PUNJAB : फिर सुलग रहे पंजाब के खेत! पराली जलाने के 90 मामले, जुर्माने के साथ शुरू हुआ अभियान

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पराली जलाने के 90 मामले सामने आए हैं, जिनमें 49 FIR दर्ज और 2,25,000 रुपये जुर्माना लगाया गया. सरकार ने किसानों व ग्रामीणों को टिकाऊ कृषि के लिए जागरूक अभियान शुरू किया.

पंजाब में खेत एक बार फिर सुलगने लगे हैं. धान की पराली जलाने के 90 मामले पिछले कल (28 सितंबर) तक सामने आए हैं. इनमें 49 FIR दर्ज की गई हैं जबकि 32 किसानों के रेवेन्यू रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है. अब तक 2,25,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 1,75,000 रुपये वसूल किए जा चुके हैं.

सबसे ज्यादा 51 पराली जलाने के मामले अमृतसर जिले में दर्ज किए गए हैं, जो राज्य में पराली जलाने की गंभीरता को दर्शाते हैं. यह मामला दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते वायु प्रदूषण की समस्या से सीधे जुड़ा हुआ है.

पंजाब सरकार ने पराली जलाने के दुष्प्रभावों और फसल अवशेष प्रबंधन (Crop Residue Management) के लाभों से लोगों को अवगत कराने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है. इसके तहत नुक्कड़ नाटक, दीवार पर चित्रकारी और अन्य गतिविधियों को शामिल किया गया है. अधिकारियों के अनुसार यह अभियान किसानों और ग्रामीण समुदायों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और टिकाऊ कृषि प्रथाओं को अपनाने पर केंद्रित है.

कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां ने बताया कि राज्य सरकार ने पराली जलाने को लेकर बढ़ती चिंता को दूर करने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन के लिए एक महत्वाकांक्षी सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) योजना का अनावरण किया है. अक्टूबर और नवंबर में धान की कटाई के बाद अक्सर दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने का मुख्य कारण पंजाब और हरियाणा में पराली जलाना होता है. उन्होंने कहा कि कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच समय कम होने के कारण कुछ किसान जल्दी से फसल अवशेष साफ करने के लिए खेतों में आग लगा देते हैं.

खुडियां ने बताया कि इस व्यापक IEC अभियान का उद्देश्य किसानों, छात्रों और समुदायों को पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं की ओर प्रेरित करना है. इस अभियान में अधिकतम प्रभाव और पहुंच के लिए 50 प्रचार वैन तैनात की जाएंगी, जो ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता संदेश प्रसारित करेंगी. पीटीआई के अनुसार, इसके अतिरिक्त, सांस्कृतिक माध्यम से संदेश संप्रेषित करने के लिए 444 नुक्कड़ नाटक आयोजित किए जाएंगे.

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