किरायेदार शशांक गुप्ता ने कहा कि हादसे के समय सम्मु अंसारी परिवार के आठ सदस्य बाहर थे. अगर वे अंदर होते, तो यह त्रासदी और भी भयावह हो सकती थी. अधिकारियों ने बताया कि पांच घंटे तक चला बचाव अभियान मंगलवार तड़के समाप्त हुआ.
इंदौर के रानीपुरा क्षेत्र में सोमवार रात एक तीन मंजिला जर्जर इमारत के ढहने से दो लोगों की मौत हो गई और 12 अन्य घायल हो गए. एक किरायेदार ने दावा किया कि मकान मालिक को एक हफ्ते पहले ही इमारत की खराब स्थिति के बारे में चेतावनी दी गई थी. अधिकारियों के अनुसार, इस हादसे में मलबे से 12 घायल लोगों को निकाला गया. यह इमारत घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित थी, जिसमें सामने की तीन दुकानें किराए पर दी गई थीं, जबकि मकान मालिक सम्मु अंसारी का 22 सदस्यों वाला परिवार बाकी हिस्से में रहता था.

इनमें से एक दुकान का उपयोग इलेक्ट्रिकल सामान के व्यापारी शशांक गुप्ता ने गोदाम के रूप में किया था. शशांक ने बताया, ‘आठ दिन पहले, इमारत की हालत देखकर मैंने सम्मु अंसारी को दो-तीन बार चेतावनी दी थी कि यह किसी भी वक्त ढह सकती है. मेरे गोदाम का शटर अपने आप खिसक गया था, जिसने मुझे सतर्क किया.’ उन्होंने बताया कि मकान मालिक ने उनकी चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया, जिसके बाद उन्होंने कहीं और दो गोदाम किराए पर लिए और अपने 70 प्रतिशत सामान को वहां स्थानांतरित कर दिया.
उन्होंने कहा, ‘अगर सोमवार को बारिश नहीं हुई होती, तो मैं बाकी सामान भी हटा लेता.’ शशांक गुप्ता ने ने बताया कि जवाहर मार्ग से बहने वाला बारिश का पानी बेसमेंट में घुस गया और चूहों द्वारा खोदे गए गड्ढों ने इमारत की नींव को समय के साथ कमजोर कर दिया था. पास में रहने वाले मोहम्मद अमिल अंसारी ने भी कहा कि किरायेदारों ने मकान मालिक को खतरे की चेतावनी दी थी.
शशांक गुप्ता ने कहा, ‘हादसे के समय सम्मु अंसारी परिवार के आठ सदस्य बाहर थे. अगर वे अंदर होते, तो यह त्रासदी और भी भयावह हो सकती थी.’ अधिकारियों ने बताया कि पांच घंटे तक चला बचाव अभियान मंगलवार तड़के समाप्त हुआ. घायलों को शहर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मृतकों की पहचान आलिफा (20) और फहीमुद्दीन अंसारी उर्फ फहीम (40) के रूप में हुई है.


