Wednesday, February 4, 2026
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NATIONAL : ‘तीन बहनें हिम्मत नहीं जुटा पाईं, पर मैं भाग निकली…’, रतलाम की बेटी ने 14 साल की उम्र देखे घर में ‘देह के ग्राहक’, बोली- अब उस देहरी नहीं लौटूंगी

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रतलाम से भोपाल आई युवती ने बताया कि उसने कई बार भागने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रही. आखिरकार उसने ‘पढ़ाई और कोचिंग’ का बहाना बनाया. परिवार को लगा कि शहर जाकर वह और ‘ मोटी कमाई’ करेगी, इसलिए उन्होंने उसे घर की चौखट लांघने की इजाजत दे दी. इसी मौके का फायदा उठाकर वह भोपाल भाग आई.

“14 बरस की रही होऊंगी तब, जब एक दिन एक अनजान शख्स मेरे घर के उस कमरे में दाखिल हुआ जिसे मैं अपना सुरक्षित ठिकाना समझती थी. जब तक कुछ सोच पाती या किसी को पुकार पाती, दरवाजा बंद हो चुका था… उस दिन के बाद जो हुआ, वह बताने लायक नहीं है. आज भी सोचती हूं तो बदन ही नहीं, रूह तक सिहर उठती है.”

यह दास्तां उस 21 बरस की युवती की है, जो मध्य प्रदेश के मालवा इलाके के रतलाम स्थित अपने गांव के उस ‘नरक’ को पीछे छोड़कर राजधानी भोपाल पहुंची है, जिसे उसका समाज ‘रिवाज’ कहता है.पीड़िता ने जो खुलासा किया वह किसी भी सभ्य समाज के माथे पर कलंक है. उसने बताया कि 14 साल की उम्र से लेकर 21 साल तक लगभग हर दिन अनजान दरिंदे उसके घर आते रहे. वह कोई चोरी-छिपे होने वाला अपराध नहीं था, बल्कि उसके अपने माता-पिता और मामा उन दरिंदों से चंद कागजी नोटों का ‘परमिट’ लेकर उन्हें घर के अंदर दाखिल करवाते थे.

जब उसने अपनी बड़ी बहनों या मां से इस जुल्म की शिकायत की, तो उसे यह कहकर खामोश कर दिया गया- ‘यही हमारे समाज की रवायत है.’ बाछड़ा समाज की इस कुप्रथा ने उसके घर को ही एक ऐसी ‘मंडी’ बना दिया था, जहां उसकी अस्मत का सौदा हर रोज 200-500 रुपए में होता था.

युवती ने भोपाल के महिला थाने में अपनी आपबीती सुनाते हुए समाज के उस ढांचे पर चोट की, जहां पुरुष कोई काम-धंधा नहीं करते. उसने बताया, “मेरे भाई और पिता घर के बाहर बैठे रहते थे. वे कोई काम नहीं करते, क्योंकि उनकी पूरी गृहस्थी हम बेटियों की ‘कमाई’ पर टिकी थी. उनके लिए हम इंसान नहीं, बल्कि नोट छापने की मशीन थे.”

21 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उस युवती ने तय कर लिया कि “हर रोज किश्तों में मरने से बेहतर है कि एक बार मर लिया जाए.” उसने घर से निकलने की एक खतरनाक योजना बनाई. उसने अपने लालची परिजनों को यकीन दिलाया कि वह शहर जाकर ‘कोचिंग’ करेगी.घर के बड़े इतने ‘भोले’ नहीं थे कि अपनी कमाई के जरिए को यूं ही छोड़ दें, लेकिन उनके लालच ने ही युवती के लिए रास्ता खोल दिया. उन्होंने सोचा कि शहर जाकर वह ‘धंधा’ और बड़े पैमाने पर करेगी और मोटी रकम घर भेजेगी. इसी उम्मीद में उन्होंने उसे घर की देहरी लांघने की इजाजत दे दी.

रतलाम से बस पकड़कर सीधे भोपाल पहुंची युवती ने स्थानीय पुलिस पर भी गंभीर सवाल उठाए. उसने कहा कि वह रतलाम में अपनी सुनवाई की उम्मीद छोड़ चुकी थी क्योंकि वहां की पुलिस अक्सर ऐसे मामलों में मौन रहती है या रसूखदारों और समाज के ठेकेदारों का साथ देती है. भोपाल के महिला थाने में अब उसकी शिकायत पर माता-पिता और दो मामाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है.

युवती की आंखों में अपनी आजादी की चमक तो है, लेकिन अपनी उन तीन बहनों के लिए दर्द भी है जो आज भी उसी नरक में कैद हैं. उसने रुंधे गले से कहा, “मेरी तीन बहनें हिम्मत नहीं जुटा पाईं, वे आज भी वहां नोची जा रही हैं… पर मैं अब उस देहरी पर कभी कदम नहीं रखूंगी, चाहे कुछ भी हो जाए.”पीड़िता ने दावा किया कि उसकी तरह हजारों लड़कियों की जिंदगी पर जो ‘परंपरा’ के नाम पर देह व्यापार के अंधेरे में धकेली जा रही हैं. भोपाल पुलिस ने युवती को सुरक्षित गृह में भेज दिया है और मामले की जांच तेज कर दी है.

NATIONAL : UP के मुरादाबाद में दर्दनाक हादसा, बथुआ तोड़ने गईं दो सगी बहनें ट्रेन की चपेट में आईं, रेलवे ट्रैक पर दर्दनाक मौत

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मुरादाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र में बुधवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया. बीजना गांव की रहने वाली दो सगी बहनें काशिश (18) और तनिष्का (15) रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट में आ गईं. दोनों खेत में बथुआ तोड़ने जा रही थीं. हादसा दोपहर करीब 2:15 बजे मोरादाबाद-रामनगर पैसेंजर ट्रेन से हुआ. मौके पर ही दोनों की मौत हो गई. पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं.

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में बुधवार को एक दर्दनाक रेल हादसे में दो सगी बहनों की मौके पर ही मौत हो गई. यह हादसा उस समय हुआ जब दोनों बहनें रेलवे ट्रैक पार करने की कोशिश कर रही थीं. अचानक तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. इस हादसे से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है.

मृतक बहनों की पहचान कशिश (18) और तनिष्का (15) के रूप में हुई है. दोनों बहनें मुरादाबाद जिले के बीजना गांव की रहने वाली थीं. पुलिस के अनुसार, दोनों बुधवार दोपहर घर से पास के खेतों में बथुआ तोड़ने के लिए निकली थीं. इसी दौरान यह हादसा हो गया.

भोजपुर थाना प्रभारी संजय सिंह ने बताया कि यह हादसा दोपहर करीब 2:15 बजे बीजना चक बेगमपुर रेलवे अंडरपास के पास हुआ. जब दोनों बहनें रेलवे ट्रैक पार कर रही थीं, तभी मुरादाबाद की ओर से रामनगर जा रही मुरादाबाद-रामनगर पैसेंजर ट्रेन आ गई.ट्रेन की रफ्तार तेज होने के कारण दोनों बहनें संभल नहीं पाईं और ट्रेन की चपेट में आ गईं. हादसा इतना भीषण था कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. आसपास मौजूद लोगों ने घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी.

सूचना मिलते ही भोजपुर थाना पुलिस आनन-फानन में मौके पर पहुंची. पुलिस ने दोनों शवों को रेलवे ट्रैक से हटवाया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की. इसके बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.पुलिस ने बताया कि हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया है. परिजन घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच गए और उनका रो-रोकर बुरा हाल है. गांव में भी शोक का माहौल है.

थाना प्रभारी संजय सिंह ने बताया कि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसे के समय कोई चेतावनी या अन्य कारण तो नहीं थे. फिलहाल इसे दुर्घटना माना जा रहा है.पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान बरती जाने वाली सावधानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

SPORTS : T20 वर्ल्ड कप से लेकर न्यूजीलैंड टूर तक… 2026 में टीम इंडिया का शेड्यूल काफी टाइट

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भारतीय मेन्स क्रिकेट टीम को इस साल तीनों फॉर्मेट में काफी सारे मुकाबले खेलने हैं. टी20 वर्ल्ड कप के अलावा इंग्लैंड और न्यूजीलैंड का दौरा टीम इंडिया के लिए बेहद अहम होगा. भारतीय टीम के दिग्गज विराट कोहली और रोहित शर्मा भी बल्ले से रन बरसाते नजर आएंगे.

नए साल का आगाज शानदार तरीके से हो चुका है. नया साल भारतीय क्रिकेट के लिहाज से काफी अहम होने जा रहा है. साल 2026 भारतीय क्रिकेट की दिशा तय कर सकता है. इस साल भारतीय मेन्स क्रिकेट टीम का सबसे बड़ा इम्तिहान टी20 वर्ल्ड कप 2026 में होगा, जो 7 फरवरी से 8 मार्च तक भारत और श्रीलंका की सहमेजबानी में खेला जाएगा. भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में डिफेंडिंग चैम्पियन के रूप में उतरेगी.

अब तक किसी भी टीम ने लगातार दो बार टी20 वर्ल्ड कप खिताब नहीं जीता है, ऐसे में टीम इंडिया उस मिथक को तोड़ना चाहेगी. ग्रुप स्टेज में भारत का सामना संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), नामीबिया, पाकिस्तान और नीदरलैंड्स से होगा. इस पूरे अभियान के केंद्र में सूर्यकुमार यादव होंगे, जिन्हें एक युवा भारतीय टीम की कमान सौंपी गई है. यह ऐसा पहला टी20 वर्ल्ड कप होगा, जिसमें रोहित शर्मा या विराट कोहली भाग नहीं लेंगे. अगर सूर्यकुमार की अगुवाई में भारत खिताब बचाने में कामयाब होता है, तो वह क्रिकेट इतिहास की बड़ी उपलब्धियों में से एक होगी.

यह कयास लगाया जा रहा है कि 2026 का टी20 वर्ल्ड कप बतौर भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव का आखिरी टूर्नामेंट हो सकता है. वर्ल्ड कप के बाद चयनकर्ता अगले दीर्घकालिक कप्तान को तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं. रोहित शर्मा और विराट कोहली ने टी20 क्रिकेट से दूरी बना ली हो, लेकिन वनडे फॉर्मेट में उनकी अहमियत बरकरार है. 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों में इन दोनों सीनियर खिलाड़ियों की भूमिका बेहद अहम होगी. अगर भारत को सभी फॉर्मेट में शीर्ष दावेदार बने रहना है, तो इन दिग्गजों का योगदान निर्णायक रहेगा.

शुभमन गिल को टी20 वर्ल्ड कप 2026 की टीम से बाहर रखा जाना चौंकाने वाला रहा. अब सबकी निगाहें उनके इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 में प्रदर्शन पर होंगी. चोटों और फॉर्म को पीछे छोड़कर अगर शुभमन शानदार वापसी करते हैं, तो वह खुद को भारत के भविष्य के ऑल-फॉर्मेट लीडर के रूप में फिर से स्थापित कर सकते हैं. भारतीय टीम इस साल श्रीलंका और न्यूजीलैंड दौरे पर भी जाएगी, जो काफी महत्वपूर्ण होंगे.

2026 में भारतीय मेन्स क्रिकेट टीम के शेड्यूल पर एक नजर डालते हैं…

न्यूजीलैंड का भारत दौरा (जनवरी)
♦ 11 जनवरी- पहला वनडे, वडोदरा
♦ 14 जनवरी- दूसरा वनडे, राजकोट
♦ 18 जनवरी- तीसरा वनडे, इंदौर
♦ 21 जनवरी- पहला टी20, नागपुर
♦ 23 जनवरी- दूसरा टी20, रायपुर
♦ 25 जनवरी- तीसरा टी20, गुवाहाटी
♦ 28 जनवरी- चौथा टी20, विशाखापत्तनम
♦ 31 जनवरी- पांचवां टी20, तिरुवनंतपुरम

आईसीसी मेन्स टी20 विश्व कप
♦ 7 फरवरी से 8 मार्च
मेजबान- भारत और श्रीलंका

यह भी पढ़ें: टी20 वर्ल्ड कप का शेड्यूल जारी, 15 फरवरी को होगा भारत-पाक‍िस्तान मैच

अफगानिस्तान का भारत दौरा (जून)
♦ 1 टेस्ट
♦ 3 वनडे

भारत का इंग्लैंड दौरा (जुलाई)
♦ 1 जुलाई- पहला टी20, चेस्टर-ले-स्ट्रीट
♦ 4 जुलाई- दूसरा टी20, मैनचेस्टर
♦ 7 जुलाई- तीसरा टी20, नॉटिंघम
♦ 9 जुलाई- चौथा टी20, ब्रिस्टल
♦ 11 जुलाई- पांचवां टी20, साउथम्प्टन
♦ 14 जुलाई- पहला वनडे, बर्मिंघम
♦ 16 जुलाई- दूसरा वनडे, कार्डिफ
♦ 19 जुलाई- तीसरा वनडे, लॉर्ड्स

भारत और श्रीलंका का दौरा (अगस्त)
♦ 2 टेस्ट मैच

भारत का बांग्लादेश दौरा (सितंबर में संभावित)
♦ 3 वनडे
♦ 3 टी20

भारत का अफगानिस्तान दौरा (न्यूट्रल वेन्यू) | सितंबर-अक्तूबर
♦ 3 टी20

वेस्टइंडीज का भारत दौरा (सितंबर-अक्तूबर)
♦ 3 वनडे
♦ 5 टी20

एशियन गेम्स 2026
मेजबान: जापान

भारत का न्यूजीलैंड दौरा (अक्टूबर-नवंबर)
♦ 2 टेस्ट
♦ 3 वनडे
♦ 5 टी20

श्रीलंका का भारत दौरा (दिसंबर)
♦ 3 वनडे
♦ 3 टी20

सीनियर क्रिकेट से इतर साल की शुरुआत में ही आईसीसी मेन्स अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 भी खेला जाना है. जिम्बाब्वे और नामीबिया की सहमेजबानी में होने जा रहे इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम शानदार प्रदर्शन कर खिताब कब्जाना चाहेगी. इस टीम में शामिल वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा बल्लेबाज पर खास नजर रहेगी. युवा खिलाड़ियों का प्रदर्शन आने वाले वर्षों में भारतीय सीनियर टीम की झलक दिखा सकता है.

जहां ज्यादातर सुर्खियां मेन्स टीम पर टिकी रहेंगी, वहीं भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने 2026 में और भी बड़ी उपलब्धियों की भूख के साथ कदम रखी है. नवंबर 2025 में अपना पहला आईसीसी महिला वनडे वर्ल्ड कप जीतने के बाद भारतीय महिला टीम ने नए साल की शुरुआत विश्व विजेता के रूप में की है और यही पहचान अब गर्व के साथ-साथ अतिरिक्त दबाव भी लेकर आएगी.

इस साल जून-जुलाई में आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप भी होना है, जिसपर भारतीय फैन्स की निगाहें हैं. अगर भारतीय महिला टीम वनडे के बाद टी20 वर्ल्ड कप भी जीतने में सफल रहती है, तो यह काफी खास लम्हा होगा. यह तभी संभव हो पााएगा, जब हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना जैसी अनुभवी खिलाड़ी अच्छा खेल दिखाएंगी.

भारतीय क्रिकेट के लिए 2026 सिर्फ उपलब्धियों को दोहराने का साल नहीं, बल्कि यह साबित करने का मौका है कि 2025 की ऐतिहासिक जीतें कोई मंजिल नहीं, बल्कि लंबे समय तक दबदबे की नींव थी.

NATIONAL : SIR ने 28 साल बाद शख्स को कर दिया ‘ज़िंदा’… दिलचस्प है शरीफ़ की वापसी की कहानी

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मुजफ्फरनगर में लापता समझे गए बुजुर्ग शरीफ़ 28 साल बाद अचानक घर लौटे, जिससे परिवार और स्थानीय लोग भावुक हो गए. उनका अपने पैतृक घर से संपर्क टूट गया था. सरकारी डॉक्यूमेंटेशन की जरूरत पड़ने पर वे वापस आए.

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक भावुक करने वाला मंजर देखने को मिला, जब करीब तीन दशक पहले मरा हुआ मान लिया गया एक शख्स अचानक वापस आ गया. खतौली कस्बे के मोहल्ला बालाराम के रहने वाले बुजुर्ग शरीफ 28 साल बाद अपने परिवार के पास लौटे, जिससे रिश्तेदार और स्थानीय लोग भावुक हो गए. उन्हें अपने खर-गांव की याद क्यों आई, इसके पीछे की वजह भी बेहद दिलचस्प है.

शरीफ़ की पहली पत्नी का 1997 में निधन हो गया था. इसके बाद, उन्होंने दूसरी शादी कर ली और अपनी दूसरी पत्नी के साथ पश्चिम बंगाल चले गए. कुछ वक्त तक परिवार लैंडलाइन फ़ोन से संपर्क में रहा, लेकिन धीरे-धीरे सारा संपर्क टूट गया.

परिवार के सदस्यों ने पश्चिम बंगाल में बताए गए पते पर उन्हें ढूंढने की कई कोशिशें कीं, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल पाई. आखिरकार, परिवार ने मान लिया था कि शरीफ़ की मौत हो गई है.पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR प्रोसेस के लिए ज़रूरी कागज़ात की ज़रूरत पड़ने के बाद, शरीफ दो दिन पहले अपने पैतृक घर खतौली लौटे. वे 28 साल में पहली बार अपने घर वापस आए. उनके अचानक आने से परिवार वालों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों में बहुत खुशी और हैरानी हुई.

शरीफ़ के भतीजे, मोहम्मद अकलम ने बताया कि परिवार ने करीब 15 से 20 सालों तक पश्चिम बंगाल की कई जगहों पर, जिसमें खड़गपुर और आसनसोल भी शामिल हैं, उन्हें ढूंढा, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला. जब खबर आई कि शरीफ़ वापस आ गए हैं, तो परिवार को शुरू में यकीन करना मुश्किल हुआ.
शरीफ के घर आने पर बड़ी भीड़ जमा हो गई, लोग उनसे मिलने आए और दूर के रिश्तेदारों ने वीडियो कॉल के ज़रिए उससे बात की.शरीफ़ ने बताया कि 1997 में अपनी दूसरी शादी के वक्त सीमित साधनों और कम्युनिकेशन सुविधाओं की कमी के कारण उनका अपने परिवार से संपर्क टूट गया था. उन्होंने कहा कि वह सिर्फ़ इसलिए वापस आए क्योंकि सरकारी डॉक्यूमेंटेशन ज़रूरी था, जिसके बाद वह फिर से वापस चले जाएंगे.

जानकारी के मुताबिक, ज़रूरी दस्तावेज़ इकट्ठा करने और अपने रिश्तेदारों से मिलने के बाद, शरीफ़ अब पश्चिम बंगाल लौट गए हैं, जहां वे करीब तीन दशकों से अपनी पत्नी और बच्चों के साथ जिंदगी गुजार रहे हैं.

NATIOANL : साढ़े तीन साल के बेटे के साथ मां ने कुएं में कूदकर दी जान… महाराष्ट्र के बीड में सामने आई दर्दनाक घटना

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महाराष्ट्र के बीड से दर्दनाक घटना सामने आई है. 23 साल की महिला ने अपने साढ़े तीन साल के बेटे के साथ कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली. महिला घर से बेटे को लेकर निकली थी, लेकिन जब देर तक वापस नहीं लौटी तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की. बाद में कुएं में दोनों के शव मिलने से मातम फैल गया. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

महाराष्ट्र के बीड से दर्दनाक घटना आई है. 23 साल की महिला अपने साढ़े तीन साल के बेटे को गोद में लेकर कुएं में कूद कई. यह घटना बीड तहसील के लिम्बारुई गांव के पास दारड़े बस्ती इलाके में हुई. घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया. सूचना के बाद पहुंची पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

एजेंसी के अनुसार. मृतकों की पहचान 23 वर्षीय प्राजक्ता रमेश्वर दारड़े और साढ़े तीन साल के बेटे वेदांत के रूप में हुई है. सुबह के समय प्राजक्ता बेटे को लेकर घर से निकली थी. परिवार वालों को लगा कि वह किसी काम से बाहर गई होगी, लेकिन काफी देर तक जब वह वापस नहीं लौटी तो परिजनों को चिंता हुई.

परिवार के सदस्यों ने आसपास के इलाके में खोजबीन शुरू की. इसी दौरान उन्हें घर से करीब 300 मीटर दूर स्थित एक कुएं के पास महिला की चप्पलें दिखाई दीं. आशंका होने पर जब कुएं में झांककर देखा गया तो महिला का शव पानी में नजर आया. इसके बाद तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई.सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से महिला के शव को बाहर निकाला गया. हालांकि कुएं में पानी अधिक होने के कारण बच्चे का शव तुरंत नहीं मिल सका. प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए चार से पांच बिजली के पंप लगाकर कुएं का पानी निकालना शुरू किया.

लगातार पांच से छह घंटे तक पानी निकाले जाने के बाद मासूम का शव मिल सका. दोनों के शव मिलने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया.
पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है. फिलहाल महिला द्वारा यह खौफनाक कदम उठाने के पीछे की वजह साफ नहीं हो पाई है. पुलिस का कहना है कि पारिवारिक स्थिति, मानसिक तनाव या किसी अन्य कारण की भी जांच की जा रही है. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और सभी पहलुओं से जांच जारी है.

नोट:- (अगर आपके या आपके किसी परिचित के मन में आता है खुदकुशी का ख्याल तो ये बेहद गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है. तुरंत भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 पर संपर्क करें. आप टेलिमानस हेल्पलाइन नंबर 1800914416 पर भी कॉल कर सकते हैं. यहां आपकी पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी और विशेषज्ञ आपको इस स्थिति से उबरने के लिए जरूरी परामर्श देंगे. याद रखिए जान है तो जहान है.)

NATIONAL : लड़की बनकर चैटिंग, फिर मुलाकात का बहाना… नवी मुंबई में 10वीं के छात्र का अपहरण, मांगी फिरौती

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सोशल मीडिया के खतरनाक ट्रैप का मामला नवी मुंबई में सामने आया है. इंस्टाग्राम पर फर्जी अकाउंट से दोस्ती कर चार युवकों ने 15 साल के किशोर को मिलने के बहाने बुलाया और उसका अपहरण कर लिया. आरोपियों ने परिजनों से 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी. इस केस में पुलिस की सतर्कता से 24 घंटे के भीतर किशोर को सुरक्षित बचा लिया गया और चारों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं.

नवी मुंबई से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां सोशल मीडिया के जरिए 15 साल के किशोर को फंसाकर उसका अपहरण कर लिया गया. आरोपियों ने फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया, खुद को युवती के रूप में पेश कर किशोर से दोस्ती की और धीरे-धीरे उसे बातों में फंसा लिया. इसके बाद उसे मिलने के बहाने बुलाया. जब किशोर मिलने आया तो चार युवकों ने उसका अपहरण कर लिया और परिजनों से 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी.

एजेंसी के मुताबिक, पीड़ित किशोर कक्षा 10वीं का छात्र है. इंस्टाग्राम पर एक लड़की के नाम से बने फर्जी अकाउंट से उसकी बातचीत शुरू हुई थी. लगातार चैटिंग और बातचीत के दौरान आरोपियों ने उसे यह भरोसा दिलाया कि वह एक रोमांटिक रिलेशन में है. पूरी तरह विश्वास में लेने के बाद उसे ठाणे जिले के कल्याण (पूर्व) स्थित नंदिवली इलाके में मिलने के लिए बुलाया गया.

किशोर तय जगह पर कैब से पहुंचा. जैसे ही वह वहां पहुंचा, चार युवकों ने उसे अगवा कर लिया और एक रिहायशी इमारत के कमरे में ले जाकर बंद कर दिया. इसके बाद आरोपियों ने उसके परिजनों से संपर्क कर 20 लाख रुपये की फिरौती की मांग की. दबाव बनाने के लिए उन्होंने वॉट्सएप पर वॉइस मैसेज भी भेजा.

घटना की जानकारी मिलने पर किशोर के माता-पिता ने पुलिस से मामले की शिकायत की. शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले और जांच के जरिए उस कैब ड्राइवर तक पहुंची, जिसने किशोर को नंदिवली इलाके में छोड़ा था.

इसके बाद मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने नंदिवली में एक कमरे पर छापा मारा, जहां से किशोर को सुरक्षित बरामद कर लिया गया. पुलिस ने इस मामले में चारों आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कर ली गई है. सभी के खिलाफ अपहरण और फिरौती मांगने के आरोप में केस दर्ज किया गया है. कोर्ट ने चारों आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेज दिया है. पुलिस ने इस घटना के बाद अभिभावकों और युवाओं से सोशल मीडिया पर सतर्क रहने की अपील की है और अजनबियों से ऑनलाइन दोस्ती के खतरों को लेकर जागरूक रहने की सलाह दी है.

ENTERTAINMENT : KBC 17 में धर्मेंद्र को याद कर इमोशनल हुए अमिताभ बच्चन, भर आई आंखें, बोले- वो एक एहसास थे

धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म इक्कीस रिलीज हो चुकी है.इसे लेकर फैंस और फिल्म इंडस्ट्री के लोग भावुक हैं. केबीसी 17 में अमिताभ बच्चन ने धर्मेंद्र को याद करते हुए उनके साथ काम करने के अनुभव साझा किए. फिल्म के डायरेक्टर श्रीराम राघवन और अभिनेता जयदीप अहलावत ने भी धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि दी.

नए साल के दिन लेजेंडरी एक्टर धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म इक्कीस रिलीज हुई है. फैंस के लिए ये इमोशनल पल है. अपने खास दोस्त धर्मेंद्र को याद कर सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की भी आंखें नम हैं. केबीसी 17 के हालिया एपिसोड में बिग बी ने धर्मेंद्र को याद किया. उनके साथ फिल्म शोले में काम करने के एक्सपीरियंस को दुनिया के सामने रखा. बिग बी ने हीमैन को इमोशनल विदाई दी.

केबीसी के सेट पर फिल्म इक्कीस की स्टारकास्ट आई थी. अगस्त्य नंदा, जयदीप अहलावत ने भी धर्मेंद्र को ट्रिब्यूट दिया. एपिसोड की शुरुआत बॉलीवुड लेजेंड धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई. धर्मेंद्र के बारे में बोलते वक्त अमिताभ इमोशनल हो गए थे. उनकी आवाज कांप रही थी. बिग बी ने कहा- इक्कीस हम सबके लिए धर्मेंद्र की आखिरी अनमोल निशानी है. जिसे वो करोड़ों लोगों के लिए छोड़ गए. एक आर्टिस्ट अपनी आखिरी सांस तक एक्टिंग ही करना चाहता है. यही मेरे दोस्त, मेरे परिवार और मेरे आदर्श मिस्टर धर्मेंद्र देओल ने किया.

ये सब बोलते वक्त अमिताभ की आवाज में कंपन थी. वो कहते हैं- मिस्टर धर्म सिर्फ एक शख्स नहीं थे. वो एक एहसास थे और एहसास कभी छोड़ता नहीं. ये याद बन जाता है, दुआएं बनकर साथ चलता है, जो आपको आगे बढ़ाता रहता है. फिल्म शोले की शूटिंग का किस्सा शेयर करते हुए बिग बी बोले- एक बार हम बैंगलोर में शूटिंग कर रहे थे. जैसा कि मैं कहता हूं धर्मेंद्र के पास शारीरिक ताकत थी, वो पहलवान थे, हीरो थे. उनकी फिजीकल ताकत का उदाहरण मैंने भी देखा था. मौत के सीन में मेरे अंदर जो तड़प आपने स्क्रीन पर देखी, वो रियल थी क्योंकि उन्होंने मुझे इतनी जोर से पकड़ा था कि दर्द अपने आप मेरी एक्टिंग में दिख रहा था. मेरी वहां पर नेचुरल एक्टिंग हुई थी.

फिल्म इक्कीस की बात करें तो इसमें अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा लीड रोल में हैं. इस मूवी से अगस्त्य ने बड़े पर्दे पर डेब्यू किया है. उनके अपोजिट सिमर भाटिया ने काम किया है.

NATIONAL : जिम ट्रेनर को भीड़ ने पीटा, लड़कियों से अंडरगारमेंट्स का कलर पूछने का आरोप लगाया

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देहरादून के क्लेमेंटटाउन इलाके में एक जिम ट्रेनर पर महिलाओं से अश्लील व्यवहार और आपत्तिजनक मैसेज भेजने का आरोप लगा है. महिलाओं की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. मामले को लेकर हिंदू संगठनों ने विरोध जताया है और सख्त कार्रवाई की मांग की है.

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के क्लेमेंटटाउन थाना क्षेत्र से महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है. यहां एक जिम में ट्रेनर पर एक्सरसाइज के लिए आने वाली महिलाओं से अश्लील हरकत करने और आपत्तिजनक संदेश भेजने के आरोप लगे हैं. शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

यह मामला चंद्रमणि चौक के पास स्थित फिट एंड फाइन जिम से जुड़ा है. महिलाओं का आरोप है कि जिम में ट्रेनर के रूप में काम कर रहे नदीम अंसारी ने एक्सरसाइज के दौरान उनके साथ अनुचित व्यवहार किया और उन्हें असहज महसूस कराया. पीड़ित महिलाओं ने बताया कि ट्रेनर द्वारा बार बार गलत तरीके से छूने और आपत्तिजनक टिप्पणियां करने की घटनाएं सामने आईं.

महिलाओं का कहना है कि उन्होंने इस व्यवहार को लेकर पहले भी आपत्ति जताई थी, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ. बाद में ट्रेनर द्वारा अश्लील मैसेज भेजे जाने के बाद उन्होंने एकजुट होकर पुलिस से शिकायत की. शिकायत मिलने पर क्लेमेंटटाउन पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है.

मामले के सामने आने के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया. बजरंग दल समेत कई हिंदू संगठनों ने इस घटना को महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है. संगठनों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में किसी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए.
पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जा रही है. जिम के अन्य सदस्यों और स्टाफ से भी पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके. एसपी सिटी देहरादून प्रमोद कुमार ने बताया कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल आरोपी से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है और पुलिस का दावा है कि दोषी पाए जाने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे.

NATIONAL : प्रेमी की चाह में अंधी हुई मां, मोबाइल छीना तो 3 साल के मासूम को जहर पिलाकर ले ली जान

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बेगूसराय के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में एक महिला ने अपने 3 साल के बेटे को जहर खिलाकर हत्या कर दी और खुद भी जहर खा लिया. दोनों को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बेटे की मौत हो गई, जबकि महिला का इलाज चल रहा है. पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है. घटना प्रेमी से बातचीत और मोबाइल विवाद से जुड़ी बताई जा रही है.बिहार के बेगूसराय जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. प्रेमी से बातचीत करने से रोके जाने और मोबाइल छीने जाने से नाराज एक महिला ने अपने तीन साल के मासूम बेटे को जहर खिला दिया. इसके बाद महिला ने खुद भी जहर खा लिया. इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई, जबकि महिला की हालत गंभीर बनी हुई है. उसका इलाज पुलिस हिरासत में सदर अस्पताल में चल रहा है.

दरअसल, यह घटना सूजा शांति नगर की है. मृत बच्चे की पहचान तीन वर्षीय देवराज के रूप में हुई है. वहीं आरोपी महिला 21 वर्षीय आशा देवी है, जो गोरेलाल साह की पत्नी है. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया.परिजनों के अनुसार, गोरेलाल साह की शादी आशा देवी से जून 2021 में हुई थी. शादी के कुछ समय बाद आशा देवी की सोशल मीडिया के जरिए एक युवक से दोस्ती हो गई थी. दोनों के बीच बातचीत बढ़ने लगी. जब परिवार को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने आशा को समझाया और उसके साथ मारपीट कर मोबाइल भी छीन लिया. उसे उस युवक से दूर रहने को कहा गया.

मंगलवार की शाम नए साल को लेकर आशा देवी ने अपने पति से रुपये और बड़ा मोबाइल मांगा. पति ने साफ मना कर दिया और उसे डांटते हुए कहा कि वह उस युवक से बातचीत बंद करें. इसी बात को लेकर आशा देवी काफी नाराज हो गई. परिवार वालों ने भी उसे फटकार लगाई और मोबाइल इस्तेमाल से रोका.
आरोप है कि इसी गुस्से में आकर आशा देवी ने घर में रखी चूहा मारने की दवा पहले अपने बेटे देवराज को खिला दी और फिर खुद भी वही जहर खा लिया.

अस्पताल में होश में आने पर आशा देवी ने बताया कि उसकी एक युवक राजाराम से दोस्ती थी और दोनों में प्यार हो गया था. पति द्वारा मारपीट और मोबाइल छीने जाने के बाद भी वह छोटे मोबाइल से बात करती थी. घटना वाले दिन भी इसी बात को लेकर विवाद हुआ था. पति से बात करने पर उसने कहा था कि ‘जो मन है करो’.सदर-वन डीएसपी आनंद कुमार पांडेय ने बताया कि प्रारंभिक जांच में प्रेम प्रसंग और मोबाइल को लेकर विवाद की बात सामने आई है. बच्चे की मौत हो चुकी है और महिला का इलाज चल रहा है. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और सभी पहलुओं से जांच की जा रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

ENTERTAINMENT : एक्शन-इमोशन और ढेर सारे जोश से भरी है धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म, अगस्त्य नंदा ने किया कमाल

डायरेक्टर श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी फिल्म ‘इक्कीस’ के चर्चे काफी वक्त से हो रहे थे. ये बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता रहे धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म है. तो वहीं अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा ने इसके साथ अपना थिएटर में डेब्यू किया है. आइए आपको बताते हैं कि ‘इक्कीस’ कैसी है.

हमारे देश के हर घर में एक कहानी है. यहां ढेरों जवान रहते हैं, जो समाज और परिवार से लड़कर आगे बढ़े हैं. कुछ ऐसे भी हैं, जो बचपन से ही फौज में भर्ती होने का सपना देखा करते थे. इन्हीं में से एक थे अरुण खेत्रपाल. भारत के सबसे यंग परमवीर चक्र विजेता. ये चक्र जीतने का सपना अरुण ने महज 21 साल की उम्र में देखा था. इसे उन्होंने पूरा भी किया. और जिस देश की सेवा वो बचपन से करना चाहते थे, उसके लिए अपनी जान भी दी. यही तो एक सच्चा फौजी करता है. अरुण के इसी शौर्य की गाथा है फिल्म ‘इक्कीस’.

डायरेक्टर श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी फिल्म ‘इक्कीस’ के चर्चे काफी वक्त से हो रहे थे. ये बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता रहे धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म है. तो वहीं अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा ने इसके साथ अपना थिएटर में डेब्यू किया है. अक्षय कुमार की भतीजी सिमर भाटिया की भी ये पहली फिल्म है. इन सभी के साथ इसमें जयदीप अहलावत भी हैं. जाहिर है, इतने सारे एलिमेंट्स के साथ मिलकर बनी ये वॉर फिल्म खास तो होनी ही थी. आइए आपको बताते हैं कि ‘इक्कीस’ कैसी है.

फिल्म ‘इक्कीस’ की शुरुआत कशमकश में डूबे ब्रिगडियर नासिर (जयदीप अहलावत) के रिटायर्ड ब्रिगडियर एमएल खेत्रपाल (धर्मेंद्र) से मुलाकात करने से होती है. भारत-पाकिस्तान के बीच लड़े गए कारगिल युद्ध को 30 साल बीत चुके हैं. साल 2001 का वक्त है, जब सीनियर खेत्रपाल पाकिस्तान गए हैं. दोनों की मुलाकात होती है, नासिर उन्हें अपने घर में ठहराते हैं और उन्हें उनके पिंड सरगोधा भी लेकर जाते हैं, जहां वो कभी रहा करते थे. बेटे को खोने का गम एमएल खेत्रपाल को आज भी है. उन्हें आखिरी बात जो पता है वो ये कि अरुण को वापस आने का ऑर्डर मिला था. लेकिन वो नहीं लौटा. उसने अपना रेडियो भी बंद कर दिया था. ऐसे में वो शहीद कैसे हुआ इसकी ठीक-ठीक जानकारी उन्हें भी नहीं है.

कहानी फ्लैशबैक में जाती है और आप यंग अरुण खेत्रपाल को देखते हैं. फौज में सेकेंड लेफ्टिनेंट का दर्जा पा चुका अरुण अपने साथियों के साथ मस्ती तो करता है, लेकिन अपने उसूलों का पक्का भी है. वो रूल्स तोड़ने के सख्त खिलाफ है और उसमें कुछ बड़ा कर दिखाने का जज्बा है. अरुण की मुलाकात मूवी थिएटर के बाहर किरण से होती है और यहां से उसकी छोटी-सी लव स्टोरी आपके देखने को मिलती है. फिर आती है जंग की बारी. खुद को साबित करने का मौका ढूंढ रहा अरुण खुद आगे आकर भारत-पाकिस्तान की जंग में जाने के लिए अपना नाम देता है. उसके कमांडिंग अफसर को लगता है कि वो बस एक जोशीला बच्चा है. लेकिन खुद अरुण को भी शायद इस बाद का अंदाजा नहीं था कि वो जहां जा रहा है, वहां दुनिया एकदम अलग है और जिंदगी का कोई भरोसा नहीं.

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