जैसे ही रात 12 बजे भारत समेत पूरी दुनिया नए साल 2025 का जश्न मनाने में डूब गई। नव वर्ष के स्वागत का यह सिलसिला दुनिया भर में विभिन्न सांस्कृतिक अंदाज में जारी है जहां हर देश अपने खास तरीके से इस खास दिन को मनाता है। वहीं नए साल 2025 की शुरुआत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।

PM मोदी ने दी खुशहाली की शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर देशवासियों को नववर्ष की बधाई दी। उन्होंने कहा, “2025 की शुभकामनाएं! यह वर्ष सभी के लिए नए अवसर, सफलता और अनंत खुशियां लेकर आए। सभी को अद्भुत स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिले।”
राष्ट्रपति मुर्मू ने की समृद्ध और टिकाऊ भविष्य की अपील
वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी नए साल के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 2025 सभी के लिए खुशी, समृद्धि और सद्भाव लेकर आए। साथ ही उन्होंने सभी से एकजुट होकर भारत और दुनिया के लिए एक उज्जवल, समावेशी और टिकाऊ भविष्य बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को फिर से नवीनीकरण करने का आह्वान किया।
नववर्ष भारत से पहले पहुंचा कई देशों में
किरिबाती के अलावा समोआ, टोंगा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पापुआ न्यू गिनी, म्यांमार, जापान और इंडोनेशिया जैसे देशों में भी भारत से पहले नव वर्ष ने दस्तक दी। दरअसल समय के अलग-अलग जोन के कारण दुनिया के 41 देश ऐसे हैं जहां भारत से पहले नए साल का स्वागत किया जाता है।
स्थानीय परंपराओं के साथ मनाया गया नया साल
भारत समेत दुनियाभर में नए साल का स्वागत अपनी-अपनी स्थानीय परंपराओं और संस्कृतियों के अनुसार किया गया। सभी जगह लोगों ने खुशियां मनाईं एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और नए साल के लिए अपनी इच्छाओं और सपनों का आदान-प्रदान किया।



मेट्रोपॉलिटन पुलिस के डिटेक्टिव कांस्टेबल पाउलो रॉबर्ट्स ने सोमवार को चोरी का खुलासा होने के बाद कहा, “हथियारबंद संदिग्ध व्यक्ति मकान में घुसा और अपराध को अंजाम दिया।” मकान से चोरी हुई चीजों में 10.73 कैरेट की हीरे की अंगूठी, सोने, हीरे और नीलम जड़ी एक क्लिप शामिल है। इसके अलावा 16 लाख रुपये से अधिक (1,89,00 अमेरिकी डॉलर) के हैंडबैग भी चोरी हुए हैं।
दोनों युद्धपोतों में महिला अधिकारियों और नाविकों की एक बड़ी संख्या के लिहाज से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, जो कि भारतीय नौसेना की अग्रिम पंक्ति की लड़ाकू भूमिकाओं में लैंगिक समावेशन की दिशा में उठाए गए कदमों के अनुरूप है।






ट्रेन समय में बदलाव के मुख्य कारण

