भारतीय रेलवे ने कश्मीर तक ट्रेन सेवा शुरू करने के अपने सपने को साकार करने के करीब एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा लिया है। आज भारतीय रेलवे ने जम्मू-कश्मीर के कटड़ा से बनिहाल तक चलने वाले उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक प्रोजेक्ट (USBRL) के तहत अंतिम निरीक्षण पूरा कर लिया है। इस निरीक्षण के दौरान, ट्रेन को दुनिया के सबसे ऊंचे रेल पुल पर दौड़ते हुए देखा गया।

कटरा-श्रीनगर ट्रैक कमिश्नर रेलवे सेफ्टी द्वारा दो दिवसीय दौरा बुधवार को कटरा स्टेशन पर खत्म हुआ। इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए दिनेश चंद्र ने कहा कि ट्रायल सफलतापूर्वक रहा है। यह निरीक्षण भारतीय रेलवे के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। यह ट्रेन सेवा जम्मू-कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी। खास बात यह है कि इस रेल लिंक के जरिए कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों के बीच सीधी रेल सेवाएं शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
Last inspection and expected start date:
रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) दिनेश चंद देशवाल ने कहा कि यह ट्रेन सेवा न केवल जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अब इस निरीक्षण के बाद डेटा का विश्लेषण किया जाएगा, जिससे यह तय किया जाएगा कि इस सेवा की शुरुआत कब की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर में रेल सेवा शुरू होने से वहां के लोगों को न सिर्फ यात्रा की सुविधा मिलेगी, बल्कि यह क्षेत्र के विकास और पर्यटन को भी प्रोत्साहन देगा। साथ ही, यह कश्मीर में सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति में भी सुधार का कारण बन सकता है, जिससे आम लोगों की जीवनशैली में सुधार हो सकता है।




केजरीवाल ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी को धन्यवाद दिया। उन्होंने एक्स (X) पर एक पोस्ट में कहा, “टीएमसी ने दिल्ली चुनावों में आप को समर्थन देने की घोषणा की है। मैं व्यक्तिगत रूप से ममता दीदी का आभारी हूं। धन्यवाद दीदी। आपने हमेशा हमारे अच्छे और बुरे समय में हमारा समर्थन और आशीर्वाद दिया है।”







13वें सवाल का सही उत्तर नहीं आने पर कौशलेंद्र प्रताप ने खेल को क्वीट कर दिया। 13वें सवाल था कि एक जनवरी 1877 को स्थापित जमशेदजी के किस कपड़ा मिल का नाम ब्रिटिश सम्राट से जुड़ी एक घटना के सम्मान में रखा गया था। सही जवाब ऑप्शन बी इंप्रेस मिल था, जिसे नागपुर में बनाया गया था। कौशलेंद्र ने बताया कि वह कोयला ढुलाई का काम करते हैं। इसी से उनकी रोजी-रोटी चलती है। उनका सपना था कि वह आईएएस बने। मगर पैसे की कमी के चलते पढ़ाई नहीं कर सके। कौशलेंद्र ने बताया कि मेरे साथ पहली बार बहुत कुछ हुआ। मुंबई आने के लिए मैं पहली बार प्लेन में चढ़ा। बड़े होटल में रुका, जहां मखमली बेड थी। समय पर तीनों वक्त खाना मिला। काम का कोई टेंशन नहीं था।

