मृतक शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशन्या ने बात करते हुए कहा कि घटना के बाद हमने जम्मू-कश्मीर पुलिस से जाकर मदद मांगी थी लेकिन उन्होंने कोई मदद नहीं की, कहा कि हम इसमें कुछ नहीं कर सकते. 45 मिनट तक गोलियां चलती रहीं मगर कोई बचाने नहीं आया.

पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए कानपुर के शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशन्या ने आपबीती बयां की है. ऐशन्या ने ‘आजतक’ से बात करते हुए कहा कि घटना के बाद हमने जम्मू-कश्मीर पुलिस से जाकर मदद मांगी थी लेकिन उन्होंने कोई मदद नहीं की, कहा कि हम इसमें कुछ नहीं कर सकते. 45 मिनट तक गोलियां चलती रहीं मगर कोई बचाने नहीं आया.
बकौल ऐशन्या- ‘हमने घोड़े चलाने वालों से मदद मांगी कि हमारे बूढ़े माता-पिता को नीचे पहुंचा दो लेकिन उन्होंने कहा कि हम आपके घोड़े वाले नहीं है… और उन्होंने मदद नहीं की. अब जब हम वायरल वीडियो (जिप लाइन ऑपरेटर) देखते हैं, तो हमें स्थानीय लोगों की संलिप्तता पर संदेह होता है. हमारा घोड़े वाला भी हमसे बार-बार कुछ न कुछ पूछ रहा था.’
ऐशन्या कहती हैं कि हमारे परिवार में से हमारे जीजा आधे रास्ते से ऊपर नहीं जाना चाहते थे, लेकिन घोड़े वाला 10 मिनट तक अड़ा रहा कि आप ऊपर चलिए. हमने उसे पूरे पैसे भी देने की बात की लेकिन वह तब भी हमें फोर्स करता रहा. मुझे सिर्फ इतना मालूम है कि हम सिर्फ हिंदू होने की वजह से मारे गए, मुसलमान होते तो बच जाते.
मृतक शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशन्या आगे कहती हैं कि सरकार के इन कदमों से कुछ नहीं होगा, वह आतंकी अभी भी वहीं आसपास छिपे हुए हैं, क्यों हम उन्हें अभी तक नहीं ढूंढ़ पा रहे हैं. उन आतंकियों को उन्हीं के परिवार के सामने गोली मारनी चाहिए. ऐशन्या के मुताबिक, शुभम के माथे पर जैसे ही गोली मारी गई, एक सेकंड में उसका दिमाग बाहर आ गया. आखिरी कुछ सेकंड शुभम के साथ मिल जाते तो वो मुझे पक्का आई लव यू बोलता. लेकिन सबकुछ खत्म हो गया.
ऐशन्या ने कहा कि शुभम ने खुद को हिंदू बताकर गर्व से अपनी जान कुर्बान कर दी और कई लोगों की जान बचाई. आतंकियों द्वारा पहली गोली मेरे पति को मारी गई.
आपको बता दें कि कानपुर के 31 वर्षीय व्यवसायी शुभम ने 12 फरवरी को ऐशन्या से शादी की थी. वह उन 28 लोगों में शामिल थे, जिन्हें आतंकियों ने 22 अप्रैल को पहलगाम के पास बैसरन घाटी में धर्म पूछकर गोली मार दी. ऐशन्या की मांग है कि शुभम को शहीद का दर्जा दिया जाए.


