MP : 3 साल की बच्ची का संथारा: मासूम की मौत पर बाल आयोग ने लिया संज्ञान, DM से मांगा जवाब

0
88

संथारा या सल्लेखना जैन धर्म की एक प्राचीन प्रथा है, जिसमें व्यक्ति आध्यात्मिक शुद्धि और सांसारिक मोह से मुक्ति के लिए स्वेच्छा से भोजन और पानी त्यागकर मृत्यु को गले लगाता है.

मध्य प्रदेश के इंदौर में जैन परिवार की 3 साल 4 माह की बच्ची वियाना जैन की संथारा के बाद मृत्यु का मामला चर्चा में है. बच्ची के माता-पिता ने दिगंबर जैन संत अभिग्रहधारी राजेश मुनि की सलाह पर 21 मार्च को उसे संथारा दिलवाया, जिसके कुछ मिनट बाद मासूम ने अंतिम सांस ली. इस घटना ने धार्मिक, कानूनी और नैतिक सवाल खड़े कर दिए हैं. मध्य प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मामले का संज्ञान लिया और इंदौर जिला प्रशासन से जवाब मांगा है.

मध्य प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य ओंकार सिंह ने सोमवार को एक न्यूज एजेंसी से कहा, “मीडिया रिपोर्टों के आधार पर हमने इस घटना का संज्ञान लिया है. हमने इंदौर के जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया है.”

उन्होंने विशेष रूप से सवाल उठाया कि एक तीन वर्षीय बच्ची संथारा जैसी प्रथा के लिए सहमति कैसे दे सकती है. सिंह ने कहा, “हम जिला मजिस्ट्रेट से जवाब मांग रहे हैं और उनके उत्तर के आधार पर उचित कार्रवाई करेंगे.”दरअसल, संथारा (सल्लेखना या समाधि मरण) जैन धर्म की एक प्राचीन प्रथा है, जिसमें व्यक्ति आध्यात्मिक शुद्धि और सांसारिक मोह से मुक्ति के लिए स्वेच्छा से भोजन और पानी त्यागकर मृत्यु को गले लगाता है.

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here