जम्मू-कश्मीर में कैंसर रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर साल अनुमानित 12,000 से 13,000 नए मामले सामने आ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के कुल मामलों की संख्या पिछले 5 वर्षों में 3468 तक पहुंच गई है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 2019 में जम्मू-कश्मीर में 12,396 नए कैंसर रोगी पंजीकृत हुए। पिछले कुछ वर्षों में इस संख्या में धीरे-धीरे वृद्धि देखी गई है।

आंकड़ों के अनुसार 2020 में 12,726 मामले, 2021 में 13,060, 2022 में 13,395 और 2023 और 2024 में 14,000 से अधिक मामले सामने आए हैं। इनमें से लगभग 20 प्रतिशत रोगी अब प्रारंभिक चरण में उपचार के लिए आ रहे हैं, जिससे उनके प्रभावी उपचार की संभावना बढ़ रही है। 2024 में जम्मू-कश्मीर के प्रमुख अस्पतालों में हजारों नए पंजीकरण दर्ज किए गए।
हर वर्ष हो रहे हजारों नए पंजीकरण
वर्ष 2024 में जम्मू और कश्मीर के प्रमुख अस्पतालों में हजारों नए पंजीकरण दर्ज किए गए। शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में 5,200 मामले दर्ज किए गए, जबकि जी.एम.सी. जम्मू में 1,700, जी.एम.सी. अनंतनाग में 500, जी.एम.सी. बारामूला में 100 और जी.एम.सी. कठुआ में 80 मामले दर्ज किए गए। इसके अतिरिक्त लगभग 500 रोगियों ने जी.एम.सी. राजौरी, डोडा और अन्य अस्पतालों में उपचार की मांग की।
चिकित्सक, डॉक्टर और सर्जन इस बढ़ौतरी का श्रेय कई कारणों को दे रहे हैं, जिसमें बढ़ती जागरूकता और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं। पहले उपचार मुख्य रूप से जी.एम.सी. जम्मू, जी.एम.सी. श्रीनगर और स्कीम्स सौरा में उपलब्ध था। अब राजौरी, कठुआ, डोडा, उधमपुर, बारामूला, अनंतनाग और हंदवाड़ा में नए मेडिकल कॉलेज अब विशेष ऑन्कोलॉजी सेवाएं प्रदान करते हैं, जिससे प्रारंभिक पहचान और उपचार अधिक सुलभ हो गया है।
5 प्रकार का कैंसर कर रहा प्रभावित
रिपोर्ट से पता चलता है कि कश्मीर में 5 सबसे आम कैंसर हैं जिनमें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर (Gastrointestinal Cancer), फेफड़ों का कैंसर (Lung cancer), स्तन कैंसर (Breast Cancer), कोलन कैंसर Colon Cancer) और डिम्बग्रंथि का कैंसर (Ovarian cancer) है। जम्मू के कैंसर संस्थान में पिछले साल 5,964 कैंसर रोगियों ने संस्थान के इनडोर विभाग में इलाज करवाया। औसतन हर महीने 400 से 500 मरीज आते हैं, जिनमें से 5 हजार के करीब मरीज कीमोथेरेपी करवाते हैं और 500 के करीब पी.ई.टी. स्कैन करवाते हैं। संस्थान ने पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर और महिलाओं में स्तन कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी है। रोगियों की जागरूकता में सुधार हुआ है, जिससे पहले निदान और बेहतर उपचार परिणाम भी सामने आए हैं।


