सोमवार (3 अगस्त) को तीन राज्यों में विधानसभा उपचुनावों के नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे. इन तीनों सीटों पर दिग्गजों की साख दांव पर लगी है. इनमें सबसे चर्चित जो सीट हैं, वो बिहार की बांकीपुर और एमपी की दतिया सीटें. जिनपर नजर टिकी हुई हैं. तीसरी सीट गुजरात के मंजलपुर की है. इन तीनों उपचुनावों में 30 जुलाई को वोटिंग हुई थी.
बांकीपुर-दतिया दोनों ही बीजेपी के लिए प्रतिष्ठित सीट मानी जाती रही है. ऐसे में बीजेपी के लिए यह प्रतिष्ठा की लड़ाई है. दोनों पारंपरिक रूप से पार्टी के गढ़ माने जाते रहे हैं. बांकीपुर का प्रतिनिधित्व बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन करते थे. जबकि दतिया एमपी के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है.
दतिया की सीट
पहले दतिया विधानसभा उपचुनाव की बात कर लेते हैं. इस सीट पर नरोत्तम मिश्रा को उपचुनाव का टिकट नहीं मिला है. 2023 के चुनाव कांग्रेस के राजेंद्र भारती से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. भारती को अप्रैल में दिल्ली की एक अदालत ने धोखाधड़ी के मामले में तीन साल की सजा सुनाई है. इसकी वजह से उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई थी. टिकट न मिलने के बाद हिंसा भड़क गई.
मिश्रा के समर्थकों में झड़प भी देखने को मिली. बाद में पूर्व मंत्री भावुक भी हुए. साथ ही बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को पूरा समर्थन देने का वादा भी किया. इस सीट पर फिलहाल मुख्य मुकाबला तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच माना जा रहा है. सुबह 8 बजे से काउंटिंग शुरू होगी.

बांकीपुर की लड़ाई
चुनाव आयोग की मानें तो बिहार के बांकीपुर-182 सीट पर हुए उपचुनाव में गुरुवार को एवरेज वोटिंग हुई. इसमें कुल 34.16 प्रतिशत वोटिंग हुई है. नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद से यह सीट खाली हो गई थी. उन्हें पार्टी ने राज्यसभा भेजा है. बीजेपी ने जहां नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा है. वहीं, जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत इस मुकाबले में कूद पड़े हैं. बीजेपी के लिए यह चुनाव आसान हो सकता था, लेकिन प्रशांत किशोर की सीधी एंट्री ने इसे दिलचस्प बना दिया है. किशोर ने दावा किया है कि वे चुनाव में बीजेपी को हरा देंगे.
मंजलपुर उपचुनाव
मंजलपुर, यह गुजरात की एक विधानसभा सीट है. यहां 30 जुलाई को उपचुनाव हुए हैं. इसमें लगभग 37.5 प्रतिशत मतदान हुआ है. यह उपचुनाव बीजेपी के सीनियर एमएलए और पूर्व मंत्री योगेश पटेल के निधन के कारण हुआ था. वे दशकों से इस सीट पर विधायक रहे थे. उपचुनाव बीजेपी के सतीश गोविंदभाई पटेल और कांग्रेस के भीखाभाई रबारी के बीच सीधा मुकाबला है.


