दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली सरकार मिलकर ऐसी योजना पर काम कर रहे हैं जिसके तहत 6,476 से अधिक लोगों को अलग-अलग इलाकों में पक्के फ्लैट दिए जाएंगे। दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए नए साल की शुरुआत बड़ी राहत लेकर आ सकती है. दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली सरकार मिलकर ऐसी योजना पर काम कर रहे हैं जिसके तहत 6,476 से अधिक लोगों को अलग-अलग इलाकों में पक्के फ्लैट दिए जाएंगे। इन आवासों को रहने योग्य बनाने के लिए मरम्मत, नवीनीकरण और बुनियादी सुविधाओं के विकास का काम तेज़ी से चल रहा है।

जानकारी के मुताबिक,दिल्ली के सुल्तानपुरी, द्वारका, सावदा घेवरा, भलस्वा, बक्करवाला और कंझावला जैसे क्षेत्रों में आवासीय फ्लैटों को बेहतर बनाने का काम तेज कर दिया गया है। डीडीए इन इलाकों में बने फ्लैटों की मरम्मत, सफाई और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुटा है ताकि जल्द से जल्द लोगों को यहां बसाया जा सके। अधिकारियों के मुताबिक आने वाले महीनों में हजारों परिवारों को इन कॉलोनियों में शिफ्ट किया जाएगा, जिससे झुग्गियों में रहने वाले लोगों को स्थायी आवास मिल सके।
दिल्ली सरकार ने सावदा घेवरा क्षेत्र में खाली पड़े करीब 2,500 फ्लैटों की मरम्मत के लिए 27.50 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. फंड जारी होने के बाद यहां मरम्मत और सुधार का काम शुरू कर दिया गया है. इसके साथ ही दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) के तहत ईडब्ल्यूएस आवासीय कॉलोनियों में भी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजना पर काम चल रहा है.सावदा घेवरा के अलावा सुल्तानपुरी, द्वारका और भलस्वा में बने फ्लैटों की मरम्मत और नवीनीकरण की परियोजनाओं को भी मंजूरी मिल चुकी है. इन इलाकों में भी काम पूरा होने के बाद पात्र परिवारों को फ्लैटों का आवंटन शुरू किया जाएगा.
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है. पक्के घर मिलने से न केवल लोगों का जीवन स्तर बेहतर होगा बल्कि उन्हें बेहतर नागरिक सुविधाएं भी मिल सकेंगी.डीडीए के अनुसार, जिन कॉलोनियों में इन फ्लैटों का निर्माण या नवीनीकरण हो रहा है, वहां रहने वालों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. इनमें डिस्पेंसरी या अस्पताल, लोकल शॉपिंग सेंटर, सर्विस मार्केट, मिल्क बूथ और ऑटो-टैक्सी स्टैंड जैसी सुविधाएं शामिल होंगी, ताकि लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूर न जाना पड़े.


