बच्चे जब खर्राटे लेते हैं तो माता-पिता को यह आम चिंता का विषय लगता है. जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. हालांकि, लगातार खर्राटे लेना कई सारी स्वास्थ्य समस्याओं के संकेत हो सकते हैं. जिस पर ध्यान देना काफी ज्यादा जरूरी है. जबकि कभी-कभार खर्राटे लेना चिंता का विषय नहीं हो सकता है. लेकिन बार-बार खर्राटे लेना नींद और सांस से जुड़ी (SDB) से जुड़ी दिक्कतों का संकेत हो सकता है. यह एक ऐसी बीमारी है जो पूरी दुनिया के बच्चों का एक अच्छा खासा हिस्से को प्रभावित किए हुए है. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक बच्चों के खर्राटों से जुड़ी दिक्कतों को लोग अक्सर हल्के में लेते हैं लेकिन कई बार वह भूल जाते हैं कि उनके बच्चों को खास देखभाल की जरूरत है.

बच्चे में खर्राटों की परेशानी को न करें नजरअंदाज
ये समस्याएं अक्सर खर्राटों का कारण बनती हैं. जिन्हें माता-पिता को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. बच्चों में खर्राटे सिर्फ़ शोर की समस्या नहीं है. यह एलर्जी, स्लीप एपनिया या सांस लेने में तकलीफ़ का संकेत भी हो सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह के बिना ओवर-द-काउंटर नेज़ल स्प्रे का इस्तेमाल करने के खिलाफ़ चेतावनी दी जाती है.कोई भी नेज़ल स्प्रे या घोल आंख मूंदकर न दें. अच्छे तरीके से अगर इस बीमारी का इलाज किया जाए तो इस समस्या का समाधान कर सकते हैं. माता-पिता को अपने बच्चे के स्वास्थ्य की रक्षा करने में मदद करने के लिए कारणों, जोखिमों और हेल्थ एक्सपर्ट से इस विषय में खास बातचीत करने की जरूरत है.
बचपन में खर्राटों के पीछे का सबसे बड़ा कारण
नाक बंद होना: मौसमी एलर्जी, सर्दी या वायरल इंफेक्शन के कारण नाक के रास्ते में इंफेक्शन हो जाता है. जिसके कारण सांस लेने में दिक्कत होती है.
बढ़े हुए एडेनोइड्स/टॉन्सिल: सांस लेने वाली नली सूज सकते हैं, जिससे नींद के दौरान सांस की नली में दिक्कत होती है.
विचलित सेप्टम या पॉलीप्स: नाक की हड्डियों का टेढ़ा होना या नाक से सांस लेने में दिक्कत होना.
मोटापा: गर्दन के आसपास अतिरिक्त वजन वायुमार्ग पर दबाव डाल सकता है.
कब माता-पिता को परेशान होना चाहिए?
सभी खर्राटे खतरनाक नहीं होते. लेकिन इन चेतावनी संकेतों पर ध्यान दें.
जोर से, बार-बार खर्राटे लेना, ज़्यादातर रातों में होता है.
सांस लेने में रुकावट: स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है.
मुंह से सांस लेना या बेचैन नींद: बच्चा अक्सर करवटें बदलता/बदलता है.


