BHAKTI : केदारनाथ यात्रा की तैयारियों को दिया जा रहा है अंतिम रूप, यात्रियों को अच्छे दर्शन कराना रहेगा लक्ष्य

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28 अप्रैल को बाबा केदार की डोली यात्रा अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओम्कारेश्वर मंदिर उखींमठ से केदारनाथ धाम के लिए रवाना होगी और 2 मई को भगवान केदारनाथ के कपाट आम भक्तों के दर्शनों के लिए खोल दिए जाएंगे.

केदारनाथ धाम की यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. 28 अप्रैल को बाबा केदार की डोली यात्रा अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओम्कारेश्वर मंदिर उखींमठ से केदारनाथ धाम के लिए रवाना होगी और 2 मई को भगवान केदारनाथ के कपाट आम भक्तों के दर्शनों के लिए खोल दिए जाएंगे. केदारनाथ धाम में इस बार यात्रियों को लंबी लाइन में न लगना पड़े, इसके लिए टोकन सिस्टम लागू किया जाएगा और यात्री टोकन में दिए गए समय के अनुसार ही दर्शन कर पाएंगे. साथ ही यात्रियों को ठंड से बचाने के लिए मंदिर में और पैदल यात्रा मार्ग पर रेन सेल्टर बनाए गये हैं.

यात्रियों को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए पिछली बार की तरह इस बार केदारनाथ, केदारनाथ बेस केम्प, लिंचोली, छोटी लिंचोली, रामबाड़ा, भीमबली, जंगल चट्टी, गौरीकुण्ड और सोनप्रयाग में स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं. यहां आवश्यक उपकरण, चिकित्सक, फार्मासिस्ट और आवश्यक दवाई हर समय उपलब्ध रहेगी. साथ ही सभी केंद्रों पर
ऑक्सीजन की भी सुविधा मिलेगी.

रुद्रप्रयाग से लेकर केदारनाथ धाम तक यात्रियों की समस्या सुनने और निराकरण के लिए प्रत्येक दो से तीन किमी. के दायरे में प्रशासन की और से सेक्टर और सब सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं. इसके अलावा, पीआरडी और होमगार्ड के जवान भी नियुक्त किए गए हैं.

उत्तराखंड के चार धामों में सबसे कठिन पैदल यात्रा केदारनाथ की है. केदारनाथ का आपदाओं से भी गहरा नाता रहा है. 16 और 17 जून 2013 की आपदा के बाद समय समय पर यहां आपदाएं आती रहती हैं. पिछले वर्ष 31 जुलाई को आयी आपदा में रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने त्वरित राहत व बचाव कार्य करते हुए हजारों यात्रियों की जान बचायी थी और आपदा में ध्वस्त यात्रा मार्ग को शीघ्र खोलकर एक माह से कम समय में यात्रा शुरू कर दी. आपदा और यात्रियों की परेशानी के मध्यनजर प्रशासन की और से पैदल यात्रा मार्ग पर जगह जगह और केदारनाथ धाम व मुख्य पड़ावों पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, डीडीआरएफ के अलावा पुलिस, पीआरडी व होमगार्ड के जवान तैनात किए गए हैं. जो हर समय यात्रियों की सुरक्षा में तैनात रहेंगे. पुलिस के लगभग 200, एसडीआरएफ के भी 150, इसी तरह एनडीआरएफ, होमगार्ड और पीआरडी के जवान यात्रियों की सुरक्षा में मौजूद रहेंगे.

रुद्रप्रयाग देश का पहला ऐसा जिला है, जिसने अपना स्वयं का इंट्रानेट स्थापित किया है. इसको डिस्टिक डिजास्टर रिलीफ इंट्रानेट नाम दिया गया है. इसमें धाम सहित यात्रा मार्ग पर किसी भी परिस्थिति में इंटरनेट चलता रहेगा. इस इंट्रानेट में वॉइस कालिंग की भी सुविधा दी गई है. इस इंट्रानेट से रुद्रप्रयाग के कई स्कूलों को भी जोड़ा गया है. यहां ऑनलाइन क्लासेस संचालित हो रही धाम सहित पैदल यात्रा मार्ग और मुख्य पड़ावों पर सुरक्षा के लिए प्रशासन ने आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एक यंत्र भी स्थापित किया है, जिसका बटन दबाने से आपदा कंट्रोल रूम को सूचित किया जा सकता है और फिर त्वरित रिस्पॉन्स मिलेगा.

केदारनाथ यात्रा मार्ग सहित पैदल मार्ग और केदारनाथ हाईवे पर जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. इन कैमरों के जरिए यात्रा पर पैनी नजर रहेगी. इसके अलावा, जिला मुख्यालय में यात्रा कंट्रोल रूम स्थापित है. जहां से यात्रा की हरेक गतिविधि का संचालन होगा. केदारनाथ धाम के लिए उड़ान भरने वाले सभी हेलीपैडों पर भी सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी रहेगी. वहीं, शनिवार को उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने केदारनाथ धाम पहुंचकर यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘यात्रा से पूर्व की सभी तैयारियां की गई हैं और जो तैयारियां छूट गई हैं उन्हें पूरा किया जा रहा है. सभी को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं. हमारा मकसद है कि यात्रियों को सुगमता से दर्शन हों.’

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