NATIONAL : PWD अधिकारी ने सर्विस बुक ढूंढने के लिए दिया मंदिर में चावल चढ़ाने का आदेश, विभाग ने थमा दिया नोटिस

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PWD के अधीक्षण अभियंता आशुतोष कुमार ने कार्यालय के सभी कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने घरों से दो मुट्ठी चावल लाकर मंदिर में चढ़ाएं. उनका दावा है कि इस धार्मिक प्रक्रिया से यह पता चल जाएगा कि दस्तावेज़ किसने चुराया है.

उत्तराखंड के चंपावत जिले के लोहाघाट में एक अनोखा मामला सामने आया है. लोक निर्माण विभाग (PWD) में तैनात सहायक अभियंता जयप्रकाश की सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक) गायब होने पर विभाग ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने सभी को हैरानी में डाल दिया है.PWD के अधीक्षण अभियंता आशुतोष कुमार ने कार्यालय के सभी कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने घरों से दो मुट्ठी चावल लाकर मंदिर में चढ़ाएं. उनका दावा है कि इस धार्मिक प्रक्रिया से यह पता चल जाएगा कि दस्तावेज़ किसने चुराया है.

”खंड में कार्यरत अधिकारियों/ कर्मचारियों को सूचित किया जाता है कि खंड में कार्यरत इंजीनियर जय प्रकाश, अपर सहायक अभियंता की सेवा पुस्तिका अधिष्ठान सहायक प्रथम की अलमारी से खो गई है. कार्यालय में काफी खोजबीन करने के उपरांत भी सेवा पुस्तिका नहीं मिल पा रही है, जो काफी खेद का विषय है. जिस कारण अधिष्ठान सहायक एवं इंजीनियर जय प्रकाश मानसिक रूप से काफी चिंतित हैं. सेवा पुस्तिका ना मिलने की दशा में यह विचार आया कि क्यों ना कार्यालय के समस्त अधिकारियों / कर्मचारियों से दैवीय आस्था के आधार पर अपने-अपने घरों से 2 मुट्ठी चावल मांग कर किसी मंदिर में डाल दिया जाए. चावल मंदिर में डालने पर वही देवता न्याय करेंगे. अत: सभी से अनुरोध है कि कल 17 मई को सभी कार्यालय में उपस्थित होने पर 2 मुट्ठी चावल जमा कर दें ताकि समस्या का समाधान हो सके.”

जैसे ही यह आदेश सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, पूरे जिले में हंगामा मच गया. आदेश की कॉपी तेजी से इंटरनेट पर फैलने लगी. मामले ने तूल पकड़ा तो विभाग के प्रमुख अभियंता ने इसका संज्ञान लिया और अधीक्षण अभियंता को नोटिस जारी किया.प्रमुख अभियंता ने अधीक्षण अभियंता से तीन दिनों के भीतर इस आदेश के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है. साथ ही चेतावनी दी है कि अगर समय पर जवाब नहीं दिया गया तो उत्तराखंड सरकारी सेवक आचरण नियमावली 2002 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

इस घटना ने सरकारी कार्यालयों में अंधविश्वास और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सरकारी दस्तावेज़ गायब होने की स्थिति में इस तरह के अजीबोगरीब आदेश ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है.

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