Business : ये 5 कारण. जिनका शेयर बाजार पर अगले हफ्ते दिखेगा असर, अमेरिका से भी है कनेक्शन

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सोमवार 6 अप्रैल, 2026 से शुरू हो रहे हफ्ते में निफ्टी और सेंसेक्स की दिशा 5 बड़े कारकों से तय होंगे. इनमें RBI की मौद्रिक नीति समिति की बैठक और रेपो रेट पर फैसला भी शामिल है. भारतीय शेयर बाजार के लिए 6 अप्रैल, 2026 से शुरू हो रहा हफ्ता काफी खास होने वाला है. इस हफ्ते कई बड़े घटनाक्रमों का असर शेयर बाजार पर देखने को मिल सकता है. हम आज आपको इस खबर के जरिए 5 ऐसे ही कारक बताने जा रहे हैं, जो अगले हफ्ते शेयर बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं.

भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की वित्त वर्ष 2026–27 (FY27) के लिए बैठकें सोमवार, 6 अप्रैल से बुधवार, 8 अप्रैल तक चलेंगी. रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च SVP अजीत मिश्रा ने कहा, “भारतीय रिजर्व बैंक का मॉनेटरी पॉलिसी फैसला एक अहम घटना होगी, जिसमें शामिल लोग ब्याज दरों और महंगाई के अनुमान पर मिलने वाले संकेतों पर बारीकी से नजर रखेंगे.”

बाजार को उम्मीद है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए रिजर्व बैंक रेपो रेट को स्थिर रखेगा या उसमें मामूली बदलाव की संभावना है. इसके अलावा, देश के GDP ग्रोथ और महंगाई पर गवर्नर की टिप्पणी का भी निवेशकों के सेंटिमेंट्स पर असर देखने को मिल सकता है. अमेरिका और ईरान में जंग का छठवां हफ्ता चल रहा है. तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता जा रहा है. खबरों के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के दो विमानों को मार गिराया है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर तेहरान किसी समझौते पर राजी नहीं होता या होर्मुज के रास्ते को फिर से नहीं खोलता, तो वह तबाही मचा देंगे.

दोनों देशों के बीच अगर तनाव और बढ़ता है, तो विदेशी निवेशक (FIIs) भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने या डॉलर जैसे सुरक्षित निवेश में लगाएंगे. इससे शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ेगी और कंपनियों व निवेशकों को तगड़ा नुकसान होगा. होमुर्ज स्ट्रेट की नाकाबंदी और ईरान व लाल सागर में संकट के कारण तेल की कीमतों में तेजी का रुख बना हुआ है. शनिवार को ब्रेंट क्रूड का बेंचमार्क 109 डॉलर तक पहुंच गया. जंग शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास ट्रेड कर रहा था, लेकिन 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद से इसकी कीमतों में 50 परसेंट से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.

चूंकि भारत अपनी जरूरत का 80 परसेंट तेल आयात करता है. ऐसे में कच्चा तेल महंगा होगा, तो आयात पर भी खर्च बढ़ेगा. इससे रुपया कमजोर होगा और पेंट, टायर व लुब्रिकेंट्स जैसी कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ेगा. कंपनियां इसी हफ्ते से चौथी तिमाही के नतीजों का ऐलान करने लगी हैं. ऐसे में कंपनियों के नतीजे और उनके कमाए गए मुनाफे का असर उनके शेयरों पर दिखेगा.

सोमवार से शुरू हो रहे हफ्ते में शेयर बाजार पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयान और वहां महंगाई के आंकड़ों का असर देखने को मिलेगा. अगर अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा आते हैं, तो फेड रिजर्व ब्याज दरें बढ़ा सकता है. ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने से इसका नकारात्मक असर ग्लोबल शेयर बाजारों पर पड़ता है. इसी तरह से अगर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो भी भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली देखने को मिल सकती है.

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