भूकंप के झटके 

यह भूकंप न्यू इंग्लैंड के सभी राज्यों में महसूस किया गया। इसके अलावा पेन्सिलवेनिया जैसे दूर के इलाकों में भी कुछ लोगों ने हल्के झटकों की सूचना दी। भूकंप के कारण फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है लेकिन लोग डरे हुए हैं।

क्षेत्र में भूकंप दुर्लभ लेकिन संभव

न्यू इंग्लैंड क्षेत्र में भूकंप आमतौर पर कम आते हैं लेकिन इस बार आया भूकंप लोगों को डराने के लिए काफी था। स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से शांत रहने और सुरक्षित स्थान पर रहने की अपील की है।

कोई बड़ा नुकसान नहीं

भूकंप की तीव्रता ज्यादा नहीं थी लेकिन फिर भी झटकों के कारण लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।

वहीं लोगों को सतर्क रहने और किसी भी अप्रत्याशित घटना के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है। भूवैज्ञानिकों ने कहा कि यह भूकंप इस क्षेत्र में प्लेटों के हल्के टकराव का नतीजा हो सकता है।

Petrol-Diesel: इन लोगों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल और CNG… सख्त होने जा रहे नियम

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जल्द ही थर्ड पार्टी बीमा के बिना चलने वाले वाहनों पर सख्ती बढ़ाई जाएगी। ऐसे वाहनों को न तो पेट्रोल-डीजल मिलेगा और न ही सीएनजी भरवाने या फास्टैग खरीदने की अनुमति दी जाएगी। इसके साथ ही, जिन वाहनों के पास थर्ड पार्टी बीमा नहीं होगा, उनके ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण (renewal) भी रुक सकता है। इस कदम का उद्देश्य थर्ड पार्टी बीमा को बढ़ावा देना और सड़क दुर्घटनाओं में तीसरे पक्ष के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य करने के लिए बड़े कदम
वित्त मंत्रालय ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से सुझाव दिया है कि थर्ड पार्टी बीमा के बिना किसी भी वाहन को सड़क पर चलने की अनुमति न दी जाए। साथ ही, यह प्रस्तावित किया गया है कि केवल उन वाहनों को पेट्रोल-डीजल, सीएनजी और फास्टैग उपलब्ध कराया जाए, जिनके पास वैध थर्ड पार्टी बीमा हो।

सेवाओं को बीमा से जोड़ा जाएगा
सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय इन प्रस्तावों पर तेजी से काम कर रहा है। जल्द ही इन नियमों को लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इसके तहत, वाहन संबंधी सेवाओं को बीमा से जोड़ा जाएगा।

सख्त अनुपालन के लिए निर्देश
एक अधिकारी ने बताया कि पेट्रोल पंप और अन्य सेवाओं को इस तरह से जोड़ा जाएगा कि केवल वैध बीमा वाले वाहनों को ही ये सुविधाएं मिलें। इसके साथ ही, सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएंगे।

क्यों जरूरी है थर्ड पार्टी बीमा?
मोटर वाहन अधिनियम-1988 के तहत सभी वाहनों के लिए थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य है। यह बीमा सड़क दुर्घटनाओं में किसी तीसरे पक्ष को हुए नुकसान की भरपाई करता है। इसे कम से कम तीन महीने के लिए कराया जाना जरूरी है।

चार दिन काम, तीन दिन छुट्टी! यहां हफ्ते में करना पड़ेगा सिर्फ 4 दिन काम, कर्मचारियों के लिए खुशी की खबर

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पूरी दुनिया में काम करने के पैटर्न को लेकर विभिन्न बहसें चल रही हैं, लेकिन ब्रिटेन ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। वहां अब 200 से अधिक कंपनियों ने हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम करने का नियम लागू किया है, जिसमें किसी प्रकार की सैलरी कटौती नहीं की जा रही। यह कदम कर्मचारियों के जीवन स्तर को सुधारने और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालने के उद्देश्य से उठाया गया है।

क्या है यह नया नियम?
यूके में अब तक करीब 200 कंपनियां हफ्ते में 4 दिन काम करने के नियम को लागू कर चुकी हैं। यह कंपनियां विभिन्न क्षेत्रों से हैं, जैसे मार्केटिंग, विज्ञापन, आईटी, प्रौद्योगिकी, चैरिटी, और सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट। इन कंपनियों ने बिना सैलरी कम किए, कर्मचारियों को एक अतिरिक्त दिन की छुट्टी देने का निर्णय लिया है। यह कदम 4 डे वीक फाउंडेशन के सहयोग से लिया गया है, और इसका मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता को सुधारना है।

क्यों जरूरी है यह बदलाव?
इसी दौरान, 4 डे वीक फाउंडेशन के अभियान निदेशक जो राइल ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि 9-5 का काम करने का पैटर्न अब पुराने समय का हिस्सा बन चुका है। राइल के अनुसार, पिछले 100 वर्षों में दुनिया बदल चुकी है, और अब उस समय के काम के ढांचे में बदलाव की आवश्यकता है। उनका मानना है कि हफ्ते में 4 दिन काम करने से न केवल कर्मचारियों को ज्यादा छुट्टी मिलती है, बल्कि यह उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर डालता है। 4 डे वीक के समर्थकों का कहना है कि 5 दिन काम करने की प्रणाली ने कर्मचारियों को मानसिक और शारीरिक रूप से थका दिया है। कर्मचारियों को अधिक खाली समय मिलने से वे अपने परिवार और व्यक्तिगत जीवन को ज्यादा प्राथमिकता दे सकते हैं, जिससे उनका काम के प्रति समर्पण भी बढ़ेगा और कार्य में उत्पादकता में सुधार होगा। यह कदम न केवल कर्मचारियों के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह कंपनियों के लिए भी लाभकारी है, क्योंकि उत्पादकता बढ़ने के साथ-साथ कर्मचारियों की संतुष्टि और आकर्षण भी बढ़ेगा।

कौन-कौन सी कंपनियां हैं इस बदलाव के समर्थन में?
यह बदलाव सबसे पहले मार्केटिंग, विज्ञापन, और प्रेस रिलेशन से जुड़ी कंपनियों ने शुरू किया था। इसके बाद, तकनीकी कंपनियां, आईटी और सॉफ़्टवेयर फर्मों ने भी इसे अपनाया। इन कंपनियों में प्रमुख नाम लंदन की 59 कंपनियां हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान घर से काम करने का पैटर्न लागू होने के बाद कर्मचारियों ने ऑफिस में लौटने के लिए और भी अधिक विरोध दिखाया, जिससे यह बदलाव और भी जरूरी हो गया।

कोविड-19 के बाद कैसे हुआ वर्क कल्चर में बदलाव
कोविड-19 महामारी के दौरान घर से काम करने के अनुभव ने कर्मचारियों के दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया। जबकि कुछ बड़ी कंपनियां जैसे जेपी मॉर्गन चेस और अमेज़ॅन ने कर्मचारियों से सप्ताह में पांच दिन ऑफिस आने का आदेश दिया, वहीं कर्मचारियों ने इसका विरोध किया और घर से काम करने का अधिकार मांगने लगे। ऐसे में, हफ्ते में 4 दिन काम करने का विचार और भी प्रासंगिक हो गया।

जीवन की गुणवत्ता में सुधार 
इस बदलाव के समर्थन में लेबर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी अपनी आवाज उठाई है, हालांकि यह अभी तक पार्टी की आधिकारिक नीति नहीं बनी है। इस बदलाव का विशेष रूप से समर्थन युवा कर्मचारियों ने किया है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, 18 से 34 साल के कर्मचारियों का मानना है कि हफ्ते में 4 दिन काम करने का नियम अगले कुछ वर्षों में आदर्श बन जाएगा। लगभग 78 प्रतिशत युवा इस बदलाव के पक्षधर हैं, और उनका मानना है कि यह उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करेगा।

मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
युवाओं का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। एक सर्वेक्षण के मुताबिक, चार दिन काम करने से कर्मचारियों को मानसिक शांति मिलती है, जिससे उनकी उत्पादकता और समग्र जीवन संतुलित होता है। इस नए कार्य सप्ताह के परिणामस्वरूप, कर्मचारियों को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लाभ मिल सकते हैं और वे बेहतर कार्य प्रदर्शन कर सकते हैं।

कंपनियों को कैसे फायदा हो रहा है?
कंपनियों के लिए यह कदम न केवल कर्मचारियों को खुश रखने का तरीका है, बल्कि यह उनकी कार्यक्षमता और उत्पादकता में भी सुधार कर रहा है। कर्मचारियों के लिए काम करने का यह नया तरीका उनकी ताजगी को बनाए रखता है, जिससे वे काम में ज्यादा फोकस और बेहतर परिणाम देने में सक्षम होते हैं।

क्या भविष्य में यह बदलाव और देशों में लागू हो सकता है?
यह कदम निश्चित रूप से कर्मचारियों की भलाई और कार्य-जीवन संतुलन को बेहतर बनाने के लिए एक सकारात्मक पहल है। यूके के उदाहरण को देखते हुए, उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में यह बदलाव अन्य देशों में भी लागू किया जा सकता है, खासकर उन देशों में जहां कार्य संस्कृति अभी भी पुराने तरीके से चल रही है। यूके में 200 से ज्यादा कंपनियों ने हफ्ते में 4 दिन काम करने का नियम लागू किया है। यह निर्णय कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। 4 डे वीक फाउंडेशन द्वारा समर्थित इस कदम को विशेष रूप से युवा कर्मचारियों द्वारा सराहा जा रहा है। इस बदलाव के कारण कंपनियों को भी उत्पादकता में वृद्धि हो रही है।

कहीं आप भी त नहीं ‘संगम’ की जगह कर आए ‘यमुना स्नान’? इन घाटों पर डुबकी लगाए बिना अधूरी है महाकुंभ यात्रा

दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागम, महाकुंभ 2025 में रोजाना करोड़ों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम पर पहुंच रहे हैं। अब तक 140 मिलियन से अधिक लोग संगम पर डुबकी लगा चुके हैं। हालांकि इनमें से बहुत से लोग जाने-अनजाने यमुना को गंगा घाट समझकर वहीं डुबकी लगा रहे हैं। अगर आप भी महाकुंभ जाने की योजना बना रहे है तो आप भी यह गलती करने से बचें नहीं तो आपका वहां जाना व्यथर् हो जाएगा। चलिए विस्तार से समझिए इन घाटों के बारे में

महाकुंभ में शाही स्नान क्या होता है

शाही स्नान(राजयोगी स्नान) कुंभ मेले का सबसे महत्वपूर्ण स्नान होता है। यह उन खास तिथियों पर होता है जब अखाड़ों (संत समाजों) के साधु-संत सबसे पहले पवित्र स्नान करते हैं। शाही स्नान में नागा साधु, महामंडलेश्वर और अन्य संत अपनी परंपराओं के अनुसार स्नान करते हैं। यह सबसे पवित्र स्नान माना जाता है।शाही स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। लाखों श्रद्धालु इस दिन संगम स्नान करने आते हैं।

प्रयागराज के प्रमुख घाट और उनका महत्व

संगम घाट:- यही वह पवित्र स्थान है जहां गंगा, यमुना और सरस्वती मिलती हैं। यहां सबसे ज्यादा श्रद्धालु स्नान करने आते हैं। शाही स्नान भी यहीं होता है।

छतनाग और दशाश्वमेध घाट: त्रिवेणी घाट के अलावा इन दो घाटों पर भी आप डुबकी लगा सकते हैं, लेकिन ये घाट थोड़े दूर हैं, जिस वजह से श्रद्धालु बस त्रिवेणी संगम घाट भी पर ही डुबकी लगाने के लिए आते हैं।

अरैल घाट: यह संगम के पार स्थित है, जहां से अखाड़ों के साधु स्नान के लिए संगम की ओर जाते हैं। यहां कई आश्रम और संतों के डेरा होते हैं।

किला घाट: यह घाट प्रयागराज किले के पास स्थित है और काफी ऐतिहासिक है। यहां से संगम जाने के लिए कई नावें उपलब्ध होती हैं।

अक्षयवट घाट: यहां स्थित अक्षयवट (अमर वृक्ष)बहुत ही पवित्र माना जाता है। संगम के करीब होने के कारण यह स्नान के लिए उपयुक्त है।

यमुना घाट:- यह घाट प्रयागराज में यमुना नदी के किनारे स्थित होते हैं। यहां गंगा नहीं मिलती, इसलिए इसे संगम स्नान की श्रेणी में नहीं रखा जाता।

संगम घाट पर शाही स्नान कैसे करें?

शाही स्नान के दिन सबसे पहलेनागा साधु और अखाड़ों के संत स्नान करते हैं। आम श्रद्धालु उनके स्नान के बाद स्नान कर सकते हैं। शाही स्नान के दिन सूर्योदय से पहलेस्नान करना श्रेष्ठ माना जाता है। साधु-संतों के बाद ही आम भक्तों को स्नान की अनुमति मिलती है। महिलाओं के लिए अलग स्नान क्षेत्र बनाए जाते हैं। संगम तक पहुंचने के लिएनाव की सुविधा उपलब्ध होती है।

महाकुंभ 2025 के प्रमुख शाही स्नान तिथियां

पहला शाही स्नान (मकर संक्रांति) -14 जनवरी 2025

दूसरा शाही स्नान (मौनी अमावस्या)- 29 जनवरी 2025

तीसरा शाही स्नान (बसंत पंचमी)- 3 फरवरी 2025

चौथा शाही स्नान (माघी पूर्णिमा)- 12 फरवरी 2025

पांचवां शाही स्नान (महाशिवरात्रि)-26 फरवरी 2025

Air India की मुंबई-दुबई फ्लाइट में 5 घंटे तक फंसे यात्री, बिना AC के केबिन में मच गया हंगामा

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 मुंबई से दुबई जा रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट में यात्रियों को 5 घंटे तक खराब AC के बीच कैद रहना पड़ा। इस दौरान, यात्री जिनमें छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे जो घुटन से परेशान हो गए। घटना का वीडियो एक यात्री ने सोशल मीडिया पर साझा किया, जो अब वायरल हो गया है। इस वीडियो को अब तक 28 मिलियन व्यूज मिल चुके हैं।

यात्री ने अपनी आपबीती इंस्टाग्राम पर लिखते हुए कहा, “सुबह 8:25 बजे उड़ान भरने वाली फ्लाइट 5 घंटे की देरी से रवाना हुई। इस दौरान एसी काम नहीं कर रहा था, और क्रू ने कोई राहत नहीं दी। जब यात्रियों ने दबाव बनाया, तब जाकर दरवाजे खोले गए और उन्हें बाहर निकलने दिया गया।”

वीडियो में देखा जा सकता है कि यात्री अपनी सीट छोड़कर केबिन के सामने इकट्ठा हो गए। एक व्यक्ति को जोर से चिल्लाते हुए सुना गया, “हमें आप पर भरोसा नहीं है। हम अपनी जान खतरे में नहीं डाल सकते। हमें यहां से जाने दो।” कुछ यात्री ओवरहेड बिन पर हाथ मारते नजर आए, जबकि कई अन्य लोग क्रू से दरवाजा खोलने की गुहार लगा रहे थे। इस दौरान, फ्लाइट क्रू ने इंटरकॉम पर यात्रियों से कहा, “एयरोब्रिज कनेक्ट करना होगा। कृपया समझने की कोशिश करें।”

वीडियो पोस्ट करने वाले यात्री ने यह भी आरोप लगाया कि फ्लाइट के कप्तान ने एक बार भी कॉकपिट से बाहर आकर यात्रियों को स्थिति के बारे में जानकारी नहीं दी। उन्होंने लिखा, “कप्तान ने पूरे 5 घंटे तक यात्रियों को शांत करने के लिए कुछ नहीं किया। यह उच्च समय है कि उड्डयन मंत्रालय ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई करे। हमेशा यात्रियों को ही क्यों भुगतना पड़ता है?”

यह वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

  • एक यूजर ने लिखा, “घंटों तक यात्रियों को बिना एसी के रोकना अमानवीय है। ऐसे मामलों पर सख्त कानून होने चाहिए। देरी होने पर यात्रियों को उतार देना चाहिए।”
  • दूसरे ने कहा, “5 मिनट बिना एसी के रहना मुश्किल है। यह सोचकर ही डर लगता है कि यात्रियों ने घंटों यह घुटन कैसे झेली होगी।”
  • कुछ ने क्रू का बचाव भी किया। एक यूजर ने लिखा, “एयर इंडिया के हाथ में सब कुछ नहीं होता। एयर ट्रैफिक कंट्रोल और कस्टम अधिकारी यात्रियों को उतारने की अनुमति देते हैं। क्रू अपनी तरफ से सिर्फ अपना काम कर रहा था।

यौन उत्पीड़न की शिकायत के लिए अबतक Online System क्यों नहीं की गई? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से किया सवाल?

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक ऑनलाइन शिकायत प्रणाली बनाने पर विचार करने को कहा है जिससे यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराना आसान हो सके। कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को पुलिस स्टेशन जाने की बाध्यता खत्म होनी चाहिए। इसके लिए एक केंद्रीय एजेंसी बनाई जाए जो शिकायतों को ऑनलाइन प्राप्त कर संबंधित थानों तक भेज सके। केंद्र सरकार को इस मामले पर 6 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा गया है।

SCWLA की याचिका और मुख्य मांगें

महिला वकीलों के संगठन ‘सुप्रीम कोर्ट वुमेन लॉयर्स एसोसिएशन’ (SCWLA) ने महिलाओं की सुरक्षा पर गाइडलाइंस बनाने और कानूनों में सुधार की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में 20 प्रमुख मांगें रखी गई हैं जिनमें शामिल हैं:

➤ सार्वजनिक स्थानों और इमारतों में सीसीटीवी कैमरे लगाना।
➤ पोर्नोग्राफिक सामग्री पर सख्त रोक लगाना।
➤ रेप के दोषियों के लिए कठोर सजा, जैसे बधियाकरण (प्रजनन अंग को अयोग्य बनाना)।
➤ ओला-उबर और अन्य परिवहन सेवाओं से जुड़े लोगों को महिला सुरक्षा का प्रशिक्षण देना।
➤ OTT प्लेटफॉर्म पर अश्लील सामग्री को नियंत्रित करना।

16 दिसंबर 2024 को याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर 2024 को याचिका को विचार के लिए स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने कहा कि याचिका में कुछ मांगें कठोर हैं लेकिन उनमें कई व्यावहारिक बातें भी शामिल हैं जिन पर विचार करना जरूरी है।

बेंगलुरु की घटना पर जजों की चिंता

27 जनवरी को इस याचिका पर फिर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान SCWLA की अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील महालक्ष्मी पवनी ने जजों को बेंगलुरु में हुई एक घटना के बारे में बताया।

➤ उन्होंने बताया कि उबर के जरिए बुक किए गए एक ऑटोरिक्शा में महिला के साथ दुर्व्यवहार हुआ।
➤ महिला और उसके पति को शिकायत दर्ज कराने के लिए कई थानों के चक्कर लगाने पड़े।
➤ इस पर जजों ने चिंता जताई और कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए।

केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट का सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि महिलाओं के लिए ऑनलाइन शिकायत की व्यवस्था अब तक क्यों नहीं बनी है?
केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे काफी व्यापक हैं। इस पर जजों ने कहा कि तकनीकी बातों के बावजूद याचिका में महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं।

महिला सुरक्षा को लेकर SCWLA की मुख्य बातें

➤ छोटे शहरों में अनदेखी अपराधों को रोकना: याचिका में कहा गया कि बड़े शहरों के अपराध चर्चा में आ जाते हैं लेकिन छोटे स्थानों पर होने वाले अपराधों को दबा दिया जाता है।
➤ महिला सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश: कोर्ट से कानूनों में सुधार और सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई।
➤ सुरक्षा गार्ड की वेरिफिकेशन: केवल प्रशिक्षित और वेरिफाइड गार्ड को ही नियुक्त किया जाए।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 6 सप्ताह के भीतर अलग-अलग मंत्रालयों से विचार लेकर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाया जाना चाहिए जिससे महिलाएं बिना किसी झिझक के शिकायत दर्ज कर सकें।

यह मामला एक बार फिर महिला सुरक्षा की गंभीरता और इसके लिए उठाए जाने वाले ठोस कदमों पर ध्यान आकर्षित करता है।

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