कमजोर मानसून के चलते मुंबई में जल संकट गहराता जा रहा है। शहर को पानी उपलब्ध कराने वाले बांधों में जलस्तर तेजी से घटने के कारण सिर्फ 10.35 प्रतिशत जल भंडारण शेष रह गया है। बीएमसी ने जल संकट को देखते हुए कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं।
मानसून में देरी के चलते मुंबई में पानी की संकट गहरा गया है। आर्थिक राजधानी के जलाशयों के जलस्तर घटकर 10.35 प्रतिशत रह जाने के मद्देनजर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने औद्योगिक, व्यावसायिक और खेल प्रतिष्ठानों को होने वाली जलापूर्ति में 20 प्रतिशत कटौती करने की घोषणा की।बीएमसी ने निर्माण कार्य परियोजनाओं और स्विमिंग पूलों के लिए पानी के कनेक्शन भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं। जलापूर्ति में कटौती संबंधी यह निर्णय बुधवार से प्रभावी होगा।
बीएमसी ने पहले ही 15 मई 2026 से शहर में 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू कर दी थी। अब पेयजल संरक्षण के लिए 17 जून से अतिरिक्त प्रतिबंध लागू किए जा रहे हैं। इसके तहत नए निर्माण कार्यों के लिए पानी के नए कनेक्शन की मंजूरी पर रोक लगा दी गई है, जबकि मौजूदा निर्माण स्थलों और सभी स्विमिंग पूलों की जल आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद की जाएगी। औद्योगिक, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और स्पोर्ट्स क्लबों को मिलने वाले पानी में 20 प्रतिशत की कटौती की गई है। बिसलेरी जैसी कंपनियों के बोतलबंद पानी और एरेटेड ड्रिंक यानी कोकाकोला, पेप्सी, स्प्राइट, फैंटा बनाने वाले प्लांट्स को केवल कर्मचारियों की पीने की जरूरत के हिसाब से सीमित पानी दिया जाएगा। बीएमसी ने चेतावनी दी है कि पेयजल का दुरुपयोग या बर्बादी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, नागरिकों से पानी बचाने में सहयोग की अपील भी की है।
मुंबई को प्रतिदिन लगभग 4,664 मिलियन लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जबकि वर्तमान औसत आपूर्ति 4,100 मिलियन लीटर प्रति दिन है। 16 जून तक, महानगर को पानी की आपूर्ति करने वाली झीलों में संयुक्त जल भंडार कुल क्षमता का केवल 10.35% था, जो पर्याप्त वर्षा होने तक जल आपूर्ति बनाए रखने में एक चुनौती पेश कर रहा है। राज्य के जल संसाधन विभाग के निर्देशों के बाद, बीएमसी पीने के पानी के प्रबंधन के लिए मितव्ययिता उपायों को लागू कर रहा है।
सार्वजनिक शौचालयों का संचालन करने वाले संगठनों को टैंकर, कुएं या बोरवेल के पानी के उपयोग को अधिकतम करने का निर्देश दिया गया है। बोरवेल और कुएं के पानी का उपयोग गैर-पीने योग्य उद्देश्यों जैसे वाहन धोने, बागवानी और सड़कों व परिसरों की सफाई के लिए किया जाना चाहिए।
प्रमुख प्रतिष्ठानों, जिनमें सेंट्रल रेलवे, वेस्टर्न रेलवे, आरसीएफ, एचपीसीएल, बीपीसीएल, नौसेना, महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) और मुंबई पोर्ट अथॉरिटी को सीवेज उपचार संयंत्रों से उपचारित अपशिष्ट जल का परिचालन और द्वितीयक उद्देश्यों के लिए पुन: उपयोग करने की सलाह दी गई है। अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें
संजय राउत के बयान ने और बढ़ाया सस्पेंसमहाराष्ट्र की राजनीति में ऑपरेशन टाइगर की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है. शिवसेना उद्धव गुट के कई सांसदों के पाला बदलने के कयास हैं. खबरों के मुताबिक टीएमसी वाली पटकथा शिवसेना में भी देखने को मिल सकती है.
क्या शिवसेना उद्धव गुट को ही पार्टी में बगावत की आशंका है? एनडीटीवी से पार्टी नेता संजय राउत ने जो कहा है कि उससे ये सवाल उठ रहा है. महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर वही पुरानी पटकथा, वैसी ही सुगबुगाहट और उसी तरह की बेचैनी तैरने लगी है, जिसने साल 2022 में महाविकास अघाड़ी की सरकार को उखाड़ फेंका था. क्या शिवसेना (UBT) यानी उद्धव ठाकरे गुट के 9 में से 7 सांसद बागी होने की राह पर हैं? दिल्ली से लेकर मुंबई के मातोश्री तक इस समय फोन की घंटियां घनघना रही हैं. दावा किया जा रहा है कि दिल्ली का भाजपा नेतृत्व सीधे उद्धव सांसदों के संपर्क में है. सूत्र बताते हैं कि सांसदों को कोई बड़ा “ऑफर” दिया गया है और महिला आरक्षण, परिसीमन के लिए एनडीए इन सांसदों को अपने पाले में लाने या बाहर से समर्थन जुटाने की जोरदार तैयारी में है!
शिवसेना उद्धव को भी लग रहा है डर! कैमरे पर “ऑल इस वेल” बोल रहे उद्धव के नेता संजय राउत ने ही गुट में टूट का इशारा अपने एक पोस्ट से कर दिया. सोमवार रात संजय राउत ने खुद अपने एक सोशल मीडिया X पोस्ट से इस डर को हवा दे दी, लिखा, “त्रिपुरा में नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष शिव कुंडू से मिलिए. मानिए या न मानिए, तृणमूल कांग्रेस के 22 सांसद आधिकारिक तौर पर उनकी पार्टी में “विलय” हो गए! ऐसा लगता है कि महाराष्ट्र के दल बदलुओं को भी खुद को बचाने के लिए किसी “कुंडू” को ढूंढना पड़ेगा! आखिरकार, संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल कानून) तो यही कहती है!”
उद्धव की पार्टी में भी टीएमसी वाली पटकथा? अगर ये सिर्फ़ TMC की टूट पर प्रतिक्रिया थी तो महाराष्ट्र के दल-बदलुओं की याद अचानक क्यों आई, वो भी उस समय में जब उन्हीं की पार्टी में टूट की बड़ी चर्चा है? साफ मतलब था, उद्धव गुट के भीतर बगावत की खिचड़ी पक रही है और अगर बागी सांसदों को दलबदल कानून से बचना है, तो उन्हें टीएमसी के बागियों की तरह किसी अनजान या छोटी पार्टी में अपना विलय करना पड़ेगा. यानी जो बगावत ममता बनर्जी की टीएमसी में देखी गई थी, क्या वैसी ही पटकथा अब उद्धव ठाकरे के साथ लिखी जा रही है?
ये सांसद व्यक्तिगत रूप से पहुंचे
अरविंद सावंत
अनिल देसाई
संजय दीना पाटिल
राजाभाऊ वाजे (नासिक)
बाकी के 5 सांसद मीटिंग से नदारद रहे, दावा हुआ, ऑनलाइन जुड़े!
संजय जाधव (परभणी)
संजय देशमुख (वाशिम)
ओमराजे निंबाळकर (धाराशिव)
भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी)
नागेश पाटील आष्टीकर (हिंगोली)
5 सांसद करेंगे खेल? दिलचस्प बात यह है कि ये वही पांच सांसद हैं जो इसके ठीक एक दिन पहले आदित्य ठाकरे के जन्मदिन पर भी उन्हें बधाई देने नहीं पहुंचे थे. हालांकि, पार्टी ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कहा कि ये सांसद ऑनलाइन जुड़े थे, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, मीटिंग के दौरान उद्धव ठाकरे की सिर्फ नागेश पाटील आष्टीकर से ही बात हो पाई. कार्यकर्ताओं में भ्रम न फैले, इसलिए उद्धव ठाकरे ने अनुपस्थित सांसदों से दो दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है.
संजय देशमुख ने दिखा दिए तेवर? इस आग में घी डालने का काम किया उद्धव के सांसद संजय देशमुख ने. “मातोश्री” की बैठक से गायब रहने के ठीक दूसरे दिन वे शिंदे गुट के केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मिलने पहुंच गए. इस पर सफाई देते हुए उद्धव नेता अनिल देसाई ने कहा, “संजय देशमुख के घर पर बेटी को देखने के लिए लोग आने वाले थे, उन्होंने स्पष्टीकरण दिया है कि वे किसी काम के सिलसिले में मिले थे. लेकिन अलग गुट बनाना या किसी के साथ जाने की बात में कोई तथ्य नहीं है। मीडिया में साल भर से ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा है, लेकिन न टाइगर दिखता है और न ऑपरेशन.”
शिवसेना शिंदे गुट बोला- ये UBT का अंदरूनी मामला दूसरी तरफ, नागपुर से महायुति के विधायक, महाराष्ट्र सरकार में शिंदे गुट मंत्री आशीष जयस्वाल ने “ऑपरेशन टाइगर” पर कहा, “यह UBT का अंदरूनी मामला है. अगर उनकी पार्टी के लोग नाराज हैं और छोड़ कर जा रहे हैं, तो यह उनका विषय है, हम ऐसा कोई उठाव नहीं करवा रहे हैं. और वैसे भी, ऐसी चीजें बगावत, पहले से बताकर नहीं की जातीं.” बगावत की सुरों का खुद इशारा करने वाले संजय राउत ने दिल्ली में पत्रकारों के सामने फिर “ऑल इस वेल” दोहराया! लेकिन सवालों की बौछार में फिर इशारा दे गए, राउत ने कहा, “सांसदों ने अपनी आई (मां), बच्चों की शपथ ली है। किसी ने साईं बाबा की तो किसी ने मां तुळजा भवानी की शपथ ली है कि वे पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे. हमारी पार्टी के सभी 9 सांसद एकजुट हैं. अमित शाह, मोदी और फडणवीस की पार्टी में कोई विश्वसनीयता नहीं बची है, वे पैसे देकर पार्टी फोड़ रहे हैं.”उद्धव ठाकरे के जितना कार्यकर्ताओं से मिलने वाला कोई नेता नहीं है. शरद पवार के बाद वे ही सबसे ज्यादा लोगों से मिलते हैं. मोदी का खौफ सिर्फ ईडी का खौफ है.”
लेकिन ताज्जुब की बात ये है कि संजय राहुत ने एनडीटीवी से खास बातचीत में ये भी कह दिया कि-लोग कसम तो खाते रहते हैं, कसम तो पहले वालों ने भी खाई थी.
राजाभाऊ वाजे के बयान से बढ़ी हलचल संजय राउत भले ही दिल्ली में बैठकर ऑल इज़ वेल का राग अलाप रहे हों, लेकिन नासिक से यूबीटी सांसद राजाभाऊ वाजे के एक ताजा बयान ने 19 जून को होने वाले शिवसेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम को लेकर बड़ी हलचल का इशारा दे दिया है. 19 जून को मुंबई के षण्मुखानंद हॉल में शिवसेना का 60वां स्थापना दिवस कार्यक्रम है, जहां उद्धव ठाकरे को अपना शक्ति प्रदर्शन करना है. लेकिन उद्धव के सांसद राजाभाऊ वाजे ने कहा, “मुंबई में 19 तारीख के शिवसेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मैं शामिल हो पाऊंगा या नहीं, यह अभी नहीं कहा जा सकता. 19 तारीख को मैं दिल्ली से लौट रहा हूं, और मेरे निर्वाचन क्षेत्र में भी कुछ कार्यक्रम हैं. उसके बाद अगर समय मिला, तो मुंबई जाने को लेकर फैसला लूंगा.
उद्धव को लगेगा सबसे बड़ा झटका! मराठी मानुस और बालासाहेब ठाकरे की विरासत का दावा करने वाली इस पार्टी के टूटने का इतिहास पुराना है, लेकिन उद्धव ठाकरे के दौर में यह सबसे घातक साबित हुआ है। अगर यह 7 सांसदों वाली बगावत सच साबित होती है, तो यह पार्टी को फिर से खड़ा ना कर पाने वाली टूट साबित हो सकती है!
राम मंदिर की दान राशि में गबन के मामले में अब तक 2.98 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। यह रकम पकड़े गए संदिग्धों की निशानदेही पर बरामद की गई है। गुपचुप ढंग से चल रही जांच में आठ करोड़ रुपये से अधिक के हेरफेर के संकेत व साक्ष्य मिले हैं। हालांकि जांच पूरी होने के बाद यह राशि घट या बढ़ सकती है।
सूत्रों के मुताबिक लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रमाशंकर पकड़े गए हैं। अब तक हुई रिकवरी भी इन्हीं पांचों ने कराई है। चोरी कुबूल भी की है। इससे ये स्पष्ट हो गया है कि इनकी इसमें भूमिका है लेकिन इतने संवेदनशील जगह से रकम पार करते रहने और पकड़ा न जाना कई सवाल खड़े करता है।
जब वह पकड़े गए हैं तब तक करोड़ों की रकम इधर से उधर की जा चुकी है। ऐसे में अंदेशा है कि क्या इसके पीछे किसी बड़े शख्स की साजिश है। वह ट्रस्ट से जुड़ा या फिर किसी अन्य विभाग आदि से है। फिलहाल इसको लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।
चर्चाएं तमाम, कयास का भी दौर जारी इतने संवेदनशील व बड़े मामले में अब तक ट्रस्ट के किसी बड़े जिम्मेदार ने कोई बयान जारी नहीं किया है। हर कोई खामोश है। इसलिए तमाम तरह की चर्चाओं व कयास का दौर जारी है। ट्रस्ट से जुड़े जुड़े दो ऐसे लोग भी हैं, जिन पर कई सवाल उठ रहे हैं। उनकी कोई भूमिका है या नहीं, ये तभी पता चल सकेगा जब कोई एजेंसी या एसआईटी मामले की विस्तृत जांच करेगी।
टिन्नू का जिक्र सबसे अधिक ट्रस्ट से जुड़े एक पदाधिकारी का टिन्नू करीबी है। वह दशकों से उनसे जुड़ा है। जिन पांच संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है, उसमें शामिल रमाशंकर का टिन्नू रिश्तेदार भी है। सूत्रों के मुताबिक टिन्नू का हस्तक्षेप हर किसी काम में रहता था। इसलिए उस पर सवाल उठ रहे हैं। उसको लेकर ट्रस्ट के एक पूर्व पदाधिकारी ने कैमरे सामने गंभीर आरोप लगाए थे। पुलिस अधिकारी भी खामोश पुलिस अधिकारी का कहना है कि मामले में कोई लिखित शिकायत तक नहीं मिली है। लिहाजा पूछताछ आदि का सवाल ही नहीं उठता है। पुलिस के बड़े अधिकारी भी खामोश हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि पूछताछ से लेकर रिकवरी की प्रक्रिया में पुलिस की एक टीम लगी है। आठ करोड़ से अधिक का हेरफेर… अब तक 2.98 करोड़ की रिकवरी राम मंदिर की दान राशि में गबन के मामले में अब तक 2.98 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। यह रकम पकड़े गए संदिग्धों की निशानदेही पर बरामद की गई है। गुपचुप ढंग से चल रही जांच में आठ करोड़ रुपये से अधिक के हेरफेर के संकेत व साक्ष्य मिले हैं। हालांकि जांच पूरी होने के बाद यह राशि घट या बढ़ सकती है।
मामले के खुलासे के बाद से ट्रस्ट गोपनीय जांच में जुटा है। लेकिन पदाधिकारी लगातार चुप्पी साधे हैं। आधिकारिक तौर पर पुलिस को भी शामिल नहीं किया गया है। लेकिन करोड़ों का गबन की रिकवरी की जद्दोजहद में सभी जुटे हैं।
पकड़े गए संदिग्धों के अलावा और कौन-कौन लोग इसमें शामिल हैं इसका पता लगाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक अभी तक गबन की राशि सही आंकड़ा सामने नहीं आया है, लेकिन संदिग्धों से पूछताछ में मिली जानकारी व साक्ष्यों के आधार पर आठ करोड़ से अधिक के खेल का अंदेशा है।
संदिग्धों के घर व ठिकानों के साथ बैंक खाते भी खंगाले जा रहे हैं। इनमें अवनीश के खाते से पांच लाख रुपये मिले हैं। यह रकम उसने दान राशि से गायब की थी। जेवरात भी मिले हैं।पुलिस ने शनिवार को रुदौली के मीनापुर ठकुरन फगौली गांव में मंदिर कर्मचारी लवकुश के घर छापा मारा गया। इस दौरान 10-12 लाख रुपये बरामद किए गए।
रामभक्तों पर गोली चलवाने वालों को नहीं है बोलने का अधिकार : पांडेय सीतापुर में दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे खाद्य एवं रसद विभाग के मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने खैराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि राम मंदिर के चढ़ावा मामले में सवाल उठाने वाले पहले अपना इतिहास देख लें। उन्होंने रामभक्तों व कारसेवकों पर गोली चलवाई थी, उन्हें इस मामले में बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है।
राम मंदिर के दान में घपले की जांच करेगी 3 सदस्यीय एसआईटी, 15 दिन में देगी रिपोर्ट अयोध्या में श्रीराम मंदिर को मिले दान में गबन के तूल पकड़ने के बाद आखिरकार राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया। एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ जोन की पुलिस महानिरीक्षक किरन एस और विशेष वित्त सचिव नीलरतन शामिल हैं। दल सात दिन में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट देगा।
राम मंदिर चढ़ावा घोटाले के बीच टिन्नू यादव के घर से करोड़ों का सोना जब्त किया गया है। 50 करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्तियां भी पता चली हैं। आगे पढ़ें रामनगरी अयोध्या स्थित राम मंदिर के खजाने और चढ़ावे में करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) 15 जून 2026 को अयोध्या पहुंची। टीम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से छह घंटे तक पूछताछ की और डिजिटल साक्ष्य खंगाले।
कार्रवाई से पहले, पांच मुख्य संदिग्धों से करीब दो करोड़ रुपये नकद, एक लग्जरी कार और तीन आईफोन बरामद हुए। इस घोटाले में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम सामने आया है। 13 जून 2026 को टिन्नू के पैतृक आवास पर छापेमारी में भारी मात्रा में शुद्ध सोना जब्त किया गया।
सूत्रों के अनुसार, इस सोने की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई करोड़ रुपये हो सकती है। जांच में पता चला है कि टिन्नू के पास अयोध्या और लखनऊ में करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्तियां हैं। वह कभी ऑटो रिक्शा चलाता था। अयोध्या अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास उसका एक 70 कमरों वाला छात्र छात्रावास भी है। एसआईटी जल्द ही इस छात्रावास की भी जांच कर सकती है।
सोमेश आनंद और केडी तिवारी पर संदेह सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर सोमेश आनंद भी आया है। वह मंदिर निर्माण के मुख्य प्रभारी गोपाल राव का कथित भतीजा बताया जा रहा है। सोमेश ने एक साल में देश के विभिन्न राज्यों की 50 से अधिक संदिग्ध यात्राएं की हैं। वह अयोध्या रेलवे स्टेशन से बोरों में भारी सामान भरकर ट्रेन से दक्षिण भारत जाता था। वापसी में वह हवाई जहाज से खाली हाथ अयोध्या लौटता था। फिलहाल सोमेश के बैंक खातों और हवाई टिकटों की बारीकी से जांच की जा रही है।
आभूषणों की जिम्मेदारी और जमीन का सौदा इस मामले में केडी तिवारी का नाम भी सामने आया है। उनके पास रामलला के आभूषणों को संभालने की मुख्य प्रशासनिक जिम्मेदारी थी। सुरक्षा अधिकारियों ने उनके आवास पर भी छापेमारी की थी। केडी तिवारी द्वारा हाल ही में खरीदी गई डेढ़ करोड़ रुपये की जमीन का सौदा जांच के दायरे में है। उन्होंने मीडिया से कहा, “मेरी ड्यूटी महज श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए आभूषणों को तौलकर उन्हें रसीद देने तक सीमित थी, उसके बाद मैं उसे ट्रस्ट के वरिष्ठों को सौंप देता था; आगे गहनों के साथ क्या खेल होता था, मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है।
भारतीय वायुसेना के लिए 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 87 उन्नत स्वदेशी यूएवी खरीदे जाएंगे। इसके लिए करीब 10 घरेलू कंपनियों ने बोलियां जमा कर दी हैं। यह कदम चीन-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने और विदेशी हथियारों पर निर्भरता घटाने में मील का पत्थर साबित होगा।
देश की हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में भारत ने एक और ऐतिहासिक कदम आगे बढ़ा दिया है। भारतीय वायुसेना के लिए 87 मीडियम-एल्टीट्यूड लॉन्ग-रेंज, एंड्योरेंस मानव रहित विमानों (यूएवी) की खरीद के लिए करीब 10 भारतीय निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने अपनी बोलियां जमा की हैं। यह पूरा प्रोजेक्ट 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, बोलियां लगाने का आज आखिरी दिन था।
इस महा-परियोजना की दौड़ में देश के कई बड़े नाम शामिल हैं। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ-साथ सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड, अडानी डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) और राफे एमफाइब्र लिमिटेड जैसी निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां मैदान में हैं। रक्षा मंत्रालय ने पिछले साल ही इस मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। भारतीय कंपनियों को अपनी तैयारी और प्रतिक्रिया बेहतर करने के लिए मंत्रालय ने दो बार समय-सीमा भी बढ़ाई थी।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारत की विदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता को कम करना है। ये ड्रोन अत्याधुनिक निगरानी और युद्धक क्षमताओं से लैस होंगे। इनमें रीयल-टाइम इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही क्षमताएं शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन ड्रोनों के साथ स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों को जोड़ने की भी योजना है। ये ड्रोन न केवल सीमाओं की चौबीसों घंटे निगरानी करेंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने में भी सक्षम होंगे।
सशस्त्र बलों ने एक व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन के बाद इन ड्रोनों की विशिष्टताओं को अंतिम रूप दिया है। पाकिस्तान और चीन के साथ लगती सीमाओं पर प्रभावी निगरानी की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब तक भारतीय सेनाएं अपनी ड्रोन आवश्यकताओं के लिए मुख्य रूप से अमेरिका और इस्राइल जैसे विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रही हैं। अब इस स्वदेशी सौदे से भारतीय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का एक नया युग शुरू होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (16 जून, 2026) को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 देशों के नेताओं की बैठक को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाया और दुनिया को संदेश दिया. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक बन सकती हैं, जब हम साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करें.
उन्होंने कहा कि भारत का दृढ विश्वास है कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे तनावों और युद्धों का स्थायी समाधान बातचीत, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्ग से ही संभव है.
जी-7 समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बगल में बैठ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो टूक कहा कि हम पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं. इस संघर्ष से पश्चिम एशिया में हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मैरिटाइम ट्रेड में आई बाधा के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है. भारत के कई नागरिकों को जान गंवानी पड़ी.’
उन्होंने कहा, ‘ग्लोबल मैरिटाइम ट्रेड के माध्यम से सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना डर के अपना कार्य कर सकें.’
पीएम मोदी ने कहा, ‘आज का विश्व पहले से कहीं अधिक इंटर-कनेक्टेड और इंटर-डिपेंडेंट है. किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि सिर्फ उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती. मोबिलिटी, डेटा, कैपिटल और तकनीक, ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘ऐसे समय में साझेदारियों का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है, लेकिन साझेदारियां तभी सफल होती हैं जब उनके केंद्र में विश्वास हो. आज सबसे महत्वपूर्ण स्ट्रैटजिक ऐसेट कोई मिनरल, तकनीक या मार्केट नहीं, बल्कि आपसी विश्वास है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘विश्वास की तकनीक और सप्लाई चेन्स को हथियार के रूप में नहीं, वैश्विक भलाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. विश्वास की विकास के अवसर कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे. विश्वास की वैश्विक संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे.’
पीएम मोदी ने कहा, ‘पिछली सदी में मानवता को दो विश्व युद्धों से गुजरना पड़ा. अनेक बलिदानों के बाद विश्व समुदाय ने शांति, स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए व्यवस्थाएं विकसित की. इन व्यवस्थाओं का आधार भी भरोसा ही था, लेकिन अनेक दशकों से, अनेक पीढ़ियों के योगदान से बनाए गए विश्वास को आज चोट पहुंच रही है. कोविड ने हमें आईना दिखाया कि भरोसा और एकजुटता के दावे कितने खोखले थे.
उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनल्ड रेगन ने कहा था कि Trust but Verify (विश्वास करो, लेकिन सत्यापन भी करो). यह आज के समय में भी प्रासंगिक है. भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप भरोसेमंद नियमों पर आधारित दुनिया का निर्माण करें.’
डोनाल्ड ट्रंप के जनवरी 2025 में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद अमेरिका और भारत के रिश्ते उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। पहले ट्रंप प्रशासन की व्यापार, टैरिफ की नीति और इसके बाद ईरान युद्ध की वजह से भारत के अमेरिका से रिश्तों को परोक्ष रूप से नुकसान पहुंचा है। ऐसे में जी-7 शिखर सम्मेलन से इतर होने वाली ट्रंप-मोदी की बैठक में कई ऐसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है, जिन पर दोनों नेताओं की 16 महीने पहले हुई बैठक में सहमति बनी थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आज (17 जून) को फ्रांस में एक अहम मुलाकात होनी है। ग्रुप ऑफ सेवेन (जी-7) सम्मेलन के इतर होने वाली इस बैठक पर भारत-अमेरिका के साथ-साथ दुनियाभर की नजरें रहेंगी। दरअसल, दोनों ही नेता फरवरी 2025 में मुलाकात के करीब 16 महीने बाद अब बैठक करने वाले हैं। पहली बैठक के बाद से अब तक दोनों ही देशों के रिश्तों से लेकर वैश्विक स्तर पर भी कई चीजों में बड़ा बदलाव आया है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि 12 फरवरी 2025 को ट्रंप और मोदी की पहली बैठक के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में कितना बदलाव आया है? इस दौरान अमेरिका-भारत के मुद्दे क्या रहे हैं? किन-किन बातों पर दोनों देशों में विवाद की स्थिति पैदा हुई है? इस दौरान पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच आपसी रिश्ते कैसे रहे हैं? अब जब दोनों नेताओं की जी7 के इतर बैठक होगी तो किन मुद्दों को लेकर चर्चा तय है?
मोदी-ट्रंप की पिछली बैठक में क्या हुआ था? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच पिछली बैठक फरवरी 2025 में वॉशिंगटन के व्हाइट हाउस में हुई थी। इस मुलाकात को ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंधों की एक मजबूत शुरुआत के रूप में देखा गया था।
कॉम्पैक्ट पहल का शुभारंभ इस बैठक की सबसे अहम घोषणा अमेरिका-भारत कॉम्पैक्ट (Catalyzing Opportunities for Military Partnership, Accelerated Commerce & Technology) नाम की एक नई पहल की शुरुआत थी। इस समझौते का मकसद रक्षा सहयोग और विनिर्माण को बढ़ावा देना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना था।
व्यापार और आर्थिक साझेदारी पर चर्चा दोनों नेताओं के बीच ट्रंप के पारस्परिक व्यापार एजेंडे पर गहन चर्चा हुई। राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के साथ अमेरिका के लगभग 46 अरब डॉलर के व्यापार घाटे को कम करने और अमेरिकी वस्तुओं पर भारतीय आयात कर को घटाने के विषय पर जोर दिया। इस दौरान दोनों देशों के बीच एक नए व्यापार समझौते की रूपरेखा की घोषणा भी की गई थी, हालांकि, इस पर शुरुआती विवाद और फिर ट्रंप की तरफ से टैरिफ लगाए जाने के बाद समझौते पर अभी तक अंतिम रूप से हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं।
ऊर्जा और परमाणु सहयोग बैठक में दोनों देशों ने तेल, गैस और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापार बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। सबसे खास बात यह रही कि इसमें भारत में अमेरिका की ओर से डिजाइन किए गए परमाणु मॉड्यूलर रिएक्टर विकसित करने की योजना को भी शामिल किया गया था।
कूटनीतिक और रक्षा समन्वय राष्ट्रपति ट्रंप ने रक्षा, व्यापार, निवेश, बहुपक्षीय समन्वय और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संबंधों को भविष्य के सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया। विज्ञापन
ट्रंप-मोदी की बैठक के बाद दोनों देशों के रिश्तों में कितना बदलाव आया है? 12 फरवरी 2025 की बैठक के दौरान एक मजबूत साझेदारी की उम्मीद साफ तौर पर दिखाई दी थी, जहां पीएम मोदी ने विश्वास जताते हुए कहा था कि दोनों देश मिलकर दोगुनी गति से काम करेंगे। हालांकि, इस बेहतर शुरुआत के बावजूद बाद के महीनों में आयात शुल्क, भारतीयों के वीजा के मुद्दे, ऑपरेशन सिंदूर, ईरान युद्ध के प्रभाव और भू-राजनीतिक बदलावों की वजहों से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव और चुनौतियां सामने आई हैं।
व्यापारिक तनाव और आयात शुल्क ट्रंप प्रशासन ने अल्पकालिक और लेन-देन वाला रवैया अपनाते हुए भारत समेत 70 से ज्यादा देशों पर 25% का टैरिफ लगा दिया। इसके अलावा, भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखने के कारण, अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त 25% (जिसे बाद में बढ़ाकर 50% कर दिया गया) का दंडात्मक शुल्क लगा दिया। हालाँकि अमेरिकी अदालतों ने इन शुल्कों को रद्द कर दिया, फिर भी एक व्यापक व्यापार समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच गतिरोध बना हुआ है।
पाकिस्तान के साथ अमेरिका की बढ़ती नजदीकियां भारत के लिए सबसे बड़ी निराशा वॉशिंगटन की ओर से पाकिस्तान के साथ फिर से कूटनीतिक बातचीत शुरू करना रहा है। अमेरिका ने अप्रैल में भारत की आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयों का समर्थन नहीं किया और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की अपील पर भारत से युद्ध रोकने की अपील करता रहा। इतना ही नहीं, पाकिस्तान की तरफ से ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने के बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस देश के साथ निजी स्तर पर रिश्तों को बढ़ाया। इसके अलावा पाकिस्तान की तरफ से कथित दुर्लभ खनिजों की अमेरिका को पेशकश और ट्रंप के क्रिप्टोकरेंसी साम्राज्य में दिलचस्पी दिखाने का भी उसे फायदा मिला और ट्रंप ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख को व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया, जिससे नई दिल्ली की चिंताएं और बढ़ गईं।
क्वाड और रणनीतिक अनिश्चितता ट्रंप प्रशासन की तरफ से भारत पर व्यापारिक दबाव डालने और पाकिस्तान की ओर झुकाव दिखाने से क्वाड (भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के गठबंधन) की मूल भावना कमजोर हुई है। इससे भारत में यह संदेश गया है कि अमेरिका अपनी दीर्घकालिक हिंद-प्रशांत रणनीति के बजाय अल्पकालिक फायदों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री ने जब भारत का दौरा किया तो उन्होंने क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया था।
रिश्तों को सुधारने के प्रयास इन तनावों के बावजूद दोनों देशों के नेता लगातार संपर्क में हैं। मई 2026 में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रिश्तों को सुधारने के लिए भारत की यात्रा की, जहां दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क (दुर्लभ खनिजों का समझौता) पर हस्ताक्षर किए।
ईरान युद्ध और भारतीय नाविकों की मौत अमेरिका-ईरान युद्ध और उसके कारण उपजे ऊर्जा संकट ने भारत को काफी प्रभावित किया है। हाल ही में ओमान के तट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जिसने रिश्तों में कड़वाहट घोल दी है। भारत ने इस घटना का कड़ा विरोध करते हुए अमेरिकी राजनयिकों को तलब किया है। हालांकि, अमेरिका की तरफ से इस घटना पर माफी मांगने या संवेदना जताने की जगह उल्टे जहाज के क्रू को ही इस घटना का जिम्मेदार करार दिया गया है और मनमाने तरीके से कार्रवाई को सही ठहराया गया है।
बीते 16 महीने में कैसे रहे पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के आपसी रिश्ते? ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान भारत-अमेरिका के बीच जो बेहतरीन व्यक्तिगत तालमेल और सौहार्दपूर्ण संबंध बने थे, उसी के आधार पर ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंधों के और अधिक मजबूत होने की उम्मीद थी। हालांकि, अब तक ऐसा होता नहीं दिखा। इस बीच अमेरिका और भारत के बीच ही व्यापार और कूटनीतिक स्तर पर कई तनाव सामने आए हों, लेकिन पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत तौर पर रिश्ते संतुलित ही रहे हैं।
व्यापारिक तनावों और भू-राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से लगातार संपर्क बनाए रखा है। 2025 के बाद से अब तक दोनों के बीच फोन पर कम से कम आठ बार बातचीत हो चुकी है। इनमें फरवरी में एक व्यापार समझौते की रूपरेखा की घोषणा करने के लिए की गई कॉल और अप्रैल में अमेरिका-ईरान युद्ध को लेकर हुई 40 मिनट की लंबी बातचीत शामिल है।
डोनाल्ड ट्रंप का 24 मई 2026 का बयान
यूं तो दोनों के व्यक्तिगत संबंध अब तक अच्छे दिखते रहे हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन की तरफ से भारत पर लगाए गए दंडात्मक और कड़े आयात शुल्कों ने इन मजबूत व्यक्तिगत संबंधों के सामने कुछ हद तक एक असहज स्थिति पैदा कर दी है। इससे काफी हद तक यह स्पष्ट हुआ है कि बेहतरीन पर्सनल केमिस्ट्री होने के बावजूद ट्रंप के लिए उनके अमेरिका फर्स्ट और लेन-देन वाले रणनीतिक फैसले ज्यादा मायने रखते हैं। दूसरी ओर पीएम मोदी ने भी अलग-अलग मौकों पर ट्रंप के दावों को लेकर कई प्रतिक्रिया देने से परहेज किया है।
इसका एक उदाहरण बीते साल कनाडा में हुए जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान दिखा था, जब ट्रंप ने पीएम मोदी को व्हाइट हाउस आने के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि, पीएम ने साफ तौर पर अपने पूर्व में तय कार्यक्रमों का हवाला देते हुए ट्रंप से अमेरिका जाकर मिलने में असमर्थता जता दी थी।
जी-7 से इतर बैठक में किन मुद्दों को ट्रंप के सामने उठा सकते हैं मोदी? दोनों नेताओं के बीच संवाद अभी भी प्राथमिकता पर है। इसी क्रम में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप फ्रांस के एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन के मौके पर मुलाकात करने वाले हैं। फरवरी 2025 के बाद यह उनकी पहली व्यक्तिगत मुलाकात होगी, जिसमें व्यापार सौदे पर स्पष्टता और ईरान युद्ध जैसी अहम चिंताओं पर चर्चा होने की उम्मीद है।
व्यापार समझौता और आयात शुल्क इस बैठक में व्यापार से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से छाए रहने की उम्मीद है। पीएम मोदी लंबित व्यापार समझौते की रूपरेखा पर अधिक स्पष्टता की मांग कर सकते हैं। खासकर ट्रंप प्रशासन की तरफ से मार्च 2026 में व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत भारत के खिलाफ अनुचित व्यापार प्रथाओं की जांच शुरू करने के फैसले को लेकर। यह जांच अमेरिकी व्यवसायों को नुकसान पहुंचाने वाले देशों की अतिरिक्त विनिर्माण क्षमता और द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन का आकलन करने के लिए की जा रही है। इसके जरिए अमेरिका आने वाले समय में किसी व्यापार समझौते के बावजूद मित्र देश पर टैरिफ लगा सकेगा। ऐसे में भारत व्यापार समझौते के लिए इस तरह की जांच से पूरी तरह सुरक्षा की मांग कर रहा है। पीएम मोदी इसी मुद्दे को सख्ती से ट्रंप के सामने उठा सकते हैं।
इसके अलावा भारत की तरफ से रूस से तेल खरीदने के कारण अमेरिका की तरफ से जो टैरिफ लगाए गए हैं, पीएम मोदी उसका मुद्दा भी उठा सकते हैं। इन टैरिफ को भारत पहले ही दो देशों के रिश्तों में अमेरिका का दखल बताते हुए अनुचित और तर्कहीन करार दे चुका है।
अमेरिका-ईरान युद्ध और ऊर्जा सुरक्षा पीएम मोदी ईरान युद्ध को लेकर वॉशिंगटन की भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी मांग सकते हैं। इस युद्ध और संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में वैश्विक शिपिंग मार्ग बाधित हुए हैं, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है।
भारतीय नाविकों की मौत ओमान के तट के पास वाणिज्यिक जहाज- एमटी सेट्टेबेलो पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा इस बैठक में बेहद अहम होगा। खासकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की तीखी बयानबाजी के बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास की स्थिति बढ़ी है। पीएम मोदी इस चिंता को व्यक्तिगत रूप से ट्रंप के सामने उठा सकते हैं।
रक्षा सौदे और रणनीतिक सहयोग हालिया तनावों से पहले, यह उम्मीद की जा रही थी कि इस बैठक में रक्षा मोर्चे पर कुछ नई घोषणाएं हो सकती हैं, जिनमें अमेरिकी जैवलिन मिसाइलों की खरीद पर चर्चा भी शामिल है। इसके साथ ही हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान तय हुआ क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क और तकनीकी नवाचार को आगे बढ़ाने पर भी बात हो सकती है।
पाकिस्तान की ओर अमेरिका का झुकाव पीएम मोदी इस बात को लेकर भी भारत की चिंताएं स्पष्ट कर सकते हैं कि अमेरिका की अल्पकालिक नीतियां और भारत-पाकिस्तान मामलों में उसका हस्तक्षेप भारत के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों के अनुकूल नहीं है। खासकर पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों के बावजूद ट्रंप प्रशासन का उसके समर्थन का मुद्दा बैठक के केंद्र में रह सकता है। अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें
नई दिल्ली, 16 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों को टेलीग्राम पर सक्रिय साइबर ठगों से सावधान रहने की सलाह दी गई है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने मंगलवार को कहा कि कुछ गिरोह परीक्षा प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और फर्जी ‘पेपर लीक’ के सबूत दिखाने के नाम पर छात्रों को निशाना बना रहे हैं।
जारी चेतावनी के अनुसार टेलीग्राम पर संचालित कुछ चैनल अभ्यर्थियों से 14 हजार रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक, जबकि कुछ मामलों में 10 लाख रुपये तक की मांग कर रहे हैं। इन चैनलों का दावा है कि वे नीट पुनर्परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध करा देंगे। एनटीए ने स्पष्ट किया है कि पुनर्परीक्षा का कोई प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ है और ऐसे सभी दावे पूरी तरह धोखाधड़ी हैं।
चेतावनी में कहा गया है कि ऐसे गिरोह पैसे लेने के साथ-साथ छात्रों के प्रवेश पत्र और व्हाट्सऐप नंबर जैसी व्यक्तिगत जानकारियां भी हासिल कर लेते हैं, जिनका बाद में अन्य छात्रों को ठगने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
एनटीए ने बताया कि कुछ साइबर ठग टेलीग्राम के संदेश संपादन फीचर का दुरुपयोग कर फर्जी ‘पेपर लीक’ के प्रमाण तैयार करते हैं। इसके तहत किसी पुराने संदेश को बाद में संपादित कर उसमें वास्तविक प्रश्नपत्र या अन्य सामग्री जोड़ दी जाती है, जबकि संदेश की मूल तारीख वही बनी रहती है। बाद में उसी स्क्रीनशॉट या चैट को यह दिखाने के लिए प्रसारित किया जाता है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले उपलब्ध था।
अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की गई है कि वे 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा से पहले किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें, ऐसे संदेशों को आगे न बढ़ाएं और किसी भी व्यक्ति या चैनल को पैसे न भेजें।
उन्हें सलाह दी गई है कि परीक्षा से संबंधित सभी सूचनाओं के लिए केवल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट और उसके सत्यापित सोशल मीडिया माध्यमों पर ही भरोसा करें।
एनटीए ने कहा कि किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दी जानी चाहिए।
जयपुर, 16 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित री-नीट (यूजी) 2026 परीक्षा 21 जून को जयपुर जिले के निर्धारित परीक्षा के न्द्रों पर आयोजित की जाएगी। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक होगी। परीक्षा के सफल, निष्पक्ष और सुचारू संचालन के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं।
जिला कलेक्टर संदेश नायक ने बताया कि परीक्षा केन्द्रों पर सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन तथा गोपनीय परीक्षा सामग्री के सुरक्षित वितरण और संग्रहण की समुचित व्यवस्था की गई है। अभ्यर्थियों की संख्या के अनुसार पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। उन्होंने बताया कि परीक्षा दिवस पर अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रत्येक परीक्षा केन्द्र पर मेडिकल स्टाफ, प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) तथा ओआरएस की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर एम्बुलेंस सहित अन्य चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी।
अभ्यर्थियों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए रोडवेज, रेलवे, जेसीटीएसएल और जयपुर मेट्रो को पर्याप्त परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं परीक्षा केन्द्रों के निरीक्षण एवं समन्वय के लिए सिटी को-ऑर्डिनेटर द्वारा सभी व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी की जाएगी। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को परीक्षा से संबंधित भ्रामक सूचनाओं, अफवाहों तथा नकल जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए आवश्यक जनजागरूकता गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की पूर्ण पालना सुनिश्चित करते हुए परीक्षा के शांतिपूर्ण, पारदर्शी और व्यवस्थित संचालन के लिए समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए हैं।
नई दिल्ली, 16 जून (हि.स)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने देश के युवाओं से वर्ष 2047 तक विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश के युवा विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में सबसे बड़ी शक्ति हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ने मंगलवार को संविधान सदन के केंद्रीय हॉल में विकसित भारत युवा संसद 2026 के राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि युवाओं का दृढ़ संकल्प, नवोन्मेषी सोच और नेतृत्व क्षमता 2047 के भारत को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले वर्षों में भारत के युवा विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार में विश्व का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने कहा कि आज, पूरी दुनिया भारत के युवाओं को आशा, आत्मविश्वास और भविष्य की संभावनाओं के प्रतीक के रूप में देखती है।
विकसित भारत के स्वप्न की सामूहिक प्रकृति पर बल देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विकसित भारत का सपना किसी एक व्यक्ति, संस्था या सरकार की आकांक्षा नहीं है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना 140 करोड़ भारतीयों का साझा राष्ट्रीय संकल्प है। बिरला ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक इस लक्ष्य को हासिल करने की जिम्मेदारी काफी हद तक आज के युवाओं के कंधों पर है। उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं की ऊर्जा, नवाचार, साहस और दृढ़ संकल्प ही विकसित भारत के सपने को साकार करने में सबसे शक्तिशाली क्षमता सिद्ध होंगे।
इससे पहले केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। मांडविया ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण में युवाओं की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित किया। प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों ने एक कठिन चयन प्रक्रिया के माध्यम से यह स्थान प्राप्त किया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोकसभा के अध्यक्ष के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर उनके लिए सौभाग्य की बात हैं।
इस कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के नेतृत्व में किया जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री के साथ युवा कार्यक्रम विभाग की सचिव पल्लवी जैन गोविल, लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह और अपर सचिव (युवा कार्यक्रम) नितेश मिश्र सहित मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। इस कार्यक्रम में देशभर के 757 विश्वविद्यालयों और संस्थानों से चयनित युवा प्रतिनिधियों ने भागीदारी करते हुए विकसित भारत@2047 की परिकल्पना पर अपने विचार और दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में 15-17 जून तक विकसित भारत युवा संसद 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में युवाओं की भागीदारी को परिपुष्ट करना और शासन, नीतिगत विचार-विमर्श और संसदीय कामकाज का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।