प्राचीन शिव मंदिर बिश्नाह से महामण्डलेश्वर अनूप गिरि महाराज ने बताया कि इस वर्ष होलिका दहन 13 मार्च को होगा जबकि रंगों का त्योहार होली 14 मार्च को मनाया जाएगा। 13 मार्च को रात्रि 11.31 बजे तक भद्रा रहने के कारण होलिका दहन रात्रि 11.31 बजे के बाद करना शास्त्र सम्मत होगा।

शादी के बाद पहली बार नई दुल्हन को होलिका दहन देखना अशुभ माना जाता है। इससे दाम्पत्य जीवन में परेशानी आती है और जीवन संकटों से घिर जाता है। सास-बहू को एक साथ होलिका दहन नहीं देखना चाहिए क्योंकि इससे आपसी प्रेम कम होता है और सम्बंधों में दरार आती है। गर्भवती महिलाओं को होलिका दहन नहीं देखना चाहिए न ही होलिका की परिक्रमा करनी चाहिए। इससे गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और जिन लोगों की इकलौती संतान हो उन्हें भी होलिका दहन नहीं देखना चाहिए।
होलिका में आहुति देने के फल
होलिका दहन के समय चन्दन की लकड़ी डालने से घर के कलह-क्लेश खत्म होते हैं। घर में सुख समृद्धि आती है। उपले डालने से घर की नेगेटिविटी दूर होती है। कपूर, लौंग, पान का पत्ता डालने से घर का बीमार व्यक्ति रोग मुक्त होता है। गेंहू की बाली डालने से घर में अनाज की कमी नहीं होती है। हवन सामग्री डालने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। अविवाहितों का विवाह योग बनना शुरू हो जाता है। काले तिल डालने से नजर दोष, वास्तु दोष, ग्रह दोष आदि का निवारण होता है और सूखा नारियल डालने से घर में लक्ष्मी जी की कृपा होती है। पैसे की कमी, गरीबी दूर होती है।

