अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका-ईरान युद्ध रोकने का समझौता लगभग तय हो चुका है, लेकिन इसी बीच उन्होंने ईरान के नक्शे पर अमेरिकी झंडा चढ़ाकर एक पोस्ट किया, जिसन…और पढ़ें
अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से चल रही तनातनी के बीच एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप ने शांति समझौते का दावा किया, तो दूसरी तरफ ऐसा पोस्ट कर दिया जिसने पूरी कूटनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म कराने के लिए एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग काफी हद तक तय हो चुका है. ट्रंप ने दावा किया कि इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल सकता है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी अंतिम मुहर बाकी है. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका, ईरान और ‘कुछ अन्य देशों’ के बीच समझौते के आखिरी पहलुओं पर चर्चा चल रही है और जल्द घोषणा हो सकती है.
इस दावे से पहले ट्रंप ने कतर, सऊदी अरब, यूएई, पाकिस्तान, जॉर्डन, मिस्र, तुर्किए और बहरीन के नेताओं से फोन पर बातचीत की. इसके बाद उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी अलग से बात की. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत में यह फार्मूला सामने आया है कि युद्ध जैसी स्थिति खत्म करने की कोशिश होगी, होर्मुज जलडमरूमध्य धीरे-धीरे खोला जा सकता है, ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी कम हो सकती है और विदेशी बैंकों में फंसी कुछ ईरानी संपत्तियां रिलीज हो सकती हैं. हालांकि सबसे मुश्किल मुद्दे ईरान का परमाणु कार्यक्रम, एनरिच्ड यूरेनियम और होर्मुज पर नियंत्रण अभी भी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं.

शांति समझौते की बात करते-करते ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान के नक्शे पर अमेरिकी झंडा चढ़ी तस्वीर पोस्ट कर दी, जिसके साथ सवाल लिखा- यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ मिडिल ईस्ट? यानी क्या अमेरिका अब मध्य पूर्व का नया मालिक बनने जा रहा है? इस पोस्ट ने तुरंत नया विवाद खड़ा कर दिया क्योंकि बातचीत के बीच इसे ईरान के लिए सीधी राजनीतिक चेतावनी माना गया. लेकिन ईरान ने भी पलटवार कर दिया.
ट्रंप के इस पोस्ट पर ईरान ने भी तीखा पलटवार किया. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने रोमन साम्राज्य का जिक्र करते हुए कहा, ‘रोम खुद को दुनिया का केंद्र मानता था, लेकिन ईरानियों ने उसका भ्रम तोड़ दिया था.’ उन्होंने कहा कि जब रोमन सम्राट फारस के खिलाफ बढ़े थे, तब उन्हें फारस की शर्तों पर समझौता करना पड़ा था. यानी तेहरान ने साफ संकेत दिया कि ईरान किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है.

