Friday, September 18, 2026
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NATIONAL : दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल ला रही सरकार, सभी संपत्तियों का बनेगा प्रॉपर्टी आधार कार्ड

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नई दिल्ली। दिल्ली की हर संपत्ति को अब स्थायी डिजिटल पहचान मिलने जा रही है। इसके लिए सरकार दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल-2026 लाएगी। इसमें राजधानी की प्रत्येक आवासीय, व्यावसायिक और अन्य श्रेणी की संपत्ति का वैज्ञानिक सर्वे कर उसका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। उसके बाद हर संपत्ति को यूनिक प्रॉपर्टी आईडी यानी प्रॉपर्टी आधार कार्ड जारी होगा। सरकार का दावा है कि इससे सालों से चले आ रहे भूमि विवाद, फर्जी रिकॉर्ड और स्वामित्व संबंधी समस्याओं के समाधान का रास्ता खुलेगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बृहस्पतिवार को बताया कि केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के तहत दिल्ली के 30 ग्रामीण गांवों में ड्रोन सर्वे कर डिजिटल प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा चुके हैं। इस प्रयोग के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब यही व्यवस्था पूरी दिल्ली में लागू की जाएगी। इसके लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग की तकनीकी विशेषज्ञता और आधुनिक ड्रोन मैपिंग का इस्तेमाल होगा। सरकार का मानना है कि एक समान डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से भविष्य में संपत्तियों की पहचान और सत्यापन आसान होगा।

हर मंजिल का भी बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड
प्रस्तावित कानून के तहत केवल भूखंड या भवन ही नहीं, बल्कि प्रत्येक इमारत की हर मंजिल का अलग डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। सर्वे के दायरे में आवासीय, व्यावसायिक, संस्थागत और अन्य सभी प्रकार की संपत्तियां आएंगी। सरकार का उद्देश्य है कि राजधानी की कोई भी संपत्ति डिजिटल रिकॉर्ड से बाहर न रहे। सर्वे पूरा होने के बाद प्रत्येक संपत्ति को यूनिक प्रॉपर्टी आईडी आवंटित की जाएगी।

विवादों से लेकर खरीद-बिक्री तक मिलेगी राहत
सरकार का कहना है कि वर्षों से व्यवस्थित भूमि रिकॉर्ड नहीं होने के कारण लोगों को स्वामित्व साबित करने, खरीद-बिक्री, उत्तराधिकार, बैंक ऋण, नक्शा स्वीकृति और अदालतों में लंबित मामलों जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रमाणिक डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होगा, जिससे रिकॉर्ड संबंधी अस्पष्टता कम होगी और भूमि विवादों में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। साथ ही फर्जी दस्तावेजों और एक ही संपत्ति पर कई दावों जैसी समस्याओं पर भी अंकुश लगेगा।

डिजिटल शासन की नई नींव बनेगा बिल
मुख्यमंत्री के मुताबिक, यह पहल केवल रिकॉर्ड तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दिल्ली में डिजिटल भूमि प्रबंधन व्यवस्था की आधारशिला बनेगी। ड्रोन सर्वे, डिजिटल मैपिंग और आधुनिक तकनीक के जरिए तैयार रिकॉर्ड से नागरिकों को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तेज सेवाएं मिल सकेंगी।

विशेष सत्र में पेश होगा विधेयक
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल-2026 को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मंत्रियों के समूह की समीक्षा के बाद इसे मंजूरी की प्रक्रिया में लाया गया है। सरकार इस विधेयक को पारित कराने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाएगी। कानून लागू होने के बाद चरणबद्ध तरीके से पूरी दिल्ली का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाएगा और प्रत्येक संपत्ति को डिजिटल पहचान देने की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार का दावा है कि यह कदम राजधानी में भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन को नई दिशा देने के साथ संपत्ति संबंधी व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी, भरोसेमंद और तकनीक आधारित बनाएगा।

NATIONAL : लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पास हुआ एंटी पेपर लीक बिल, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा सख्त कानून

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लोकसभा के बाद सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 यानी एंटी पेपर लीक बिल राज्यसभा में पारित हो गया है। अब कानून बनने के लिए राष्ट्रपति के पास जाएगा।

देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली को रोकने के लिए लाया गया ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ यानी एंटी पेपर लीक बिल अब राज्यसभा से भी पास हो गया है। लोकसभा से 29 जुलाई को पारित होने के बाद, बृहस्पतिवार को राज्यसभा ने भी भारी हंगामे के बीच इसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। अब यह विधेयक राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा, जिसके बाद यह पूरे देश में कानून का रूप ले लेगा।

इस नए विधेयक में फर्जीवाड़े और पेपर लीक रोकने के लिए बेहद कड़े कदम उठाए गए हैं। प्रावधानों के मुताबिक, प्रश्नपत्र लीक करने या नकल कराने वालों को 5 से 10 साल तक की सजा और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। यदि यह अपराध किसी संगठित गिरोह द्वारा किया जाता है, तो सजा कम से कम 7 साल की जेल होगी और जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक जा सकता है। इसके अलावा, मामले की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी और राज्यों में बनने वाली त्वरित अदालतें (फास्ट ट्रैक कोर्ट) तीन महीने के अंदर सुनवाई पूरी करेंगी।

विधेयक के पारित होने से पहले सदन में तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा बिल पेश किए जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यह कानून छात्रों के भले के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव में लेकर आई है। खरगे ने कहा कि सरकार ने कड़ा कानून बनाने में दो साल की देरी की, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद हुआ।

सदन में अपने संबोधन के दौरान खरगे ने छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग का मुद्दा उठाया और कहा कि जब छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, तब उन पर आंसू गैस और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। इस पर सत्ता पक्ष के नेता जेपी नड्डा ने कड़ा ऐतराज जताया और खरगे की भाषा को असंसदीय बताते हुए रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। तीखी नोकझोंक और बहस के बाद आखिरकार बिल को उच्च सदन की मंजूरी मिल गई।

भाजपा के राज्यसभा सदस्य और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पलटवार करते हुए कहा कि गृह मंत्री के बारे में खरगे की टिप्पणी कांग्रेस की ’’तुच्छ मानसिकता और पराजित मानसिकता’’ को दर्शाता है। त्रिवेदी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ’’राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गृह मंत्री के लिए बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। हमने सदन में इसका पुरजोर विरोध किया। हालांकि, हमारे विरोध के बाद उन्होंने अपनी टिप्पणी में संशोधन किया, लेकिन उनकी असली मानसिकता उजागर हो गई।’’

उन्होंने कहा, ’’इससे पहले हमने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते देखा और आज राज्यसभा में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली।’’ भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ खरगे और राहुल गांधी की टिप्पणियां उनकी ’’हताशा’’ को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा, ’’जनता लगातार आपको नकार रही है। ऐसी भाषा के इस्तेमाल से आप लोगों की नजरों में भी गिर गए हैं।’’

NATIONAL : पवन खेड़ा के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने से अदालत का इनकार

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गुवाहाटी : गुवाहाटी की एक अदालत ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा उनके पास कई पासपोर्ट और विदेश में संपत्ति होने के आरोपों को लेकर दायर एक मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने के अनुरोध वाली असम पुलिस की याचिका खारिज कर दी है.यह आदेश कामरूप मेट्रो के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) द्वारा 7 अप्रैल को पारित किया गया था. यह आदेश खेड़ा द्वारा तेलंगाना उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने से एक दिन पहले सुनाया गया था.

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत के आदेश की प्रति रविवार को यहां मीडिया के साथ साझा की गई. सीजेएम ने कहा कि जांच अधिकारी (आईओ) द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी करने के लिए बताए गए आधार “पूरी तरह से अनुमानों और अटकलों पर आधारित हैं, और रिकॉर्ड में मौजूद किसी भी सामग्री से समर्थित नहीं हैं.’’

आदेश में कहा गया, “इसके अलावा, चूंकि यह मामला संज्ञेय है और अपराध गैर-जमानती है, इसलिए जांच अधिकारी को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार, जांच के उद्देश्य से आवश्यक समझे जाने पर, बीएनएसएस की धारा 35 के तहत गिरफ्तारी करने का अधिकार पहले से ही प्राप्त है.”

मुख्य न्यायिक न्यायाधीश ने कहा, “उपरोक्त के मद्देनजर, गैर-जमानती वारंट जारी करने के अनुरोध को इस स्तर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है और इसलिए इसे अस्वीकार किया जाता है.”खेड़ा के खिलाफ मामला गुवाहाटी अपराध शाखा पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 175 और 318 सहित विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया था.

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा ने 6 अप्रैल को कांग्रेस नेता और उनके साथ मिलीभगत करने वाले सभी अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था.उन्होंने दावा किया कि खेड़ा द्वारा 5 अप्रैल को नई दिल्ली और गुवाहाटी में आयोजित दो संवाददाता सम्मेलन में लगाए गए आरोप गलत और निराधार हैं. खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिंकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट/गोल्डन कार्ड और विदेश में संपत्ति है, जिसका उल्लेख उनके पति के चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया है.

उन्होंने कहा कि खेड़ा द्वारा अपने आरोपों के समर्थन में दिखाए गए “सभी दस्तावेज फर्जी, छेड़छाड़ किए गए, जाली और गढ़े हुए” थे और ये दावे “सार्वजनिक अव्यवस्था और सार्वजनिक संशय पैदा करने के आपराधिक इरादे से किए गए थे, जिससे एक अत्यंत संवेदनशील चुनावी चरण में सार्वजनिक अशांति भड़काने, नागरिकों को गुमराह करने और सार्वजनिक शांति भंग करने की आशंका थी.’’खेड़ा को तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 10 अप्रैल को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी. हालांकि, पिछले सप्ताह उच्चतम न्यायालय ने असम सरकार की याचिका पर गौर करते हुए इस मामले में उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी.

उच्चतम न्यायालय ने खेड़ा की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने रिंकी भुइयां सरमा द्वारा उनके खिलाफ दायर मामले में 20 अप्रैल तक गिरफ्तारी से सुरक्षा का अनुरोध किया था.उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस नेता को इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए असम की सक्षम अदालत में याचिका दायर करने को कहा था और स्पष्ट किया था कि वहां की अदालत उनकी याचिका पर तेलंगाना उच्च न्यायालय और उसके द्वारा की गई किसी भी प्रतिकूल टिप्पणी पर ध्यान दिए बिना सुनवाई करेगी.

SPORTS : ब्राजील फुटबॉल टीम के भारत दौरे की तैयारी तेज, इस शहर में हो सकता है इंटरनेशनल फ्रेंडली मैच

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भारत के फुटबॉल प्रेमियों के लिए एक रोमांचक खबर है. रिपोर्ट्स के अनुसार, विश्व प्रसिद्ध ब्राजील की फुटबॉल टीम अक्टूबर में कोलकाता में एक इंटरनेशनल फ्रेंडली मैच खेल सकती है. यह भारतीय फुटबॉल के लिए एक बड़ा अवसर हो सकता है.

भारत के फुटबॉल फैंस के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया की सबसे मशहूर फुटबॉल टीमों में से एक ब्राजील की राष्ट्रीय टीम भारत आ सकती है. बताया जा रहा है कि ब्राजील टीम अक्टूबर में कोलकाता में एक इंटरनेशनल फ्रेंडली मैच खेल सकती है. अगर यह मैच तय हो जाता है, तो यह भारतीय फुटबॉल प्रेमियों के लिए किसी बड़े त्योहार से कम नहीं होगा. फैंस को पहली बार भारत में ब्राजील जैसी बड़ी टीम को खेलते हुए करीब से देखने का मौका मिल सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्राजील फुटबॉल फेडरेशन और मैच कराने वाले आयोजकों के बीच बातचीत चल रही है. अब सिर्फ समझौते से जुड़ी कुछ आखिरी औपचारिकताएं (Formalities) पूरी होना बाकी हैं.

सितंबर-अक्टूबर इंटरनेशनल विंडो में तीन मैचों की तैयारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्राजील की टीम सितंबर और अक्टूबर के इंटरनेशनल विंडो में तीन फ्रेंडली मुकाबले खेलने की योजना बना रही है. इनमें से शुरुआती दो मुकाबले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले जाने हैं. पहला मैच 25 सितंबर को टाउन्सविले और दूसरा मुकाबला 29 सितंबर को ब्रिस्बेन में आयोजित होने की संभावना है. वहीं तीसरे मुकाबले के लिए अभी विपक्षी टीम का नाम आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है. हालांकि, रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इस मैच की मेजबानी के लिए कोलकाता को संभावित शहर के रूप में देखा जा रहा है.

भारत के खिलाड़ियों के लिए बड़ा सीखने का मौका
भारतीय फुटबॉल टीम इस समय फीफा रैंकिंग में 138वें स्थान पर है. टीम लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है, लेकिन वर्ल्ड कप में पहुंचने का सपना अभी पूरा नहीं हो सका है. ब्राजील जैसी विश्व स्तरीय टीम के खिलाफ खेलने से भारतीय खिलाड़ियों को उच्च स्तर की फुटबॉल, रणनीति और दबाव में प्रदर्शन करने का अनुभव मिलेगा. यह मुकाबला भारतीय फुटबॉल के विकास के लिहाज से भी अहम साबित हो सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबले घरेलू खिलाड़ियों को प्रेरणा देते हैं और युवा फुटबॉलरों को वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा (Competition) को समझने का मौका देते हैं.

कोलकाता में फुटबॉल का बढ़ सकता है रोमांच
कोलकाता को भारत का फुटबॉल गढ़ माना जाता है. यहां फुटबॉल को लेकर जुनून लंबे समय से देखने को मिलता रहा है. शहर के प्रशंसकों के बीच ब्राजील की टीम को लेकर खास उत्साह देखने को मिल सकता है. अगर यह मुकाबला आधिकारिक रूप से तय होता है तो कोलकाता में बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है. यह मैच भारत में फुटबॉल संस्कृति को और मजबूत करने वाला आयोजन बन सकता है.

वर्ल्ड कप 2026 में ब्राजील को मिला बड़ा झटका
ब्राजील की टीम के लिए फीफा वर्ल्ड कप 2026 का सफर उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. रिपोर्ट्स के अनुसार, टीम को राउंड ऑफ-16 मुकाबले में नॉर्वे के खिलाफ 2-1 से हार का सामना करना पड़ा और वह टूर्नामेंट से बाहर हो गई. यह ब्राजील के लिए एक बड़ा झटका था, क्योंकि 1990 के बाद पहली बार टीम वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल तक नहीं पहुंच पाई. ब्राजील ने अपना पिछला वर्ल्ड कप खिताब 2002 में जीता था. इसके बाद से टीम छठी बार विश्व चैंपियन बनने का इंतजार कर रही है.

NATIONAL : आरजी कर केस: सीबीआई ने जांच अधिकारी बदला, पीड़ित परिवार को नई उम्मीद जगी

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कोलकाता: आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में बलात्कार और हत्या मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई. लंबे समय से जांच का नेतृत्व कर रही सीबीआई अधिकारी सीमा पाहुजा की जगह संदीपनी गर्ग को नया जांच अधिकारी बनाया गया है. पीड़िता की मां ने गर्ग से मुलाकात की है और उन पर परिवार का भरोसा जताया है.

सूत्रों के मुताबिक मृतका के माता-पिता लंबे समय से जांच की प्रोग्रेस से खुश नहीं थे. उन्होंने जांच अधिकारी को बदलने की रिक्वेस्ट की थी, जिसमें मांग की गई थी कि जांच में तेजी लाई जाए और केस के अलग-अलग पहलुओं की फिर से जांच की जाए. आखिरकार, इस मांग को मानते हुए सीबीआई ने जांच अधिकारी को बदलने का फैसला किया.

खबर है कि संदीपनी ने नया रोल संभालने के बाद से ही केस के डॉक्यूमेंट्स को रिव्यू करना शुरू कर दिया है. उन्होंने इन्वेस्टिगेशन के अलग-अलग स्टेज से लेकर सबूत और फोरेंसिक रिपोर्ट तक सब कुछ चेक किया है. इसके अलावा, वह अब तक हुई प्रोग्रेस का डिटेल में रिव्यू करेंगी. इन्वेस्टिगेशन टीम के सूत्रों का कहना है कि अगर जरूरी हुआ, तो कुछ गवाहों से फिर से पूछताछ की जा सकती है, और आगे कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं.

इस बीच जांच अधिकारी और पीड़ित परिवार के बीच मीटिंग के दौरान एक इमोशनल पल भी आया. सूत्रों की रिपोर्ट है कि ‘अभया’ की माँ ने नए इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर का हाथ पकड़ा और कहा, ‘मुझे आप पर भरोसा है.’ उनकी बस यही उम्मीद है कि लंबा इंतजार खत्म होगा, सच सामने आएगा, और गुनाहगारों को कानून के तहत ज़्यादा से ज़्यादा सजा मिलेगी.

कई लोग जांच अधिकारी के बदलने को केस में एक अहम मोड़ मान रहे हैं. हालांकि सीबीआई ने इस मामले पर कोई डिटेल्ड बयान जारी नहीं किया है, लेकिन जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि यह फैसला ट्रांसपेरेंसी बढ़ाने और जांच में तेजी लाने के लिए किया गया. खास तौर पर आरजी कार की घटना ने पूरे देश में भारी हंगामा मचा दिया था. घटना के बाद से मेडिकल कम्युनिटी, आम जनता और पीड़ित का परिवार तेजी से और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.

ऐसे हालात में जांच अधिकारी बदलने के फैसले से चल रही जांच में एक नया पहलू जुड़ने की उम्मीद है. कई लोगों का यह भी मानना ​​है कि आरजी कार की घटना ने राज्य में हाल के राजनीतिक बदलावों में भूमिका निभाई. उनका मानना ​​है कि उस समय की तृणमूल सरकार रेप और हत्या के बाद स्थिति को ठीक से संभालने में नाकाम रही.

तारीख थी 9 अगस्त, 2024. ट्रेनी डॉक्टर की बॉडी आरजी कर हॉस्पिटल के चौथे फ्लोर के सेमिनार हॉल से मिली. बाद की जांच में पता चला कि उसके साथ रेप और मर्डर हुआ था. इस केस के सिलसिले में कोलकाता पुलिस ने अपने एक सिविक वॉलंटियर, संजय रॉय को गिरफ्तार किया. इसके बाद राज्य में पॉलिटिकल टेंशन बढ़ गया. प्रोटेस्ट मूवमेंट के दबाव में आकर, उस समय के कोलकाता पुलिस कमिश्नर, विनीत गोयल को उनके पद से हटा दिया गया.

बाद में घटना की जांच सीबीआई को सौंप दी गई. इसके बाद सियालदह कोर्ट ने संजय को उम्रकैद की सज़ा सुनाई. हालांकि, पीड़ित के परिवार और आरजी कार कर प्रोटेस्ट मूवमेंट में शामिल कई लोगों का कहना है कि संजय अकेले इतना बड़ा जुर्म नहीं कर सकता था.

इस बीच राज्य के पॉलिटिकल माहौल में बदलाव के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने तीन आईपीएस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया. इनमें उस समय के कोलकाता पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल भी शामिल थे. जो इस घटना से अलग-अलग तरह से जुड़े थे. सुवेंदु ने यह भी संकेत दिया कि नई सरकार आरजी कार मुद्दे पर प्रोएक्टिव कदम उठाएगी, और यह प्रोसेस पहले ही शुरू हो चुका है.

KOLKATA : सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलेगा, गोपाल मुखर्जी रोड के नाम से जानी जाएगी सड़क; विपक्ष ने साधा निशाना

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पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक और सार्वजनिक स्थलों के नामकरण को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। कोलकाता के पार्क सर्कस क्षेत्र स्थित सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर अब ‘गोपाल मुखोपाध्याय रोड’ रखा जाएगा। कोलकाता नगर निगम की आयुक्त स्मिता पांडे ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता नगर निगम (केएमसी) द्वारा शहर की प्रमुख सड़क सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड किए जाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे “ऐतिहासिक भूल को सुधारने वाला कदम” बताया। टीएमसी ने सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताई है।

शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सीएम अधकारी ने कहा कि पश्चिम बंग दिवस के अवसर पर कोलकाता नगर निगम द्वारा लिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय न्यायपूर्ण और समयोचित है। उन्होंने कहा कि दशकों तक शहर की एक महत्वपूर्ण सड़क का नाम ऐसे व्यक्ति के नाम पर रहा, जिस पर सत्ता का दुरुपयोग कर राजनीतिक लाभ के लिए निर्दोष नागरिकों के नरसंहार को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं।

अधिकारी ने कहा कि अब इस सड़क का नाम गोपाल मुखर्जी रोड किए जाने से उन हजारों निर्दोष लोगों की रक्षा करने वाले एक साहसी व्यक्ति को सम्मान मिलेगा, जिन्होंने संकट की घड़ी में लोगों की जान बचाने के लिए अग्रणी भूमिका निभाई थी। उनके अनुसार, यह फैसला ऐतिहासिक न्याय की पुनर्स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल को अब अपने वास्तविक नायकों को याद करने, इतिहास की गलतियों को सुधारने और समाज के सच्चे रक्षकों को सम्मान देने का समय आ गया है।

नाम बदलने को लेकर लंबे समय से बहस

हालांकि, इस नाम को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और वैचारिक बहस चलती रही है। सर हसन सुहरावर्दी के भतीजे हुसैन शहीद सुहरावर्दी 1946-47 के दौरान अविभाजित बंगाल के प्रधानमंत्री थे। भाजपा और उससे जुड़े संगठनों का आरोप रहा है कि 1946 के ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग’ के दौरान उनकी भूमिका विवादास्पद रही थी।

वहीं, गोपाल मुखोपाध्याय, जिन्हें ‘गोपाल पाठा’ के नाम से जाना जाता है, को 1946 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान हिंदू समाज की रक्षा के लिए याद किया जाता है। कोलकाता के बौबाजार क्षेत्र के निवासी गोपाल मुखोपाध्याय का परिवार मांस व्यवसाय से जुड़ा था, जिसके कारण उन्हें ‘गोपाल पाठा’ कहा जाता था। दक्षिणपंथी संगठनों और भाजपा के बीच उन्हें लंबे समय से एक प्रतीकात्मक व्यक्तित्व के रूप में देखा जाता रहा है।

पिछले वर्ष ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग’ की बरसी पर आयोजित एक पदयात्रा में तत्कालीन विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने गोपाल मुखोपाध्याय की तस्वीर के साथ हिस्सा लिया था। बाद में अलीपुर में उनकी प्रतिमा का अनावरण भी किया गया। अब सड़क का नाम उनके नाम पर किए जाने को भाजपा सरकार की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पुनर्स्मरण की पहल के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला केवल सड़क का नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि बंगाल के इतिहास और उसके नायकों की नई व्याख्या को भी दर्शाता है। सरकार के इस कदम को राज्य की बदलती राजनीतिक और वैचारिक दिशा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

कौन थे सर हसन सुहरावर्दी?
सर हसन सुहरावर्दी बंगाल के प्रतिष्ठित शिक्षाविद और चिकित्सक थे। वह 8 अगस्त 1930 से 7 अगस्त 1934 तक कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। उनके सम्मान में 1933 में पार्क सर्कस से काशीपाड़ा लेन तक बनी नई सड़क का नाम ‘सुहरावर्दी एवेन्यू’ रखा गया था। वह तत्कालीन अविभाजित बंगाल के प्रमुख शिक्षाविदों में गिने जाते थे। उनके भतीजे हुसैन शहीद सुहरावर्दी बाद में अविभाजित बंगाल के प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने।

कौन थे गोपाल मुखोपाध्याय?
गोपाल मुखोपाध्याय, जिन्हें ‘गोपाल पाठा’ के नाम से अधिक जाना जाता है, कोलकाता के बौबाजार क्षेत्र के निवासी थे। उनका परिवार मांस व्यवसाय से जुड़ा था, जिसके कारण उन्हें यह उपनाम मिला। 1946 के ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग’ और सांप्रदायिक दंगों के दौरान उन्होंने अपने समर्थकों के साथ मिलकर हिंदू बहुल इलाकों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाई थी। दक्षिणपंथी संगठनों और भाजपा द्वारा उन्हें उस दौर में हिंदू समुदाय की सुरक्षा के लिए संघर्ष करने वाले व्यक्तित्व के रूप में याद किया जाता है। वर्ष 2005 में उनका निधन हो गया था

विपक्ष ने साधा निशाना
टीएमसी नेता कुणाल घोष ने सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड करने पर कहा, जब कोई नाम होता है, तो उसके पीछे कोई इतिहास या घटना होती है… किसी नाम को पूरी तरह से हटाने से इतिहास पर असर पड़ता है… हमने दूसरी जगहों पर भी देखा है कि भाजपा को रोटी, कपड़ा, मकान देने की बजाय जगहों के नाम बदलने में अधिक दिलचस्पी है… हम इसका विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन किसी नाम को हटाकर उसकी जगह दूसरा नाम रखने से पहले इस पर थोड़ा सोचना चाहिए…।

NATIONAL : मुंबई को पछाड़ ये शहर बना रियल एस्टेट का नया ‘किंग’, 10 करोड़ या ज्‍यादा कीमत वाले कितने मकान बिक गए?

इस शहर में महज दो साल पहले यानी 2023 में 10 करोड़ से महंगे घरों की कुल बिक्री 4,004 करोड़ रुपये थी, जो 2025 में बढ़कर 24,000 करोड़ के पार पहुंच गई है. यानी दो साल में 600% की भारी बढ़त!

मुंबई को पछाड़ ये शहर बना रियल एस्टेट का नया ‘किंग’, 10 करोड़ या ज्‍यादा कीमत वाले कितने मकान बिक गए? मुंबई को पछाड़ गुरुग्राम बना ‘अल्ट्रा-लग्जरी’ का नया ठिकाना: 10 करोड़ वाले घरों की बिक्री में बनाया रिकॉर्ड
अगर आप सोचते हैं कि देश के सबसे महंगे और आलीशान घर केवल मायानगरी मुंबई के समंदर किनारे मिलते हैं, तो अपनी जानकारी अपडेट कर लीजिए. साल 2025 के आंकड़ों ने रियल एस्टेट जगत के सारे समीकरण पलट दिए हैं. दिल्ली से सटे हाई-टेक शहर गुरुग्राम ने ‘अल्ट्रा-लग्जरी’ हाउसिंग मार्केट में मुंबई को पटखनी देते हुए नंबर-1 का ताज अपने नाम कर लिया है.

24,000 करोड़ का जादुई आंकड़ा
सोमवार को जारी ‘इंडिया सोथबीज इंटरनेशनल रियल्टी’ और ‘सीआरई मैट्रिक्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुग्राम में साल 2025 के दौरान 10 करोड़ रुपये और उससे अधिक कीमत वाले घरों की कुल बिक्री 24,120 करोड़ रुपये रही. यह आंकड़ा न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अमीरों की पहली पसंद अब गुरुग्राम बन चुका है.

दो साल में 6 गुना उछाल
गुरुग्राम की यह रफ्तार किसी रॉकेट से कम नहीं है. महज दो साल पहले यानी 2023 में यहां 10 करोड़ से महंगे घरों की कुल बिक्री 4,004 करोड़ रुपये थी, जो 2025 में बढ़कर 24,000 करोड़ के पार पहुंच गई है. यानी दो साल में 600% की भारी बढ़त!

गुरुग्राम: ‘लग्जरी’ रिपोर्ट कार्ड
कुल बिक्री: 1,494 अल्ट्रा-लग्जरी घर (10 करोड़+ श्रेणी में).
औसत कीमत: यहां बिकने वाले एक लग्जरी घर की औसत कीमत लगभग 16 करोड़ रुपये रही.
फेवरेट साइज: खरीदारों ने औसतन 5,000 वर्ग फुट के घरों को चुना, जबकि 22% योगदान उन बड़े विला का रहा जिनका साइज 8,000 वर्ग फुट से भी ज्यादा था.

कहां है सबसे ज्यादा डिमांड?
इंडिया सोथबीज इंटरनेशनल रियल्टी की एरिया डायरेक्टर टीना तलवार के अनुसार, अब लग्जरी केवल पुराने पॉश इलाकों तक सीमित नहीं है. द्वारका एक्सप्रेसवे, गोल्फ कोर्स रोड और गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड जैसे इलाके अब इस विस्तार के नए केंद्र बन गए हैं.

BUSINESS : बाबा रामदेव की पतंजलि अब बेचेगी इंश्योरेंस! ₹4,500 करोड़ की डील को IRDAI की हरी झंडी

योग गुरु बाबा रामदेव की Patanjali Ayurved अब फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में भी कदम रखने जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने Patanjali Ayurved और धर्मपाल सत्यपाल (DS) ग्रुप द्वारा Magma General Insurance के करीब ₹4,500 करोड़ के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। मार्च में घोषित इस सौदे के लिए यह आखिरी बड़ी रेगुलेटरी मंजूरी थी।

डील के तहत Patanjali Ayurved, Adar Poonawalla की Sanoti Properties और अन्य विक्रेताओं से Magma General Insurance में 73.6% हिस्सेदारी खरीदेगी। वहीं Rajnigandha पान मसाला बनाने वाला DS Group कंपनी में 24.5% हिस्सेदारी लेगा। इस डील से पहले Sanoti Properties के पास Magma General Insurance में 72.4% हिस्सेदारी थी।

28 जुलाई को मिली मंजूरी के मुताबिक Patanjali कंपनी की नई प्रमोटर बनेगी और भविष्य में उसकी सॉल्वेंसी मजबूत रखने और कारोबार बढ़ाने के लिए पूंजी निवेश भी जारी रखेगी। DS Group इस अधिग्रहण में सह-निवेशक की भूमिका निभाएगा।CareEdge Ratings के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच Magma General Insurance का ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम 22% की CAGR से बढ़कर ₹3,334 करोड़ पहुंच गया। इसी अवधि में सामान्य बीमा उद्योग की औसत वृद्धि दर 10% रही।

कंपनी ने वित्त वर्ष 2024-25 में ₹1 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज कर ब्रेकईवन हासिल किया, जबकि इससे एक साल पहले उसे ₹141 करोड़ का घाटा हुआ था। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹27 करोड़ रहा। 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी का सॉल्वेंसी मार्जिन 1.81 गुना था, जो नियामकीय न्यूनतम 1.50 गुना से अधिक है।

Magma General Insurance के पास सामान्य बीमा कैटेगरी में 70 से अधिक उत्पाद हैं। Patanjali के पास देशभर में करीब दो लाख बिक्री केंद्र, 250 Patanjali Mega Stores और बड़े रिटेल नेटवर्क तक पहुंच है। माना जा रहा है कि इस वितरण नेटवर्क के जरिए कंपनी बीमा उत्पादों का विस्तार खासकर अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में करेगी।

CWG 2026: लवप्रीत सिंह ने वेटलिफ्टिंग में दिलाया सिल्वर, सीमा ने डिस्कस थ्रो में जीता कांसा, तूर-गिल शॉट पुट में रहे पीछे

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 30 जुलाई को भारत को दो पदक मिले. पुरुष वेटलिफ्टिंग में लवप्रीत सिंह ने सिल्वर मेडल हासिल किया. महिला डिस्कस थ्रो में सीमा कालीरामा ने कांस्य पदक जीता. बाकी इवेंट में निराशा मिली. पुरुषों की गोला फेंक स्पर्धा में ताजिंदरपाल सिंह तूर और समरदीप सिंह गिल मेडल से काफी दूर रह गए. महिलाओं की 5000 मीटर रेस में पारुल चौधरी 13वें स्थान पर रही. अनिमेष कुजूर 200 मीटर और विशाल टीके 400 मीटर रेस के फाइनल में नहीं जा सके. हालांकि ट्रिपल जंप में प्रवीण चित्रावेल और सेल्वा प्रभु ने फाइनल में जगह बना ली. तेजस्विन शंकर डेकाथलॉन में पहले दिन के बाद दूसरे स्थान पर हैं.

लवप्रीत ने पुरुषों की 110 किलो प्लस स्पर्धा में कुल 388 किलो वजन उठाया और चांदी जीती. उन्होंने स्नैच में 176 किलो भार उठाया जो गेम्स रिकॉर्ड रहा. फिर क्लीन एंड जर्क में 212 किलो वजन उठाया. वह गोल्ड जीतने वाले न्यूजीलैंड के डेविड एंड्रयू लिटी (389) से महज एक किलो वजन पीछे रह गए. लिटी की आखिरी कोशिश तक लवप्रीत 10 किलो वजन आगे चल रहे थे. लेकिन न्यूजीलैंड के वेटलिफ्टर ने आखिरी प्रयास में 223 किलो वजन उठाया जो गेम्स रिकॉर्ड रहा. इससे वह आगे हो गए. लवप्रीत ने 217 किलो वजन उठाना चाहा लेकिन सफलता नहीं मिली. लवप्रीत ने 2022 बर्मिंघम खेलों में कांस्य पदक जीता था.

मार्टिना देवी पदक से चूकी
महिलाओं की 86 किलो प्लस कैटेगरी में मार्टिना देवी मामूली अंतर से मेडल से चूक गई. 18 साल की इस वेटलिफ्टर ने कुल 245 किलो वजन उठाया. स्नैच में मार्टिना ने 105 किलो तो क्लीन एंड जर्क में 140 किलो भार उठाया. उन्होंने 144 व 146 किलो भार उठाना चाहा था लेकिन ऐसा नहीं कर सकी. भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग में आठ मेडल जीते. इनमें एक गोल्ड, छह सिल्वर और एक ब्रॉन्ज शामिल रहा.

एथलेटिक्स में 30 जुलाई को भारत को सीमा ने मेडल दिलाया. उन्होंने डिस्कस थ्रो में 58.65 मीटर थ्रो के साथ तीसरा स्थान हासिल किया. उन्होंने तीसरे राउंड में यह थ्रो किया. हालांकि आखिरी तीन में फाउल कर बैठी. 27 साल की सीमा मां बनने के बाद पिछले साल ही फिर से खेलों में लौटी हैं. वह पीएचडी भी कर रही हैं. इसी स्पर्धा में हिस्सा ले रही निधि रानी चौथे स्थान पर रही.

पुरुषों के शॉट पुल फाइनल में तूर का सबसे अच्छा प्रयास 20.27 मीटर रहा. इससे वह पांचवें पायदान पर रहे. समरदीप सिंह का बेस्ट थ्रो 20.03 मीटर था. वे सातवें नंबर पर रहे.

WORLD : अमेरिका-चीन अब ह्यूमनॉइड और रोबोटिक डॉग पर भिड़े, US ने लगाया बैन, ये वजह

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अमेरिका ने चीन को एक बड़ा झटका दिया है. अब अमेरिका ने चीन से इंपोर्ट किए जाने वाला ह्यूमनॉइड और रोबोटिक डॉग पर बैन लगा दिया है. साथ ही चीन से आने वाले इन्वर्टर को भी बैन कर दिया है. ये जानकारी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में दी है. फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने चीन से आने वाले नए ह्यूमनॉइड (मानव जैसे) और चारों पैरों पर चलाने वाले रोबोट के इंपोर्ट पर पूरी तरह से बैन कर दिया है. FCC ने चीन में तैयार किए गए पावर इन्वर्टर मॉडल पर भी प्रतिबंध लगा दिया है.

चीन के रोबोट और रोबो डॉग पर बैन लगाने के पीछे की मुख्य वजह राष्ट्रीय सुरक्षा को बताया है. FCC इस बैन की मदद से जोखिमों को कम करना चाहती है. महत्वपूर्ण उद्योगों के निर्माण को अमेरिका में बढ़ावा देना है. ट्रंप सरकार ने मंगलवार को इन नए बैन का ऐलान किया, जिसका मकसद चीन से आने वाले नए रोबोट और पावर इन्वर्टर के आयात को रोकना है. इससे अमेरिका में डेवलप हो रहे AI इंफ्रास्ट्रक्चर को राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधित खतरों से सुरक्षित रखा जा सके.

जिस इन्वर्टर पर रोक लगाई वो क्या करता है?

FCC के आदेश के तहत चीन से आने वाले नए ह्यूमनॉइड और चार पैरों वाले रोबोट के अलावा कनेक्टेड पावर इन्वर्टर पर भी रोक लगाई है. ये इन्वर्टर सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, बैटरियों, पावर ग्रिड और डेटा सेंटर उपकरणों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं.

साइबर अटैक का खतरा: इंटरनेट से कनेक्ट रहने वाले रोबोट और पावर इन्वर्टर किसी नेटवर्क में एंट्री करने का रास्ता बन सकते हैं.
इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर: पावर इन्वर्टर बिजली ग्रिड, सोलर सिस्टम और डेटा सेंटर से जुड़े होते हैं. इनमें खामी पाई गई तो ये बिजली आपूर्ति या डेटा सेंटर के संचालन को प्रभावित कर सकते हैं.

रिमोटली कंट्रोल का खतरा: डिवाइस पर मैन्युफैक्चरर या हैकर द्वारा कंट्रोल कर लिया जाता है तो यह काफी खतरनाक साबित हो सकता है.
सप्लाई चेन जोखिम: अगर एक देश पर ज्यादा निर्भरता हो और तनाव बढ़ जाए, तो जरूरी उपकरणों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.
ट्रंप का मकसद, संभावित खतरों से बचाव करना है

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