Monday, March 16, 2026
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Bihar News : छपरा मामले को लेकर पुलिस पर भड़के पप्पू यादव, कहा- ‘पीड़िता का चरित्र हनन बर्दाश्त नहीं’

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छपरा में एक बेटी के साथ हुई अमानवीय घटना पर सियासी घमासान मचा है. पप्पू यादव ने बिहार पुलिस पर पीड़िता और उसके परिवार को कलंकित करने का आरोप लगाया है. बिहार के छपरा में एक बेटी के साथ हुई भयावह और अमानवीय घटना को लेकर सियासी पारा गरमा गया है. इस जघन्य अपराध के बाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. सांसद पप्पू यादव ने इस मामले में बिहार पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए उस पर मृतक बेटी और उसके पीड़ित परिजनों को कलंकित करने का संगीन आरोप लगाया है.

पप्पू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने पुलिस प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि वह अपनी इस शर्मनाक हरकत से बाज आए. अपने बयान में पप्पू यादव ने बिहार पुलिस पर एक पैटर्न के तहत काम करने का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा, “बिहार पुलिस की यह आदत सी हो गई है कि जब भी राज्य में किसी बेटी पर जुल्म या दरिंदगी होती है, तो पुलिस न्याय दिलाने के बजाय उल्टे पीड़िता के चरित्र पर ही सवाल उठाने लगती है.” उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए न्याय की गुहार लगा रहे पीड़ित परिजनों को ही कटघरे में खड़ा कर देता है, ताकि मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके.

पप्पू यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन के इस असंवेदनशील और पीड़ित-विरोधी रवैये को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने इस अन्याय के खिलाफ मजबूती से लड़ने का ऐलान किया है.

छपरा की इस घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है और महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है. पप्पू यादव का यह आरोप इस ओर इशारा करता है कि पुलिस निष्पक्ष जांच करने के बजाय अक्सर ‘विक्टिम ब्लेमिंग’ (Victim Blaming) का सहारा लेती है. उनके इस कड़े रुख के बाद स्पष्ट है कि अगर पुलिस ने अपनी जांच की दिशा नहीं बदली और पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा नहीं दिलाया, तो वे इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतर सकते हैं. अब देखना यह है कि पुलिस मुख्यालय इन गंभीर आरोपों पर क्या सफाई देता है.

Uttarakhand News : दोगुनी रफ्तार से पिघल रहा है हिमालय! सदी के अंत तक 68 फीसदी बर्फ गायब होने का खतरा

हिंदुकुश-हिमालय क्षेत्र में तापमान दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है. नए शोध के मुताबिक सदी के अंत तक करोड़ों लोगों के पानी पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है. हिमालय को अक्सर एशिया का जल टॉवर कहा जाता है. यही पर्वत श्रृंखला करोड़ों लोगों के लिए पानी का सबसे बड़ा स्रोत है. वैज्ञानिक इसे “तीसरा ध्रुव” भी कहते हैं क्योंकि यहां दुनिया के ध्रुवीय इलाकों के बाद सबसे ज्यादा बर्फ और ग्लेशियर मौजूद हैं. लेकिन अब यही हिमालय तेजी से बदलते मौसम और बढ़ते तापमान की वजह से गंभीर खतरे में है.

मिजोरम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विश्वंभर प्रसाद सती और सुरजीत बनर्जी के एक ताजा शोध ने इस खतरे की गंभीरता को उजागर किया है. अंतरराष्ट्रीय जर्नल अर्थ साइंस रिव्यूज में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक हिंदुकुश-हिमालय क्षेत्र में तापमान दुनिया के औसत तापमान से लगभग दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो इस सदी के अंत तक हिमालय की लगभग 68 प्रतिशत बर्फ हमेशा के लिए गायब हो सकती है.

शोध के मुताबिक हिमालय में बदलाव की शुरुआत पिछले चार दशकों में तेजी से दिखाई देने लगी है. 1980 से 2020 के बीच हिंदुकुश-हिमालय क्षेत्र का तापमान प्रति दशक औसतन 0.2 से 0.3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा है. यह बढ़ोतरी वैश्विक औसत से करीब दोगुनी मानी जा रही है. वैज्ञानिकों ने पाया कि पूर्वी हिमालय के इलाकों में तापमान बढ़ने की रफ्तार और भी ज्यादा है. इसके साथ ही बारिश के पैटर्न में भी बड़ा बदलाव आया है. कहीं अत्यधिक बारिश हो रही है तो कहीं लंबे समय तक सूखा पड़ रहा है. इन बदलावों का सीधा असर ग्लेशियरों पर पड़ रहा है. कई ग्लेशियर तेजी से पीछे हट रहे हैं और बर्फ की परत हर साल पतली होती जा रही है.

शोध में भविष्य को लेकर बेहद चिंताजनक अनुमान भी सामने आया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो वर्ष 2100 तक हिमालय का करीब 68 प्रतिशत हिमावरण समाप्त हो सकता है.

काराकोरम क्षेत्र, जिसे अभी तक अपेक्षाकृत स्थिर माना जाता था, वहां भी करीब 26 प्रतिशत बर्फीला आवरण खत्म होने की आशंका जताई गई है. इसका मतलब यह है कि आने वाले दशकों में हिमालय का स्वरूप ही बदल सकता है. यह सिर्फ पहाड़ों की खूबसूरती का सवाल नहीं है. हिमालय की बर्फ एशिया की कई बड़ी नदियों के लिए जीवनरेखा है. अगर बर्फ कम हुई तो इन नदियों का जल प्रवाह भी प्रभावित होगा. हिमालय से निकलने वाली सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, तारिम और अमू दरिया जैसी बड़ी नदियां करोड़ों लोगों के जीवन का आधार हैं. इन नदियों के सालाना प्रवाह का लगभग 33 से 42 प्रतिशत हिस्सा ग्लेशियरों और हिमावरण के पिघलने से आता है.

अध्ययन के अनुसार इन नदियों पर करीब 86.9 करोड़ लोग सीधे तौर पर निर्भर हैं. अभी ग्लेशियर तेजी से पिघलने के कारण कुछ जगहों पर नदियों में पानी बढ़ता हुआ दिख रहा है. मानसून से पहले ही पानी का बहाव तेज हो जाता है और कई बार बाढ़ का खतरा पैदा हो जाता है.

लेकिन वैज्ञानिक इसे राहत नहीं, बल्कि आने वाले संकट की चेतावनी मानते हैं. जब ग्लेशियर ही खत्म हो जाएंगे तो नदियों में पानी का स्थायी स्रोत खत्म हो जाएगा. तब कई नदियां मौसमी बन सकती हैं और इससे पानी, खेती और बिजली उत्पादन पर गहरा असर पड़ेगा. बढ़ते तापमान की वजह से हिमालय में एक और खतरा तेजी से बढ़ रहा है. ग्लेशियरों के पिघलने से बड़ी-बड़ी हिमनदीय झीलें बन रही हैं. इन झीलों के अचानक फटने से आने वाली बाढ़ को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी जीएलओएफ कहा जाता है.

ऐसी बाढ़ बिना चेतावनी के आती है और कुछ ही मिनटों में भारी तबाही मचा सकती है. उत्तराखंड समेत कई हिमालयी राज्यों में इसके उदाहरण पहले भी सामने आ चुके हैं. इसके अलावा पर्माफ्रॉस्ट यानी जमीन के अंदर जमी रहने वाली बर्फीली परत भी पिघलने लगी है. शोध के मुताबिक यह परत हर साल 2 से 23 सेंटीमीटर तक गहरी पिघल रही है. इससे पहाड़ी ढलानों की मजबूती कमजोर पड़ रही है और भूस्खलन तथा जमीन धंसने की घटनाएं बढ़ रही हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हिंदुकुश-हिमालय क्षेत्र की पूरी जल प्रणाली अस्थिर हो सकती है. इसका असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहेगा. भारत, पाकिस्तान, चीन, नेपाल और बांग्लादेश जैसे कई देश इससे प्रभावित होंगे. वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर तुरंत और ठोस कदम उठाने की जरूरत है. हिमालय सदियों से एशिया की जीवनरेखा रहा है, लेकिन अब उसकी बर्फ तेजी से पिघल रही है और यह पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी है.

Business : शेयर बाजार में बढ़ सकता है उतार-चढ़ाव, वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी नजर.

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव इस सप्ताह शेयर बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे. आइए जानते हैं, मार्केट की चाल के विषय में. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव इस सप्ताह शेयर बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे. विश्लेषकों ने कहा कि इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर के फैसले और मुद्रास्फीति के आंकड़े भी बाजार को प्रभावित करेंगे. आइए जानते हैं, 16 मार्च से शुरू हो रहे सप्ताह में मार्केट की चाल के विषय में.

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के शोध उपाध्यक्ष अजित मिश्रा ने कहा कि यह सप्ताह घरेलू और वैश्विक स्तर पर कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों और आंकड़ों से भरा है. उन्होंने बताया कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर विशेष नजर रहेगी, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों पर उनका प्रभाव बाजार की समग्र दिशा को प्रभावित कर सकता है. घरेलू मोर्चे पर, बाजार थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति, व्यापार संतुलन के आंकड़े और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे प्रमुख व्यापक आर्थिक संकेतकों पर नजर रखेंगे.

लाइवलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक और शोध विश्लेषक हरिप्रसाद के. ने बताया कि वैश्विक जोखिम धारणा बिगड़ने, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के कारण भारतीय बाजार पिछले सप्ताह भारी दबाव में रहे. पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 4,354.98 अंक या 5.51 प्रतिशत टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी में 1,299.35 अंक या 5.31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

पिछले महीने 27 फरवरी से अब तक सेंसेक्स 6,723.27 अंक या 8.27 प्रतिशत नीचे आ चुका है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी गतिरोध वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति को सख्त बना सकता है, जिससे एशिया में मुद्रास्फीति बढ़ सकती हैं. एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा कि आने वाले सप्ताह में काफी उतार-चढ़ाव रहने की उम्मीद है. पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण पोत परिवहन में होने वाली किसी भी देरी के चलते भारत जैसे उभरते बाजारों में वैश्विक पूंजी आवंटन पर असर पड़ सकता है.

विदेशी निवेशकों ने मार्च के पहले पखवाड़े में घरेलू शेयरों से लगभग 52,704 करोड़ रुपये निकाले हैं. इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में तनाव, रुपये की कमजोरी और भारतीय वृद्धि दर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का प्रभाव है. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि इस सप्ताह निवेशकों की नजर यूरो क्षेत्र के सीपीआई आंकड़ों, बैंक ऑफ इंग्लैंड (बीओई) और यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ईसीबी) के नीतिगत फैसलों तथा अमेरिकी नौकरियों के आंकड़ों पर भी रहेगी.

Sports : बुमराह पर छक्के लगाकर बनाई डॉक्यूमेंट्री, अब विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़ साहिबजादा फरहान ने लिखी किताब?

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एशिया कप में जसप्रीत बुमराह पर छक्के लगाने वाले साहिबजादा फरहान ने डॉक्यूमेंट्री बनाई थी. अब सुनने में आ रहा है कि कोहली का रिकॉर्ड तोड़ने पर उन्होंने किताब लिख दी है. पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज साहिबजादा फरहान (Sahibzada Farhan) 2026 टी20 वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे. उन्होंने 6 मैचों की 6 पारियों में 76.60 की औसत और 160.25 के स्ट्राइक रेट से 383 रन स्कोर किए, जिसमें 2 शतक और 2 अर्धशतक शामिल रहे. इसके साथ पाक बल्लेबाज ने विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़ा था.

अब टूर्नामेंट खत्म होने के बाद दावा किया जा रहा है कि कोहली का रिकॉर्ड तोड़ने के उपलक्ष्य में साहिबजादा फरहान ने किताब लिख डाली, जो जल्द ही रिलीज भी होने वाली है. बताते चलें कि 2025 एशिया कप में जसप्रीत बुमराह पर कुछ छक्के लगाने के बाद पाक बल्लेबाज ने एक डॉक्यूमेंट्री बना डाली थी. तो आइए जानते हैं कि किताब लिखने की हकीकत क्या है.

तो आपको बता दें कि अभी सिर्फ सोशल मीडिया पर साहिबजादा फरहान के किताब लिखने की बात का दावा किया जा रहा है. किताब का टाइटल ‘हीरो इन मेकिंग’ दिया गया है. इसके अलावा नीचे ‘सिंगल टी20 वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा रन’ लिखा है. गौर करने वाली बात यह है कि इस किताब को लेकर किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है. बात करें कोहली के रिकॉर्ड की, तो उन्होंने 2014 के टी20 विश्व कप में 319 रन बनाए थे. 12 साल के बाद यानी 2026 के टी20 वर्ल्ड कप में साहिबजादा फरहान ने यह रिकॉर्ड तोड़ते हुए 383 रन स्कोर किए. हालांकि पाक बल्लेबाज के बाद संजू सैमसन और टिम सीफर्ट भी कोहली से आगे निकल गए हैं.

टी20 वर्ल्ड कप के सिंगल एडीशन में सबसे ज्यादा रन

साहिबजादा फरहान- 383 रन

टीम सीफर्ट- 326 रन

संजू सैमसन- 321 रन

विराट कोहली- 319 रन

तिलकरत्ने दिलशान- 317 रन

Trending : 4 महीने पहले हुई थी डॉग बाइट, अब कुत्ते की तरह भौंक रहा ये बच्चा

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एक बच्चा बेहद असामान्य व्यवहार करता हुआ दिखाई देता है. बताया जा रहा है कि उसकी उम्र करीब 12 साल है. वीडियो में कुछ लोग उसे मजबूती से पकड़कर एंबुलेंस की ओर ले जाते दिखाई दे रहे हैं.

सोशल मीडिया की दुनिया में हर दिन कोई ना कोई ऐसा वीडियो सामने आ जाता है जो लोगों को हैरान भी करता है और डरा भी देता है. इन दिनों एक ऐसा ही वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें करीब 12 साल का एक बच्चा अजीब व्यवहार करता दिखाई दे रहा है. वीडियो में दावा किया जा रहा है कि बच्चे को चार महीने पहले कुत्ते ने काट लिया था और उसे सही इलाज नहीं मिला, जिसके बाद अब वह रेबीज का शिकार हो गया है. वीडियो में बच्चा कुत्ते की तरह भौंकता हुआ दिखाई देता है और आसपास मौजूद लोग उसे पकड़कर एंबुलेंस में बैठाने की कोशिश कर रहे हैं.

एक बच्चा बेहद असामान्य व्यवहार करता हुआ दिखाई देता है. बताया जा रहा है कि उसकी उम्र करीब 12 साल है. वीडियो में कुछ लोग उसे मजबूती से पकड़कर एंबुलेंस की ओर ले जाते दिखाई दे रहे हैं. इस दौरान बच्चा जोर-जोर से चिल्लाता और भौंकने जैसी आवाजें निकालता नजर आता है. आसपास मौजूद लोग उसे शांत कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वह लगातार उग्र व्यवहार करता दिख रहा है. यही वजह है कि यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है.

चार महीने पहले बच्चे को एक कुत्ते ने काट लिया था. कहा जा रहा है कि उस समय उसे केवल दो इंजेक्शन ही लगाए गए थे, जबकि रेबीज से बचाव के लिए पूरा वैक्सीनेशन कोर्स जरूरी होता है. दावा यह भी किया जा रहा है कि अधूरा इलाज होने की वजह से अब बच्चे में रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगे हैं और इसी कारण वह कुत्ते की तरह भौंक रहा है. हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही एबीपी लाइव इस वीडियो की पुष्टि करता है.

कितना खतरनाक होता है रेबीज

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक रेबीज एक बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी है जो आमतौर पर संक्रमित जानवर के काटने से फैलती है. यदि समय पर और पूरा इलाज न किया जाए तो यह बीमारी बेहद खतरनाक साबित हो सकती है. डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते या किसी भी जानवर के काटने के बाद तुरंत घाव को साबुन और पानी से साफ करना चाहिए और जल्द से जल्द एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए.

Sports : पापा बनने वाले हैं टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव, बेबी शॉवर

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सूर्यकुमार यादव पिता बनने वाले हैं. उनकी पत्नी देविशा शेट्टी के बेबी शॉवर का वीडियो वायरल हो रहा है. टी20 वर्ल्ड कप के दौरान ही कहा जा रहा था कि देविशा प्रेग्नेंट हैं. सूर्यकुमार यादव पिता बनने वाले हैं, उनकी पत्नी देविशा शेट्टी प्रग्नेंट है. उनके बेबी शॉवर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. टी20 वर्ल्ड कप के दौरान खबर आई थी कि सूर्यकुमार की पत्नी प्रग्नेंट है, लेकिन अब इस वीडियो के सामने आने से इसकी पुष्टि हो गई है. सूर्या और देविशा की शादी को करीब 10 साल हो गए हैं.

सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारत ने फाइनल में न्यूजीलैंड को हराकर टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब जीता है. बेबी शॉवर के प्रोग्राम से एक दिन पहले ही सूर्यकुमार आईसीसी अध्यक्ष जय शाह और कोच गौतम गंभीर के साथ मुंबई स्थित सिद्धिविनायक मंदिर गए थे. उनके पास वर्ल्ड कप ट्रॉफी भी थी. सभी ने बप्पा का आशीर्वाद लिया. सूर्यकुमार यादव अपनी पत्नी देविशा शेट्टी का हाथ पकड़े हुए हॉल में एंट्री लेते हुए नजर आ रहे हैं. बता दें कि सूर्यकुमार और देविशा की शादी 7 जुलाई, 2016 को हुई थी. तब सूर्या सिर्फ आईपीएल में खेलते थे. शादी से करीब 5 साल बाद सूर्या ने इंटरनेशनल डेब्यू किया.

सूर्यकुमार यादव अभी टी20 फॉर्मेट में टीम इंडिया के कप्तान हैं और उनकी कप्तानी में ही भारत ने ऐतिहासिक वर्ल्ड कप जीता. भारत पहला देश बना, जिसने अपने घर पर टी20 वर्ल्ड कप जीता. इसी के साथ लगातार 2 बार टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाला भी भारत पहला देश है.

सूर्यकुमार अब आईपीएल में खेलते हुए नजर आएंगे, वह मुंबई इंडियंस के लिए खेलते हैं. इंटरनेशनल करियर की बात करें तो सूर्या ने 113 टी20 मैचों में 3272 रन बनाए हैं. इस फॉर्मेट में वह 4 शतक और 25 अर्धशतक लगा चुके हैं. 37 वनडे मैचों में उन्होंने 773 रन बनाए हैं. इसके आलावा उन्होंने 1 टेस्ट भी खेला है. आईपीएल में सूर्यकुमार यादव ने 166 मैचों में 4311 रन बनाए हैं. आईपीएल में सूर्या 2 शतक और 29 अर्धशतक लगा चुके हैं.

Education : CBSE ने खाड़ी देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षा की रद्द, मिडिल ईस्ट में जंग के बीच लिया फैसला

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सीबीएसई की ओर से जारी नोटिस के माध्यम से बताया कि बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में निर्धारित सभी 12वीं कक्षा की परीक्षाएं अब नहीं होंगी. मिडिल ईस्ट में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच भारतीय छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने खाड़ी क्षेत्र में पढ़ रहे 12वीं के छात्रों की बोर्ड परीक्षाओं को रद्द कर दिया है. यह फैसला उन देशों में रहने वाले छात्रों के लिए बेहद जरूरी है, जहां भारतीय प्रवासी परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए सीबीएसई से जुड़े स्कूलों पर निर्भर हैं.

सीबीएसई की ओर से जारी नोटिस के माध्यम से बताया कि बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में निर्धारित सभी 12वीं कक्षा की परीक्षाएं अब नहीं होंगी. इन परीक्षाओं का समय 16 मार्च 2026 से 10 अप्रैल 2026 तक तय किया गया था. इसके अलावा, मार्च के पहले हफ्ते में पहले से स्थगित की गई परीक्षाएं भी अब पूरी तरह रद्द मानी जाएंगी.

सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि 1 मार्च, 3 मार्च, 5 मार्च, 7 मार्च और 9 मार्च 2026 को स्थगित की गई परीक्षाओं को भी अब रद्द माना जाएगा. बोर्ड ने यह भी कहा कि इन देशों में पढ़ रहे छात्रों के मूल्यांकन और परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया बाद में अलग से घोषित की जाएगी. परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा, इन देशों में कक्षा XII के उम्मीदवारों के लिए परिणाम घोषित करने का तरीका उचित समय पर अलग से अधिसूचित किया जाएगा.

यह कदम मध्य पूर्व में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय संकट को देखते हुए लिया गया है. खाड़ी देशों में कई भारतीय प्रवासी परिवार रहते हैं, जिनके बच्चे भारतीय शिक्षा प्रणाली में पढ़ाई कर रहे हैं. सीबीएसई की यह पहल छात्रों और उनके परिवारों के लिए राहत की बात है, क्योंकि अप्रत्याशित परिस्थितियों में यात्रा करना और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचना सुरक्षित नहीं था.

सीबीएसई का यह निर्णय काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (CISCE) से पहले लिए गए फैसले के बाद आया है. CISCE ने भी संयुक्त अरब अमीरात में सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर आईसीएसई और आईएससी परीक्षाओं को रद्द कर दिया था. इससे यह साफ होता है कि भारतीय शिक्षा बोर्ड छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं.

खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव का असर अब भारतीय छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ने लगा है. दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने बताया है कि खाड़ी क्षेत्र में चल रहे हालात की वजह से CBSE ने बड़ा फैसला किया है.बोर्ड ने 7 देशों में रह रहे 12वीं के छात्रों के सभी एग्जाम रद्द कर दिए हैं. 16 मार्च 2026 से 10 अप्रैल 2026 के बीच होने वाले सभी परीक्षाएं अब नहीं होंगी. इससे पहले जो एग्जाम 1 मार्च, 3 मार्च, 5 मार्च, 7 मार्च और 9 मार्च के सर्कुलर के जरिए पोस्टपोन हुए थे वो भी अब पूरी तरह कैंसिल माने जाएंगे.CBSE ने साफ किया है कि इन देशों के 12वीं के छात्रों का रिजल्ट कैसे निकाला जाएगा यह अलग से बताया जाएगा. फिलहाल इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है.

Gujarat News : गुजरात में पिता ने बेटी के प्रेम संबंध पर उठाया खौफनाक कदम, प्रेमी संग उतारा मौत के घाट

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गुजरात में एक पिता ने प्रेम संबंध अस्वीकार होने पर अपनी बेटी और उसके प्रेमी की गला दबाकर हत्या कर दी. शवों को कुएं में फेंका गया, जो एक महीने बाद बरामद हुए. गुजरात से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है जहां एक पिता ने अपनी बेटी के प्रेम संबंध को मंजूरी न देने के चलते बेटी और उसके प्रेमी की गला दबाकर हत्या कर दी और शव को कुएं में फेंक दिया. राजकोट जिले के खंभाला गांव के पास एक कुएं से दोनों के शव एक महीने से भी अधिक समय बाद बरामद हुए. पुलिस ने चारों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है.

मृतक लड़की की पहचान नाथी उर्फ सोनू रबारी (19) और लड़के की पहचान नवीन जीवाभाई रबारी (21) के रूप में हुई है. दोनों 3 फरवरी को लापता हुए थे. नखतराना पुलिस थाने में लापता होने की सूचना दर्ज कराई गई थी लेकिन एक महीने से भी अधिक समय बाद पुलिस ने राजकोट जिले के खंभाला गांव के पास एक कुएं से दोनों के शव बरामद किए. भुज के पुलिस कमिश्नर और उनकी टीम की पूछताछ में लड़की के पिता ने हत्या कबूल कर ली. पिता ने बताया कि नवीन के साथ अपनी बेटी के रिश्ते को लेकर वह बेहद नाराज थे और यह रिश्ता उन्हें किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं था.

पुलिस जांच में पता चला कि घटना के दिन लड़की के पिता और चचेरे भाई ने मोटरसाइकिल का उपयोग कर दोनों को खंभाला गांव के पास एक सुनसान जगह पर घेर लिया. महिला के सगे भाई और मामा भी इस वारदात में शामिल थे. परिवार के इन लोगों ने मिलकर नाथी और नवीन की गला दबाकर हत्या कर दी. हत्या को छुपाने के लिए परिजनों ने दोनों शव कुएं में फेंक दिए ताकि किसी को शक न हो. पिता के कबूलनामे के बाद फायर ब्रिगेड टीम और फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी यानी FSL की मदद से रिकवरी ऑपरेशन चलाया गया. क्रेन का इस्तेमाल कर दोनों के शव कुएं से निकाले गए और पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए.

DYSP MJ क्रिश्चियन ने बताया कि आरोपी ने स्वीकार किया कि हत्या की मूल वजह यह थी कि दोनों ने एक-दूसरे से अलग होने से इनकार कर दिया था. उन्होंने कहा कि पुलिस और FSL टीमों के बीच समन्वय से मामले में महत्वपूर्ण सबूत हासिल करने में मदद मिली. पुलिस ने चारों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है जिनमें पिता, चचेरा भाई, सगा भाई जो नाबालिग है और मामा शामिल हैं. महिला की मां की भूमिका की भी जांच की जा रही है.

Bollywood : ‘हर दूसरे सीन में किस या मुझे ब्रा में दिखाना था’, जरीन खान ने बताया इंडस्ट्री में दिखाया गया नीचा

जरीन खान ने बताया कि फिल्म हेट स्टोरी 3 करने के बाद उन्हें बॉलीवुड में बहुत क्रिटिसिज्म मिला. साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि फिल्म अक्सर 2 के कंटेंट को लेकर भी गलत जानकारी दी थी. एक्ट्रेस जरीन खान ने हाल ही में हेट स्टोरी 3 और अक्सर 2 को लेकर बात की थी. उन्होंने कहा कि हेट स्टोरी 3 के बाद उन्होंने इंडस्ट्री में आलोचना झेली. साथ ही उन्हें बहुत जज किया गया था.

बता दें कि जरीन खान ने 2010 में सलमान खान के अपोजिट फिल्म वीर में 2010 में डेब्यू किया था. इसके बाद वो हाउसफुल 2, हेट स्टोरी 3 जैसी फिल्मों में दिखीं. दोनों ही फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा परफॉर्म किया. हालांकि, हेट स्टोरी 3 में बोल्ड सीन्स की वजह से उन्होंने निगेटिविटी झेली. पूजा भट्ट के साथ पॉडकास्ट में जरीन ने इसके बारे में बात की. उन्होंने कहा, ‘जब मैंने हेट स्टोरी की तो लोगों ने मुझे बहुत नीचा दिखाया. खासतौर पर इंडस्ट्री से. वो कहते थे क्योंकि ये एक्ट नहीं कर सकती थी तो इसीलिए इसने कपड़े उतारे.’

हेट स्टोरी 3 के बाद जरीन को अक्सर 2 के लिए अप्रोच किया. ये 2006 की अक्सर की सीक्वल फिल्म थी. फिल्म को अनंत महादेवन ने डायरेक्ट किया है.
इसके बारे में जरीन ने कहा, ‘उन्होंने बहुत पॉलिश इंग्लिश में स्क्रिप्ट सुनाई. हम हेट स्टोरी नहीं बना रहे हैं. हम क्राइम जॉनर की फिल्म बना रहे हैं और उसी से रिलेटेड लाइन्स पर. तो मैंने बोला ओके. लेकिन जब मैं सेट पर पहुंची तो र दूसरा सीन किस पर खत्म हो रहा था. अचानक से मुझे सीन के लिए ब्रा या उसके जैसे कपड़ों में चाहते थे.

मैंने कहा कि मुझे ऐसे सीन से दिक्कत नहीं है, लेकिन आपने मुझे बिल्कुल अलग स्क्रिप्ट दी थी. अब क्योंकि आपने वो फिल्म देखी है तो आप ये सब एड करना चाहते हैं. मुझे एहसास हुआ कि डायरेक्टर के रीढ़ की हड्डी नहीं थी. उन्होंने स्टोरी को लेकर एक विजन प्रोडूसर्स को सुनाया. दूसरा मुझे और मेरे कॉस्ट्यूम डिजाइनर को. उस वक्त सेट पर टेंशन पैदा हो गई थी.’

Panjab News : गरीब का मसीहा बनी मुख्यमंत्री सेहत योजना, पटियाला के गुरतेज सिंह के लिए वरदान बना ‘स्वास्थ्य कार्ड’

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पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना, दिहाड़ी मजदूरों के लिए वरदान साबित हुई है. गुरतेज सिंह जैसे कई परिवारों को, जो इलाज के खर्च से परेशान थे, इस योजना के तहत मुफ्त इलाज मिला है. दैनिक मजदूरी पर निर्भर परिवारों के लिए अस्पताल में कुछ दिनों का इलाज भी कई महीनों की कमाई पर भारी पड़ सकता है. पंजाब में पटियाला जिले के मंडोली गांव के मैकेनिक गुरतेज सिंह के लिए गंभीर रूप से बीमार पड़ना न केवल आय रुकने का कारण बना, बल्कि बढ़ते इलाज खर्च की चिंता भी सामने आ खड़ी हुई.

चमन अस्पताल, बहादुरगढ़ में भर्ती होने के कुछ ही दिनों के भीतर उनके परिवार को बेड चार्ज और दवाइयों पर लगभग ₹10000 खर्च करने पड़े. डॉक्टरों ने संकेत दिया कि कुल इलाज का खर्च ₹80000 से ₹90000 तक पहुंच सकता है. परिवार की अनियमित आय को देखते हुए इतनी बड़ी राशि का इंतजाम करना उनके लिए आसान नहीं था.

परिवार के पास न तो जमीन थी और न ही कोई बचत, ऐसे में ब्याज पर उधार लेना लगभग तय लग रहा था. इसी दौरान गुरतेज सिंह को मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार द्वारा लागू मुख्यमंत्री सेहत योजना के बारे में जानकारी मिली और उन्हें स्वास्थ्य कार्ड बनवाने में सहायता दी गई. योजना में पंजीकरण के बाद उन्हें छह दिनों तक अस्पताल में पूरा इलाज मिला और इसके लिए कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ा, क्योंकि पूरा खर्च योजना के तहत कवर किया गया.

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनियमित आय वाले परिवार भी इलाज के खर्च की चिंता के बिना बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बना सकें. बीमारी के समय आर्थिक सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी चिकित्सा सुविधा.” गुरतेज सिंह ने कहा, “सबसे बड़ी चिंता यह थी कि इलाज के लिए पैसे कैसे जुटाए जाएंगे. यदि यह कार्ड न होता, तो हमें उधार लेना पड़ता और कई महीनों तक आर्थिक दबाव झेलना पड़ता. इस योजना ने मेरे परिवार को उस बोझ से बचा लिया.” उन्होंने यह भी बताया कि इतनी बड़ी राशि का खर्च उनकी दोनों बेटियों की पढ़ाई और परिवार की आवश्यकताओं को प्रभावित कर सकता था.

प्रति पात्र परिवार को प्रतिवर्ष ₹10 लाख तक की कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराकर यह योजना इस बात को सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि किसी भी चिकित्सा आपात स्थिति के कारण परिवारों को लंबे समय तक आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े. करीब 65 लाख परिवारों के लगभग 3 करोड़ लोगों को कवर करने के लक्ष्य के साथ, 800 से अधिक अस्पतालों में 2300 से ज्यादा उपचार पैकेज उपलब्ध कराते हुए मुख्यमंत्री सेहत योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चिकित्सा आपात स्थितियों के दौरान कामकाजी परिवार कर्ज के बोझ में न फंसें.

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