समरावता ‘थप्पड़कांड’ और प्रशासनिक विवाद

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एसडीएम अमित चौधरी पर एफआईआर का आदेश और कानूनी पहल

समरावता में हुए एक विवादास्पद घटनाक्रम, जिसे अब ‘थप्पड़कांड’ के नाम से जाना जा रहा है, ने प्रशासन और राजनीति के बीच एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले में प्रशासनिक अधिकारी एसडीएम अमित चौधरी समेत अन्य पांच अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। यह घटना 10 अक्टूबर 2024 को हुई थी, जब नगर पालिका द्वारा एक कानूनी विवाद के बावजूद एक दुकान को ध्वस्त कर दिया गया था।

एफआईआर का आदेश और कानूनी पहल

मालपुरा के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) ने इस मामले में एसडीएम अमित चौधरी समेत छह अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। एफआईआर में तत्कालीन तहसीलदार पवन कुमार मातवा, प्रशासनिक अधिकारी जयनारायण जाट, गिरदावर रामदास माली, जमादार राजेश कुमार और स्टोर कीपर राजेंद्र कुमार के नाम भी शामिल हैं।

दुकान ध्वस्तीकरण विवाद

मालपुरा के निवासी राकेश कुमार पारीक ने कोर्ट में याचिका दायर करते हुए आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर 2024 को नगर पालिका के अधिकारियों और एसडीएम अमित चौधरी ने उनकी किराए की दुकान को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के ध्वस्त कर दिया। पारीक का दावा था कि उन्होंने दुकान को लेकर कोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त किया था, जिसे अनदेखा कर कार्रवाई की गई। इस घटना में दुकान का सामान, नकदी और महत्वपूर्ण स्टाम्प पेपर भी गायब कर दिए गए।

प्रशासनिक अधिकारियों पर लगे आरोप

राकेश पारीक का आरोप है कि इस कार्रवाई में प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया और किसी भी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। इसके चलते उन्होंने एसीजेएम कोर्ट में एफआईआर दर्ज करने की अपील की, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 198, 199, 201, 334(1), 334(2) और 61(2) के तहत कार्रवाई की मांग की गई।

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