Monday, June 22, 2026
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गणतंत्र दिवस पर ‘रोबोट आर्मी’ ने दी सलामी! दिखा अनोखा नजारा, Video सोशल मीडिया पर Viral

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गणतंत्र दिवस के मौके पर राजधानी दिल्ली में कर्तव्य पथ पर भव्य परेड निकाली गई जिसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य अतिथि शामिल रहे। वहीं दूसरी ओर कोलकाता में भी एक अलग तरह की परेड आयोजित की गई जिसमें ‘रोबोट आर्मी’ ने सलामी दी। इस दौरान रोबोटों को देखकर सभी लोग हैरान रह गए। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

वीडियो में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौजूद थीं। परेड में जवानों की एक टुकड़ी रोबोट आर्मी के साथ आगे बढ़ी और सलामी दी। बताया गया कि ये रोबोट हर तरह के मौसम में काम करने में सक्षम हैं। ये रोबोट माइनस 40 डिग्री से लेकर 50 डिग्री तापमान तक काम कर सकते हैं।

क्या है मल्टी-यूटिलिटी लेग्ड इक्विपमेंट (MULE)?

ये कोई सामान्य रोबोट नहीं हैं बल्कि इनका वजन 15 किलो तक हो सकता है और ये आसानी से चल सकते हैं। भारतीय सेना ने हाल ही में जम्मू में आयोजित नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2023 में इस रोबोट का अनावरण किया था जिसका नाम मल्टी-यूटिलिटी लेग्ड इक्विपमेंट (MULE) है। इस रोबोट में 360 डिग्री कैमरे और रडार लगे होते हैं जो ऑपरेटर को किसी भी खतरे का पता लगाने और उसे नष्ट करने में मदद करते हैं। ये रोबोट चार पैरों पर चलते हैं और एक एनालॉग मशीन हैं।

इस रोबोट को वाई-फाई या लॉन्ग-टर्म इवोल्यूशन (LTE) नेटवर्क के जरिए ऑपरेट किया जा सकता है जिससे यह 10 किलोमीटर तक काम कर सकता है। इसे रिमोट कंट्रोल से आसानी से चलाया जा सकता है और यह बर्फ, पहाड़ों और ऊंची सीढ़ियों पर भी चलने में सक्षम है। यह 45 डिग्री तक के कोण पर पहाड़ों पर चढ़ सकता है और 18 सेंटीमीटर ऊंची सीढ़ियां भी चढ़ सकता है।

इस रोबोट के प्रदर्शन ने न केवल लोगों को हैरान किया बल्कि यह भारतीय सेना की तकनीकी क्षमता को भी उजागर किया है।

ब्रेन डेड के बावजूद गर्भवती महिला ने दिया बेटे को जन्म… तीन और लोगों को दे गई नई जिंदगी

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महाराष्ट्र के पुणे में एक गर्भवती महिला ने दुनिया को अलविदा कहते हुए भी कई लोगों को जीवनदान दिया। हादसे का शिकार हुई इस महिला ने ब्रेन डेड घोषित होने के बावजूद बेटे को जन्म दिया और अपने अंगों के दान से कई जिंदगियां बचाईं।

पुणे के जोनल ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेशन सेंटर की सेंट्रल को-ऑर्डिनेटर आरती गोखले ने बताया कि महिला अपने पति के साथ स्कूटर पर पीछे बैठी थी। दोनों कहीं जा रहे थे कि इस दौरान वह हादसे का शिकार हो गए। सड़क पर गिरने से महिला के सिर में चोट लगी। उसे खून से लथपथ हालत में पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे प्राथमिक उपचार दिया लेकिन 25 वर्षीय महिला मरीज के दिमाग में चोट लगी थी, जिस वजह से उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों ने परिजनों की अनुमति से सी-सेक्शन के जरिए महिला की डिलीवरी करवाई, जिससे एक स्वस्थ बच्चे का जन्म हुआ। इसके बाद महिला के पति और पिता ने उसका अंगदान करने का साहसिक निर्णय लिया। महिला की किडनी, लिवर और कॉर्निया दान किए गए, जिससे कई लोगों को नई जिंदगी मिली।

अस्पताल प्रशासन ने परिवार के इस निस्वार्थ फैसले की सराहना करते हुए इसे मानवता का एक बड़ा उदाहरण बताया। डॉक्टरों के अनुसार, अंगदान के जरिए इस महिला ने जाते-जाते भी कई परिवारों को खुशियां और उम्मीदें दीं।

दिशानिर्देशों के अनुसार, महिला की एक किडनी, एक लीवर और 2 कॉर्निया आवंटित किए गए। दूसरी किडनी को जोनल ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेशन सेंटर (ZTCC) पुणे के जरिए डोनेट किया गया। DPU सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में मल्टी ऑर्गन ट्रांसप्लांट की HOD डॉ. वृषाली पाटिल ने कहा कि गर्भावस्था के 9वें महीने में महिला 20 जनवरी को अहमदनगर के पारनेर में हादसे के बाद ब्रेन डेड घोषित की गई थी।

पुलों के समुचित रख-रखाव के लिए बनेगी ‘संधारण नीति’, इंजीनियरों के कर्तव्य एवं दायित्व होंगे निर्धारित; विजय सिन्हा ने बताया पूरा प्लान

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बिहार के उप मुख्यमंत्री सह पथ निर्माण मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया है कि पुलों के समुचित रख-रखाव के लिये संधारण नीति बनायी जाएगी। सिन्हा की अध्यक्षता में शनिवार को पुल संधारण नीति एवं अभियंताओं के कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व निर्धारण पर एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर मुख्य सचिव, पथ निर्माण विभाग, सचिव, पथ निर्माण विभाग और सभी वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर सिन्हा ने बताया कि वर्तमान में पथ निर्माण विभाग के अन्तर्गत कोई पुल संधारण नीति नहीं है और न ही अभियंताओं को कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व स्पष्ट रूप से निर्धारित है। मैंने विभागीय पदाधिकारियों को निदेशित किया था कि इस संबंध में शीघ्र ही एक पुल संधारण नीति तैयार की जाए और इस संबंध में अभियंताओं के कर्तव्य एवं दायित्व भी निर्धारित किये जाए।

‘पुलों को चार भागों में बांटा गया’
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि विभागीय पदाधिकारियों ने इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किया। पुल संरचना के संपूर्ण जीवनकाल के दौरान दो चरणों में इनके प्रबंधन एवं संधारण पर विचार किया जा रहा है। पुलों को चार भागों में बांटा गया है। पहले भाग में 1000 मीटर से लम्बे पुल, दूसरे भाग में 250-1000 मीटर से लम्बे पुल तीसरे भाग में 60-250 मीटर से एवं चौथें भाग में 60 मीटर से छोटे पुलों को रखा गया है। उन्होंने बताया कि पुलों के प्रमुख घटकों के वास्तविक स्थिति को दर्शाने हेतु पुलों का एक हेल्थ काडर् भी बनाया जाएगा। अतिसंवेदनशील पुलों का प्राथमिकता के आधार पर मरम्मति और आवश्यकता आधारित निर्माण का कार्य कराया जाएगा। पथ निर्माण मंत्री ने बताया कि पुलों के प्रबंधन के लिये पुलों के वास्तविक स्थिति का आकलन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, सेंसर डाटा रिर्पोट जैसे नये तकनीकों के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि परियोजनाओं को तय सीमा के अंतर्गत पूर्ण करने के लिये के कर्तव्य एवं दायित्वों का निर्धारण भी किया जा रहा है। परियोजनाओं में विलंब के कारण समय वृद्धि एवं लागत मूल्य में वृद्धि भी होती है, इसे गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदारी निर्धारित करने का कार्य भी किया जाएगा।

सिन्हा ने कहा कि विगत वर्ष राज्य के कई जिलों में बाढ़ के समय वर्षों पूर्व निर्मित कई छोटे पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, इसे देखते हुए पुल संधारण नीति लागू किया जाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। साथ ही अभियंताओं का कर्तव्य एवं दायित्व भी निर्धारित रहेगा कि वे नियमित रूप से पुलों का अनुश्रवण करते रहें। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में आम जनों को सुगम यातायात उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है और विभाग इस दिशा में सतत् रूप से प्रयासरत है।

खत्म हो गया इंतजार… उत्तराखंड में कल से लागू होगा यूसीसी, CM धामी ने किया ऐलान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में सोमवार से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दी जाएगी और इसके साथ ही यह स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बनेगा जहां यह कानून प्रभावी होगा।

यहां शनिवार शाम जारी एक बयान में मुख्यमंत्री ने कहा, “यूसीसी लागू करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं जिसमें अधिनियम की नियमावली को मंजूरी और संबंधित अधिकारियों का प्रशिक्षण शामिल है।” उन्होंने कहा कि यूसीसी से समाज में एकरूपता आएगी और सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और दायित्व सुनिश्चित होंगे। धामी ने कहा, “यूसीसी प्रधानमंत्रीजी (नरेन्द्र मोदी) द्वारा देश को विकसित, संगठित, समरस और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए किए जा रहे महान यज्ञ में हमारे प्रदेश द्वारा अर्पित की गई एक आहुति मात्र है। समान नागरिक संहिता के अंतर्गत जाति, धर्म, लिंग आदि के आधार पर भेद करने वाले व्यक्तिगत नागरिक मामलों से संबंधित सभी कानूनों में एकरूपता लाने का प्रयास किया गया है।’

उत्तराखंड में यूसीसी को लागू करना प्रदेश में 2022 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा किए गए प्रमुख वादों में से एक है। मार्च में दोबारा सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में यूसीसी प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए उसका मसौदा तैयार करने के लिए विशेषज्ञ समिति के गठन पर मुहर लगा दी गयी थी। उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 27 मई 2022 को गठित विशेषज्ञ समिति ने लगभग डेढ़ साल की मेहनत से तैयार अपनी रिपोर्ट दो फरवरी 2024 को राज्य सरकार को सौंपी जिसके आधार पर मार्च 2024 में राज्य विधानसभा ने यूसीसी विधेयक पारित कर दिया। उसके बाद 12 मार्च 2024 को राष्ट्रपति ने भी उसे अपनी मंजूरी दे दी।

दो सहेलियों को हुआ प्यार… जेंडर चेंज कर सविता बनी ललित, फिर की शादी

उत्तर प्रदेश के मथुरा के महावन थाना इलाके में एक अजीब मामला सामने आया है। यहां पर एक शादीशुदा जोड़ा पकड़ा गया है। इसमें दो सहेलियों के बीच प्रेम संबंध थे, जिसमें एक ने लिंग परिवर्तन कराकर दूसरी से शादी कर ली। यह दोनों एक कोचिंग सेंटर में मिलीं और यहीं से उनका प्रेम बढ़ा। दोनों ने एक दूसरे को पति-पत्नी के रुप में स्वीकार किया है।

जानिए पूरा मामला

पुलिस ने दोनों को पकड़ा 
पूजा के पिता रमेश, जो पेशे से ड्राइवर हैं, उन्होंने उसकी शादी एक लड़के से तय कर दी थी। पूजा को इस बारे में पता चला और उसने अपने पिता से कहा कि वह बीएड करने के लिए भरतपुर जा रही है। पूजा 10 जनवरी को भरतपुर चली गई और अपना मोबाइल बंद कर लिया। परिजनों ने कई बार उसको फोन किया, लेकिन बंद ही आता था। जिसके बाद परिजनों ने परेशान होकर 14 जनवरी को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट जयपुर के सांगानेर थाने में दर्ज कराई। पुलिस ने जांच शुरू की और पूजा के मोबाइल की लोकेशन महावन थाना इलाके में पाई। जयपुर पुलिस ने शुक्रवार को महावन थाना इलाके में एक मेडिकल कॉलेज से पूजा और ललित को पकड़ लिया। पूजा अब ललित के साथ रहना चाहती है। राजस्थान पुलिस पूजा को जयपुर ले गई है, जहां उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा और उसके बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जानकारी के मुताबिक, राजस्थान के जिला भरतपुर निवासी सविता सिंह साल 2021 में कोचिंग करने जयपुर गई थी। जयपुर के सांगानेर थाना के पास एक मकान में किराए पर रहने लगी। मकान मालिक की बेटी पूजा से उसकी दोस्ती हो गई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती गईं। एक साथ रहना, खाना आना-जाना था। दोनों का प्रेम अटटू बनता गया। सविता ने 31 मई 2022 को इंदौर के एक अस्पताल में अपना लिंग परिवर्तन कराकर ललित सिंह बन गया। दोनों ने नवंबर 2024 में जयपुर के आर्य समाज वैदिक संस्थान मंडल में शादी कर ली। लेकिन, पूजा ने अपने परिवार को भनक तक नहीं लगने दी।

 

20 साल तक पिता ने छुपाई दौलत, ग्रेजुएशन के बाद बेटे को पता चला पापा हैं 693 करोड़ के मालिक

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ज़िंदगी में हर किसी का सपना होता है कि वह अपने परिवार का सहारा बने और जिम्मेदारियां उठाए। ऐसा ही सपना एक साधारण से लड़के झांग ज़िलोंग का भी था। वह ग्रेजुएशन के बाद अपने परिवार का कर्ज़ उतारने के लिए नौकरी की तैयारी कर रहा था। लेकिन अचानक उसकी ज़िंदगी में ऐसा खुलासा हुआ जिसने उसे हैरान कर दिया।

झांग ज़िलोंग को पता चला कि उसके पिता, झांग युडोंग, अरबपति हैं और उनके नाम एक बड़ी कंपनी है। हुनान स्पाइसी ग्लूटेन लटियाओ ब्रांड माला प्रिंस (Mala Prince) के फाउंडर और प्रेसिडेंट झांग युडोंग ने बेटे से 20 साल तक अपनी दौलत की सच्चाई छिपाकर रखी थी।

पिता ने क्यों छिपाई दौलत?

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, झांग युडोंग ने अपने बेटे को हमेशा बताया कि उनका परिवार कर्ज़ में डूबा हुआ है। कंपनी के बारे में झांग ज़िलोंग को जानकारी तो थी, लेकिन उन्हें यही कहा गया कि इसे चलाने के लिए बड़ा कर्ज़ लिया गया है।

साधारण ज़िंदगी की सीख

इस झूठ के चलते झांग ज़िलोंग ने अपनी ज़िंदगी बहुत साधारण तरीके से बिताई। उन्होंने हुनान की राजधानी चांग्शा में सेकेंडरी स्कूल में दाखिला लिया और फिर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। उनकी सबसे बड़ी ख्वाहिश थी कि वह एक महीने में 6,000 युआन (लगभग 70,224 रुपये) कमाएं और परिवार का कर्ज़ धीरे-धीरे चुकाएं।

खुलासा: परिवार है अरबपति

ग्रेजुएशन के बाद झांग ज़िलोंग को उनके पिता ने बताया कि परिवार असल में बेहद अमीर है। वे 10 मिलियन युआन (लगभग 11.54 करोड़ रुपये) की कीमत वाले विला में रहते हैं। माला प्रिंस कंपनी का सालाना टर्नओवर 600 मिलियन युआन (693 करोड़ रुपये) है।

साधारण जिंदगी से अरबपति उत्तराधिकारी तक का सफर

झांग ज़िलोंग ने खुलासा किया कि उनके पिता नहीं चाहते थे कि वह ‘fu er dai’ (दूसरी पीढ़ी का अमीर) के रूप में पहचाने जाएं। इसलिए उन्हें मेहनत का महत्व सिखाने के लिए ऐसा झूठ बोला गया।

अब झांग ज़िलोंग ने अपने पिता की कंपनी के ई-कॉमर्स विभाग में काम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनके सहकर्मी उनके साथ किसी अन्य कर्मचारी की तरह ही व्यवहार करते हैं। झांग ज़िलोंग की कहानी हमें यह सिखाती है कि कभी-कभी सच्चाई छिपाने का उद्देश्य बड़ा होता है। उनके पिता ने उन्हें सादगी और मेहनत का महत्व सिखाने के लिए ऐसा किया। अब, अरबों की दौलत के वारिस होने के बावजूद, झांग ज़िलोंग अपने पैरों पर खड़े होकर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।

 

 

“CM नीतीश मानसिक रूप से अस्वस्थ, उपराष्ट्रपति के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का नहीं किया पालन”, तेजस्वी का आरोप

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राजद नेता तेजस्वी यादव ने शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि उन्होंने 24 जनवरी को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के राज्य के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया।

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि शुक्रवार को धनखड़ की अगवानी करने में नीतीश कुमार की असमर्थता इस बात का संकेत है कि जदयू प्रमुख की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। विपक्ष के नेता यादव ने दावा किया, ‘‘स्थिति यहां तक ​​पहुंच गई है कि मुख्यमंत्री अब प्रोटोकॉल का पालन करने में सक्षम नहीं हैं। वह उपराष्ट्रपति का स्वागत करने में विफल रहे। वह मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं।” बता दें कि धनखड़ पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर आयोजित समारोह में भाग लेने के लिए समस्तीपुर में थे। कर्पूरी  ठाकुर को एक साल पहले भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

समारोह में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और नित्यानंद राय सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। नीतीश कुमार इस समारोह में अनुपस्थित रहे। हालांकि इसके तुरंत बाद उन्होंने ठाकुर को श्रद्धांजलि देने के लिए समस्तीपुर का दौरा किया।

बजट से पहले मोदी सरकार का बड़ा कदम, 1 अप्रैल 2025 से लागू होगी UPS

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) की घोषणा कर दी है, जो 1 अप्रैल 2025 से लागू होगी। यह कदम कर्मचारियों के भविष्य के लिए बड़ा बदलाव लेकर आया है, क्योंकि इसमें उन्हें रिटायरमेंट के बाद गारंटीड पेंशन मिलेगी, जो उनकी वित्तीय सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा।

UPS क्या है और कैसे काम करेगा?

यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का उद्देश्य पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) और नई पेंशन योजना (NPS) के बीच संतुलन बनाना है। इसके तहत कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद गारंटीड पेंशन मिलेगी। यह पेंशन कर्मचारी की बेसिक सैलरी के 50% के बराबर होगी, जो आजीवन दी जाएगी। इसके लिए कर्मचारियों को कम से कम 25 साल तक सेवा देनी होगी। साथ ही, समय-समय पर महंगाई राहत (DR) का लाभ भी पेंशन में जोड़ा जाएगा।

यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) केंद्र सरकार के उन कर्मचारियों पर लागू होगी, जो नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) के तहत आते हैं और UPS का विकल्प चुनते हैं। कर्मचारियों को यह विकल्प मिलेगा कि वे NPS के तहत UPS को अपनाएं या फिर NPS के तहत ही अपनी पुरानी योजना जारी रखें। हालांकि, UPS को चुनने वाले कर्मचारियों को किसी अन्य पॉलिसी रियायत का लाभ नहीं मिलेगा।

सरकारी योगदान में बड़ा बदलाव

एनपीएस के तहत कर्मचारियों को अपनी बेसिक सैलरी का 10% योगदान करना होता है, जबकि सरकार का योगदान 14% होता है। वहीं, 1 अप्रैल 2025 से UPS लागू होने के बाद सरकार का योगदान कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 18.5% होगा। इसका मतलब यह है कि कर्मचारियों को अब अधिक पेंशन मिलेगी, लेकिन इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। पहले साल में इसका अनुमानित खर्च 6250 करोड़ रुपये तक हो सकता है।

UPS के लाभ:

  1. 50% पेंशन: रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को उनकी बेसिक सैलरी का 50% पेंशन मिलेगी, जो जीवनभर जारी रहेगी।
  2. महंगाई राहत: पेंशन में समय-समय पर महंगाई राहत (DR) जोड़ा जाएगा।
  3. परिवार को लाभ: कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार के एक सदस्य को पेंशन का 60% हिस्सा मिलेगा।
  4. न्यूनतम पेंशन: 10 साल या उससे अधिक की सेवा देने वाले कर्मचारियों को कम से कम 10,000 रुपये की पेंशन मिलेगी।
  5. ग्रेच्युटी और एकमुश्त राशि: रिटायरमेंट पर कर्मचारियों को ग्रेच्युटी के अलावा एकमुश्त राशि भी दी जाएगी, जो उनकी सेवा के आधार पर निर्धारित होगी।

सरकार की पहल और भविष्य की योजना

यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के माध्यम से सरकार ने अपने कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। यह योजना सरकारी कर्मचारियों को एक मजबूत वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगी और उनके जीवन के बाद की अवस्था में उन्हें सहारा देगी।

जर्मन के इंजीनियर ने पानी के अंदर बिताए 120 दिन, बनाया Guinness World Record

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अगर कोई आपसे कहे कि आप पानी के अंदर कितने दिन तक रह सकते हैं तो आप शायद एक या दो मिनट ही सोच पाएंगे लेकिन जर्मन इंजीनियर रुडिगर कोच ने पानी के नीचे 120 दिन बिताकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है। उन्होंने यह रिकॉर्ड पनामा के तट पर डूबे एक कैप्सूल में 120 दिन रहकर बनाया।

59 वर्षीय रुडिगर कोच ने शुक्रवार को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की निर्णायक सुजाना रेयेस की मौजूदगी में समुद्र के अंदर से बाहर निकलते हुए इस सफलता को हासिल किया। कोच ने 30 वर्ग मीटर के कैप्सूल में 120 दिन बिताए। इससे पहले जोसेफ डिटुरी ने फ्लोरिडा के लैगून में अंडर वाटर लॉज में 100 दिन बिताकर एक रिकॉर्ड बनाया था जिसे अब रुडिगर कोच ने तोड़ दिया है।

रुडिगर कोच पेशे से एयरोस्पेस इंजीनियर हैं। उन्होंने समुद्र के 11 मीटर नीचे 120 दिन बिताने के बाद कहा कि यह रोमांचक अनुभव था जिसका उन्होंने पूरा आनंद लिया लेकिन उन्होंने अफसोस जताया कि यह सफर अब खत्म हो गया है। कैप्सूल के अंदर बिताए गए समय को लेकर उन्होंने कहा कि जब चीजें शांत हो जाती हैं और अंधेरा छा जाता है तो समुद्र खुद ही चमकता है जो शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

कोच ने बात करते हुए कहा कि इस प्रयोग के माध्यम से हम यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि समुद्र का वातावरण मानव जीवन के लिए सुरक्षित और व्यवहार्य हो सकता है। उनका मानना है कि इस अनुभव से हमारी सोच में बदलाव आएगा।

इन 120 दिनों में कोच के पास कैप्सूल के अंदर एक बेड, शौचालय, टीवी, कंप्यूटर इंटरनेट और व्यायाम की सुविधा थी लेकिन इस दौरान वह नहा नहीं सके।

UP News: महिला ने गुस्से में अपने मासूम बच्चे को छत से फेंका, दर्दनाक मौत

 उत्तर प्रदेश के बलिया से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां पर एक मां ने गुस्से में अपने नौ महीने के मासूम बच्चे को छत से फेंक दिया। जिसकी दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और महिला को हिरासत में ले लिया और घटना की वजह जानने के लिए पूछताछ की।

जानिए पूरा मामला
बता दें कि यह पूरा मामला कृष्णा नगर इलाके का है। यहां पर 27 वर्षीय अंजू देवी अपनी बहन मनीषा के साथ अपने मायके में रह रही थी। शनिवार को दोनों बहनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। दोनों के बीच काफी झगड़ा होने लगा और गुस्से में आकर अंजू ने अपने नौ महीने के बेटे को दो मंजिला मकान की छत से नीचे फेंक दिया। इससे बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने आरोपी मां को किया गिरफ्तार
सूचना पर पहुंची पुलिस ने अंजू देवी को गिरफ्तार कर लिया। मृतक बच्चे की दादी शोभा देवी की शिकायत पर अंजू के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपी महिला से पूछताछ कर रही है। पुलिस ने बताया कि अंजू देवी ने प्रेम विवाह किया था।  पिछले दो साल से अपने मायके में रह रही थी। अंजू की बड़ी बहन मनीषा भी पिछले दो महीने से उसी घर में रह रही थी।

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