ENTERTAINMENT : दो बार प्यार में हुआ फेल, बिना घरवालों को बताए की थी शादी, कपूर खानदान के बेटे की ऐसी रही लव स्टोरी

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कपूर खानदान के बेटे शम्मी कपूर इंडियन सिनेमा के एक दिग्गज एक्टर में से एक थे. 1950 के दशक से लेकर 1970 के दशक तक, वह एक ऐसे सुपरस्टार थे जिनका कोई मुकाबला नहीं था. उनकी एक्टिंग स्टाइल और जिस तरह से वह अपने किरदारों में जोश और ऊर्जा भरते थे, वह आज भी अनोखा माना जाता है.

शम्मी कपूर की स्टारडम की वजह से उनकी लव स्टोरीज हमेशा सुर्खियों में रहती थीं. उन्हें फिल्म इंडस्ट्री की कई मश्हूर एक्ट्रेस के साथ जोड़ा गया. शम्मी कपूर के फिल्मी करियर और उनकी फिल्मों के बारे में बहुत कुछ जाना जाता है, लेकिन उनकी लव लाइफ के बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते. आइए जानें शम्मी कपूर की कुछ खास प्रेम कहानियां.

कहा जाता है कि शम्मी कपूर बचपन से ही नूतन के प्यार में थे. नूतन और शम्मी साथ बड़े हुए क्योंकि वे पड़ोसी थे. दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब थे और उनके परिवारों का अच्छा रिश्ता होने की वजह से उनका ये नजदीकी रिश्ता और मजबूत हो गया.

जब वे दोनों बड़े हुए तो, शम्मी और नूतन ने शादी करने का फैसला लिया. लेकिन फिर, नूतन की मां शोभना सामर्थ अपने पति से अलग हो गईं और उन्होंने अपने मित्र एक्टर मोतीलाल पर भरोसा किया, जिनसे वह राय और सुझाव लेती थीं. मोतीलाल ने शम्मी और नूतन की शादी को अस्वीकार कर दिया. इसके बाद शोभना ने नूतन को पढ़ाई के लिए स्विट्जरलैंड भेज दिया, और इस तरह शम्मी कपूर और नूतन की बचपन की प्रेम कहानी खत्म हो गई.

शम्मी और नादिया की लव स्टोरी
1953 में शम्मी कपूर अपने भाइयों के साथ श्रीलंका गए थे, जहां उन्होंने होटल में कैबरे प्रदर्शन देखा और वहां उनकी मुलाकात नादिया गमाल से हुई. शम्मी उनके प्यार में पागल हो गए और 22 साल की उम्र में उन्होंने 17 साल की नादिया को शादी का प्रस्ताव रखा. नादिया ने कहा कि उन्हें 5 साल इंतजार करना होगा और अगर प्यार मजबूत रहा, तो वह भविष्य में शादी करेंगी.

टूर के बाद नादिया मुंबई और फिर मिस्र चली गईं, जबकि शम्मी फिल्मों और एक्टिंग में व्यस्त हो गए. उस समय इंटरनेट और मेल की सुविधा न होने के कारण दोनों का संपर्क धीरे-धीरे टूट गया और वे अलग हो गए.

शम्मी कपूर और गीता बाली की मुलाकात 1955 में फिल्म ‘रंगीन रातें’ के सेट पर हुई, जिसकी शूटिंग कुमाऊं में हो रही थी. कुछ ही हफ्तों में दोनों एक-दूसरे के प्यार में पड़ गए. मुंबई लौटने के बाद दोनों अपने प्यार का इजहार करने से हिचकिचा रहे थे.
दो बार प्यार में हुआ फेल, बिना घरवालों को बताए की थी शादी, कपूर खानदान के बेटे की ऐसी रही लव स्टोरी

23 अगस्त 1955 को गीता बाली ने अचानक शादी का प्रस्ताव रखा और अगले ही दिन, 24 अगस्त 1955 को बांगंगा मंदिर, मुंबई में शम्मी कपूर और गीता बाली की शादी हुई. शादी में पुजारी हरि वालिया एकमात्र गवाह थे. शम्मी ने एक बार बताया था, “गीता ने अपनी पर्स से लिपस्टिक निकाली और मुझसे कहा कि इसे उनके मस्तक पर लगाऊं.”

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