शास्त्रीनगर निवासी सेवानिवृत्त जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपनी बेटी प्रणिता वशिष्ठ की तलाक के बाद घर वापसी को एक नई सोच के साथ पेश किया. उन्होंने अपनी बेटी का जोरदार स्वागत किया है.
उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में एक परिवार की अनोखी पहल इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. यहां रिटायर्ड जज ने अपनी बेटी के तलाक के बाद घर वापसी को एक नई सोच के साथ पेश किया. उन्होंने तलाक के बाद अपनी बेटी भव्य स्वागत किया है. इस दौरान मोहल्ले और आसपास के लोगों ने उनकी बेटी का उत्साह बढ़ाया है. यह अनोखी पहल अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है.
आपको बता दें कि आमतौर पर जहां तलाक को दुख और सामाजिक दबाव से जोड़ा जाता है, वहीं मेरठ के इस परिवार ने इसे सम्मान और हौसले के रूप में देखा है. जानकारी के मुताबिक, शास्त्रीनगर निवासी सेवानिवृत्त जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपनी बेटी प्रणिता वशिष्ठ की तलाक के बाद घर वापसी को एक नई सोच के साथ पेश किया.

कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब प्रणिता वशिष्ठ घर लौटीं, तो उनका स्वागत ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ किया गया. इस दौरान परिवार के लोगों ने सभी ने आई लव डॉटर के नाम से टीशर्ट पहन रखी थी. परिवार और आसपास के लोगों ने भी इस मौके पर उनका उत्साह बढ़ाया. इस पहल का उद्देश्य यह संदेश देना था कि बेटी का आत्मसम्मान सबसे महत्वपूर्ण है.
पति से तलाक के बाद प्रणिता वशिष्ठ ने कहा कि यह उनके जीवन की नई शुरुआत है और उन्होंने अपने सम्मान के लिए यह फैसला लिया. उनकी मां ने कहा कि बेटी कभी बोझ नहीं होती और मायका हमेशा उसका अपना घर रहता है. सेवानिवृत्त जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने साफ कहा कि उन्होंने अपनी बेटी को सिर झुकाकर नहीं, बल्कि सम्मान के साथ घर वापस लाया है. उनका मानना है कि समाज को बेटियों के प्रति अपनी सोच बदलनी चाहिए और उन्हें हर परिस्थिति में समर्थन देना चाहिए. इस मौके पर परिवार की एक चचेरी बहन, जो यूके से आई थीं, भी मौजूद रहीं. उन्होंने इस पहल को प्रेरणादायक बताया है. यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि तलाक अंत नहीं, बल्कि सम्मान के साथ नई जिंदगी की शुरुआत भी हो सकता है.


