122 करोड़ घोटाले को लेकर बड़ा खुलासा-RBI ने बैंक को किया बैन

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मुंबई के न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सख्त प्रतिबंध लगा दिए हैं। बैंक में 122 करोड़ रुपये के घोटाले और गबन का मामला सामने आने के बाद, आरबीआई ने इस पर छह महीने का बैन लगाया है। इस फैसले से बैंक के ग्राहकों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि अब खाताधारक अपनी जमा राशि भी निकाल नहीं सकते। बैंक की वित्तीय स्थिति को देखते हुए, आरबीआई ने यह कदम उठाया है और मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) इस घोटाले की गहराई से जांच कर रही है। बैंक के सीओओ द्वारा दादर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद मामला सामने आया।

वहीं अब इस न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में बड़ा मोड़ आया है। आरोपी हितेश मेहता ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों के सामने कबूल किया है कि उसने घोटाले के 122 करोड़ रुपये किन लोगों को दिए थे। इस घोटाले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंप दी गई है।

कैसे हुआ घोटाला?
  • घोटाले की शुरुआत कोविड काल में हुई: हितेश मेहता ने बताया कि उसने यह रकम निकालना 2020 में शुरू किया था।
  • बैंक का अकाउंट हेड था आरोपी: हितेश के पास बैंक की नकदी, जीएसटी, टीडीएस और पूरे अकाउंट्स की जिम्मेदारी थी।
  • तिजोरी से गायब हुआ पैसा:
    • प्रभादेवी शाखा: 112 करोड़ रुपये
    • गोरेगांव शाखा: 10 करोड़ रुपये

बैंक पर बैन क्यों लगाया गया?
मुंबई के न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर हितेश प्रवीनचंद मेहता पर बैंक के ट्रेजरी से 122 करोड़ रुपये गबन करने का आरोप है।

– आरोपों के मुताबिक, यह धोखाधड़ी 2020 से 2025 के बीच की गई।
– दादर और गोरेगांव शाखाओं से बैंक के फंड को निकालकर हेरफेर किया गया।
– दादर पुलिस ने बीएनएस अधिनियम की धारा 316(5) और 61(2) के तहत FIR दर्ज की है।
– आर्थिक अपराध शाखा (EOW) इस मामले की आगे की जांच कर रही है।

RBI ने क्या कहा?
-बैंक की खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह बैन लगाया गया है।
– बैंक अब बिना RBI की अनुमति के कोई लोन, एडवांस या निवेश नहीं कर सकता।
– खाताधारक अपने जमा पैसे भी नहीं निकाल सकते।
– हालांकि, बैंक कर्मचारियों के वेतन, किराया और बिजली बिल जैसी जरूरी चीजों पर खर्च की अनुमति दी गई है।

न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक का नेटवर्क
बैंक की कुल 26 ब्रांच मुंबई, ठाणे और पालघर में हैं, जबकि 2 शाखाएं सूरत में हैं। इस बैंक में लाखों खाताधारक हैं, जो अब अपनी जमा राशि को लेकर चिंतित हैं।

ग्राहकों के लिए क्या विकल्प हैं?
– RBI और EOW की जांच के नतीजों पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।
– ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे बैंक की आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करें।
– अगर बैंक का लाइसेंस रद्द होता है, तो DICGC (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation) के तहत खाताधारकों को 5 लाख रुपये तक की बीमा सुरक्षा मिल सकती है।

यह घोटाला बैंकिंग सेक्टर में बड़ा झटका माना जा रहा है, जिससे हजारों ग्राहकों की गाढ़ी कमाई फंस गई है। अब सबकी नजरें इस पर हैं कि आर्थिक अपराध शाखा की जांच में क्या सामने आता है और आरबीआई आगे क्या कदम उठाता है?

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