चीन की मदद से बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की तैयारी में हूती विद्रोही? सऊदी अरब और इस्राइल पर बढ़ सकती है चुनौती

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यमन के हूती विद्रोही उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। हथियारों की आपूर्ति पर नजर रखने वाली ब्रिटेन स्थित संस्था Conflict Armament Research (CAR) की एक रिपोर्ट के अनुसार, हूती समूह चीन से प्राप्त विशेष पुर्जों की मदद से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली विकसित करने की कोशिश कर रहा है। इस घटनाक्रम से पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

ईरान की मिसाइल तकनीक से जुड़ाव

रिपोर्ट के मुताबिक, हूती विद्रोही ईरान की ‘खैबर शिकन’ मिसाइल प्रणाली से मिलती-जुलती मिसाइल बनाने के लिए आवश्यक पुर्जे जुटा रहे हैं। इस मिसाइल की बताई गई मारक दूरी लगभग 2,000 किलोमीटर है। यदि हूती समूह ऐसी क्षमता विकसित करने में सफल होता है, तो सऊदी अरब और इस्राइल सहित क्षेत्र के कई देश इसकी संभावित जद में आ सकते हैं।

चीन से आए पुर्जों पर उठे सवाल

CAR की रिपोर्ट में यमन के अधिकारियों द्वारा चीन से आए संदिग्ध माल की दो खेपों को रोके जाने से जुड़ी जानकारी का उल्लेख है। इन खेपों में ऐसे विशेष उपकरण और पुर्जे होने की बात कही गई है, जिनका इस्तेमाल मिसाइल निर्माण में किया जा सकता है।

हालांकि, चीन की ओर से कहा गया है कि वह सैन्य उत्पादों और दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं के निर्यात पर अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करता है। रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि चीन की सरकार ने सीधे तौर पर हूती विद्रोहियों को मिसाइल बनाने में सहायता देने का निर्देश दिया था।

सऊदी अरब और इस्राइल के लिए क्या हैं मायने?

हूती विद्रोही पहले भी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन कर चुके हैं। उन्नत मिसाइलों के निर्माण की कोशिश सफल होने पर उनकी लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता बढ़ सकती है। इससे सऊदी अरब और इस्राइल की सुरक्षा व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी पुर्जों की आपूर्ति और स्थानीय स्तर पर हथियारों को जोड़ने की क्षमता हूती समूह की सैन्य रणनीति में बदलाव का संकेत देती है। हालांकि, नई मिसाइल प्रणाली के निर्माण, उसकी वास्तविक क्षमता और बड़े पैमाने पर उत्पादन की स्थिति को लेकर अभी कई सवाल बने हुए हैं।

पश्चिम एशिया में बढ़ सकती है सैन्य चिंता

हूती विद्रोहियों की मिसाइल संबंधी महत्वाकांक्षाएं ऐसे समय सामने आई हैं, जब यमन और सऊदी अरब के बीच तनाव तथा क्षेत्रीय संघर्ष पहले से चिंता का विषय हैं। आने वाले समय में हथियारों की आपूर्ति पर निगरानी, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था इस मुद्दे के महत्वपूर्ण पहलू होंगे।

रिपोर्ट हूती विद्रोहियों की बढ़ती हथियार निर्माण क्षमता और चीन से जुड़े आपूर्ति नेटवर्क पर सवाल उठाती है। हालांकि, मिसाइल निर्माण की वास्तविक प्रगति और इसके संभावित प्रभावों का आकलन करने के लिए आगे की जांच और स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होगी।

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