ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खोलने के समझौते के दावे को खारिज कर दिया है। तेहरान ने कहा कि कोई समझौता नहीं हुआ है, हालांकि ओमान के साथ वार्ता अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
ईरान पर संभावित सैन्य हमले फिलहाल टालने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के बाद ईरानी मीडिया ने उन पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कई ईरानी मीडिया संस्थानों ने ट्रंप की आलोचना करते हुए उनके फैसले को अमेरिका की पीछे हटने की रणनीति बताया।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि ईरान और पश्चिम एशिया के कुछ अन्य देशों के अनुरोध के बाद उन्होंने सैन्य कार्रवाई फिलहाल रोकने का फैसला किया। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौते के कुछ प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत, पूरी तरह और बिना शर्त खोलना भी शामिल है।

हालांकि, ईरान के सरकारी मीडिया में ऐसी किसी अपील या होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर रुख में बदलाव की कोई पुष्टि नहीं की गई। इसके बजाय ईरानी मीडिया ने ट्रंप के बयान को अमेरिका के पीछे हटने के रूप में पेश किया। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए लिखा ‘मूर्ख ट्रंप की अब हवा निकल गई है।’ वहीं, अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने ट्रंप के इस दावे को खारिज किया कि तेहरान ने हमले रोकने का अनुरोध किया था। एजेंसी ने कहा कि ट्रंप एक बार फिर अपनी खोखली धमकियों से पीछे हट गए और दुनिया के सामने इसे अपने फैसले के तौर पर पेश किया।
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से बातचीत में आशंका जताई कि यदि अमेरिका ने ईरान पर नया हमला किया और उसके जवाब में तेहरान ने खाड़ी देशों को निशाना बनाया, तो इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। ट्रंप ने भी स्वीकार किया कि सऊदी अरब की इस चिंता ने उनके फैसले को प्रभावित किया और इसी वजह से उन्होंने फिलहाल सैन्य कार्रवाई टालकर कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य युद्ध से पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर ओमान के साथ चर्चा जारी है, लेकिन फिलहाल जलमार्ग को दोबारा खोलने पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। वहीं, ईरान के रक्षा मंत्री ने कहा कि देश अमेरिकी खतरों को लेकर सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच बातचीत अगली दोपहर फिर शुरू हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वार्ता में कौन-कौन शामिल होगा। क्षेत्रीय मध्यस्थता से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, प्रस्ताव में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता बहाल करने, होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही फिर शुरू करने और क्षेत्र में हमलों पर रोक लगाने की बात शामिल है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान पर नए सैन्य हमले का आदेश फिलहाल रोकने का फैसला कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे खाड़ी देशों के नेताओं की सलाह के बाद लिया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना रविवार को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला करने की तैयारी में थी, लेकिन कूटनीति को मौका देने के लिए इस योजना को स्थगित कर दिया गया।
ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से पूछा था कि सैन्य कार्रवाई की जाए या नहीं। उनके अनुसार, खाड़ी देशों के नेताओं ने हमले के बजाय समझौते को प्राथमिकता देने की बात कही, क्योंकि सैन्य कार्रवाई के परिणामों का अनुमान लगाना मुश्किल होता है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि ओमान के साथ ऐसा समुद्री मार्ग तय करने पर सहमति बनने की उम्मीद है, जो दोनों देशों के हितों और सुरक्षा का सम्मान करे। हालांकि उन्होंने साफ किया कि ओमान के साथ समझौते का मतलब यह नहीं होगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खोल दिया जाएगा।

