
हाल ही में किए गए जल गुणवत्ता जांच से पता चला है कि गंदेरबल और श्रीनगर में विभिन्न झरनों से एकत्र किए गए 40 में से 37 सैंपलों में हानिकारक बैक्टीरिया पाए गए हैं। इसलिए उक्त झरने इंसानों के पीने लायक नहीं रहे। इन झरनों का पानी पीने से जान का खतरा भी हो सकता है।

जानकारी के अनुसार गंदेरबल और ग्रामीण श्रीनगर के लिए जल शक्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer) द्वारा जारी एक सार्वजनिक नोटिस में निवासियों से झरने के पानी का सेवन न करने और इसके बजाय नल के पानी पर निर्भर रहने का आग्रह किया गया है।
जानकारी के अनुसार विभाग ने गंदेरबल जिले में बड़े पैमाने पर सैंपलिंग और जांच अभियान चलाया, जिसमें अधिकांश जांच सैंपलों में पूर्ण रूप से हानिकारक बैक्टीरिया होने की पुष्टि हुई है। नोटिस में कहा गया है कि इसलिए ये झरने इंसानों के इस्तेमाल के लिए नहीं रहे।
गंदेरबल और ग्रामीण श्रीनगर के गांव जहां झरने के पानी का आमतौर पर पीने के लिए उपयोग किया जाता है, वहां के निवासियों को अगली सूचना तक इसके पानी को पीने से परहेज करने की सलाह दी गई है। विभाग ने यह भी सिफारिश की है कि यदि जरूरी हो तो स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए झरने के पानी को लंबे समय तक उबालने के बाद ही पीना चाहिए।
जल शक्ति विभाग पी.एच.ई. गंदेरबल के कार्यकारी अभियंता एर सैमुल्लाह बेग ने आम जनता को विभिन्न क्षेत्रों में झरनों के पानी का उपयोग न करने की चेतावनी जारी की है क्योंकि इक्ट्ठे किए गए सैंपलों में हानिकारक बैक्टीरिया होने की पुष्टि हुई है।
बेग के अनुसार पी.एच.ई. विभाग ने विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न झरनों से पानी के नमूने एकत्र किए हैं और परिणामों से पता चला है कि पानी दूषित है। बेग ने कहा कि वह आम जनता से अपील करते हैं कि इस पानी का उपयोग पीने या किसी अन्य उद्देश्य के लिए न करें क्योंकि इससे जान को गंभीर खतरा भी हो सकता है।

