BUSINESS : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में लगातार उछाल, 110 डॉलर के करीब पहुंचा ब्रेंट क्रूड

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव को खत्म करने के लिए ईरान द्वारा नए प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल कच्चे तेल की कीमत में कोई राहत के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। ब्रेंट क्रूड आज 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी आज 97 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के पार जा पहुंचा। हालांकि बाद में कच्चे तेल की कीमत में मामूली गिरावट भी दर्ज की गई।

आज ब्रेंट क्रूड तेजी दिखाते हुए 108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। थोड़ी देर में ही यह उछल कर 109.46 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। कुछ देर बाद इसकी चाल में गिरावट भी आई, जिसके कारण ब्रेंट लुढ़क कर 107.98 तक भी गिर गया। इसके बाद इसके भाव में दोबारा तेजी का रुख बनने लगा। भारतीय समय के अनुसार सुबह नौ बजे तक का कारोबार होने के बाद ब्रेंट क्रूड 0.90 प्रतिशत की तेजी के साथ 109.20 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

इसी तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड ने आज 96 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर 96.62 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। ओपनिंग के तुरंत बाद ये गिर कर थोड़ी देर के लिए 96.24 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आया, लेकिन इसके बाद इसकी चाल में तेजी आ गई। कुछ देर में ही यह उछल कर 97.55 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में इसके भाव में मामूली गिरावट भी दर्ज की गई। भारतीय समय के अनुसार सुबह नौ बजे डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.95 प्रतिशत की उछाल के साथ 97.29 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली दूसरे दौर की शांति वार्ता के टल जाने और होर्मुज स्ट्रेट के मसले पर दोनों देशों के आमने सामने आ जाने की वजह से इस प्रमुख समुद्री रास्ते के जरिये होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई अभी भी लगभग ठप पड़ी हुई है। ईरान ने हालांकि शांति वार्ता को दोबारा शुरू करने के लिए नया प्रस्ताव दिया है और अमेरिका ने भी उस प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही है। इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमत में कोई गिरावट का रुख बनता हुआ नजर नहीं आ रहा है।

आपको बता दें कि फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया में शुरू हुई इस जंग ने दुनिया के पेट्रोलियम बेस्ड एनर्जी मार्केट को हिला कर रख दिया है। इस जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट के लगभग बंद हो जाने से फारस की खाड़ी से होने वाली ऑयल और गैस की सप्लाई में जबरदस्त गिरावट आई है। अमेरीका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए यहां नाकेबंदी कर रखी है। दूसरी ओर, ईरान अपनी ओर से होर्मुज को इंटरनेशनल ट्रैफिक के लिए बंद रखने की कोशिश में जुटा हुआ है।

पूरी दुनिया में होने वाली कच्चे तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा हॉर्मुज स्ट्रेट के जरिये होता है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण इसके लगभग ठप पड़ जाने से दुनिया भर में उथल-पुथल मच गई है और कच्चे तेल की कीमत में जबरदस्त उछाल आ गया। खासकर, डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत 70 प्रतिशत तक बढ़ गई।

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बाच सीजफायर होने के बावजूद जानकारों का मानना है कि ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरी तरह से काम शुरू कर पाना मुश्किल है। जंग की वजह ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर का फिजिकल सिस्टम जल्दी ठीक नहीं होने वाला है। खासकर, जंग के कारण बंद हो गए तेल कुओं को फिर से शुरू करने, क्रू और जहाजों को दूसरी जगह भेजने और रिफाइनरी इन्वेंट्री को फिर से बनाने में काफी लंबा समय लगेगा।

टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत का लंबे समय तक बना रहना भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट को बढ़ा सकता है। इसके साथ ही इसकी वजह से फिस्कल डेफिसिट टारगेट भी हिट हो सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत भारतीय मुद्रा को कमजोर कर सकती है, महंगाई को बढ़ा सकती है और फॉरेन कैपिटल आउटफ्लो (विदेशी पूंजी की निकासी) को और बढ़ा सकती है। इसी तरह अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव से स्टॉक मार्केट में अनिश्चितता आ सकती है, क्योंकि सरकार को सब्सिडी, इंटरेस्ट रेट और रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट पर पड़ने वाले असर के बारे में कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं।

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