WORLD : बांग्लादेश में मिलकर लड़ीं हसीना और जिया, ‘बेगमों’ की दोस्ती में कैसे आई दरार; जानें पूरी कहानी

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1991 में बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं खालिदा जिया का मंगलवार (30 दिसंबर) को लंबी बीमारी के बाद 80 साल की उम्र में निधन हो गया. बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) की प्रमुख खालिदा जिया उन दो महिलाओं में एक थीं, जिन्होंने 4 दशकों से बांग्लादेशी राजनीति पर अपना दबदबा बनाए रखा. दूसरी महिला शेख हसीना हैं, जो 5 बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं. अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक प्रदर्शनों के बीच उन्हें सत्ता छोड़कर भागना पड़ा और तबसे वो भारत में रह रही हैं.

अवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना ने भी खालिदा जिया के निधन पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने एक पोस्ट में कहा, ‘मैं बीएनपी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के निधन पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं. बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में और लोकतंत्र की स्थापना के संघर्ष में भूमिका के लिए उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा. मैं उनके बेटे तारिक रहमान और उनके शोक संतप्त परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करती हूं.’

1980 के दशक से ही बांग्लादेश की राजनीति जिया और हसीना के इर्द-गिर्द घूमती रही है. दोनों की राजनीतिक अदावत जगजाहिर है, जिसे बेगमों की लड़ाई कहा जाता है. ये शक्तिशाली महिला के लिए इस्तेमाल होने वाला सम्मानजनक नाम है. दोनों की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने बांग्लादेश में सड़क पर हिंसा को बढ़ावा दिया, शासन व्यवस्था को पंगु बना दिया और लोकतांत्रिक राजनीति को भी अंदर से खोखला कर दिया.

दोनों बेगमों के बीच दुश्मनी की जड़ें 1975 तक जाती हैं, जब बांग्लादेश के संस्थापक पिता और अवामी लीग के प्रमुख शेख मुजीबुर रहमान और उनके परिवार के सदस्यों की तख्तापलट में हत्या कर दी गई थी. इसके तीन महीने बाद जिया के पति जियाउर रहमान (जो उस समय सेना के उप प्रमुख थे) ने प्रभावी रूप से देश पर कंट्रोल कर लिया और 1977 में बांग्लादेश के राष्ट्रपति बन गए.

1981 में जियाउर रहमान की हत्या के बाद जिया और हसीना ने मिलकर लोकतंत्र के लिए जन आंदोलन खड़ा किया और 1990 में सैन्य शासक हुसैन मोहम्मद इरशाद को सत्ता से बेदखल कर दिया. जिया और हसीना की दोस्ती अधिक समय तक नहीं चली. 1991 में बांग्लादेश में पहले स्वतंत्र चुनाव हुए. जिया ने देश की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी, जमात-ए-इस्लामी का समर्थन प्राप्त कर हसीना पर अप्रत्याशित जीत हासिल की. इस कारण खालिदा बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं.

1996 के आम चुनाव में शेख हसीना ने जिया को परास्त किया, लेकिन 5 साल बाद फिर जिया भारी बहुमत से सत्ता में लौटीं. 2004 में हसीना की रैली पर ग्रेनेड से हमला हुआ, लेकिन हसीना बच गईं. इस हमले के लिए जिया की सरकार को दोषी ठहराया गया.

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