Monday, June 29, 2026
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RAJKOT : ‘शादी के लिए कोई बेटी नहीं देगा…’ मच्छरों के आतंक से परेशान हुआ ये गांव

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राजकोट के एक गांव में इस वक्त मच्छर आतंक का पर्याय बन चुके हैं. शाम होते ही झुंड के झुंड मच्छर गांव में आ जाते हैं, जिसकी वजह से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो गांव में कोई शादी भी नहीं करेगा.

राजकोट का वेजा गांव इस समय एक ऐसी अजीब और गंभीर समस्या का सामना कर रहा है, जिसे सुनकर प्रशासन की आंखें खुल जानी चाहिए. गांव में मच्छरों का प्रकोप इतना बढ़ गया है कि अब रात के समय लोगों का गांव में रहना मुश्किल हो गया है. वेजा गांव से गुजरने वाली नदी में जलकुंभी का साम्राज्य इतना फैल गया है कि पूरी नदी में सिर्फ जलकुंभी ही दिखाई देती है. इस जलकुंभी के फैलने का मुख्य कारण गंदा और प्रदूषित पानी है

यह जलकुंभी मच्छरों के पनपने के लिए बेहद अनुकूल है, जिससे बड़ी संख्या में मच्छर पैदा हो रहे हैं. दिन के समय ये मच्छर जलकुंभी में रहते हैं और रात होते ही बाहर निकलकर गांव में घुस जाते हैं. मच्छरों की संख्या करोड़ों में होगी, ऐसा कहना भी अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्योंकि झुंड के झुंड गांव में आ जाते हैं.

स्थानीय लोगों के अनुसार अगर कोई मेहमान या रिश्तेदार गांव में आता है तो वह शाम होते ही वापस चला जाता है, क्योंकि बाहरी लोगों के लिए इन मच्छरों के बीच रात बिताना असंभव है. मच्छर इतनी बड़ी संख्या में होते हैं कि गांव की सड़कों पर निकलने पर मुंह, नाक और कान में भी घुस जाते हैं. इस स्थिति के कारण ग्रामीण बेहद लाचार महसूस कर रहे हैं.

ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण यहां पशुओं की संख्या भी अधिक है. ग्रामीणों को अपने पशुओं को मच्छरों से बचाने के लिए उन्हें मच्छरदानी में रखना पड़ रहा है. इसके लिए उन्होंने बड़ी-बड़ी मच्छरदानियां तैयार की हैं. ग्रामीणों का दावा है कि मच्छरों के काटने से पशु बीमार पड़ जाते हैं और दूध देना भी बंद कर देते हैं.

इस गांव की भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि आधा गांव राजकोट महानगर निगम के अंतर्गत आता है, जबकि आधा गांव RUDA (राजकोट अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी) के तहत आता है. उपसरपंच ने बताया कि उन्होंने दोनों जगहों पर शिकायत की, लेकिन दोनों संस्थाएं एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रही हैं. उपसरपंच ने यह भी दावा किया कि यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही तो गांव के युवाओं को शादी के लिए कोई लड़की नहीं मिलेगी.

इस मुद्दे पर राजकोट महानगर निगम के कमिश्नर से आजतक संवाददाता ने बातचीत की. चुनाव के चलते उन्होंने ऑन कैमरा कोई घोषणा करने से इनकार किया, लेकिन समस्या के समाधान के लिए एक्शन प्लान बताया. उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर समस्या है.

जलकुंभी इतनी तेजी से फैलती है कि मशीन से हटाने के बाद भी कुछ ही दिनों में फिर फैल जाती है. इसलिए राजकोट महानगर पालिका ने लखनऊ म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन से संपर्क किया है, क्योंकि उन्होंने गोमती नदी से इस समस्या को सफलतापूर्वक हटाया है. वहां ट्रैश अरेस्टर तकनीक से जलकुंभी को हटाने में सफलता मिली है. अब राजकोट में भी चुनाव के बाद इसी तकनीक का उपयोग कर जलकुंभी की समस्या को दूर किया जाएगा.

NATIONAL : ‘वो बोल न सकी पर सच चुप न रहा…’, महिला जज ने फैसले में कविता लिखकर बयां किया मूक-बधिर पीड़िता का दर्द, दरिंदे को सुनाई उम्रकैद

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राजस्थान के टोंक जिले की एससी-एसटी कोर्ट की विशिष्ट न्यायाधीश आरती माहेश्वरी ने मानवता को शर्मसार करने वाले एक दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई है. न्यायाधीश आरती माहेश्वरी ने यह सजा अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में पेश किए गए 16 गवाहों, 33 दस्तावेजों और 5 आर्टिकल के आधार पर सुनाई है.दुष्कर्मी रामलाल डिग्गी थाना क्षेत्र के भवानीपुरा का रहने वाला है, जिसे अब अपनी पूरी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे ही गुजारनी पड़ेगी. रामलाल पर दो अलग-अलग धाराओं में 1 लाख 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है. साथ ही पीड़िता को पीड़ित प्रतिकर स्कीम के तहत राशि दिए जाने के आदेश भी दिए गए हैं.

रामलाल नामक 55 वर्षीय अधेड़ ने झिराना थाना क्षेत्र के एक गांव में 20 वर्षीय युवती को अपनी हवस का शिकार बनाया था. वह युवती न सिर्फ मानसिक रूप से विमंदित और चलने-फिरने में असमर्थ थी, बल्कि मूक-बधिर भी थी.

रामलाल ने युवती को अकेला पाकर यह शर्मनाक घटना को अंजाम दिया. तभी पीड़िता की बहन और मां घर आ गईं. उनके शोर मचाने पर आसपास के लोग भी वहां पहुंच गए और दुष्कर्मी रामलाल को वहीं पकड़ लिया गया. उसकी पहचान उसके पास मिले आधार कार्ड और पैन कार्ड से हुई. बाद में मौके पर पहुंची पुलिस ने पीड़िता के मकान से कुछ दूरी पर रामलाल को बरामद किया था.

गौरतलब है कि दुष्कर्मी रामलाल ईंट भट्ठों पर कमीशन एजेंट था और पीड़िता के मकान के निर्माण का काम चल रहा था. वारदात के दिन परिवार के सदस्य बाहर गए हुए थे और उसने इन्हीं हालातों का फायदा उठाकर घटना को अंजाम दिया था.पीड़िता को गवाही के लिए व्हीलचेयर पर लाया गया था-पीड़िता की शारीरिक अक्षमता को देखते हुए मामले की सुनवाई के दौरान माता-पिता द्वारा उसे व्हीलचेयर पर ही कोर्ट में लाया गया था. पीड़िता की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराने वाली उसकी मां ने न्यायाधीश के समक्ष अपनी गवाही दर्ज कराई थी.

न्यायाधीश आरती माहेश्वरी ने केवल कानूनी फैसला ही नहीं सुनाया, बल्कि पीड़िता के दर्द को समझते हुए फैसले के अंत में एक 12 लाइनों की मार्मिक कविता भी पढ़ी:

“वो बोल ना सकी पर सच चुप न रहा,
खामोशी ने भी अपराधी को पहचाना
नजरों की भाषा में सच उजागर हुआ,
हर संकेत ने अपराध को बेनकाब किया
आई फिर एक रोशनी, बहिन बनी आधार;
थामा उसका हाथ जब, टूटा सारा अंधकार
मौन सही पर हार नहीं, रूह रही मजबूत;
हर अन्याय के सामने, सच रहता है अटूट
न्याय की राह जगानी है, हर आवाज सुनवानी है;
अब वक्त है आवाज उठाने का, हर खामोश को न्याय दिलाने का.”

ENTERTAINMENT : व्हीलचेयर पर क्रिकेटर, जमीन पर बैठकर मिले रणवीर, सलमान ने दिया ऑटोग्राफ

10 अप्रैल को अनंत अंबानी ने अपना जन्मदिन मनाया जिसमें बॉलीवुड के कई सितारे जामनगर पहुंचे. रणवीर सिंह और सलमान खान ने व्हीलचेयर क्रिकेटर भीमा खुंटी से जामनगर एयरपोर्ट पर मुलाकात की और उनके साथ समय बिताया.10 अप्रैल को अनंत अंबानी ने धूमधाम से अपना जन्मदिन सेलिब्रेट किया. अनंत अंबानी के जन्मदिन के लिए बॉलीवुड सेलेब्स जामनगर पहुंचे थे. 11 अप्रैल की सुबह सेलेब्स जामनगर से मुंबई के लिए रवाना हुए. जामनगर एयरपोर्ट से सोशल मीडिया पर कई वीडियोज सामने आ रहे हैं. वीडियो में रणवीर सिंह और सलमान खान व्हीलचेयर क्रिकेटर भीमा खुंटी से मिलते नजर आ रहे हैं.


व्हीलचेयर क्रिकेटर भीमा खुंटी ने इंस्टाग्राम पर रणवीर सिंह और सलमान खान संग मुलाकात का वीडियो शेयर किया है. वो जामनगर एयरपोर्ट पर उनसे मिले, और दोनों स्टार्स ने खुशी-खुशी ऑटोग्राफ दिए. रणवीर के साथ वीडियो शेयर करते हुए भीमा ने धुरंधर स्टार की तारीफ की और लिखा, धुरंधर रणवीर सिंह के साथ. कभी-कभी जिंदगी ऐसे पल देती है जो कभी भूलते नहीं. आज ऐसा ही दिन था. रणवीर सिंह से मिलने का मौका मिला. जिंदगी में बहुत लोगों से मिला हूं, लेकिन आज जो सादगी, विनम्रता और सम्मान मिला. वो सच में खास था. सुपरस्टार बनना तो एक बात है, लेकिन सच्चा इंसान बनना ही असली स्टार बनाता है.ये पल हमेशा याद रहेगा.

रणवीर सिंह के अलावा वो सलमान खान से भी मिले. उन्होंने दबंग खान की तारीफ में लिखा कि सलमान खान के साथ. सपने लिमिट्स नहीं देखते वो हिम्मत देखते हैं. क्रिकेट फील्ड से सलमान खान से मिलना तक भीमा खुंटी के लिए गर्व का पल रहा. भीमा के प्रति सलमान खान और रणवीर सिंह का जेस्चर देखकर फैन्स खुशी से झूम उठे हैं. एक ने लिखा कि रणवीर सिंह का टाइम आ गया है. वो नेक दिल इंसान हैं. दूसरे ने लिखा कि रणवीर सिंह ग्राउंडेड हैं. अन्य ने कहा कि सलमान खान तो हमेशा ही दिल जीत लेते हैं. कई लोगों ने कहा कि सुपरस्टार की यही खासियत होती है. कुछ लोग कह रहे हैं कि ‘हमजा’ का ये वीडियो दूर तक जाना चाहिए.

NATIONAL : रिश्वत लेते ही भागा कॉन्स्टेबल, ACB टीम पीछे से दौड़ी, एक कर्मचारी तो जीप से ही लटक गया

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फिल्मों में आपने पुलिस और अपराधी के बीच पीछा करते कई सीन देखे होंगे… लेकिन राजस्थान के झुंझुनूं में जो हुआ, वह भी कुछ एक्शन मूवी जैसा ही था. यहां रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने से बचने के लिए एक कॉन्स्टेबल थाने की जीप लेकर भागा. उसे पकड़ने के लिए ACB टीम पीछे दौड़ पड़ी. इस दौरान एक कर्मचारी जीप की खिड़की से ही लटक गया.

राजस्थान के झुंझुनूं से सामने आई एक घटना ने हर किसी को हैरान कर दिया. आमतौर पर पुलिस अपराधियों का पीछा करती नजर आती है, लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल उलटी थी. एक पुलिसकर्मी ही आरोपी बन गया और उसे पकड़ने के लिए एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम सड़कों पर दौड़ती दिखी.यह पूरा मामला चिड़ावा थाना क्षेत्र का है. यहां तैनात ड्राइवर कॉन्स्टेबल अनिल कुमार पर रिश्वत मांगने का आरोप लगा. एक वाहन चालक से अवैध तरीके से लकड़ी परिवहन के मामले में कार्रवाई न करने के बदले उससे पैसे मांगे जा रहे थे.

परेशान होकर उसने शिकायत ACB से कर दी थी. इसके बाद जयपुर ACB की टीम ने पहले पूरे मामले की जांच कराई. जब आरोप सही लगे, तो टीम ने एक प्लान तैयार किया- ट्रैप बिछाया, और वाहन चालक को विशेष निशान लगे नोट देकर कॉन्स्टेबल के पास भेज दिया.

सब कुछ प्लान के मुताबिक चल रहा था. दोपहर के वक्त वाहन चालक पैसे लेकर चिड़ावा थाने के बाहर पहुंचा. जैसे ही उसने कॉन्स्टेबल अनिल कुमार को पैसे दिए, ACB की टीम एक्शन में आ गई. लेकिन अचानक कहानी ने ऐसा मोड़ ले लिया.पैसे लेते ही कॉन्स्टेबल अनिल कुमार तेजी से थाने की जीप में बैठा और वहां से भागने लगा. ACB की टीम ने उसे घेरने की कोशिश की, लेकिन वह जीप को तेज रफ्तार में लेकर चिड़ावा बाईपास की तरफ निकल गया.

यह सब किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था. ACB के कर्मचारी उसके पीछे दौड़ पड़े. इस दौरान एक कर्मचारी लक्ष्मी नारायण हिम्मत दिखाते हुए जीप के ड्राइवर साइड के गेट पर लटक गया, ताकि किसी तरह कॉन्स्टेबल को रोका जा सके. लेकिन कॉन्स्टेबल ने जीप रोकने की बजाय रफ्तार और बढ़ा दी. स्पीड में दौड़ती जीप और उससे लटका कर्मचारी- यह नजारा हैरान कर रहा था.

कुछ दूरी पर सड़क किनारे खड़ी एक कार से जोरदार टक्कर हुई. इस टक्कर में गाड़ी का शीशा टूट गया और गेट पर लटके ACB कर्मचारी लक्ष्मी नारायण नीचे गिर पड़े. गिरते ही उन्हें सिर, पैर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं. वहीं कॉन्स्टेबल अनिल कुमार मौके से भाग निकला. पुलिस और ACB की टीम उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है. घटना के बाद मौके पर मौजूद अन्य ACB कर्मियों ने तुरंत घायल कर्मचारी को अस्पताल पहुंचाया. प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर उन्हें झुंझुनूं रेफर किया गया.

इस पूरी घटना का CCTV फुटेज सामने आया है. वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे ACB टीम के कर्मचारी जीप के पीछे दौड़ रहे हैं और एक कर्मचारी जान जोखिम में डालकर गाड़ी से लटक जाता है. ACB के डीएसपी सुरेंद्र पंचोली ने बताया कि कॉन्स्टेबल के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत मिली थी. इसी के बाद ट्रैप की योजना बनाई थी. आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो पर लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं.

NATIONAL : ऋषिकेश में उद्घाटन से पहले ही ‘दरक’ गया बजरंग सेतु… तीसरी बार कांच में आई दरारें; आवाजाही रोकी गई

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ऋषिकेश की पहचान और लक्ष्मण झूला के विकल्प के तौर पर बन रहे बजरंग सेतु की मजबूती पर एक बार फिर ‘दरारों’ ने सवाल खड़े कर दिए हैं. करीब 69 करोड़ की लागत से बन रहे इस अत्याधुनिक ब्रिज का अभी आधिकारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ है और इसके कांच वाले फुटपाथ का तीसरी बार चटकना चिंता का विषय बन गया है.

उत्तराखंड के ऋषिकेश, टिहरी और पौड़ी जनपद को जोड़ने के लिए बन रहे बजरंग सेतु की क्वालिटी एक बार फिर सवालों के घेरे में है. पुल के कांच वाले फुटपाथ में दरारें आने के बाद एहतियातन दोनों ओर से आवाजाही बंद कर दी गई है. यह तीसरी बार है जब फुटपाथ का कांच क्षतिग्रस्त हुआ है, जिससे निर्माण कार्य की क्वालिटी पर गंभीर संदेह खड़े हो गए हैं.

बताया जा रहा है कि ट्रायल के बाद अभी तक इस ब्रिज का आधिकारिक रूप से उद्घाटन नहीं हुआ है, और मनाही के बावजूद लोग फुटपाथ पर चल रहे हैं. साथ ही, क्रैक आने के बाद भी यह काफी वजन सहन कर सकता है.

लोक निर्माण विभाग नरेंद्रनगर ने साल 2022 में लक्ष्मण झूला के पास इस पुल का निर्माण शुरू किया था. करीब 69.20 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस सेतु की लंबाई 132.30 मीटर और चौड़ाई 5 मीटर है, जबकि दोनों ओर पारदर्शी कांच के फुटपाथ बनाए गए हैं. हालांकि, अभी तक पुल का उद्घाटन नहीं हुआ है, इसके बावजूद पिछले दो महीनों से यहां स्थानीय लोगों और पर्यटकों की आवाजाही जारी रही, जहां लोग कांच पर खड़े होकर फोटो और सेल्फी लेते नजर आए.लगातार कांच टूटने की घटनाओं से स्थानीय लोगों में नाराजगी है और उन्होंने निर्माण कार्य की जांच व जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है.

गौरतलब है कि 92 साल पुराने लक्ष्मण झूला पुल को 16 अप्रैल 2022 को सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया था और उसी के विकल्प के रूप में इस सेतु का निर्माण किया जा रहा है. अब उद्घाटन से पहले ही सामने आ रही खामियों ने पूरे प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जबकि संबंधित अधिकारी इस मामले पर जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं.

PWD सचिव डॉक्टर पंकज पांडेय ने क्वालिटी चेक को लेकर सख्त आदेश दिए हैं. हालांकि ‘आजतक’ से बातचीत में पांडेय ने साफ किया कि 12 mm के 5 ग्लास की एक लेयर होती है और यह टफन ग्लास काफी मजबूत होते हैं. चटकने पर भी किसी को हानि नहीं हो सकती. प्रथम दृष्टया लगता है कि किसी ने पत्थर से मारा है. इसके सीसीटीवी भी लगाए जा रहे हैं और पूरी जांच होने के बाद ग्लास को चेक करने के उपरांत ही लोगों को बजरंग सेतु के प्लेटफार्म पर आने जाने की इजाजत होगी.

NATIONAL : पान मसाला विज्ञापन केस में सलमान खान केस में दस्तावेजों पर सवाल, कोर्ट ने कमियों को दूर करने के दिए निर्देश

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बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान से जुड़े पान मसाला विज्ञापन मामले में कोटा कंज्यूमर कोर्ट ने FSL द्वारा लौटाए गए दस्तावेजों में सुधार करने को कहा है. हस्ताक्षर जांच फिलहाल रुकी हुई है और अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी.राजस्थान के कोटा की जिला उपभोक्ता अदालत में हिंदी फिल्म अभिनेता सलमान खान से जुड़े राजश्री पान मसाला के कथित भ्रामक विज्ञापन मामले में सुनवाई के दौरान अहम मोड़ आ गया. अदालत ने हस्ताक्षरों की सत्यता को लेकर भेजे गए दस्तावेजों में कमियां पाई जाने पर उन्हें सुधारने के निर्देश दिए हैं.

मामले की सुनवाई के दौरान साफ हुआ कि अदालत द्वारा राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला, जयपुर भेजे गए दस्तावेजों को 8 अप्रैल को तकनीकी आपत्तियों के साथ वापस लौटा दिया गया. प्रयोगशाला ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेज जांच के मानकों पर खरे नहीं उतरते, इसलिए उनकी वैज्ञानिक जांच संभव नहीं है.सुनवाई के दौरान अभिनेता की ओर से अधिवक्ता शिवांशु नवल और राजश्री पान मसाला की ओर से अधिवक्ता राकेश सुवालका उपस्थित रहे. वहीं परिवादी इंद्रमोहन सिंह हनी की ओर से शपथ-पत्र अदालत में प्रस्तुत किया गया.

राजश्री पान मसाला के पक्षकार अधिवक्ता राकेश सुवालका ने दलील दी कि मौजूदा दस्तावेजों के आधार पर किसी प्रकार की जांच संभव नहीं है. इस पर अदालत ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि दस्तावेजों में बताई गई कमियों को दूर कर उन्हें दोबारा जांच के लिए भेजा जाए. मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को तय की गई है.

राजश्री पान मसाला की ओर से एडवोकेट राकेश सुवालका ने कहा कि कोर्ट ने फिल्म स्टार सलमान खान के डॉक्यूमेंट्स एफएसएल जांच के लिए भेजे थे, जिन्हें लैब ने 8 अप्रैल को कमियां बताते हुए रिजेक्ट कर दिया. इन डॉक्यूमेंट्स की एफएसएल जांच संभव नहीं है. जिस पर कोर्ट ने आज कमियों को पूरा करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई अब 21 अप्रैल को होगी.

इंद्रमोहन सिंह हनी के वकील ने बताया कि राज्य आयोग से रोक हटने के बाद डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कोर्ट ने अनुपालन सुनिश्चित करते हुए संबंधित डॉक्यूमेंट-फाइल एफएसएल, जयपुर को भेज दी. एफएसएल द्वारा पूर्व में कुछ आपत्तियां जताई गई थीं, जिनके संबंध में कोर्ट ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

एडवोकेट इंद्र मोहन सिंह हनी और एडवोकेट रिपु दमन सिंह ने बताया कि कोर्ट का यह कदम सत्यता की जांच के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. हमने शुरू से यह तर्क दिया है कि कोर्ट में पेश किए गए डॉक्यूमेंट्स पर सलमान खान के हस्ताक्षर संदिग्ध हैं. अब दूध का दूध और पानी का पानी एफएसएल रिपोर्ट के माध्यम से हो जाएगा.

दरअसल, यह विवाद 26 दिसंबर 2025 को सामने आया था, जब परिवादी इंद्रमोहन सिंह हनी ने अदालत में पेश वकालतनामा और जवाब पर किए गए हस्ताक्षरों को संदिग्ध बताते हुए उनकी जांच की मांग की थी. इस पर संज्ञान लेते हुए जिला उपभोक्ता अदालत ने हस्ताक्षरों की वैज्ञानिक जांच कराने के आदेश दिए थे और संबंधित पक्ष को स्वयं उपस्थित होकर हस्ताक्षरित शपथ-पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए थे.

बाद में इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग, जयपुर में अपील दायर की गई, जहां प्रारंभ में जांच प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी गई थी. हालांकि, हाल ही में आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह रोक हटा दी और निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा.

अब इस मामले में आगे की दिशा दस्तावेजों में सुधार और उसके बाद होने वाली वैज्ञानिक जांच पर निर्भर करेगी. अदालत की निगरानी में होने वाली यह प्रक्रिया यह तय करेगी कि संबंधित दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षर वास्तविक हैं या नहीं.

MEERUT : चार महीने तक घर में पड़ी रही बेटी की सड़ी-गली लाश, पिता छोड़कर हरिद्वार चला गया, मेरठ में दिल दहला देने वाली घटना

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मेरठ के सदर बाजार में चार महीने से बंद घर से युवती का सड़ा-गला शव मिला. पिता ने मौत के बाद कुछ दिन शव के साथ रहकर घर बंद कर दिया और हरिद्वार चला गया. रिश्तेदारों को शक होने पर सच्चाई सामने आई. पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पिता को हिरासत में लिया है और जांच शुरू कर दी है.

मेरठ के सदर बाजार क्षेत्र से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया. यहां एक बंद पड़े मकान से चार महीने बाद 34 साल की युवती का सड़ा-गला शव बरामद हुआ है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि युवती की मौत के बाद उसका पिता कुछ दिन उसी शव के साथ घर में रहा और फिर मकान में ताला लगाकर फरार हो गया. बताया जा रहा है कि मृतका का नाम प्रियंका था, जो काफी पढ़ी-लिखी थी. उसके पिता उदय भान बिस्वास शिक्षा विभाग से रिटायर हैं और मूल रूप से बंगाल के रहने वाले हैं. परिवार के अनुसार, प्रियंका की मौत दिसंबर 2025 में बीमारी के चलते हो गई थी. पिता ने दावा किया कि वह बेटी की मौत से इतना दुखी था कि वह घर छोड़कर चला गया.

रिश्तेदारों के मुताबिक, पिछले चार महीनों से पिता और बेटी दोनों का कोई पता नहीं चल रहा था. जब बार-बार फोन करने पर भी संपर्क नहीं हुआ, तो परिवार के लोग परेशान हो गए. उन्होंने आसपास भी पता किया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली. शुक्रवार को अचानक एक नया मोड़ आया, जब युवती के पिता मेरठ के बेगम बाग इलाके में एक चाय की दुकान पर बैठे मिले. उनके भतीजे विश्वजीत ने उन्हें पहचान लिया और अन्य रिश्तेदारों को बुला लिया. जब पिता से बेटी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि वह देहरादून के एक अस्पताल में भर्ती है.

लेकिन रिश्तेदारों को इस बात पर शक हुआ और सख्ती से पूछताछ की गई. इसके बाद पिता ने जो सच बताया, उसे सुनकर सभी के होश उड़ गए. उसने बताया कि बेटी की मौत चार से पांच महीने पहले हो चुकी है और उसका शव घर के अंदर ही पड़ा है. इस खुलासे के बाद तुरंत पुलिस को 112 पर सूचना दी गई. मौके पर पहुंची पुलिस ने घर का ताला तोड़ा और अंदर जाकर देखा तो युवती का सड़ा-गला शव बेड पर पड़ा मिला. घर के अंदर कूड़े और रद्दी का ढेर लगा हुआ था और शव से तेज दुर्गंध आ रही थी.

पुलिस के अनुसार, कमरे में कुछ परफ्यूम स्प्रे भी मिले हैं, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि बदबू को छिपाने की कोशिश की गई होगी. हालांकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. रिश्तेदारों ने बताया कि पिता ने पहले कहा था कि बेटी को काला पीलिया हो गया था और उसका इलाज झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र से कराया जा रहा था. इसी दौरान उसकी मौत हो गई. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पिता को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और लोग इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं.

NATIONAL : मोनालिसा की डेट ऑफ बर्थ हुई कंफर्म: अस्पताल का 2009 वाला रिकॉर्ड बना सबसे बड़ा सबूत, नगर परिषद का सर्टिफिकेट निरस्त

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मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर से शुरू हुआ मोनालिसा और फरमान का विवाद अब एक बड़े राष्ट्रीय मुद्दे में तब्दील हो गया है. जिस लड़की को सोशल मीडिया पर महाकुंभ की वायरल गर्ल बताया जा रहा था, वह जांच में नाबालिग पाई गई है. इस खुलासे के बाद आरोपी फरमान पर पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है.

मध्य प्रदेश के खरगोन में महाकुंभ की वायरल गर्ल मोनालिसा नाबालिग निकली. माता-पिता ने अब सरकार से गुहार लगाई है कि हमारी बेटी वापस दिलाओ. भाजपा विधायक ने इसे षड्यंत्र करार दिया है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महेश्वर के प्रसव पंजीयन रजिस्टर में वायरल गर्ल 30 दिसंबर 2009 दर्ज है. अब फरमान पर पॉस्को एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हो गई है.जिला मुख्यालय से करीब 65 किमी दूर पर्यटन स्थल महेश्वर फिर से देशभर में सुर्खियों में है. मामला एक नहीं, तीन राज्यों मध्य प्रदेश, केरल और उत्तर प्रदेश से जुड़ा है.

बागपत (उत्तर प्रदेश) के फरमान के साथ केरल में शादी करने के बाद वायरल गर्ल के पिता जय सिंह भोंसले ने एफआईआर के लिए थाने में आवेदन दिया था.
इसके बाद मामला और गंभीर जब हो गया, इसमें राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने संज्ञान में लेकर मामले की जांच के आदेश दिए.

मोनालिसा की फरमान के साथ शादी के बाद जब माता-पिता को पता चला तो फिल्म डायरेक्टर सनोज मिश्रा के साथ महेश्वर थाने पर पहुंचकर फिर के लिए आवेदन दिया गया था, लेकिन मामले में तेजी तब आई जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने मामले की जांच को लेकर डीजीपी केरल और डीजीपी मध्य प्रदेश को निर्देश दिए इसके बाद जांच तेज हुई. मानव अधिकार आयोग दिल्ली ने भी खरगोन एसपी रवींद्र वर्मा को मामले की जांच के निर्देश दिए थे.

जब महेश्वर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रसव पंजीयन रजिस्टर की जांच की गई, तो साल 2009 के रिकॉर्ड में मोनालिसा के जन्म की पुष्टि हुई. उसकी जन्म तिथि 30 दिसंबर 2009 लिखी थी. जांच में सामने आया कि नगर परिषद महेश्वर द्वारा जारी किया गया वह बर्थ सर्टिफिकेट फर्जी था, जिसके आधार पर उसे बालिग बताकर शादी की गई थी.

मोनालिसा के पिता जय सिंह भोंसले और मां लताबाई ने मीडिया के सामने कहा, ”हम पहले से ही कह रहे थे कि हमारी बेटी को फंसाया गया है. वह तो सीधी सादी है, भोली है. उसे गुमराह किया गया है. झूठा सर्टिफिकेट बनाकर उसके साथ शादी की गई है. हम तो कहते हैं ये ‘लव जिहाद’ ही है. हमारी सरकार से मांग है कि हमारी बेटी को हमें शीघ्र वापस दिलाए.”

मामले को लेकर महेश्वर के भाजपा विधायक राजकुमार में शुक्रवार की दोपहर सर्किट हाउस में पत्रकार वार्ता की. उन्होंने कहा कि ये शुद्ध रूप से ‘लव जिहाद’ का ही मामला है. जानबूझकर हमारे नगर की बेटी को फंसाया गया. झूठा प्रमाण पत्र बनवाया गया और उसके आधार पर शादी की गई है. पॉस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ. सरकार जल्द से जल्द मोनालिसा को वापस लाना चाहिए.

महेश्वर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर अतुल गौर का कहना है, ”मोनालिसा भोंसले का जन्म प्रमाण पत्र हमारे कार्यालय ने ही जारी किया है. जिस पर बच्चों के जन्म होने पर नाम रजिस्टर्ड किया जाता है. प्रसव पंजीयन रजिस्टर में उनके माता-पिता का नाम और पुत्री का जन्म दर्ज है. 30 दिसंबर 2009 में उल्लेखित पाया गया.

महेश्वर नगर परिषद CMO प्रियंका पांडे का कहना है, ”मोनालिसा की मां ने नगर परिषद में जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन दिया था, क्योंकि हमारे रिकॉर्ड में नहीं था इसलिए तहसीलदार के आदेश पर प्रमाण पत्र बना कर दिया गया है. अस्पताल से जो जन्म प्रमाण पत्र जारी किया गया है, वो सही है. हमारी ओर से जारी किया गया प्रमाण पत्र गलत था, जिसे निरस्त कर दिया गया है और पोर्टल से भी हटा दिया गया है.

एडवोकेट प्रथम दुबे का कहना है, ”मोनालिसा और फरमान की शादी के बाद मामला बहुत चर्चा में आया. इसके बाद कई सवाल उठे कि मोनालिसा बालिग है या नाबालिग है? मैंने इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में शिकायत दर्ज कराई कि बागपत (यूपी) में रहने वाले फरमान और महेश्वर की रहने वाली वायरल गर्ल मोनालिसा की शादी हुई है. ये बेहद षडयंत्रपूर्वक शादी रची गई. केरल में राजनीतिक नेताओं की उपस्थिति और पुलिस प्रोटेक्शन में शादी हुई थी. एक जनजाति भारतीय समाज की बेटी की शादी में इतने बड़े लोगों का आना एक सवाल खड़ा करता है.”

MAHARASHTRA : झुग्गी-बस्ती में लगी भीषण आग, 3 लोगों की जलकर मौत

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ठाणे में एक झुग्गी-बस्ती में आग लग गई. जिससे तीन लोगों की मौत हो गई. बताया जाता है कि आग लगने की वजह से कई सिलेंडर भी फट गए थे. फिलहाल आग कैसे लगी, इसके कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है.महाराष्ट्र के ठाणे ज़िले में एक झुग्गी-बस्ती में लगी भीषण आग में तीन लोगों की मौत हो गई. इस आग की वजह से कई एलपीजी सिलेंडर फट गए. इस बात की जानकारी एक नगर निगम अधिकारी ने शनिवार को दी.

मीरा भायंदर नगर निगम (MBMC) के मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रकाश बोराडे ने बताया कि शुक्रवार रात करीब 8.30 बजे मीरा भायंदर के नवघर इलाके में स्थित इंद्रलोक झुग्गी-बस्ती में यह आग लगी. आग की लपटें दूर से ही दिखाई दे रही थीं, क्योंकि आग तेज़ी से घास-फूस और कपड़ों से बनी अस्थायी झोपड़ियों की घनी बस्ती में फैल गई थी.

इस घटना में करीब 30 से 35 झोपड़ियां जलकर खाक हो गईं. आग लगने के दौरान कई गैस सिलेंडर फट गए. अधिकारी ने बताया कि अग्निशमन कर्मियों ने मौके से 24 सिलेंडर सुरक्षित बाहर निकाल लिए, जिनमें से कुछ भरे हुए थे और कुछ खाली.बोराडे ने बताया कि आग पर काबू पाने से पहले अग्निशमन कर्मियों को करीब एक घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी. तीनों मृतकों के शव बुरी तरह जल चुके थे, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया था. उनके शवों को पोस्टमार्टम के लिए एक सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है. हालांकि आग लगने के सही कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है.

NATIONAL : न्यू नोएडा परियोजना के लिए जमीन देने वाले किसान होंगे मालामाल, मुआवजा दर बढ़ी

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न्यू नोएडा परियोजना के लिए जमीन देने वाले किसानों को अब फायदा मिलने वाला है. नोएडा ऑथोरिटी ने भूमि अधिग्रहण की दर बढ़ाकर ₹4,300 प्रति वर्ग मीटर कर दी है.नोएडा ऑथोरिटी ने न्यू नोएडा परियोजना के लिए जमीन देने वाले किसानों को बड़ी राहत दी है. ऑथोरिटी ने भूमि अधिग्रहण की दर बढ़ाकर ₹4,300 प्रति वर्ग मीटर कर दी है, जो अब यमुना ऑथोरिटी द्वारा दी जा रही दर के बराबर हो गई है. इस फैसले के बाद माना जा रहा है कि किसान स्वेच्छा से जमीन देने के लिए आगे आएंगे.

नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों का कहना है कि पिछले करीब 10 साल से जमीन की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी, जिससे किसान अपनी जमीन देने में रुचि नहीं दिखा रहे थे. लगातार बढ़ते दबाव और मांग के बाद अब यह फैसला लिया गया है, जिससे किसानों को बेहतर मुआवजा मिल सके.ऑथोरिटी के एक अधिकारी ने बताया कि दर बढ़ाने का उद्देश्य यही है कि किसान इस परियोजना में सहयोग करें और जमीन देने के लिए तैयार हों. न्यू नोएडा यानी डीएनजीआईआर परियोजना एक बड़े स्तर पर विकसित की जा रही है, जो करीब 209 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली होगी.

इसमें 80 से ज्यादा गांव शामिल हैं, जिनमें बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर के गांव भी आते हैं. पहले चरण में ही हजारों हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने की योजना है. जमीन के दर के लिए जिले के जनप्रतिनिधियों की भी अहम भूमिका रही है.जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह के मुताबिक उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री और अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठाया था. सरकार के निर्देश के बाद ही मुआवजा दर बढ़ाई गई है, जिससे अब किसानों को उनका हक मिल सकेगा.

नोएडा ऑथोरिटी ने यह भी साफ किया है कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द शुरू कर दी जायेगी. जिसके लिए राज्य सरकार से अतिरिक्त स्टाफ की मांग की गई है.पूरी परियोजना को लागू करने की जिम्मेदारी नोएडा प्राधिकरण को दी गई है, जो किसानों से बातचीत से लेकर जमीन से जुड़े सभी मामलों को देखेगा.फिलहाल बढ़े हुए मुआवजे के बाद अब न्यू नोएडा के लिए जमीन देने वाले किसानों के लिए यह सौदा फायदे का माना जा रहा है. ऐसे में माना जा रहा है कि जिन किसानों का जमीन अधिग्रहण होगा, वो मालामाल होंगे जिस से वो अपनी जमीन भी ऑथोरिटी को देने में रुचि दिखाएंगे.

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