उत्तर प्रदेश सरकार ने ओला-उबर जैसी एप आधारित टैक्सी सेवाओं के लिए नई नियमावली का ड्राफ्ट जारी किया है. अब रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस, चालक प्रशिक्षण और पुलिस सत्यापन अनिवार्य होगा. उत्तर प्रदेश सरकार ने ओला, उबर जैसी एप आधारित टैक्सी सेवाओं को नियमों के दायरे में लाने की तैयारी कर ली है. सरकार ने साफ कर दिया है कि अब बिना पंजीकरण और लाइसेंस के कोई भी एप आधारित टैक्सी सेवा संचालित नहीं हो सकेगी. इसके लिए सरकार ने मोटरयान समूह व वितरण सेवा प्रदाता नियमावली-2026 को मंजूरी दी है.
सरकार का कहना है कि इन नए नियमों का मकसद यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना, टैक्सी सेवाओं को व्यवस्थित करना और चालक व यात्रियों दोनों के हितों की रक्षा करना है. राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली-1998 में संशोधन करते हुए नई नियमावली का ड्राफ्ट अधिसूचित कर दिया है. इस ड्राफ्ट पर आम लोगों, टैक्सी कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं.
सरकार का कहना है कि सभी सुझावों पर विचार करने के बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा. इसके बाद प्रदेश में चलने वाली सभी एप आधारित टैक्सी सेवाओं को इन्हीं नियमों के तहत काम करना होगा. नई व्यवस्था के अनुसार कोई भी टैक्सी सेवा बिना रजिस्ट्रेशन, वाहन फिटनेस और चालक के दस्तावेजों के नहीं चल सकेगी. इसके साथ ही चालक का मेडिकल परीक्षण और पुलिस सत्यापन भी अनिवार्य होगा.

अगर कोई सेवा प्रदाता या चालक इन नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. सरकार का मानना है कि इससे अवैध रूप से चल रही टैक्सी सेवाओं पर रोक लगेगी और यात्रियों को सुरक्षित सफर मिलेगा. नई नियमावली में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए खास प्रावधान किया गया है. अगर कोई चालक बुकिंग स्वीकार करने के बाद बिना वैध कारण के उसे रद्द कर देता है तो उस पर किराए का 10 प्रतिशत या अधिकतम 100 रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा.
साथ ही अगली बुकिंग में यात्री को किराए में रियायत भी दी जाएगी. सरकार का मानना है कि इससे बार-बार बुकिंग रद्द करने की समस्या कम होगी. सरकार ने टैक्सी चालकों के लिए 40 घंटे का प्रशिक्षण कार्यक्रम भी अनिवार्य कर दिया है. इस प्रशिक्षण में एप का सही उपयोग, मोटरयान नियम, सुरक्षित ड्राइविंग, यात्रियों से व्यवहार और सड़क दुर्घटना की स्थिति में आपात सहायता जैसे विषय शामिल होंगे. अगर किसी चालक की रेटिंग पांच प्रतिशत से कम हो जाती है तो उसे हर तीन महीने में फिर से प्रशिक्षण लेना होगा.
नई नीति के अनुसार टैक्सी चालक बनने के लिए कम से कम दो साल का ड्राइविंग अनुभव होना जरूरी होगा. इसके अलावा पिछले तीन वर्षों में किसी भी अपराध में दोषी पाए गए व्यक्ति को चालक बनने की अनुमति नहीं मिलेगी. सभी चालकों का पुलिस द्वारा चरित्र सत्यापन भी कराया जाएगा. सरकार ने चालक और यात्रियों दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई प्रावधान किए हैं. हर चालक के पास कम से कम पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा होना अनिवार्य होगा.
महिलाओं की सुरक्षा के लिए एप में महिला चालक का विकल्प भी दिया जाएगा. यात्रा के दौरान यात्री अपनी लाइव लोकेशन परिवार या परिचितों के साथ साझा कर सकेंगे और सभी वाहनों में ट्रैकिंग सिस्टम सक्रिय रहेगा. यदि चालक तय रास्ते से हटता है तो तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट मिल जाएगा. नई नीति में प्रदूषण को कम करने पर भी खास जोर दिया गया है. एनसीआर क्षेत्र में अब केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक ऑटो रिक्शा ही जोड़े जा सकेंगे. चार पहिया हल्के वाणिज्यिक वाहन, हल्के मालवाहक वाहन और दोपहिया श्रेणी में पेट्रोल या डीजल से चलने वाले नए वाहनों को शामिल नहीं किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे प्रदूषण पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी और साफ-सुथरा परिवहन तंत्र विकसित होगा.


