BUSINESS : गड़बड़ाएगा किचिन का बजट, और महंगा हो सकता है खाद्य तेल

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वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ने, घरेलू स्तर पर रुपए की कमजोरी और इंपोर्ट की लागत बढ़ने की वजह से खाने का तेल महंगा होने की आशंका जताई जा रही है. पश्चिम एशिया संकट की वजह से खाद्य तेल कंपनियों के लिए इंपोर्ट महंगा हो गया है, ऊपर से कमजोर रुपए ने उनके मार्जिन घटा दिए हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में उनकी तरफ से दाम में बढ़ोतरी हो सकती हैं. 

मार्च में बढ़ी थीं कीमतें 

इससे पहले तेल कंपनियों ने अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न संकट के चलते मार्च में खाद्य तेल की थोक कीमतों में 3-5 फीसद की बढ़ोतरी की थी. इससे पाम तेल की खुदरा कीमतों में 10-12 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी. 

महंगाई का दूसरा दौर 

खाद्य तेलों में महंगाई का दूसरा दौर शुरू होने वाला है. इसकी दो प्रमुख वजह हैं। पहली वजह है पश्चिम एशिया और लाल सागर दोनों जगह तनाव के कारण जहाज भाड़ा महंगे हो गए हैं. दूसरा कारण है, समुद्री परिवहन में बाधा से आपूर्ति श्रृंखला में अड़चन. अधिकांश देश खाद्य तेल सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए भंडार बढ़ा रहे हैं, जिससे कीमतों में उछाल आ रहा है. 

कितनी बढ़ सकती हैं कीमतें 

खाद्य तेल उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, तेल की कीमतों में 5-6 फीसदी की संभावित बढ़ोतरी हो सकती है. इससे पहले मार्च में एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस, इमामी एग्रोटेक और पतंजलि फूड्स जैसे प्रमुख खिलाड़ियों ने भी ऐसी ही बढ़ोतरी की थी. 

कच्चे तेल से है सीधा संबंध

पश्चिम एशिया में युद्ध ने खाद्य तेल निर्माताओं की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं क्योंकि अस्थिरता के समय खाद्य तेल की कीमतें अक्सर कच्चे तेल की कीमतों के नक्शेकदम पर चलती हैं. कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ है जिसकी वजह से कई देश पाम तेल का इस्तेमाल बायो डीजल बनाने में कर रहे हैं. इस वजह से पाम तेल की आपूर्ति कम हुई है जबकि मांग ऊंची है. इस वजह से पाम तेल की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है. सूरजमुखी तेल और सोयाबीन तेल की महंगाई का कारण ऊंची ढुलाई लागत है. बीते गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतें 125 डॉलर/बैरल की ओर बढ़ गईं. अमेरिका द्वारा ईरान की नाकाबंदी जारी रखने की खबरों और शिपिंग के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान की आशंकाओं ने आपूर्ति संबंधी चिंताओं को और गहरा कर दिया है. 

बढ़ रही है लैंडेड लागत 

भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरतों का लगभग 57 फीसदी आयात करता है. पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल भारत की कुल 25-26 मिलियन टन खपत का मुख्य हिस्सा हैं. पिछले साल की तुलना में इन तेलों की लैंडेड कॉस्ट (भारत पहुंचने तक की लागत) में भारी बढ़ोतरी हुई है. पाम ऑयल की लागत 14 फीसदी बढ़कर 1,270 डॉलर प्रति टन हो गई है. सोयाबीन तेल की लागत 20 फीसद बढ़कर 1,335 डॉलर प्रति टन हो गई. सूरजमुखी तेल की लैडेंड लागत 17 फीसदी  बढ़कर 1,425 डॉलर प्रति टन हो गई. 

बढ़ रही है लैंडेड लागत 

भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरतों का लगभग 57 फीसदी आयात करता है. पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल भारत की कुल 25-26 मिलियन टन खपत का मुख्य हिस्सा हैं. पिछले साल की तुलना में इन तेलों की लैंडेड कॉस्ट (भारत पहुंचने तक की लागत) में भारी बढ़ोतरी हुई है. पाम ऑयल की लागत 14 फीसदी बढ़कर 1,270 डॉलर प्रति टन हो गई है. सोयाबीन तेल की लागत 20 फीसद बढ़कर 1,335 डॉलर प्रति टन हो गई. सूरजमुखी तेल की लैडेंड लागत 17 फीसदी  बढ़कर 1,425 डॉलर प्रति टन हो गई.

आम आदमी पर असर

उद्योग के जानकारों का कहना है कि यह बढ़ोतरी सभी प्रमुख ब्रांडों और श्रेणियों में लागू होने की संभावना है. हालांकि, कंपनियां क्षेत्रीय मांग और प्रतिस्पर्धा के आधार पर इसके समय और मात्रा का फैसला करेंगी. यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब उपभोक्ता पहले से ही बढ़ी हुई खाद्य कीमतों से जूझ रहे हैं, जिससे समग्र मुद्रास्फीति पर प्रभाव पड़ने की चिंता बढ़ गई है. विश्लेषकों का मानना है कि जब तक तिलहन की कीमतों में बड़ी कमी नहीं आती या वैश्विक माल ढुलाई दरें कम नहीं होतीं, तब तक कीमतों पर यह दबाव बना रहेगा. फिलहाल, उद्योग जगत लागत में हो रही इस बढ़त से जूझ रहा है और आने वाले हफ्तों में इसका बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ना तय लग रहा है.

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