अगर आप प्ले स्टोर पर सर्च करेंगे तो रैम क्लीनर (RAM cleaner) के नाम पर आपको कई ऐप्स मिल जाएंगी. ये एंड्रॉयड फोन पर सबसे ज्यादा डाउनलोड होने वाली ऐप्स में शामिल होती हैं. ये ऐप्स बेहतर परफॉर्मेंस, फ्री मेमोरी और लंबी बैटरी लाइफ का प्रॉमिस करती हैं, लेकिन असल में ऐसा कुछ नहीं होता है. एक समय फोन में इन ऐप्स की जरूरत होती थी, लेकिन अब इनकी कोई जरूरत नहीं है. अगर आपके फोन में रैम क्लीनर ऐप्स हैं तो इन्हें तुरंत रिमूव कर दें. ये फोन की स्पीड स्लो करने के साथ बैटरी लाइफ पर भी असर डालती हैं.
फोन को कैसे स्लो करती हैं रैम क्लीनर ऐप्स?रैम क्लीनर ऐप्स फोन में चल रही बैकग्राउंड ऐप्स को फोर्स क्लोज कर देती हैं. हर बार ऐसा करना ठीक नहीं होता है. दरअसल, जब आप एंड्रॉयड पर किसी ऐप को मिनिमाइज करते हैं तो इसका रैम यूसेज कम हो जाता है. अगली बार जब आप इसे ओपन करते हैं तो यह जल्दी लोड होती है और तुरंत ओपन हो जाती है. रैम क्लीनर ऐप इन ऐप्स को फोर्स क्लोज कर देती है. इसलिए जब आप दोबारा उस ऐप को ओपन करते हैं तो इसे पूरी तरह रीलोड होना पड़ता है. इससे रिसोर्सेस पर लोड बढ़ता है और फोन का सिस्टम स्लो हो जाता है.

बैटरी लाइफ पर भी पड़ता है असर
जब आप फोर्स क्लोज के बाद ऐप को दोबारा ओपन करते हैं तो यह सिर्फ फोन के सिस्टम पर असर नहीं डालती. इसे ओपन करने के लिए एक्स्ट्रा बैटरी पावर की भी जरूरत पड़ती है. ऐसे में अगर रैम क्लीनर बार-बार ओपन होने वाली ऐप्स जैसे फेसबुक, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम को फोर्स क्लोज करती रहेगी तो इन्हें दोबारा ओपन करने के लिए बैटरी को ज्यादा काम करना पड़ेगा. इससे बैटरी लाइफ कम होती है और आपके लिए चार्जिंग का झंझट बढ़ जाता है.
अब नहीं है रैम क्लीनर ऐप्स की जरूरत
ऐसा नहीं है कि एंड्रॉयड फोन्स को कभी भी रैम क्लीनर ऐप्स की जरूरत नहीं रही है. एंड्रॉयड के शुरुआती दिनों में स्मार्टफोन्स में लिमिटेड रैम मिलती थी. ऐप्स भी आज की तरह ऑप्टिमाइज्ड नहीं होती थी और बैकग्राउंड मैनेजमेंट भी आज की तुलना में कम इंटेलीजेंट था. इस कारण कुछ ऐप्स ओपन होते ही फोन स्लो हो जाता था. ऐसी स्थिति में रैम क्लीनर ऐप्स काम आती थीं, लेकिन आज ये सारी चीजें बदल चुकी हैं. अब फोन का सिस्टम अपने आप सब कुछ मैनेज कर लेता है, जिससे रैम क्लीनर ऐप्स की जरूरत खत्म हो गई है.


