BNP ने भारत के साथ बेहतर संबंध बनाने की इच्छा जताई है. पार्टी ने कहा कि वह आपसी सम्मान और एक-दूसरे की चिंताओं को समझते हुए भारत के साथ मिलकर काम करना चाहती है.बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की तैयारी शुरू हो गई है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की नई चुनी गई सरकार मंगलवार को शपथ लेने जा रही है. पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान के नेतृत्व में बनी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से पहले अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने 13 देशों के नेताओं को समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया है.
रिपोर्ट के मुताबिक जिन देशों को आमंत्रित किया गया है उनमें भारत, चीन, सऊदी अरब, तुर्किये, पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, मलेशिया, ब्रुनेई, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान शामिल हैं. शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रीय संसद के साउथ प्लाज़ा में होगा. हाल ही में हुए 2026 के आम चुनाव में BNP को बड़ी जीत मिली थी.BNP नेता एएनएम एहसानुल हक मिलन ने शनिवार को उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस समारोह में बुलाया जाएगा. ढाका में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया के सभी नेताओं को न्योता दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘यह सामान्य शिष्टाचार है. आयोजक यह काम करेंगे. हमें उम्मीद है कि पूरी दुनिया हमारे साथ होगी.’

BNP ने अपनी जीत पर बधाई संदेश देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद भी किया. पार्टी ने एक्स पर लिखा, ‘माननीय नरेंद्र मोदी जी, आपके संदेश के लिए बहुत धन्यवाद. राष्ट्रीय चुनाव में BNP की निर्णायक जीत में तारिक रहमान के नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए हम आभारी हैं.’BNP ने भारत के साथ बेहतर संबंध बनाने की इच्छा जताई है. पार्टी ने कहा कि वह आपसी सम्मान और एक-दूसरे की चिंताओं को समझते हुए भारत के साथ मिलकर काम करना चाहती है. बयान में कहा गया कि दोनों देश क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास के लिए साथ आगे बढ़ सकते हैं.
12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव खास माने जा रहे हैं. यह चुनाव 2024 के बड़े प्रदर्शनों के बाद हुआ, जिनके कारण लंबे समय तक सत्ता में रहीं शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा था. 300 सीटों वाली संसद में सरकार बनाने के लिए 151 सीटों की जरूरत होती है और BNP ने इससे काफी ज्यादा सीटें जीत लीं. इसके बाद तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद का दावेदार माना जा रहा है.इस चुनाव में इस्लामी जमात-ए-इस्लामी गठबंधन मुख्य विपक्ष के रूप में उभरा है. मतदान प्रतिशत करीब 59 प्रतिशत रहा. इसके साथ ही शासन सुधार से जुड़ा एक संवैधानिक जनमत संग्रह भी पास हो गया.

