ग्रेग स्ट्यूबी के EXILE एक्ट के तहत प्रस्ताव दिया गया है कि इमिग्रेशन एंड नेशनेलिटी एक्ट के सेक्शन 214(g)(1)(A) में संशोधन करके H1B वीजा प्रोग्राम को बंद कर दिया जाएगा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सांसद ने ऐसा बिल पेश किया है, जो भारतीयों के लिए बड़ा झटका है. ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के एक सांसद ग्रेग स्ट्यूबी ने सोमवार (9 फरवरी, 2026) को विदेशी कामगारों को मिलने वाली H1B वीजा की सुविधा को खत्म करने के लिए EXILE एक्ट विधेयक पेश किया है.
ग्रेग स्ट्यूबी ने कहा कि H1B वीजा योजना अमेरिकी नागरिकों के बजाय विदेशी कामगारों को ज्यादा प्राथमिकता देती है, जिसकी वजह से स्थानीय लोगों को नुकसान होता है. एंडिंग एक्सप्लॉटिव इंपोर्टेड लेबर एग्जंप्शन (EXILE) एक्ट नाम के इस प्रस्तावित विधेयक में इमिग्रेशन और राष्ट्रीयता अधिनियम में बदलाव का प्रस्ताव दिया गया है.
ग्रेग स्ट्यूबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया और लिखा, ‘आज मैं H1B वीजा प्रोग्राम खत्म करने के लिए विधेयक पेश कर रहा हूं. लंबे समय से इस H1B वीजा प्रोग्राम के चलते अमेरिकी कामगारों को लूटा जा रहा है. कंपनियां सस्ते विदेश कामगारों को बुलाकर अपने मुनाफे के लिए सिस्टम का दुरुपयोग करती रही हैं, जिसकी वजह से वेतन में कमी आई है और अमेरिकी अच्छी सैलरी वाली नौकरियों से वंचित रह गए.’

ग्रेग स्ट्यूबी के ऑफिस की तरफ से भी इसे लेकर एक प्रेस रिलीज जारी की गई है, जिसमें कहा गया कि EXILE एक्ट का मकसद उन चिंताओं को दूर करना है कि अमेरिकी नागरिकों की भलाई और समृद्धि के बजाय विदेशी कामगारों को प्राथमिकता देना हमारे मूल्यों और राष्ट्रीय हितों को कमजोर करता है. हमारे कर्मचारियों और युवाओं को H1B वीजा प्रोग्राम की वजह से लगातार बेघर किया जा रहा है.
प्रेस रिलीज के अनुसार, EXILE एक्ट के तहत इमिग्रेशन एंड नेशनेलिटी एक्ट के सेक्शन 214(g)(1)(A) में संशोधन करके सास 2027 से हर वित्तीय वर्ष में H1B वीजा की संख्या शून्य कर दी जाएगी. प्रेस रिलीज के अनुसार H1B वीजा प्रोग्राम के तहत 5000 हजार विदेशी डॉक्टर्स को बुलाया गया, जिसकी वजह से 10 हजार से ज्यादा अमेरिकी फिजिशियन रेजीडेंसी प्रोग्राम में प्रवेश से वंचित रह गए. इसी तरह पिछले साल 16 हजार से ज्यादा माइक्रोसॉफ्ट अमेरिकी कर्मचारियों को विस्थापित होना पड़ा क्योंकि 9 हजार विदेशी कामगारों को नौकरियां दी गईं. उन्होंने कहा कि डिजनी ने साल 2015 में विदेशी कामगारों को रखने के लिए 250 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था.
ग्रेग स्ट्यूबी का यह विधेयक भारतीयों के लिए सबसे बड़ा झटका है क्योंकि भारत से बड़ी संख्या में H1B वीजा प्रोग्राम के तहत कामगार अमेरिका जाते हैं. H1B वीजा अमेरिका का एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियों को इंजीनियरिंग, मेडिकल और फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने की अनुमति मिलती है.
H1B वीजा होल्डर्स में 70 प्रतिशत भातीय हैं, जिनमें युवा कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है, इसलिए यह विधेयक भारतीयों के लिए सबसे बड़ा झटका है. हालांकि, विधेयक अभी सिर्फ अमेरिकी संसद के लोअर हाउस में पेश हुआ है. अभी इस पर न तो बहस हुई और न ही मतदान. अभी विधेयक को H1B वीजा प्रोग्राम से संबंधित हाउस कमेटी को भेजा जाएगा और फिर वह फैसला करेगी कि इस पर ऑफिशियल डिस्कशन होना है या नहीं. अगर प्रतिनिधिसभा में यह पास हो जाता है तो फिर विधेयक को अमेरिकी कांग्रेस के अपर हाउस सीनेट में भेजा जाएगा.

