तमिलनाडु के 30 मछुआरों पर श्रीलंकाई लुटेरों द्वारा हमला किया गया, जिससे 17 मछुआरे घायल हो गए. लुटेरों ने धारदार हथियारों से हमला कर मछुआरों के जीपीएस डिवाइस, मछली पकड़ने के जाल और अन्य सामान लूटे, जिससे करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ. घटना भारतीय समुद्री सीमा में होने का दावा किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है.

तमिलनाडु के मछुआरों को एक बार फिर से तमिलनाडु के लुटेरों ने निशाना बनाया है. अक्कराईपेट्टई के सेरुधुर गांव के 30 मछुआरे अपने बोट से शुक्रवार को कोडियाकरई के दक्षिण-पूर्व क्षेत्र में मछली पकड़ने गए थे, जहां श्रीलंकाई लुटेरों ने उनपर हमला कर दिया. इस हमले में 17 मछुआरे घायल हो गए, जिनका इलाज सरकारी अस्पताल में किया जा रहा.
सेरुधुर गांव के 30 मछुआरे एक बोट से कोडियाकरई के दक्षिण-पूर्व क्षेत्र में मछली पकड़ने गए थे. तभी एक तेर रफ्तार वाली लुटेरों की बोट उनके सामने आ गई, जिनमें छह लोग सवार थे. इन लुटेरों के पास धारधार हथियार थे, जिससे वह मछुआरों पर हमला करना शुरू कर दिया.
श्रीलंकाई लुटेरों ने हमले के साथ लूटपाट भी की. लुटेरे जीपीएस डिवाइस, मछली पकड़ने के जाल और अन्य सामान को चुराकर ले गए. मछुआरों के अनुसार, उन्हें करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ है. मछुआरों का दावा है कि यह हमला भारक के समुद्री सीमा के अंदर ही हुआ है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है.
मीडिया से बाचतीच करते हुए एक मछुआरे ने राज्य और केंद्र सरकार से मांग की है कि इस पर जल्द से जल्द एक्शन लिया जाए. मछुआरे ने कहा कि फिलहाल हमले को लेकर एक दिन की हड़ताल रखी गई है. अगर ऐसे हमले होते रहते हैं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल किया जाएगा. बता दें, पिछले साल दिसंबर में ऐसे ही श्रीलंकाई लुटेरों की ओर से तमिलनाडु के मछुआरों पर रॉड से हमला कर लूटपाट की गई थी. इस हमले में भी कई मछुआरे घायल हो गए थे.


