Saturday, February 7, 2026
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इन लोगों को नहीं मिलेगा प्रधानमंत्री आवास योजना का फायदा, 31 मार्च तक चलेगा सर्वे

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प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) 2.0 का सर्वे अब शुरू हो चुका है। यह योजना विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों को पक्का घर देने के लिए बनाई गई थी। इस योजना के तहत 2024-25 से लेकर 2028-29 तक कई परिवारों को पक्के मकान मिलेंगे। मध्य प्रदेश में 31 मार्च 2025 तक लोग नए आवेदन कर सकते हैं, और इसके लिए अब मोबाइल ऐप का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या है पीएम आवास योजना (ग्रामीण) 2.0?
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का दूसरा चरण ग्रामीण इलाकों के पात्र परिवारों को पक्के मकान देने के लिए शुरू किया गया है। इस योजना के तहत, मध्य प्रदेश में पात्र परिवारों को पक्के घर मिलेंगे। इस सर्वे में उन परिवारों को वरीयता दी जाएगी जो बेघर हैं, विशेषकर अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों को।

कैसे करें आवेदन
अब आवेदक खुद अपने मोबाइल से इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें “Awas Plus” ऐप डाउनलोड करना होगा। इस ऐप के जरिए सर्वे प्रक्रिया में हिस्सा लिया जा सकता है। राष्ट्रीय सूचना केंद्र ने यह ऐप तैयार किया है, जिससे लोग आसानी से अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।

आवेदन की प्रक्रिया और नियम

  • लाभार्थी को अपने मोबाइल में Awas Plus-2024 सर्वे और आधार फेस आईडी ऐप डाउनलोड करना होगा।
  • आवेदन के लिए आधार कार्ड जरूरी है।
  • एक मोबाइल फोन से एक ही आवेदन किया जा सकता है।

पीएम आवास योजना के लिए प्राथमिकताएं
इस योजना में सबसे पहले उन परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनके पास घर नहीं है, खासकर अनुसूचित जाति-जनजाति के परिवारों को। इसके बाद बाकी पात्र परिवारों को घर दिए जाएंगे।

कौन लोग इस योजना का लाभ नहीं उठा सकेंगे?

  • जिन किसान की केसीसी लिमिट 50 हजार से अधिक है।
  • जिनके पास पक्का घर, तीन पहिया या चार पहिया वाहन हैं।
  • जिनके पास ढाई एकड़ या उससे अधिक सिंचित भूमि है।
  • जिनके पास 11.5 एकड़ या उससे अधिक असिंचित भूमि है।
  • जिनके परिवार में कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है या जिनका कोई व्यवसाय है।
  • जो लोग इनकम टैक्स या बिजनेस टैक्स देते हैं, वे भी इस योजना से बाहर रहेंगे।

समाप्ति की तारीख
31 मार्च 2025 तक इस सर्वे को पूरा करने का लक्ष्य है, और उसके बाद पात्र परिवारों को पक्के मकान दिए जाएंगे।

अमित शाह रहेंगे नासिक के दौरे पर, त्र्यंबकेश्वर मंदिर में करेंगे पूजा-अर्चना

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को नासिक जिले में होंगे, जहां वह प्रसिद्ध त्र्यंबकेश्वर मंदिर जाएंगे। शाह विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए मालेगांव शहर और अजंग गांव जाने से पहले 12 ज्योतिर्लिंग में से एक त्र्यंबकेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे।

कर्नाटक में मंकीपॉक्स की दस्तक, सामने आया पहला केस, दुबई से लौटा शख्स पाया गया पॉजिटिव

कर्नाटक के मंगलुरु में में मंकीपॉक्स का पहला पुष्ट मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि उडुपी जिले के करकला तालुक का निवासी 40 वर्षीय मरीज की हालत स्थिर है और उसे कोई गंभीर जटिलता नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि 17 जनवरी को दुबई से आए मरीज को जल्द ही छुट्टी मिलने की उम्मीद है और अधिकारियों ने लोगों से नहीं घबराने की अपील की है।

मरीज की पत्नी, जिसने उसे हवाई अड्डे पर प्राप्त किया था, को प्राथमिक संपकर् के रूप में पहचाना गया है। उन्हें अलग-थलग रहने और अगले कुछ दिनों तक किसी भी लक्षण पर नजर रखने की सलाह दी गई है। एक बयान में, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के प्रधान सचिव हर्ष गुप्ता और एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के निदेशक अंसार अहमद ने लोगों को आश्वस्त किया कि यह बीमारी ज्यादातर मामलों में हल्की और स्व-सीमित होती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लोगों को घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि यह बीमारी मुख्य रूप से निकट या घनिष्ठ संपर्क से फैलती है और यह कोविड-19 जितनी संक्रामक नहीं है।

इसके लक्षणों में आमतौर पर त्वचा पर चकत्ते, बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और ठंड लगना शामिल हैं। अधिकारियों ने उच्च जोखिम वाले देशों की यात्रा करने वाले लोगों या पुष्टि मामलों के निकट संपर्क में रहने वाले लोगों को इनमें से किसी भी लक्षण का अनुभव होने पर चिकित्सा सलाह लेने की सलाह दी। मंकीपॉक्स का उपचार बुखार और शरीर के दर्द जैसे लक्षणों को कम करने पर केंद्रित है, साथ ही संक्रमित घावों से होने वाले द्वितीयक संक्रमणों के लिए एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जाता है। पर्याप्त हाइड्रेशन, पोषण और विश्राम सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।

वर्तमान में, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए भारत सरकार की ओर से कोई अनिवार्य परीक्षण आवश्यकताएं या सलाह नहीं दी गई है। स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और लोगों को आश्वस्त कर रहे हैं कि मामले को प्रबंधित करने के लिए आवश्यक उपाय किए गए हैं।

US citizenship: अमेरिका में 20 फरवरी से पहले सीजेरियन डिलीवरी की होड़

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डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिका में जन्म लेने पर स्वाभाविक नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) को खत्म कर दिया है। इसके तहत, 20 फरवरी के बाद जन्म लेने वाले बच्चों को अब अमेरिका की नागरिकता नहीं मिलेगी।

हालांकि इस घोषणा के बाद अमेरिका की एक अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा जन्म के आधार पर नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) को निरस्त करने के फैसले पर रोक लगा दी है। अदालत ने इस निर्णय को असंवैधानिक करार दिया है और कहा कि यह अमेरिकी संविधान के तहत दी गई नागरिकता के अधिकारों का उल्लंघन करता है।

◆क्या है बर्थराइट सिटिजनशिप?
बर्थराइट सिटिजनशिप अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन का हिस्सा है, जिसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को वहां की नागरिकता मिलती है। ट्रंप प्रशासन ने इस कानून को समाप्त कर गैरकानूनी प्रवासियों के बच्चों को नागरिकता देने पर रोक लगाने की कोशिश की थी।

◆जज का फैसला
अदालत के जज ने अपने फैसले में कहा कि ट्रंप प्रशासन का यह कदम स्पष्ट रूप से असंवैधानिक है। इस कानून को समाप्त करने के लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता होगी, जो प्रशासन की कार्यकारी शक्तियों के दायरे से बाहर है।

◆ बर्थराइट सिटिजनशिप खत्म करने का आदेश
राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस आदेश को लागू करने के लिए 30 दिन का समय दिया है। इस फैसले के बाद अमेरिका में गर्भवती महिलाएं जल्द-से-जल्द अपनी डिलीवरी कराने की कोशिश कर रही हैं, जिससे उनके बच्चों को अमेरिकी नागरिकता का अधिकार मिल सके।

◆ सीजेरियन डिलीवरी का ट्रेंड बढ़ा
इस फैसले के बाद अमेरिका के कई अस्पतालों में सीजेरियन डिलीवरी के मामलों में तेजी देखी जा रही है। गर्भवती महिलाएं 20 फरवरी से पहले अपने बच्चों का जन्म सुनिश्चित करने के लिए ऑपरेशन का सहारा ले रही हैं।

ट्रम्प प्रशासन के इस फैसले से हजारों परिवार प्रभावित होंगे, खासकर उन प्रवासियों के जो अमेरिका में अपने बच्चों को नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से रह रहे हैं।

◆ प्रवासी समुदाय को राहत
हालांकि अदालत के इस फैसले से प्रवासी समुदाय को बड़ी राहत मिली है। यह निर्णय उन लाखों बच्चों और परिवारों के लिए उम्मीद लेकर आया है, जो इस कानून के निरस्त होने से प्रभावित हो सकते थे।

◆ ट्रंप प्रशासन की दलील
ट्रंप प्रशासन ने तर्क दिया था कि बर्थराइट सिटिजनशिप के कारण अवैध प्रवासियों की संख्या बढ़ रही है और यह अमेरिका की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। हालांकि अदालत ने इसे खारिज कर दिया।

यह मामला अब उच्च न्यायालय तक पहुंच सकता है, लेकिन फिलहाल इस फैसले ने बर्थराइट सिटिजनशिप के अधिकार को बहाल कर दिया है।

महाकुम्भ में आस्था की डुबकी लगाने दक्षिण अफ्रीका से आएंगे हजारों श्रद्धालु

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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जारी महाकुम्भ में दक्षिण अफ्रीका से हजारों श्रद्धालुओं के जाने की उम्मीद है। जोहानिस्बर्ग में भारत के महावाणिज्यदूत महेश कुमार ने बुधवार शाम कहा, ‘‘13 जनवरी को महाकुम्भ की शुरुआत के बाद से कुछ ही दिनों में उन लोगों के लिए सौ से ज्यादा वीजा जारी किए जा चुके हैं जो इसमें शामिल होने के इच्छुक हैं और कई लोगों ने इसमें शामिल होने के लिए अपने प्रवासी भारतीय नागरिकता (OCI) कार्ड का इस्तेमाल किया है।”

कुमार ‘महाकुंभ 2025- वेयर स्पिरिचुएलिटी मीट्स टेक्निकल इनोवेशन’ नामक संगोष्ठी की मेजबानी कर रहे थे, जिसमें विभिन्न वक्ताओं ने इस आयोजन के इतिहास और आध्यात्मिक लाभों पर प्रकाश डाला। कुमार ने कहा, ‘‘ट्रैवल एजेंट विशेष पैकेज भी तैयार कर रहे हैं, जिससे महाकुम्भ में लोगों की संख्या में और इजाफा होने की उम्मीद है।” उन्होंने कहा, ‘‘महाकुम्भ में शामिल होने के इच्छुक लोगों के मन में बहुत सारे प्रश्न हैं और इसी को देखते हुए यह संगोष्ठी आयोजित की गई है।”

दक्षिण अफ्रीका में पर्यावरण कार्यकार्ता एवं ‘सेव सॉइल मूवमेंट’ के नेता त्सेके नकादिमेंग महाकुम्भ में जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह का अगला महाकुम्भ साल 2169 में होगा। यह जानने के लिए कि यह वास्तव में है क्या, आपको वहां जाना ही चाहिए..।” दक्षिण अफ्रीका के रामकृष्ण केंद्र के स्वामी विप्रानंद महाराज ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में किसी भी ऐसे व्यक्ति के लिए कुम्भ की कल्पना करना मुश्किल है जिसने इस तरह के आयोजन का अनुभव नहीं किया है।

जापान में भूकंप के झटकों से कांपी धरती, घरों से बाहर आए लोग

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जापान में फुकुशिमा प्रांत के आइज़ू क्षेत्र में गुरुवार तड़के भूकंप के मध्यम झटके महसूस किये गये। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.2 मापी गई। इसके बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने आने वाले हफ़्तों में इसी तरह के झटकों की चेतावनी दी थी। साथ ही लोगों से भूस्खलन और हिमस्खलन से सावधान रहने की सलाह दी गई है।

भूकंप के कारण किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है और सुनामी की चेतावनी भी जारी नहीं की गई है। इसके अलावा फुकुशिमा, तोचिगी, गुन्मा और निगाटा प्रान्तों के कुछ हिस्सों में रिक्टर पैमाने पर तीन तीव्रता के झटके महसूस किए गए, जबकि कांटो और तोहोकू क्षेत्रों सहित व्यापक क्षेत्र में इससे कम तीव्रता के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय प्रसारक एनएचके की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार से इस क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियां बढ़ गई हैं तथा गुरुवार को स्थानीय समयानुसार सुबह पांच बजे तक एक या उससे अधिक तीव्रता के 15 झटके महसूस किये गये।

रिपोर्ट में क्षेत्रीय अधिकारी, पुलिस और दमकल विभाग के अनुसार किसी भी जानमाल की रिपोर्ट सामने नहीं आई है। अधिकारी भूकंप के संभावित झटकों और अन्य तरह की आपदाओं के लिए हाई अलर्ट पर हैं। जापान भूकंप के सक्रिय क्षेत्र में स्थित है जिसे‘रिंग ऑफ फायर’के रूप में जाना जाता है। देश नियमित अंतराल के दौरान भूकंप के शक्तिशाली झटकों से प्रभावित होता रहता है।

गौरतलब है कि वर्ष 2011 में देश में रिक्टर पैमाने पर 9.0 तीव्रता वाले भूकंप और इसके बाद आई सुनामी की चपेट में 15 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गयी थी। देश के फुकुशिमा परमाणु संयंत्र हादसा भी हुआ था।

ट्रंप के सबसे ‘बड़े आदेश’ को कोर्ट से लगा झटका, जन्मजात कानून को बदलने वाले आदेश पर रोक

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अमेरिका की फेडरल कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जन्मजात नागरिकता (Birthright Citizenship) को खत्म करने के लिए जारी किए गए आदेश पर 14 दिनों की अस्थायी रोक लगा दी है। यह फैसला फेडरल कोर्ट के जज जॉन कफनौर ने वॉशिंगटन, एरिजोना, इलिनोइस और ओरेगन राज्यों द्वारा दायर याचिका पर सुनाया।

जज का आदेश: स्पष्ट रूप से असंवैधानिक
सीएनएन के मुताबिक, सुनवाई के दौरान जस्टिस डिपार्टमेंट के वकील से सवाल करते हुए जज कफनौर ने कहा कि ट्रंप का यह आदेश “स्पष्ट रूप से असंवैधानिक” है। उन्होंने कहा, “मैंने अपने 40 साल के न्यायिक करियर में ऐसा कोई मामला नहीं देखा, जो इतना साफ तौर पर संविधान के खिलाफ हो।” मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी को होगी।

क्या है ट्रंप का आदेश?
ट्रंप ने 20 जनवरी को अपने शपथ ग्रहण के दिन “प्रोटेक्टिंग द मीनिंग एंड वैल्यू ऑफ अमेरिकन सिटिजनशिप” नामक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किया था। इस आदेश के जरिए तीन परिस्थितियों में जन्मजात नागरिकता (जूस सोली) पर रोक लगाई गई:

  • अगर बच्चे की मां अवैध रूप से अमेरिका में रह रही हो।
  • अगर मां अमेरिका की वैध, लेकिन अस्थायी निवासी हो।
  • अगर पिता अमेरिकी नागरिक या स्थायी निवासी न हो।

22 राज्यों ने जताया विरोध
ट्रंप के आदेश के खिलाफ 22 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने फेडरल कोर्ट में याचिका दायर की। उनका कहना है कि 14वें संशोधन के तहत हर व्यक्ति को अमेरिका में जन्म लेने के बाद नागरिकता का अधिकार है और इसे रोकने का अधिकार राष्ट्रपति या कांग्रेस के पास नहीं है। न्यू जर्सी के अटॉर्नी जनरल मैथ्यू प्लैटकिन ने कहा, “राष्ट्रपति शक्तिशाली हो सकते हैं, लेकिन वे राजा नहीं हैं। वे संविधान को कलम के एक झटके से बदल नहीं सकते।”

14वें संशोधन का इतिहास और विवाद
14वां संशोधन 1868 में अमेरिका के गृहयुद्ध के बाद लागू हुआ था। इसका उद्देश्य गुलामी के शिकार अश्वेत अमेरिकियों को नागरिकता देना था। इसके तहत कहा गया कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति नागरिक होगा चाहे उसके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो। हालांकि आलोचकों का कहना है कि इस कानून का फायदा उठाकर गरीब और युद्धग्रस्त देशों के लोग अमेरिका में बच्चों को जन्म देते हैं। इसे बर्थ टूरिज्म कहा जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हर साल लाखों बच्चों को इस कानून के जरिए अमेरिकी नागरिकता मिलती है और उनके माता-पिता को अमेरिका में रहने का कानूनी आधार मिलता है।

प्यू रिसर्च की रिपोर्ट: भारतीय बच्चे भी शामिल
प्यू रिसर्च सेंटर की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक 16 लाख भारतीय बच्चों को अमेरिका में जन्म लेने की वजह से नागरिकता मिली है। ट्रंप के आदेश से इस तरह के मामलों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

अवैध प्रवासियों पर भी सख्ती
एक अन्य आदेश में अमेरिकी कांग्रेस ने लेकेन रिले एक्ट पारित किया। इस कानून के तहत अवैध प्रवासियों और अपराधों में शामिल अप्रवासियों को हिरासत में लेकर डिपोर्ट करना अनिवार्य होगा। यह कानून जॉर्जिया राज्य के 22 वर्षीय छात्र लेकेन रिले की हत्या के बाद लाया गया। उनकी हत्या एक वेनेजुएला के अवैध प्रवासी ने की थी।

ट्रम्प के फैसले से क्या बदलेगा?
ट्रंप के आदेश के लागू होने पर हर साल करीब 1.5 लाख नवजातों को नागरिकता नहीं मिलेगी। यह आदेश 30 दिन बाद यानी 19 फरवरी से लागू होना था लेकिन फेडरल कोर्ट की रोक के चलते इस पर असमंजस की स्थिति बन गई है।

सुनवाई का असर और भविष्य
मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी को होगी जिसमें कोर्ट यह तय करेगी कि ट्रंप के आदेश को लागू किया जाए या इसे पूरी तरह रद्द कर दिया जाए। यह मामला न सिर्फ अमेरिकी संविधान के लिए बल्कि लाखों अप्रवासियों और उनके बच्चों के भविष्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

पुलिस के बुनियादी ढांचे बनाने को खर्च किए जाएंगे 426 करोड़

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पंजाब सरकार द्वारा अगले तीन वर्षों में पुलिस भवनों, विशेष रूप से पुलिस थानों और पुलिस लाइनों के उन्नयन और आधुनिकीकरण के लिए 426 करोड़ रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत कर दी गई है। इससे पंजाब पुलिस को अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन मिला है। यह जानकारी गुरुवार को डीजीपी पंजाब गौरव यादव ने दी।

उन्होंने कहा, “426 करोड़ रुपये की इस राशि का उपयोग पूरे राज्य में पुलिस भवनों, खासतौर पर पुलिस थानों, पुलिस लाइनों और अन्य पुलिस बुनियादी ढांचे को आधुनिक और उन्नत बनाने के लिए किया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा कि इससे पुलिस बल की कार्यक्षमता और प्रभावशीलता में वृद्धि होगी।

गौरतलब है कि डीजीपी पंजाब ने गणतंत्र दिवस को ध्यान में रखते हुए फिरोजपुर, बठिंडा और पटियाला पुलिस रेंज में कानून व्यवस्था की समीक्षा करने और सुरक्षा प्रबंधों का जायजा लेने के लिए त्वरित दौरा किया। अपने इस दौरे के दौरान, डीजीपी गौरव यादव ने बठिंडा में पुनर्निर्मित कॉन्फ्रेंस हॉल का उद्घाटन किया और पटियाला में पुलिस कंट्रोल रूम (पीसीआर) के लिए 20 मोटरसाइकिलों को समर्पित किया। साथ ही, पुलिस बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए चल रही कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया। ये मोटरसाइकिलें कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंडिंग के तहत पटियाला पीसीआर में शामिल की गई हैं।

डीजीपी ने कहा कि पंजाब पुलिस आगामी गणतंत्र दिवस-2025 के सुरक्षित और शांतिपूर्ण आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है और पूरे राज्य में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि सभी सीपीज/एसएसपीज को सुरक्षा को कड़ा करने, गश्त तेज करने और रात्रि समय में नाइट डोमिनेशन ऑपरेशन्स को और अधिक मुस्तैदी से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

विभिन्न रेंजों के अधिकारियों के साथ कानून व्यवस्था समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता करते हुए, डीजीपी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देशों के अनुरूप राज्य में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा अलर्ट और आवश्यक जानकारियां साझा कीं।

उन्होंने सीपीज/एसएसपीज को सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस की उपस्थिति बढ़ाने और अपने-अपने क्षेत्रों में संवेदनशील स्थानों पर निगरानी और गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके अलावा, पुलिस नाकों की संख्या बढ़ाने के भी आदेश जारी किए गए हैं।

खेलों में योगदान को मान्यता देते हुए, डीजीपी पंजाब गौरव यादव ने ‘यूथ कनेक्ट’ कार्यक्रम के तहत, जिला संगरूर में युवा एथलीटों को प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले 6 कोचों को पदोन्नति दी। इस पहल का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करना है ताकि उन्हें नशे से दूर रखकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इस कार्यक्रम के माध्यम से साधारण परिवारों के कम से कम 78 बच्चों को खेल में उपलब्धियों के आधार पर नौकरियां पाने में सहायता मिली है।

26 जनवरी से दिल्ली में चुनाव प्रचार शुरु करेंगी प्रियंका गांधी वाड्रा

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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा दिल्ली में 26 जनवरी से चुनाव प्रचार शुरु कर सकती है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार प्रियंका उत्तर-पूर्वी दिल्ली में अपनी पहली रैली को संबोधित करेंगी। प्रियंका द्वारा पार्टी के उम्मीदवारों को अपने- अपने चुनावी क्षेत्रों में प्रचार करने का अनुरोध किया है, जबकि प्रियंका खुद केवल चुनिंदा और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ही रैलियां करेंगी।

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पार्टी ने जनता से किए ये बड़े वादे –

कांग्रेस ने दिल्ली के विधानसभा चुनावों के लिए लोगों से 5 बड़े वादे किए हैं। इन वादों में “प्यारी दीदी योजना” के तहत महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये देने का वादा किया गया है, जो सबसे अहम है। इसके अलावा, दिल्ली के हर निवासी को 25 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा, शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार के लिए 8,500 रुपये प्रति माह वजीफा मिलेगा, 500 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर मिलेगा और 300 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी। कांग्रेस का मानना है कि इन वादों के जरिए वह जनता का विश्वास वापस पा सकती है। 2015 और 2020 के चुनावों में पार्टी कोई सीट नहीं जीत पाई थी, लेकिन इस बार उनकी तैयारी पूरी तरह से मजबूत है।

महिला और युवा वोटरों पर प्रियंका का खास फोकस

इस बार होने वाले विधानसभा चुनावों से कांग्रेस पार्टी को काफी उम्मीदें हैं। पार्टी को ऐसी उम्मीद है कि प्रियंका का प्रभाव और पार्टी के वादे जनता को लुभाने में कामयाब होंगे। इस बार प्रियंका गांधी का खास फोकस महिला और युवा वोटरों पर होगा।

GST Tax:16 हज़ार रुपये कमाने वाले मिस्त्री को GST विभाग ने भेजा 1.96 करोड़ का टैक्स नोटिस !

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गुजरात के पाटन जिले से जीएसटी से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अहमदाबाद में मिस्त्री का काम करने वाले सुनील सथवारा को बेंगलुरु जीएसटी विभाग से 1.96 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस मिला, जिससे वह हैरान रह गए। महज 16-17 हजार रुपये की मासिक आय से परिवार चलाने वाले सुनील के लिए यह नोटिस किसी बड़े सदमे से कम नहीं था।

फर्जी आधार और पैन कार्ड का हुआ इस्तेमाल
जांच में यह खुलासा हुआ कि सुनील सथवारा के नाम पर 11 कंपनियां संचालित हो रही हैं, जो देश के अलग-अलग राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार में पंजीकृत हैं। यह भी पाया गया कि इन कंपनियों के पंजीकरण के लिए सुनील के नकली आधार और पैन कार्ड का उपयोग किया गया था।

कानूनी मदद और शिकायत दर्ज
टैक्स नोटिस मिलने के बाद सुनील ने वकील से संपर्क किया और दस्तावेजों की जांच कराई। फर्जी दस्तावेजों के उपयोग का पता चलने पर उन्होंने गृह विभाग और क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। सुनील का कहना है कि उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर यह रैकेट संचालित किया गया है।

सीआईडी क्राइम कर रही है जांच
मामले की जांच गांधीनगर सीआईडी क्राइम के हवाले की गई है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि यह रैकेट किसने चलाया, असली आरोपी कौन है और उसका मकसद क्या था।

जागरूकता की जरूरत
यह घटना आधार और पैन कार्ड से जुड़ी सुरक्षा खामियों और फर्जीवाड़े को उजागर करती है। संबंधित विभागों से अपील की जा रही है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाए जाएं।

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