Sunday, June 21, 2026
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NATIONAL : ट्विशा शर्मा मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, CJI की अगुवाई में सोमवार को सुनवाई

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देश की सर्वोच्च अदालत ने ट्विशा शर्मा से जुड़े संवेदनशील मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान लिया है. देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की विशेष पीठ आगामी सोमवार, 25 मई को इस मामले पर बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई करने जा रही है.

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा की मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 25 मई (सोमवार) को सुनवाई की तारीख तय की है. इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच करेगी. बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल रहेंगे.

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष स्वत: संज्ञान लेने की अनुमति के लिए रखा था. नोट में मीडिया रिपोर्ट्स और अन्य परिस्थितियों के आधार पर जांच के प्रभावित होने को लेकर सवाल उठाए गए थे.

नोट में यह भी उल्लेख किया गया था कि 33 वर्षीय कॉरपोरेट प्रोफेशनल और पूर्व अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की 12 मई को भोपाल स्थित ससुराल में मौत हुई थी. मीडिया रिपोर्ट्स और बाद की घटनाओं के आधार पर यह धारणा बनाई जा रही है कि निष्पक्ष जांच कथित तौर पर न्यायिक प्रभाव के कारण प्रभावित हुई हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा रखे गए नोट में कहा गया है कि मृतका की सास एक रिटायर्ड जिला जज हैं, जिसके कारण संस्थागत स्तर पर मामले को दबाने के आरोप लगाए जा रहे हैं. नोट में मानसिक प्रताड़ना, दहेज से जुड़ी मांगों और कथित संस्थागत कवर-अप के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है.

नोट में मुख्य न्यायाधीश से यह निर्देश मांगा गया था कि क्या इस मामले में जांच की निष्पक्षता और संस्थागत ईमानदारी से जुड़े मुद्दों पर स्वत: संज्ञान लिया जाए. साथ ही सुझाव दिया गया था कि यदि अनुमति दी जाती है तो मामले को “सुओ मोटू रिट पिटीशन (क्रिमिनल)” के रूप में दर्ज कर संवेदनशील मामलों में निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया मजबूत करने के निर्देश दिए जाएं.

मृतका के परिवार ने मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है. परिवार ने यह आरोप भी लगाया है कि न्यायपालिका से ससुराल पक्ष के गहरे संबंध होने के कारण जांच प्रभावित हो सकती है.

मामले में मृतका के परिवार ने हाईकोर्ट का भी रुख किया था. हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए कहा था कि सभी संदेह दूर करने और आम लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए दूसरा पोस्टमार्टम जरूरी है.इसके बाद अदालत ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक को स्वतंत्र विशेषज्ञों की टीम गठित कर भोपाल जाकर दूसरा पोस्टमार्टम करने के निर्देश दिए थे.

अब मुख्य न्यायाधीश द्वारा दोनों प्रार्थनाओं को मंजूरी दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में स्वत: संज्ञान का मामला औपचारिक रूप से दर्ज हो चुका है और इस पर सोमवार को सुनवाई होगी.

बता दें कि ट्विशा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली थीं. 33 साल की इस मॉडल-एक्टर के परिवार ने उनके ससुराल वालों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उनकी बेटी को मौत के मुंह में धकेल दिया. वहीं, ससुराल वालों का दावा है कि ट्विशा को नशे की लत थी. हालांकि, ट्विशा का पोस्टमॉर्टम AIIMS भोपाल में ही किया गया था, लेकिन उनके परिवार ने प्रक्रिया में कुछ कमियों का हवाला देते हुए दूसरे पोस्टमॉर्टम की मांग की थी.

ट्विशा शर्मा के परिजनों ने ससुराल वालों पर दहेज की मांग, मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना और जबरदस्ती गर्भपात करवाने तक के गंभीर आरोप लगाए हैं. पहले भोपाल की निचली अदालत ने दोबारा पोस्टमार्टम की मांग को खारिज कर दिया था, लेकिन परिवार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह ने निर्देश दिया कि दोबारा पोस्टमार्टम दिल्ली एम्स एक विशेष टीम करेगी.

NATIONAL : जलवायु परिवर्तन और गर्मी ने उड़ाई नींद: डिहाइड्रेशन के बढ़े मरीज, सूरज ढलने के बाद भी नहीं मिल रही राहत

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भारत में गर्मी अब केवल दिन तक सीमित नहीं रही, बल्कि रातें भी लगातार गर्म और उमस भरी हो रही हैं। क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन, बढ़ती नमी और अनियोजित शहरीकरण के कारण हीटवेव पहले से ज्यादा खतरनाक बनती जा रही है। 2010 से 2024 के बीच रात के तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इसका सबसे ज्यादा असर मजदूरों, बुजुर्गों, बच्चों और गरीब आबादी पर पड़ रहा है।

भारत में गर्मी अब केवल दोपहर की झुलसाती धूप तक सीमित नहीं रही। हालात ऐसे हो चुके हैं कि दिन में लू लोगों को झुलसा रही है, तो रात में भी तापमान और उमस शरीर को ठंडा नहीं होने दे रहे। पंखे और कूलर के बावजूद लोगों की नींद टूट रही है, जबकि अस्पतालों में हीट स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन के मरीज बढ़ रहे हैं। शहर धीरे-धीरे ऐसे हीट ट्रैप में बदलते जा रहे हैं, जहां सूरज ढलने के बाद भी राहत नहीं मिलती

क्लाइमेट ट्रेंड्स की नई रिपोर्ट व्हाई इंडियाज हीटवेव्स फील मोर ब्रूटल दैन बिफोर ने चेताया है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ती नमी, सूखी मिट्टी और बेतरतीब शहरीकरण मिलकर भारत की गर्मियों को पहले से कहीं ज्यादा लंबा, दमघोंटू और खतरनाक बना रहे हैं। देश इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में दिन और रात दोनों असामान्य रूप से गर्म बने हुए हैं।

कई शहरों में रात का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज हो रहा है। इसका मतलब यह है कि सूर्यास्त के बाद भी शरीर को ठंडक नहीं मिल पा रही। क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिपोर्ट के अनुसार 2010 से 2024 के बीच भारत में रात के औसत न्यूनतम तापमान में हर दशक करीब 0.21 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है। देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 35 में रातें लगातार गर्म होती जा रही हैं।

NATIONAL : देश के बड़े शहरों में 25-60% तक की पानी बर्बादी:मुंबई में भोपाल-इंदौर की जरूरत से ज्यादा पानी बर्बाद; इंदौर में 65% पानी लीकेज

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देश के लगभग सभी बड़े शहरों में 25-60% तक पानी बर्बाद हो रहा है। या तो पेयजल लाइनों में बड़े लीकेज हैं या फिर पाइपलाइन में अवैध कनेक्शन जोड़ लिए गए हैं। हालात ये हैं कि मुंबई को रोज लगभग 3,850 एमएलडी (मिलियन लीटर रोज) पानी सप्लाई होता है।

इसमें से करीब 30% लीकेज माना जाता है। रोज लगभग 1000 एमलडी पानी पाइपलाइन लीकेज व अन्य तरह से बेकार जा रहा है। ये बर्बाद पानी इंदौर-भोपाल की कुल रोजाना जरूरत से भी ज्यादा है। इन दोनों शहरों को रोज 900 एमएलडी ही पानी चाहिए।

स्मार्ट सिटी और अमृत 2.0 जैसी परियोजनाओं के तहत 2016 में शहरी निकायों ने सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (एससीएडीए) प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसके तहत लीकेज और चोरी वाले नॉन रिवेन्यू वाटर (एनआरडब्ल्यू) को घटाकर 20% पर लाने का लक्ष्य था।

इस प्रोजेक्ट के तहत पिछले 10 साल में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, फिर भी हालात नहीं बदले। भोपाल-इंदौर जैसे शहरों में पानी का लीकेज 35%-65% तक है। भोपाल ने तो 2021 तक ही पेयजल लीकेज 16% करने का दावा किया था। लेकिन कैग रिपोर्ट 2019 के मुताबिक भोपाल में वाटर लीकेज 48% है। इंदौर में 65% तक है।

NATIONAL : कॉकरोच जनता पार्टी की चर्चा विदेशी मीडिया में भी, जानिए इसे वहाँ कैसे देखा जा रहा है?

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इमेज कैप्शन,एआई से तैयार की गई यह तस्वीर पैरोडी पार्टी के लोगो दिखाता है और यह उन कई मीम्स और छोटे वीडियो में शामिल है, जिन्हें सीजेपी ने बनाया ह.भारत में राजनीतिक पार्टियों का जन्म सामान्य तौर पर आंदोलनों से होता है. लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का जन्म 16 मई को सोशल मीडिया पर अचानक से हुआ था.

दरअसल, 15 मई को भारत के सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था, “समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. क्या आप भी उनके साथ जुड़ना चाहते हैं? कुछ युवा ऐसे हैं, जो रोज़गार नहीं मिलने और पेशे में जगह न बना पाने के कारण कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं.”

जस्टिस सूर्यकांत की इस टिप्पणी की बहुत आलोचना हुई. हालांकि इस आलोचना के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्टीकरण दिया और कहा कि उनकी टिप्पणी को ग़लत तरीक़े से पेश किया गया है.

उन्होंने कहा, “मुझे यह देखकर दुख हुआ कि मीडिया के एक वर्ग ने कल (15 मई को) एक निरर्थक मामले की सुनवाई के दौरान की गई मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया. मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी, जिन्होंने फर्ज़ी और नकली डिग्रियों की मदद से बार (कानूनी पेशे) जैसे क्षेत्रों में प्रवेश किया है. ऐसे ही लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य सम्मानित पेशों में भी घुस आए हैं, इसलिए वे परजीवियों की तरह हैं.”

लेकिन तब तक कॉकरोच भारत की राजनीतिक बहस में शामिल हो चुका था. 16 मई को 30 साल के अभिजीत दीपके ने एक्स पर एक गूगल फॉर्म पोस्ट किया, जिसमें लोगों को कॉकरोच जनता पार्टी में रजिस्ट्रेशन के लिए आमंत्रित किया.

इमेज कैप्शन,सीजेपी के एक्स अकाउंट को भारत में बैन करने के बाद कॉकरोच इज़ बैक नाम से अकाउंट बनाया गया है
कुछ ही घंटों में अभिजीत को 5,000 से अधिक रजिस्ट्रेशन मिल गए और इंटरनेट पर शुरू हुआ एक मज़ाक धीरे-धीरे सार्वजनिक असंतोष, हास्य और राजनीतिक हताशा को अभिव्यक्त करने वाले एक अनौपचारिक संगठन में बदल गया.

अभिजीत इस समय अमेरिका में बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स कर रहे हैं. उन्होंने अपनी पार्टी को लेकर कहा, ”कॉकरोच युवाओं की उस असहमति के भाव को व्यक्त करती है, जो माननीय मुख्य न्यायाधीश के उस बयान के ख़िलाफ़ है, जिसमें उन्होंने युवाओं को कॉकरोच और परजीवी कहा था. भारत जैसे लोकतंत्र में यह स्वीकार्य नहीं था, जहाँ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षक माना जाता है. उन्होंने आलोचना करने के कारण युवाओं को अपमानित किया.”

देखते ही देखते भारत में सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी के फॉलोवर्स लाखों में हो गए. इंस्टाग्राम पर तो कॉकरोच जनता पार्टी के फॉलोवर्स दो करोड़ के क़रीब हो गए हैं जो सत्ताधारी बीजेपी के फॉलोवर्स से दोगुने हैं.सोशल मीडिया पर बनी कॉकरोच पार्टी की चर्चा भारत में आम लोगों की बातचीत में भी शुरू हो गई है. यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इस पर अच्छी ख़ासी चर्चा हो रही है.

ब्रिटिश न्यूज़ वेबसाइट द गार्डियन ने 21 मई को कॉकरोच जनता पार्टी पर विस्तार से एक कहानी प्रकाशित की है.

गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”कॉकरोच जनता पार्टी को लाखों भारतीय युवा अपनी हताशा और ग़ुस्से को व्यक्त करने के माध्यम के रूप में अपना रहे हैं. कॉकरोच को चुनाव चिह्न बनाने वाली एक पैरोडी राजनीतिक पार्टी ने हास्यास्पद और व्यंग्यात्मक हास्य को विरोध के माध्यम में बदलते हुए भारतीय सोशल मीडिया पर विस्फोटक लोकप्रियता हासिल कर ली है.”

”भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और राजनीतिक अव्यवस्था का मज़ाक उड़ाने वाले मीम्स और छोटे वीडियो सोशल मीडिया पर भर गए हैं. लाखों यूज़र्स अब कॉकरोच, एक ऐसा कीड़ा जो कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहने की क्षमता के लिए जाना जाता है, को संघर्ष और टिके रहने के प्रतीक के रूप में व्यंग्यात्मक अंदाज़ में अपना रहे हैं. इस ऑनलाइन आंदोलन का विस्तार असाधारण रूप से रहा है.

द गर्डियन से सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा , “यह सब जानबूझकर नहीं हुआ. इसमें लोगों की दिलचस्पी युवाओं के भीतर बढ़ती हताशा को दर्शाती है. असल में युवा बहुत निराश हैं. उनके पास अपनी बात कहने का कोई माध्यम नहीं है. वे सरकार से बेहद नाराज़ हैं.”

गार्डियन ने लिखा है, ”दीपके पहले आम आदमी पार्टी के साथ काम कर चुके हैं. आम आदमी पार्टी 2012 में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उभरी थी. दीपके कहते हैं, हमें समझना होगा कि पाँच साल पहले तक कोई भी मोदी या सरकार के ख़िलाफ़ खुलकर बोलने को तैयार नहीं था लेकिन अब समय बदल रहा है.”

क़तर के प्रसारक अल जज़ीरा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”सीजेपी के अभियान से जुड़ने वालों में कई बड़े राजनीतिक नाम भी शामिल हैं. इनमें पश्चिम बंगाल से टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा और कीर्ति आज़ाद शामिल हैं. इसी साल केंद्र सरकार की सेवा से सेवानिवृत्त हुए नौकरशाह आशीष जोशी भी उन शुरुआती लोगों में थे, जिन्होंने सोशल मीडिया पर इसके बारे में पढ़ने के बाद पार्टी में रजिस्ट्रेशन कराया.”

जोशी ने अल जज़ीरा से कहा, “पिछले एक दशक में देश में बहुत डर का माहौल रहा है. लोग खुलकर बोलने से डरते हैं. भारत इतना नफ़रत से भर गया है कि सीजेपी ताज़ी हवा के झोंके जैसी लगती है. युवाओं की तुलना कॉकरोच से करने का एक दूसरा पहलू भी है. कॉकरोच बेहद जुझारू जीव होते हैं. वे हर हाल में जीवित रहते हैं.”

अल जज़ीरा ने लिखा है, ”हाल के वर्षों में दक्षिण एशिया जेन-ज़ी आंदोलनों का बड़ा केंद्र बना है. श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश में युवा आंदोलनों ने सरकारों को गिरा दिया. दुनिया की सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश भारत भी कई समस्याओं से जूझ रहा है. हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ी है, लेकिन असमानता, बेरोज़गारी और महंगाई बढ़ी है. भारत हर साल 80 लाख से अधिक ग्रैजुएट तैयार करता है लेकिन उनमें बेरोज़गारी दर 29.1 प्रतिशत है.”

ब्रिटिश न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि महज़ पांच दिन पुराना एक समूह, जो जेन-ज़ी की चिंताओं को आवाज़ देता है, भारत में वायरल हो गया है.

रॉयटर्स ने लिखा है, ”यह इंस्टाग्राम पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से भी अधिक फॉलोअर्स हासिल कर चुका है. सीजेपी राजनीति, महंगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर हल्के व्यंग्य और हास्य के साथ चर्चा कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीजेपी जो ख़ुद को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बताती है के इंस्टाग्राम पर 90 लाख से भी कम फॉलोअर्स हैं जबकि सीजेपी के क़रीब दो करोड़ फॉलोवर्स हो चुके हैं.”

रॉयटर्स ने लिखा है, ”सीजेपी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर ग्राफिक्स और वीडियो पोस्ट किए जाते हैं, जिनमें मीडिया की स्वतंत्रता से लेकर संसद और मंत्रिमंडल की आधी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने जैसे मुद्दों तक पर चर्चा होती है. इसने हाल ही में नीट प्रवेश परीक्षा रद्द किए जाने के मुद्दे को भी उठाया, जिसका प्रश्न नपत्र लीक हो गया था और इससे लगभग 23 लाख छात्र प्रभावित हुए.”

रॉयटर्स ने लिखा है, ”भारत के युवाओं के भीतर बेचैनी इस सप्ताह प्रकाशित डीलॉइट ग्लोबल सर्वे में भी दिखाई दी.सर्वे में कहा गया कि भारत की जेन-ज़ी आबादी यानी 1995 से 2007 के बीच जन्मे युवा रोज़गार की कमी और बढ़ती महंगाई से बुरी तरह प्रभावित हुई है. सर्वे के अनुसार, “जेन-ज़ी में वित्तीय तनाव ज़्यादा है. बड़ी संख्या में युवा घर ख़रीदने की मुश्किलों और आर्थिक असुरक्षा की बात कर रहे हैं.”

भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है और यहां दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी भी रहती है. देश की 1.42 अरब आबादी में लगभग 65 प्रतिशत लोग 35 वर्ष से कम उम्र के हैं.सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में बेरोज़गारी दर 3.1 प्रतिशत थी. लेकिन 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग में यह दर कहीं अधिक, 9.9 प्रतिशत रही. इसमें शहरी क्षेत्रों में 13.6 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 8.3 प्रतिशत बेरोज़गारी दर्ज की गई.

यूएई की न्यूज़ वेबसाइट खलीज टाइम्स ने भी सीजेपी पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. खलीज टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”हालांकि इस आंदोलन का नाम किसी राजनीतिक पार्टी जैसा है, लेकिन फ़िलहाल ऐसा नहीं लगता कि यह पार्टी चुनाव लड़ेगी. क्या भारत अगला नेपाल या बांग्लादेश बनेगा? सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने अकाउंट पर पिन की गई पोस्ट में इसका जवाब नहीं में दिया है.

उन्होंने लिखा, “मैं यह बिल्कुल साफ़ कर देना चाहता हूँ कि इस तरह की तुलना करके भारत की जेन-ज़ी का अपमान या उसे कमतर मत आंकिए. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत के युवा बदलाव लाने के लिए असंवैधानिक रास्तों का सहारा नहीं लेंगे.

उन्होंने लिखा, “इस देश के युवा परिपक्व, जागरूक और राजनीतिक रूप से सचेत हैं. वे अपने संवैधानिक अधिकारों को समझते हैं और अपनी असहमति शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीक़ों से व्यक्त करेंगे.”

NATIONAL : कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले का विहिप ने किया स्वागत, पूरे देश में गौहत्या पर रोक की मांग की

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कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में पशु बलि पर रोक लगाने वाले सरकारी आदेश को सही ठहराया है। विश्व हिंदू परिषद ने इस फैसले का स्वागत करते हुए पूरे देश में गौहत्या पर प्रतिबंध की मांग की।

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार के पशु बलि से जुड़े आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया है। यह आदेश ईद-उल-अजहा के दौरान पशु बलि को नियंत्रित करने के लिए दिया गया था। विहिप ने उन राज्यों से भी कानून बनाने की अपील की है जहां अभी तक गौहत्या पर प्रतिबंध नहीं है।

विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने एक वीडियो संदेश में हाई कोर्ट के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश से गौहत्या का पाप हमेशा के लिए खत्म होना चाहिए। पश्चिम बंगाल सरकार के नोटिस में साफ कहा गया है कि बिना ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ के किसी भी जानवर की बलि नहीं दी जाएगी। इसमें गाय, बैल, बछड़े, सांड और भैंस जैसे जानवर शामिल हैं। पशु मालिकों को अधिकारियों से यह प्रमाण पत्र लेना होगा कि जानवर बलि के लिए फिट है।

जैन ने दावा किया कि कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि गौहत्या मुस्लिम समुदाय का कोई धार्मिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जिन राज्यों ने गौहत्या पर रोक लगाई है, उनका फैसला सही है। उन्होंने राज्यों से पूछा कि वे गौहत्या का समर्थन करते हैं या संविधान के साथ खड़े हैं। विहिप नेता ने कहा कि भारत के लगभग तीन-चौथाई हिस्से में गौहत्या पर पहले से ही रोक है। उन्होंने पूरे देश में इसे लागू करने की मांग दोहराई ताकि हिंदू भावनाओं और संविधान का सम्मान हो सके।

उन्होंने कुछ समुदाय विशेष नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि वे अपने समुदाय को उकसा रहे हैं। जैन के अनुसार, दुनिया में कहीं भी धर्म गौहत्या का आदेश नहीं देता, तो फिर भारत में ऐसा क्यों हो रहा है? उन्होंने इसे संविधान का उल्लंघन और हिंदू भावनाओं का अपमान बताया। विहिप और बजरंग दल ने कहा है कि वे कानून को पूरी तरह लागू करवाएंगे। बजरंग दल की टीमें ईद-उल-अजहा के दौरान निगरानी रखेंगी ताकि गौहत्या को रोका जा सके।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 13 मई को दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसमें बिना सर्टिफिकेट के बलि देने पर सजा की चेतावनी दी गई है। साथ ही, खुले सार्वजनिक स्थानों पर पशु बलि को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। हाई कोर्ट ने कहा कि यह नोटिस 2018 के एक पुराने आदेश को लागू करने के लिए है, इसलिए इस पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है।

NATIONAL : सीबीएसई के पुनर्मूल्यांकन में गड़बड़ी पर सख्त हुए धर्मेंद्र प्रधान, छात्रों की शिकायतों पर मांगी रिपोर्ट

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सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ियों और पेमेंट समस्याओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बोर्ड से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। छात्रों और अभिभावकों ने सर्वर डाउन, पेमेंट फेल और स्कैन कॉपी में दिक्कतों की शिकायत की थी। सीबीएसई ने आवेदन की तारीख 24 मई तक बढ़ा दी है। बोर्ड ने भरोसा दिलाया है कि छात्रों के शैक्षणिक हितों की पूरी सुरक्षा की जाएगी।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में सामने आई तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार सख्त हो गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए सीबीएसई से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। छात्रों ने पोर्टल ठप होने, पेमेंट फेल होने और उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी में दिक्कतों की शिकायत की थी। बोर्ड परीक्षा के परिणाम आने के बाद बड़ी संख्या में छात्र पुनर्मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिका सत्यापन के लिए आवेदन कर रहे हैं। इसी दौरान कई तकनीकी समस्याएं सामने आईं, जिससे छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई।

क्या पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ी हुई?
सूत्रों के मुताबिक शिक्षा मंत्री ने सीबीएसई अधिकारियों से पूछा है कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान सर्वर डाउन क्यों हुआ और पेमेंट गेटवे में दिक्कतें कैसे आईं। छात्रों का कहना था कि आवेदन करते समय वेबसाइट बार-बार बंद हो रही थी। कई लोगों का भुगतान कट गया लेकिन आवेदन पूरा नहीं हुआ। कुछ छात्रों ने यह भी शिकायत की कि उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी धुंधली थी या कुछ पन्ने गायब थे। कई छात्रों ने कॉपियों में उत्तरों के गलत मूल्यांकन और बिना जांचे जवाबों को लेकर भी सवाल उठाए। शिक्षा मंत्रालय ने संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा है कि तकनीकी तैयारी में कहां कमी रह गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

सीबीएसई ने छात्रों और अभिभावकों को क्या भरोसा दिया?
सीबीएसई ने बयान जारी कर कहा है कि बोर्ड छात्रों के शैक्षणिक हितों की पूरी सुरक्षा करेगा। बोर्ड के अनुसार इस साल ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम प्रणाली के तहत 98.6 लाख से ज्यादा उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद छात्रों को स्कैन कॉपी लेने, सत्यापन कराने और री-इवैल्यूएशन का मौका दिया गया। बोर्ड ने माना कि बहुत कम समय में भारी संख्या में आवेदन आने के कारण पोर्टल पर दबाव बढ़ गया था। इसी वजह से कुछ समय के लिए तकनीकी दिक्कतें आईं। हालांकि बोर्ड का कहना है कि सभी शिकायतों पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुधार के कदम उठाए जा रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों से घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से की जा रही है।

आवेदन की तारीख क्यों बढ़ाई गई?
सीबीएसई ने कहा कि तकनीकी दिक्कतों को देखते हुए री-इवैल्यूएशन और सत्यापन के आवेदन की अंतिम तारीख एक दिन बढ़ाकर 24 मई कर दी गई है। इसके अलावा जिन छात्रों को अभी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी नहीं मिली है, उनके लिए पोर्टल आखिरी कॉपी भेजे जाने के बाद भी दो दिन तक खुला रहेगा। बोर्ड का कहना है कि इसका मकसद किसी भी छात्र को नुकसान से बचाना है। इससे पहले भी ओएसएम प्रणाली को लेकर कुछ छात्रों और अभिभावकों ने चिंता जताई थी, जिसके बाद बोर्ड ने पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू की थी।

फीस में बदलाव से छात्रों को क्या राहत मिली?
सीबीएसई ने इस साल फीस ढांचे में भी बड़ा बदलाव किया है। अब छात्र सिर्फ 100 रुपये देकर अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी प्राप्त कर सकते हैं, जबकि पहले इसके लिए 700 रुपये देने पड़ते थे। इसी तरह उत्तर पुस्तिका सत्यापन की फीस 500 रुपये से घटाकर 100 रुपये कर दी गई है। वहीं, पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रति प्रश्न 25 रुपये तय किए गए हैं। बोर्ड का कहना है कि फीस कम करने का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा छात्रों को पारदर्शी प्रक्रिया का लाभ देना है। हालांकि तकनीकी दिक्कतों ने इस प्रक्रिया को प्रभावित किया, लेकिन अब सरकार और बोर्ड दोनों इसे सुधारने में जुट गए हैं।

NATIONAL : भारतीय वायुसेना की शान ने रचा नया इतिहास: सूर्यकिरण टीम के 30 साल पूरे, बीदर में होगा भव्य समारोह

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भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम 26 मई को अपने 30 साल पूरे करने जा रही है। कर्नाटक के बीदर में विशेष समारोह आयोजित होगा। टीम ने अब तक देश-विदेश में 800 से ज्यादा हवाई शो किए हैं। आधुनिक हॉक मार्क-132 विमानों से लैस यह टीम भारतीय वायुसेना की ताकत और अनुशासन का प्रतीक बन चुकी है।

भारतीय वायु सेना की प्रतिष्ठित सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम अपने शानदार सफर के 30 साल पूरे करने जा रही है। देश और दुनिया के आसमान में अपनी हैरतअंगेज कलाबाजियों से पहचान बनाने वाली यह टीम 26 मई को कर्नाटक के बीदर एयरबेस में विशेष समारोह के साथ अपना स्थापना दिवस मनाएगी। वायुसेना की यह टीम पिछले तीन दशकों से भारतीय वायुसेना की ताकत, अनुशासन और तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करती रही है। सूत्रों के अनुसार समारोह में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी हिस्सा ले सकते हैं और संभव है कि वह खुद विमान उड़ाते हुए नजर आएं।

सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम का गठन 27 मई 1996 को कर्नाटक के बीदर स्थित एयरफोर्स स्टेशन में किया गया था। शुरुआत में टीम ने किरण मार्क-2 विमानों के साथ उड़ान भरना शुरू किया। इसके बाद सितंबर 1996 में कोयंबटूर में टीम ने अपना पहला सार्वजनिक हवाई प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। साल 2006 में इस टीम को औपचारिक रूप से 52 स्क्वाड्रन ‘शार्क्स’ के रूप में पहचान मिली। वायुसेना के लिए यह टीम केवल प्रदर्शन का हिस्सा नहीं रही, बल्कि देश की हवाई ताकत और पेशेवर क्षमता का प्रतीक बन गई।

साल 2015 में सूर्यकिरण टीम ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा बनाए गए आधुनिक हॉक मार्क-132 विमानों को अपने बेड़े में शामिल किया। इन विमानों के आने के बाद टीम की गति, संतुलन और प्रदर्शन क्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिला। इन जेट विमानों की मदद से टीम और ज्यादा सटीक तथा जटिल हवाई करतब दिखाने लगी। यही कारण है कि सूर्यकिरण टीम आज दुनिया की चुनिंदा बेहतरीन एरोबेटिक टीमों में गिनी जाती है।

बीते 30 वर्षों में सूर्यकिरण टीम 800 से अधिक हवाई शो कर चुकी है। चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर, लाओस, मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में टीम ने अपने प्रदर्शन से दुनिया को प्रभावित किया। हाल ही में चेन्नई तट पर हुए एयर शो को देखने रिकॉर्ड 17 लाख लोग पहुंचे थे। वहीं साल 2026 में टीम ने पहली बार हिमालयी क्षेत्र के आसमान में भी अपने करतब दिखाए। सूर्यकिरण टीम को भारतीय वायुसेना का “हवाई राजदूत” भी कहा जाता है क्योंकि यह टीम हर प्रदर्शन में देश की शक्ति और गौरव का संदेश देती है।

NATIONAL : कोलकाता पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, आज ही पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात

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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो आज से भारत के दौरे पर पहुंच गए हैं। वे ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी के साथ 26 मई को नई दिल्ली में होने वाली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे। यह उनकी पहली भारत यात्रा है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो आज से 26 मई तक भारत के चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर पहुंच गए हैं। विदेश मंत्री के रूप में यह उनकी पहली भारत यात्रा है, जिसे भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा में ऊर्जा सुरक्षा एक प्रमुख विषय रहेगा। क्वॉड विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए आ रहे मार्को रूबियो के एजेंडे में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझेदारी जैसे विषय सबसे अहम रहेंगे। इस दौरान आधुनिक रक्षा उपकरणों की तकनीक के हस्तांतरण पर चर्चा होने की संभावना भी है.

भारत रवाना होने से पहले वॉशिंगटन में मीडिया से बातचीत के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि भारत के साथ अमेरिका ऊर्जा, व्यापार और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी, जिनका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करना है।

ऊर्जा सहयोग बढ़ाने के मौकों पर होगी चर्चा- वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच दोनों देश आपूर्ति सुरक्षा और सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा करेंगे। हालांकि किसी नई नीति या बड़े समझौते की आधिकारिक घोषणा फिलहाल नहीं की गई है।अमेरिकी दूतावास का संदेश- अमेरिकी दूतावास ने इस यात्रा को लेकर एक्स पर लिखा कि मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत के लिए साझेदारी इस दौरे का केंद्रीय संदेश है। क्षेत्रीय सुरक्षा से लेकर महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने तक, रुबियो की भारत यात्रा क्वॉड साझेदारी का महत्व रेखांकित करती है।चार शहरों का दौरा करेंगे रूबियो- अपने प्रवास के दौरान मार्को रूबियो कोलकाता, आगरा, जयपुर और नई दिल्ली का दौरा करेंगे। यह दौरा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मार्को रूबियो आज सुबह कोलकाता पहुंचें हैं, वहां एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वह नई दिल्ली आएंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर एक पोस्ट में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के कोलकाता पहुंचने की जानकारी दी है।

विदेश विभाग की जानकारी के अनुसार रूबियो अपने दौरे के दौरान राजधानी दिल्ली सहित भारत के प्रमुख शहरों का दौरा करेंगे और वरिष्ठ नेतृत्व के साथ विभिन्न रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत करेंगे। रूबियो के इस दौरे को द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रूबियो स्वीडन में नाटो के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के बाद भारत रवाना हुए हैं। उन्होंने स्वीडन रवाना होने से पहले कहा था कि वॉशिंगटन भारत के साथ ऊर्जा साझेदारी को काफी बड़े पैमाने पर बढ़ाने का इच्छुक है। अमेरिका उतनी ऊर्जा की आपूर्ति करने के लिए तैयार है, जितनी नई दिल्ली खरीदने को तैयार है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक सहयोग मजबूत करने के लिए भारत 26 मई को क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा। विदेश मंत्रालय ने बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर के निमंत्रण पर ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आ रहे हैं। मंत्रालय के मुताबिक यह बैठक स्वतंत्र और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र का साझा नजरिया आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगी। बैठक में पिछली क्वॉड बैठकों में लिए गए निर्णयों और सहयोग बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श भी किया जाएगा। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के विदेश मंत्री जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। सभी नेताओं के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी शिष्टाचार भेंट किए जाने की संभावना है।

यह बैठक वैश्विक और क्षेत्रीय भू-राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों के बीच मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत का संकल्प दोहराना इस क्षेत्र में चीन के प्रभाव के बीच शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है। मुख्य बैठक के इतर होने वाली द्विपक्षीय वार्ताएं भारत को अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने रणनीतिक, व्यापारिक और रक्षा संबंधों को और गहरा करने का मौका देंगी। राजधानी में इस बैठक का आयोजन वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका को मजबूत करता है।

NATIONAL : देश में फैक्ट्रियां लगाने का सरकार का मास्टर प्लान: ‘भव्य योजना’ के नियम जारी, बनेंगे 100 हाई-टेक इंडस्ट्रियल पार्क

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केंद्र सरकार के डीपीआईआईटी (DPIIT) विभाग ने देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए ‘भव्य योजना’ (BHAVYA Scheme) के दिशानिर्देश जारी किए हैं. इस योजना के तहत अगले 6 सालों (2026-27 से 2031-32) में ₹33,660 करोड़ के भारी-भरकम बजट से देश भर में 100 अत्याधुनिक इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएंगे.

भारत को दुनिया का सबसे बड़ा और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग हब (उत्पादन केंद्र) बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक योजना की शुरुआत की है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले डीपीआईआईटी (DPIIT-उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग) ने आज (23 मई 2026) ‘भव्य योजना’ (BHAVYA Scheme) को लागू करने के लिए दिशानिर्देश (Operational Guidelines) जारी कर दिए हैं.

इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य देश भर में निवेश के लिए पूरी तरह तैयार (Investment-Ready) और विश्व स्तरीय इंडस्ट्रियल पार्क बनाना है. इस योजना को ‘मेक इन इंडिया’ और ‘पीएम गति शक्ति’ के सपनों को सच करने के लिए तैयार किया गया है. आइए इस पूरी योजना की हर छोटी-बड़ी बात को समझते हैं.

भव्य योजना (BHAVYA) की सबसे मुख्य बातें
इस योजना के स्वरूप और नियमों को नीचे दिए गए मुख्य बिंदुओं के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:

कुल बजट और समय सीमा: इस केंद्रीय योजना के लिए कुल ₹33,660 करोड़ का वित्तीय बजट तय किया गया है. इसके तहत साल 2026-27 से 2031-32 के बीच (6 सालों में) पूरे देश में 100 इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जाएंगे.

पहला चरण (Phase 1): शुरुआत में पहले चरण के तहत 50 इंडस्ट्रियल पार्कों को चुना जाएगा. इनका चुनाव राज्यों के बीच एक निष्पक्ष कम्पटीशन (Challenge-Based Competitive Selection) के आधार पर होगा.

जमीन की जरूरी सीमा (Land Requirement): सामान्य राज्यों (मैदानी इलाकों) के लिए पार्क का आकार कम से कम 100 एकड़ होना जरूरी है. पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर (North-East) के राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) और छोटे राज्यों के लिए यह सीमा कम से कम 25 एकड़ रखी गई है. योजना के तहत 1000 एकड़ तक के बड़े पार्कों पर भी विचार किया जा सकता है.

इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यहां आने वाले निवेशकों और कंपनियों को फैक्ट्री शुरू करने के लिए कोई कागजी या बुनियादी ढांचा खुद नहीं बनाना होगा. यहां सब कुछ पहले से तैयार (Plug-and-Play) मिलेगा. इन पार्कों में ये वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं दी जाएंगी:

राज्यों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों को बहुत कड़े और पारदर्शी पैमानों पर परखा जाएगा. पार्कों का चुनाव करते समय देखा जाएगा कि वहां मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी (सड़क, रेल और पोर्ट से जुड़ाव) कैसी है, जमीन कितनी उपयुक्त है, डिजिटल गवर्नेंस की क्या तैयारी है और लंबे समय तक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना यह प्रोजेक्ट कैसे चलेगा. इसमें नए (Greenfield) और पुराने लेकिन पात्र (Brownfield) दोनों तरह के पार्कों को शामिल किया जा सकता है.

भव्य योजना के तहत बनने वाले हर एक इंडस्ट्रियल पार्क को चलाने और संभालने के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत एक विशेष कंपनी बनाई जाएगी, जिसे स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) कहा जाता है. यह एसपीवी ही पार्क की प्लानिंग, विकास, मैनेजमेंट, नए निवेशकों को जमीन सौंपने और भविष्य में पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर की देखरेख के लिए जिम्मेदार होगी. सरकार इस एसपीवी में अपनी तरफ से इक्विटी (पूंजी) के रूप में वित्तीय मदद देगी, जो कि एसपीवी को ट्रांसफर की गई जमीन की वैल्यू और काम के माइलस्टोन (लक्ष्यों) को पूरा करने पर निर्भर करेगी.

इस योजना में देश के बड़े प्राइवेट डेवलपर्स (निजी कंपनियों) को भी शामिल होने का पूरा मौका दिया गया है. वे भी प्रोजेक्ट-स्पेसिफिक एसपीवी के जरिए इन पार्कों को विकसित कर सकते हैं, बशर्ते वे पारदर्शिता और जवाबदेही के कड़े सरकारी नियमों का पालन करें. इसके अलावा, भव्य योजना को केंद्र और राज्य सरकार की अन्य बड़ी योजनाओं (जैसे लॉजिस्टिक्स, स्किलिंग और रिन्यूएबल एनर्जी मिशन) के साथ जोड़ा (Convergence) जाएगा ताकि पैसों और संसाधनों की बचत हो सके.

NICDC संभालेगी कमान: नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NICDC) को इस योजना की मुख्य प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी (PMA) बनाया गया है, जो पूरे काम को लागू और मॉनिटर करेगी.GIS से होगी ट्रैकिंग: पार्कों के निर्माण की प्रगति को सैटेलाइट और GIS-बेस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए लाइव ट्रैक किया जाएगा.कमेटी रखेगी नजर: समय-समय पर ऑडिट होगा और डीपीआईआईटी (DPIIT) के सचिव की अध्यक्षता वाली नेशनल लेवल स्टीयरिंग कमेटी पूरे प्रोजेक्ट की सर्वोच्च निगरानी करेगी.

‘भव्य योजना’ के इन नियमों का जारी होना भारत के औद्योगिक इतिहास में एक बहुत बड़ा कदम है. इससे विदेशी कंपनियों को भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने के लिए एक ऐसा बेंचमार्क इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा जो चीन या वियतनाम को कड़ी टक्कर दे सकता है. जब देश में 100 नए औद्योगिक शहर जैसे पार्क बनकर तैयार होंगे, तो इससे न केवल हमारी घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए और शानदार अवसर पैदा होंगे.

NATIONAL : ‘भविष्य के युद्धों में AI, रोबोटिक्स और साइबर सिस्टम की होगी मुख्य भूमिका’, शिरडी में बोले CDS अनिल चौहान

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CFD अनिल चौहान ने शिर्डी के NIBE डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन के दौरान अपनी बात रखी. उन्होंने डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और टेक्निकल इनोवेशन के लिए उभरते हुए केंद्र के तौर पर बताया. नई दिल्ली में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान ने शनिवार को भविष्य में होने वाले युद्ध को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि भविष्य में युद्ध कई मोर्चों पर लड़े जाएंगे. इनमें जमीन, हवाल, समुद्र के अलावा साइबर स्पेस और कॉन्गिटिव वॉरफेयर शामिल है.

उन्होंने शिर्डी के NIBE डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन के दौरान अपनी बात रखी. उन्होंने शहर को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और टेक्निकल इनोवेशन के लिए उभरते हुए केंद्र के तौर पर बताया.

चौहान ने उद्घाटन के दौरान संबोधित करते हुए कहा कि मॉर्डन वॉरफेयर तेजी से पारंपरिक मैनपावर और प्लेटफॉर्म ऑपरेशंस से आगे बढ़ रहे हैं. अब एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन और साइबर सिस्टम जैसी टेक्नोलॉजी नए मोर्चों को आकार दे रही हैं.

उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध बहुक्षेत्रीय होंगे. जहां जमीन, समुद्र, साइबर स्पेस, कॉन्गिटिव वॉरफेयर मिलकर काम करेंगे. यानी भविष्य के युद्ध भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहेंगे. युद्ध आने वाले समय में सूचना नेटवर्क, डिजिटल इकोसिस्टम, साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा वातावरण भी इस युद्ध क्षेत्र का हिस्सा बन जाएंगे.

जनरल चौहान ने कहा है कि भविष्य के संघर्षों में तकनीकी इनोवेशन अहम भूमिका निभाएंगे. साथ ही स्पीड और अनुकूलन क्षमता पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सिस्टम, ड्रोन, ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म, अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी, सटीक मार करने वाले हथियार और सूचना के क्षेत्र में बढ़त भविष्य के युद्धक्षेत्र को एक निर्णायक रूप दे रहे हैं.

इसके अलावा उन्होंने कहा कि शिरडी में जो लंबे समय से आध्यात्मिकता और आस्था से जुड़ा रहा है. अब इंडस्ट्रियल और डिफेंस डेवलपमेंट, मॉर्डन टेक्नोलॉजी का अद्भुत संगम बनकर उभरा है.

उन्होंने कहा कि भारत का डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन 1.27 लाख करोड़ तक पहुंच गया है. वहीं डिफेंस इम्पोर्ट 38 हजार करोड़ रुपए को पार कर गया है. इससे भारत में बने डिफेस प्रोडक्ट 100 से अधिक देशों को निर्यात किए जा रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने युवा इंजीनियर्स और इनोवेटर्स से विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया है. इस कार्यक्रम में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस भी शामिल हुए.

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