Saturday, September 19, 2026
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NATIONAL : राम मंदिर चढ़ावा चोरी: ट्रस्ट ने बरामद की थी अधिक रकम, एसआईटी को बताई कम; मामले को दबाने की थी पूरी कोशिश

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एसआईटी व पुलिस की बरामदगी में 80 लाख रुपये ही सामने आए, पर हकीकत में यह रकम ढाई से तीन करोड़ रुपये थी, जिसे ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने खुद बरामद किया था।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी की रकम करोड़ों में है। एसआईटी व पुलिस की बरामदगी में 80 लाख रुपये ही सामने आए, पर हकीकत में यह रकम ढाई से तीन करोड़ रुपये थी, जिसे ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने खुद बरामद किया था।

एसआईटी के सामने एक-तिहाई ही रकम बताई गई, वही बरामद हुई। ऐसा इसलिए किया गया कि अगर बड़ी रकम बरामद दिखाई जाती तो सवाल भी और बड़े उठते। एसआईटी जांच में इसके सबूत सामने आए हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

सूत्रों ने बताया, चोरी का खुलासा होते ही ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से संदिग्धों को पकड़ लिया था। इनसे बरामदगी शुरू कर दी गई, जिसका जिक्र एसआईटी ने भी किया है। ढाई से तीन करोड़ रुपये बरामद कर लिए गए।

मकसद था कि बची रकम भी बरामद कर मामला दबा दिया जाए। मामला उजागर हुआ तो एक सप्ताह तक पूरा सेटलमेंट किया गया। जब सब पुख्ता हो गया, तब एसआईटी जांच की मांग की गई। एसआईटी ने वही बरामदगी दिखाई, जो ट्रस्ट ने बताई थी।

रकम पांच करोड़ से अधिक होने की आशंका
सूत्रों के मुताबिक, करीब तीन करोड़ रुपये ट्रस्ट ने बरामद किए थे, जबकि सभी आरोपियों ने मिलकर दो से ढाई करोड़ रुपये खर्च कर दिए थे। इस हिसाब से चोरी की रकम पांच करोड़ रुपये से अधिक होने की आशंका है।

सपा का भाजपा पर निशाना
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के चढ़ावे की चोरी को भाजपा पर लगा काला दाग बताया है। अखिलेश ने कहा कि हर तरफ लूट, झूठ और चोरी का चक्र अबाध गति से चल रहा है। चढ़ावा-चंदा-दान चोरी खुलने के बाद भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के नेताओं के काले कारनामे उजागर हुए हैं। भाजपा में बदहवासी छा गई है और वह जनता का ध्यान भटकाने के लिए बचकाने बयान दे रही है।

NATIONAL : धीरेंद्र शास्त्री के भाई सालिगराम गर्ग गोलीकांड में गिरफ्तार, जमीन विवाद में चलाई थी गोली, हथियार भी जब्त

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बागेश्वरधाम के धीरेंद्र शास्त्री के भाई सालिगराम गर्ग को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सालिगराम व उसके साथियों पर बीते रोज छतरपुर जिले के राजनगर इलाके के कोड़ा गांव में जमीन विवाद में गोली चलाने का आरोप है। गोलीकांड में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया है…

छतरपुर: एमपी के छतरपुर जिले के राजनगर थाना क्षेत्र के कोड़ा गांव में हुए सनसनीखेज गोलीकांड मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई सालिगराम गर्ग और उसके साथी अंकित मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल किया गया हथियार भी बरामद कर लिया है।

जमीन विवाद में चली थी गोली, युवक रेफर

एडिशनल एसपी आदित्य पटले ने बताया कि कोड़ा गांव में जमीन को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ था। इसी विवाद के दौरान चली गोली से एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को पहले जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे ग्वालियर रेफर कर दिया।

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में दर्ज एफआईआर के आधार पर सालिगराम गर्ग और अंकित मिश्रा की गिरफ्तारी की गई है। इस घटना में कुल चार आरोपी शामिल थे, जिनमें तीन नामजद और एक अज्ञात है। बाकी फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

खगड़िया में मुठभेड़: पुलिस चेकिंग के दौरान दारोगा की पिस्टल छीन भाग रहे बदमाश को लगी गोली

कानून अपना काम करे, हमारा कोई संबंध नहीं: धीरेंद्र शास्त्री

भाई सालिगराम की गिरफ्तारी के पहले ही बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, सालिगराम गर्ग से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। हमारा परिवार से कोई संबंध नहीं है, पूरा विश्व ही हमारा परिवार है। कानून उन्हें जो भी कठोर से कठोर सजा देना चाहे, दे। इस मामले में हर बात में हमारा नाम न घसीटा जाए।

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विवेचना जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

NATIONAL : ‘BJP चाहती है कि मुझे हार्ट अटैक आए’: ममता, बोलीं- ‘गद्दारों’ के लिए माफी मांगती हूं, अभिषेक का किया बचाव

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टीएमसी में बढ़ती बगावत के बीच ममता बनर्जी ने पहली बार खुलकर अभिषेक बनर्जी का बचाव किया। उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर समझौता करने का आरोप लगाया, भाजपा पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का दावा किया और कहा कि जरूरत पड़ी तो वह टीएमसी को फिर से शून्य से खड़ा कर देंगी।

टीएमसी के कई बागी नेताओं ने पार्टी छोड़ने के लिए अभिषेक बनर्जी के कथित मनमाने रवैये को जिम्मेदार ठहराया है। ऐसे माहौल में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के समर्थन में मजबूती से सामने आईं। बुधवार को उन्होंने ‘गद्दारों की ओर से जनता से माफी मांगी और कहा कि न तो उन्होंने और न ही उनके परिवार ने राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए कभी कोई समझौता किया है।

टीएमसी में बढ़ती फूट के बीच अभिषेक बनर्जी के बचाव में अब तक का सबसे मुखर सार्वजनिक बयान देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद अभिषेक को पार्टी पर हमलों का ‘बहाना’ बना दिया गया है। राजनीतिक लड़ाई छोड़कर ‘राहत’ हासिल करने के बजाय अभिषेक ने संघर्ष का रास्ता चुना और इसके लिए उनकी सराहना की जानी चाहिए। फेसबुक लाइव के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि अभिषेक बनर्जी को एक बहाना बना दिया गया है। उनके परिवार के सदस्यों को समन भेजा गया। अगर वह चाहते तो राहत पा सकते थे, लेकिन वह लड़ाई के मैदान से भागे नहीं। जिस तरह उन्होंने संघर्ष जारी रखा है, उनकी सभी कमियों को माफ किया जा सकता है।

हाल के हफ्तों में टीएमसी छोड़ने वाले कई वरिष्ठ नेताओं ने अभिषेक बनर्जी पर पार्टी को तानाशाही तरीके से चलाने और संगठन में डर का माहौल बनाने का आरोप लगाया है। पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि मैं गद्दारों की ओर से जनता से माफी मांगती हूं। मैंने अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए कभी अपनी अंतरात्मा नहीं बेची। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें और उनके परिवार को लगातार राजनीतिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, क्योंकि उन्होंने कभी समझौता करने का रास्ता नहीं चुना।

पार्टी बदलने वाले नेताओं पर परोक्ष हमला करते हुए उन्होंने कहा कि अगर मैंने समझौता किया होता, तो हमें इतनी प्रताड़ना नहीं झेलनी पड़ती। जिन्होंने समझौता किया है, उनके पास अपने कई बैग और सामान हैं। यह दावा करते हुए कि भाजपा जांच एजेंसियों और पुलिस का इस्तेमाल कर नेताओं पर दबाव बना रही है, ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि कई नेताओं ने डर की वजह से पार्टी छोड़ी है। लोकसभा और राज्यसभा में हमारे अभी भी 18 सांसद हैं। जो सांसद ‘सेटिंग कंपनी’ में शामिल हुए हैं, उन्होंने ऐसा इसलिए किया है क्योंकि वे पुलिस से डरते हैं।

भाजपा पर निशाना साधते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि टीएमसी छोड़ने वाले नेता भगवा पार्टी की ‘वॉशिंग मशीन’ और भाजपा समर्थित टीएमसी के बागी खेमे में जा रहे हैं। आज जो व्यक्ति (मदन मित्रा) पार्टी छोड़कर गए, उन्होंने कल ही हमें बताया था कि उन्हें और उनके परिवार को समन मिला है। तभी हमें समझ आ गया था कि वे पाला बदल सकते हैं। जिनकी कोई ‘सेटिंग’ है, वे ही भाजपा की ‘वॉशिंग मशीन’ में शामिल हो रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा,’भाजपा चाहती थी कि मुझे हार्ट अटैक आ जाए। लेकिन मैं तब तक जिंदा रहूंगी, जब तक उनका अंत नहीं हो जाता।’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके नेताओं और उनके परिवार के सदस्यों को केंद्रीय एजेंसियों के नोटिस भेजकर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें पाला बदलने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

तृणमूल प्रमुख ने कहा कि तमाम चुनौतियों और राजनीतिक हमलों के बावजूद वह किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगी और अपनी लड़ाई जारी रखेंगी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद खड़ी हुई है। इसे तोड़ने की हर कोशिश का राजनीतिक जवाब दिया जाएगा और उनकी राजनीतिक लड़ाई अंत तक जारी रहेगी।

WORLD : अफ्रीका के 40 देशों तक पहुंचेगा भारत का रक्षा उद्योग, पुणे में सेना प्रमुखों के सम्मेलन की तैयारी

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भारत नवंबर में पुणे में अफ्रीकी देशों के सेना प्रमुखों का सम्मेलन आयोजित करेगा, जिसमें लगभग 40 देशों के शीर्ष सैन्य अधिकारी और रक्षा प्रतिनिधि शामिल होने की संभावना है। सम्मेलन का उद्देश्य रक्षा सहयोग को मजबूत करने के साथ भारतीय रक्षा उद्योग और स्वदेशी सैन्य तकनीकों को अफ्रीकी देशों तक पहुंचाना है।

भारत अफ्रीकी देशों के सेना प्रमुखों के बड़े सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। महाराष्ट्र के पुणे जिले में 4 और 5 नवंबर को प्रस्तावित सम्मेलन में लगभग 40 अफ्रीकी देशों के सेना प्रमुखों, 120 वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और भारत में उनके रक्षा अताशों के शामिल होने की संभावना है। सम्मेलन ऐसे समय होने जा रहा है, जब भारत अपनी रक्षा कूटनीति को केवल सैन्य सहयोग तक सीमित न रखकर उसे रक्षा उद्योग, तकनीकी साझेदारी और स्वदेशी हथियारों के निर्यात से जोड़ रहा है।

सेना की दक्षिणी कमान की देखरेख में होने वाले सम्मेलन में रक्षा-कूटनीतिक संवाद के साथ बड़ी रक्षा प्रदर्शनी की तैयारी भी की जा रही है। इसका सीधा लक्ष्य लगभग 40 अफ्रीकी देशों के दरवाजे तक स्वदेशी रक्षा उद्योग पहुंचाकर अफ्रीकी बाजार पर दस्तक देना है। सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शनी में उन स्वदेशी रक्षा प्रणालियों पर जोर होगा, जो आधुनिक युद्ध की नई जरूरतों को पूरा करती हैं। इनमें ड्रोन और ड्रोन रोधी तकनीक, बख्तरबंद वाहन और इन्फैंट्री कैरियर, भारत में विकसित हल्की और मध्यम तोपें, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, साइबर सुरक्षा समाधान और नाइट विजन उपकरण प्रमुख होंगे।

चुनौती बड़ी, पर बढ़त बनाने मौका भी
अफ्रीका में विस्तार के साथ भारतीय रक्षा उद्योग के सामने चुनौतियां भी होंगी। रूस दशकों से अफ्रीकी देशों का प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता रहा है। चीन कम कीमत, तेज आपूर्ति और आक्रामक कूटनीति के दम पर मजबूत पकड़ बना चुका है। ऐसे में भारत का जोर अपनी तकनीक, लागत और भरोसेमंद साझेदारी के बल पर बढ़त बनाना होगा।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत का मॉडल
अफ्रीका में रक्षा सहयोग को लेकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है। अमेरिका, फ्रांस, रूस, चीन और ड्रोन तकनीक के बल पर तुर्किये वहां तेजी से मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। ऐसे में भारत खुद को एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक रक्षा साझेदार के रूप में पेश कर रहा है। अधिकांश अफ्रीकी देशों के रक्षा बजट सीमित हैं। उन्हें कम लागत, आसान संचालन और कम रखरखाव वाले हथियारों की जरूरत है।

अफ्रीका में भारत की रक्षा मौजूदगी पहले से है, जिसे अब विस्तार देने की तैयारी है। मॉरीशस और सेशेल्स भारत के सबसे करीबी रक्षा साझेदार हैं। भारत ने दोनों देशों को डोर्नियर-228 विमान, ध्रुव हेलीकॉप्टर, बैराकुडा श्रेणी के अपतटीय गश्ती पोत और तटीय रडार नेटवर्क जैसी समुद्री सुरक्षा प्रणालियां उपलब्ध कराई हैं। हिंद महासागर में तटीय सुरक्षा के लिए नौसेना मोजाम्बिक के साथ सहयोग कर रही है। मोरक्को में बख्तरबंद वाहनों के लिए भारत की पहली विदेशी रक्षा विनिर्माण इकाई की स्थापना भारतीय रक्षा उद्योग की बड़ी उपलब्धि है।

NATIONAL : पीएम मोदी के स्वागत में झाड़ू थाम रहे सूबों के हुक्मरान, ‘स्वच्छता’ बना सियासी सम्मान

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के विभिन्न राज्यों के दौरों के दौरान ‘स्वच्छता से स्वागत’ नाम की एक नई परंपरा और प्रोटोकॉल उभरकर सामने आया है। इसके तहत पीएम मोदी के आगमन से पहले स्थानीय प्रशासन और भाजपा की स्थानीय इकाइयां मिलकर सड़कों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक सफाई अभियान चलाती हैं, जैसा कि हाल ही में गुजरात, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और पंजाब-हरियाणा के दौरों पर देखा गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के विभिन्न राज्यों के दौरों के दौरान एक नई परंपरा उभरकर सामने आई है। गुजरात, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और पंजाब-हरियाणा के पिछले दौरों के दौरान देखा गया कि पीएम मोदी के आगमन पर स्थानीय प्रशासन और भाजपा की स्थानीय यूनिट मिलकर व्यापक स्वच्छता अभियान चलाते हैं। इसे स्वच्छता से स्वागत नाम दिया गया है। यह पीएम मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के प्रति सम्मान और प्रतिबद्धता जताने का नया माध्यम बन गया है।

पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात में यह परंपरा सबसे मजबूत बनकर सामने आई है। किसी भी बड़े कार्यक्रम या रैली से दो-तीन दिन पहले ही नगर निगम और स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता सड़कों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई और उन्हें चमकाने में जुट जाते हैं। भाजपा के झोली में आए बंगाल में भी यह पहल नजर आई है। राज्य में सियासी गहमागहमी के बीच भी पीएम के दौरों से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से गंगा घाटों और कार्यक्रम स्थलों के आसपास विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया था। इसने लोगों का ध्यान अपनी ओर बरबस खींचा। राज्य प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर पीएम के दौरे से पहले छह दिनों तक सफाई अभियान चलाया।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और मंत्रियों के नेतृत्व में चले इस अभियान में जन-प्रतिनिधियों ने कोलकाता के प्रमुख ऐतिहासिक घाटों और सार्वजनिक जगहों की सफाई के लिए झाड़ू उठाई। वहीं राजस्थान में भी पीएम की यात्राओं से पहले ऐतिहासिक स्मारकों और प्रमुख रास्तों की न केवल सफाई की गई, बल्कि स्वच्छता से स्वागत के तहत दीवारों पर सुंदर पेंटिंग और कलाकृतियां भी उकेरी गईं। इसके अलावा पंजाब और हरियाणा में भी स्थानीय प्रशासन ने सड़कों के किनारे से कचरा हटाने व हरियाली बढ़ाने के लिए जमकर काम किया। अभियान की खासियत यह है कि इसमें केवल सरकारी तंत्र ही नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल के संगठन की भी बराबर की भागीदारी होती है। एक प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार, यह केवल एक प्रोटोकॉल नहीं है, बल्कि एक जन-आंदोलन की तरह है।

नागरिकों की भागीदारी : यह अभियान सार्वजनिक जगहों पर समुदाय का मालिकाना हक और जिम्मेदारी की भावना पैदा करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों, स्थानीय व्यापारियों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को सक्रिय रूप से शामिल करता है।

स्थानीय संसाधनों का कायाकल्प : सिर्फ झाड़ू-पोछा करने से आगे बढ़कर, इस अभियान ने जटिल नागरिक कार्यों पर ध्यान दिया है, जैसे ऐतिहासिक आदि गंगा चैनल की गहरी सफाई, गाद निकालना और उसे सुंदर बनाना।

नीतिगत एकीकरण : राज्य के अधिकारियों ने इस अभियान की गति का इस्तेमाल स्थायी नागरिक नीतियां बनाने में किया है, जिसमें डिजिटल निगरानी प्रणाली शुरू करना और सार्वजनिक जगहों पर कचरा फैलाने वालों के लिए सख्त जुर्माने का प्रस्ताव रखना शामिल है।

NATIONAL : शरद पवार बदल सकते हैं पाला, परिसीमन-महिला आरक्षण पर सरकार को समर्थन के संकेत

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एनसीपी (शरद पवार गुट) में अंदरूनी बगावत तेज हो गई है, जिसे रोकने के लिए शरद पवार पाला बदल सकते हैं। माना जा रहा है कि मानसून सत्र से पहले वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही, उनकी पार्टी संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर सरकार का समर्थन कर सकती है। शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने भी 50 प्रतिशत सीटें बढ़ने की शर्त पर इस बिल को समर्थन देने के संकेत दिए हैं।

तृणमूल कांग्रेस, आप और शिवसेना यूबीटी में टूट के बाद मानसून सत्र के पहले विपक्षी एकता को एक और बड़ा झटका लगने वाला है। पार्टी में सांसदों-विधायकों के बगावती सुर के बीच एनसीपी (शरद) न सिर्फ परिसीमन व महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन कर सकती है, बल्कि सत्र से पहले राजग में शामिल होने का फैसला भी कर सकती है।

सीएम फडणवीस से मिले जयंत पाटिल
एनसीपी (एसपी) के नए रुख ने मानसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो तिहाई समर्थन जुटाने में लगी सरकार को नई ऊर्जा दी है। गौरतलब है कि छह सांसदों और आधे से अधिक विधायकों के बगावती सुर के बीच शरद पवार की शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे से मुलाकात की काफी चर्चा हुई थी। इस बीच मंगलवार देर रात पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल भी सीएम देवेंद्र फडणवीस से गुपचुप मिले। इसी दौरान दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के साथ एकनाथ शिंदे और शिवसेना यूबीटी गुट के बागी सांसदों की मैराथन बैठक हुई थी।

पवार का समर्थन तय
भाजपा सूत्रों के मुताबिक फडणवीस और जयंत पाटिल की मुलाकात में एक बात तो तय हो गई है कि एनसीपी (एसपी) महिला आरक्षण-परिसीमन से जुड़े विधेयक के पक्ष में मतदान करेगी, जहां तक बागी सांसदों-विधायकों की बात है तो इस पर बातचीत जारी है। दूसरी ओर शरद पवार के करीबियों का कहना है कि उन्होंने पार्टी में बगावत की आग ठंडी करने और पार्टी को टूट से बचाने के लिए राजग का समर्थन करने का मन बनाया है।

50 फीसदी लोकसभा सीटें बढें तभी करेंगे समर्थन : सुले
शरद पवार की बेटी और एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने भी बुधवार को एनडीए सरकार को समर्थन देने का संकेत दिया। हालांकि, उन्होंने शर्त रखी कि अगर, हर राज्य में लोकसभा की 50 प्रतिशत सीटें बढ़ती हैं तभी वे परिसीमन बिल का समर्थन कर सकती हैं। उन्होंने कहा, परिसीमन बिल पर अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है। इसलिए पार्टी का रुख तय नहीं हुआ है। यदि विधेयक में 50 प्रतिशत कोटा निर्धारित किया जाता है तो हम समर्थन कर सकते हैं।

BUSINESS : इंस्टामार्ट से अब 30-45 मिनट में LPG सिलेंडर मिलेगा:HPCL के साथ पार्टनरशिप; बेंगलुरु से शुरुआत, 10kg और 5kg के सिलेंडर ऑर्डर कर सकेंगे

स्विगी के क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट ने LPG सिलेंडर की डिलीवरी शुरू करने के लिए हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ पार्टनरशिप का ऐलान किया है। इसके तहत अब ग्राहक सीधे इंस्टामार्ट ऐप के जरिए ऑन-डिमांड LPG गैस सिलेंडर ऑर्डर कर सकेंगे।

बुधवार, 15 जुलाई को दोनों कंपनियों ने इस सर्विस को लॉन्च करने की जानकारी दी। गैस सिलेंडर की क्विक डिलीवरी के लिए क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ हुई यह देश की पहली पार्टनरशिप है। शुरुआती फेज में इस सर्विस को कर्नाटक के बेंगलुरु में रोलआउट किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिलेंडर की डिलीवरी 30 से 45 मिनट में की जा सकती है।

10 kg का नया ‘HP नव्या’ और 5 kg का सिलेंडर मिलेगा

इस पार्टनरशिप के जरिए ग्राहक इंस्टामार्ट ऐप पर HPCL के दो तरह के सिलेंडर ऑर्डर कर सकेंगे। इसमें हाल ही में लॉन्च किया गया कंपनी का ‘HP नव्या’ 10 किलोग्राम का कंपोजिट LPG सिलेंडर शामिल है।

इसके अलावा ग्राहक ऐप के जरिए HPCL का ट्रेडिशनल 5 किलोग्राम वाला लोहे का LPG सिलेंडर भी बुक कर सकेंगे।

बिना किसी पुराने कनेक्शन के भी बुकिंग कर सकेंगे

कंपनियों ने जानकारी दी है कि ग्राहकों को इंस्टामार्ट के जरिए इन गैस सिलेंडरों को खरीदने के लिए पहले से किसी भी प्रकार के घरेलू LPG गैस कनेक्शन की जरूरत नहीं होगी।

पहला ऑर्डर: यदि कोई ग्राहक पहली बार ऐप से सिलेंडर बुक करता है, तो इसे नए सिलेंडर की खरीद माना जाएगा। पहली बार खरीदने पर ग्राहक का आइडेंटिटी वेरिफिकेशन किया जाएगा और डिलीवरी प्रूफ से जुड़े जरूरी दस्तावेज लिए जाएंगे।
रिफिल ऑर्डर: पहली बार के बाद जब भी ग्राहक दोबारा सिलेंडर बुक करेंगे, तो डिलीवरी के समय उन्हें अपना पुराना खाली HPCL सिलेंडर डिलीवर करने वाले कर्मचारी को सौंपना होगा।

अब सवाल-जवाब में जानें इससे जुड़ी जरूरी बातें…

सिलेंडर इंस्टामार्ट का होगा या HP का?

सिलेंडर पूरी तरह से HP का ही होगा। स्विगी इंस्टामार्ट यहां सिर्फ एक टेक-इनेबल्ड डिलीवरी प्लेटफॉर्म की तरह काम कर रहा है। ग्राहक इंस्टामार्ट ऐप के जरिए ऑर्डर बुक करेंगे, लेकिन गैस और सिलेंडर HPCL के ही होंगे।

सिलेंडर की कीमत क्या होगी और रिफिलिंग चार्ज क्या होंगे?

कंपनियों के ऐलान में अभी सटीक कीमतों और डिलीवरी/रिफिलिंग चार्ज का खुलासा नहीं किया गया है। चूंकि यह कॉमर्शियल और घरेलू गैस नियमों के तहत आता है, इसलिए नए 10 kg ‘HP नव्या’ कंपोजिट सिलेंडर और 5 kg मेटल सिलेंडर की मूल कीमत सरकारी दरों और HPCL के मानक नियमों के अनुसार ही तय होगी।

इसके अलावा, इंस्टामार्ट ऐप पर क्विक डिलीवरी के लिए कुछ अतिरिक्त कॉन्विनिएंस या डिलीवरी चार्ज जोड़े जा सकते हैं, जिसकी स्पष्ट जानकारी ऐप पर बुकिंग के समय ही लाइव होगी।

HP ने टाई-अप के लिए इंस्टामार्ट को ही क्यों चुना?

स्विगी इंस्टामार्ट भारत के 131 से ज्यादा शहरों में फैला हुआ है और इसके पास एक बेहद मजबूत डिजिटल और डिलीवरी नेटवर्क है। HPCL के मार्केटिंग डायरेक्टर अमित गर्ग के अनुसार, बदलते दौर में ग्राहकों की जरूरतें बदल रही हैं और वे हर चीज तुरंत चाहते हैं।

इंस्टामार्ट के जरिए HPCL को एक नया टेक-इनेबल्ड चैनल मिला है, जिससे वे युवाओं, नए शहर में शिफ्ट होने वाले लोगों और डिजिटल फ्रेंडली ग्राहकों तक तेजी से पहुंच बना सकते हैं।

डिलीवरी के दौरान सेफ्टी की जिम्मेदारी किसकी होगी?

सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी HPCL के ऑथराइज्ड डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क और उनके प्रोफेशनल डिलीवरी स्टाफ की होगी। इंस्टामार्ट के CEO अमितेश झा ने कहा कि क्विक कॉमर्स ऐप से बुकिंग होने के बावजूद सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। ग्राहकों के ऑर्डर सीधे HPCL के ऑथराइज्ड डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क से पूरे किए जाएंगे।

सिलेंडरों की डिलीवरी सामान्य स्विगी राइडर्स नहीं, बल्कि HPCL के ट्रेंड और प्रोफेशनल डिस्ट्रीब्यूटर स्टाफ ही करेंगे, जो सभी लागू सेफ्टी और रेगुलेटरी नियमों का पालन करने के लिए जिम्मेदार होंगे।

क्या अन्य गैस कंपनियां भी इसे फॉलो कर सकती हैं?

जी हां, बिल्कुल कर सकती हैं। भारत में क्विक कॉमर्स का बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। HPCL और इंस्टामार्ट की यह पार्टनरशिप देश में अपनी तरह का पहला और पायलट यानी शुरूआती प्रोजेक्ट है। अ

गर बेंगलुरु में यह मॉडल सफल रहता है, तो कॉम्पिटिशन को देखते हुए इंडेन और भारत गैस जैसी अन्य बड़ी सरकारी व निजी कंपनियां भी ब्लिंकिट या जेप्टो जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ इस तरह की पार्टनरशिप कर सकती हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से ग्राहकों की पहुंच बढ़ेगी

HPCL के मार्केटिंग डायरेक्टर अमित गर्ग ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से ग्राहकों की पहुंच बढ़ेगी। इंस्टामार्ट ने ग्रॉसरी से आगे बढ़कर अब ग्राहकों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बनने के लिए अपनी सर्विसेज का काफी विस्तार किया है। साथ मिलकर हम उसी सुविधा को एक और जरूरी घरेलू सर्विस तक पहुंचा रहे हैं। हम ग्राहकों की सुरक्षा और भरोसे से समझौता किए बिना LPG डिलीवरी को इंस्टामार्ट पर लेकर आए हैं।

ग्राहकों की जरूरतें बदल रही हैं और हम उनके लिए लगातार नए समाधान ला रहे हैं। हमारा उद्देश्य डिजिटल रूप से सक्षम प्लेटफॉर्म के जरिए देश के लोगों के लिए LPG गैस की पहुंच को आसान बनाना है। साथ ही सुरक्षा, विश्वास और विश्वसनीयता के उसी मानक को बनाए रखना है जो हमेशा से HP गैस के साथ जुड़ा रहा है।

बेंगलुरु के बाहर सर्विस कब मिलेगी, अभी तय नहीं

वर्तमान में स्विगी इंस्टामार्ट भारत के 131 से ज्यादा शहरों में 50,000 से ज्यादा एसकेयू (SKUs) यानी प्रोडक्ट्स की डिलीवरी करता है। एलपीजी डिलीवरी सेगमेंट में उतरना कंपनी के लिए हाई-ट्रस्ट कैटेगरीज में एंट्री का हिस्सा है।

वहीं HPCL के लिए यह साझेदारी अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को एक नए टेक-इनेबल्ड चैनल में विस्तार देने जैसी है। दोनों कंपनियों ने फिलहाल बेंगलुरु से बाहर इस सर्विस को बढ़ाने की टाइमलाइन शेयर नहीं की है।

क्या होता है ‘कंपोजिट’ सिलेंडर?

ट्रेडिशनल गैस सिलेंडर भारी लोहे या स्टील के बने होते हैं, जिनका वजन खाली होने पर भी काफी ज्यादा होता है। इसके विपरीत, कंपोजिट सिलेंडर तीन परतों वाले फाइबरग्लास मटीरियल से बने होते हैं।

ये जंगरोधी होते हैं और इनमें जंग लगने की वजह से गैस लीक होने का खतरा नहीं रहता। हल्के होने के साथ-साथ इनका लुक भी मॉडर्न होता है, जिससे यह शहरी घरों और आधुनिक किचन के लिए बेहतर होते हैं।

NATIONAL : सीधे हाईकमान से मिलना चाहते हैं चन्नी, बघेल की बैठक से बनाई दूरी; इस संकेत के बाद नाराजगी

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पंजाब कांग्रेस में घमासान में जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सीधे हाईकमान से मिलना चाहते हैं। उन्होंने प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल की बैठक से दूरी बना रखी है। प्रदेश प्रभारी की बैठक में चन्नी गुट का कोई नेता नहीं पहुंचा, पूर्व सीएम चन्नी चंडीगढ़ लौटने के बाद भी बघेल से नहीं मिले।

पंजाब कांग्रेस में बगावत जारी है। पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बदलने की जिद पर अड़े हैं। इस विवाद को सुलझाने के लिए पंजाब प्रभारी एवं पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने बैठकों का दौर शुरू कर दिया मगर चन्नी पहले हाईकमान से मिलना चाहते हैं। लिहाजा मंगलवार को उन्होंने बघेल की बैठक से दूरी बनाई रखी। उनके समर्थक विधायक, पूर्व मंत्री व पूर्व विधायक भी प्रदेश प्रभारी की बैठक में नहीं गए।

पार्टी सूत्र बताते हैं कि चन्नी दिल्ली से लौट आए हैं और वे मंगलवार को चंडीगढ़ में ही रहे मगर बघेल से मिलने नहीं पहुंचे। उनके समर्थकों ने यही बताया कि चन्नी जरूरी काम के चलते दो दिन बाद बघेल से मिलेंगे। उधर, सूत्र बताते हैं कि मंगलवार शाम को कांग्रेसी नेता राहुल गांधी की टीम ने पूर्व सीएम चन्नी से संपर्क साधा है। उनकी मुलाकात जल्द राहुल गांधी से हो सकती है जबकि प्रियंका गांधी की ओर से भेजी गई टीम चन्नी से मिलकर जा चुकी है।

हालांकि इस मुलाकात के बाद से पूर्व सीएम चन्नी और उनके समर्थक फिलहाल शांत हैं मगर पंजाब कांग्रेस में जिस तरह से अंदरूनी हालात चल रहे हैं, उस देखते हुए हाईकमान को पार्टी में टूट का डर सता रहा है।

चन्नी के एक समर्थक विधायक ने बताया कि मोरिंडा में हुई बैठक में सभी नेताओं ने पूर्व सीएम चन्नी को इस मसले पर हाईकमान से बात करने के लिए अधिकृत किया था, इसलिए सभी नेता चाहते हैं कि प्रदेश प्रभारी से पहले पूर्व सीएम चन्नी राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के समक्ष पंजाब के नाराज नेताओं की बात रखें। उनके अनुसार अधिकतर नेता वड़िंग का नेतृत्व स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

एक कार्यवाहक प्रदेशाध्यक्ष, छह जिला प्रधान नहीं पहुंचे
मंगलवार को बघेल ने बैठकों का दौर शुरू कर दिया जोकि देर शाम तक जारी रहा। पहले प्रदेश प्रभारी बघेल ने नवनियुक्त प्रदेश कार्यवाहक प्रधानों सुखजिंदर सिंह डैनी, राजकुमार वेरका और संगत सिंह गिलजियां को बुलाया था मगर गिलिजियां नहीं पहुंचे। इसी तरह उन्होंने सभी जिला प्रधानों को भी बैठक के लिए बुलाया था, उसमें भी छह जिलाध्यक्ष नहीं पहुंचे।

इससे पहले बघेल ने कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा, चुनाव घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष डॉ. अमर सिंह, चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति के अध्यक्ष विजय इंदर सिंगला, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता राणा केपी सिंह, चुनाव प्रचार समिति के सह अध्यक्ष सुखपाल सिंह खैहरा, घोषणा पत्र समिति के सह-अध्यक्ष हरदयाल कंबोज, चुनाव प्रबंधन समिति के सह अध्यक्ष कुलजीत नागरा, ब्रह्म मोहिंद्रा, बलबीर सिंह सिद्धू, शमशेर सिंह दूलों सहित अन्य नेताओं के साथ बैठक की।

नेताओं, कार्यकर्ताओं में एकजुटता : बघेल
पंजाब प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने कहा कि सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं में एकजुटता है और सभी मिलकर 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जल्द जुटेंगे। जिनके जो गिल-शिकवे हैं, वे जल्द दूर कर लिए जाएंगे। वे एक-एक कर सभी नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। बघेल ने कहा कि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में उद्देश्य और मिशन को लेकर पूरी एकजुटता है। बघेल ने कहा, बैठक में चुनाव को लेकर संगठन की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। कहना-सुनना जारी है, मिलना-जुलना जारी है।

बदलाव न होने के संकेत पर बढ़ी नाराजगी
बघेल ने पंजाब कांग्रेस मुख्यालय में जिलाध्यक्षों की बैठक के दौरान मौजूदा नेतृत्व में बदलाव न होने के संकेत दिए। जिसके बाद पूर्व सीएम चन्नी के समर्थक और नाराज हो गए हैं। उनका कहना है कि अधिकतर नेता यही मांग कर रहे हैं कि मौजूदा नेतृत्व बदला जाए, यदि ऐसा नहीं होता तो नाराजगी और बढ़ेगी।

NATIONAL : सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- हर जिंदगी कीमती, दिया ये आदेश

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दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की सरकारी डॉक्टरों की निगरानी में जांच का आदेश दिया है। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश हुए। मेहता ने अदालत को आश्वासन दिया कि सरकारी चिकित्सक सोनम वांगचुक की नियमित जांच करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर उचित कदम उठाएंगे।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 19वें दिन भी जारी है। लंबे समय से जारी इस हड़ताल के कारण उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक घट गया है। डॉक्टरों की टीम उनकी शारीरिक स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की अदालत इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल के द्वारा दिए गए आश्वासन से हम संतुष्ट हैं। यह निर्देश दिए जाते हैं कि सरकारी डॉक्टरों द्वारा सोनम वांगचुक्की नियमित जांच की जाए और डॉक्टरों की सलाह पर उचित हस्तक्षेप किया जाए। अदालत ने जनहित याचिका का निस्तारण किया।

कोर्ट में सरकारी वकील की दलील, हाईकोर्ट ने कहा- प्रत्येक नागरिक का जीवन कीमती
दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सोनम का स्वास्थ्य नियमित तौर पर चेक हो रहा है। अदालत ने पूछा कि क्या सरकारी डॉक्टर सोनम वांगचुक की जांच कर रहे हैं। उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि नहीं उनकी तरफ से जब भी हमें अनुमति जाएगी सरकारी डॉक्टर उनकी नियमित जांच करना शुरू कर देंगे। तुषार मेहता ने अदालत को आश्वासन दिया कि अब सरकारी चिकित्सक उनकी नियमित जांच करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर उचित कदम उठाए जाएंगे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के आश्वासन के बाद अदालत ने कहा की प्रत्येक नागरिक का जीवन कीमती है। किसी भी व्यक्ति को इस प्रकार अपने जीवन को अंत करने के लिए नहीं देखा जा सकता।

कैसा है सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य
डॉक्टरों के अनुसार, सोनम वांगचुक अभी भी काफी सक्रिय हैं। डॉक्टर सतीश लांबा ने उनके स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि लगातार उपवास से ब्लड शुगर का स्तर घट रहा है। इससे उनके स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। कई बार उनसे भूख हड़ताल खत्म करने का आग्रह किया गया है।

वीडियो साझा कर सोनम वांगचुक ने की बड़ी अपील
हालांकि, उन्होंने अपनी मांगों पर कार्रवाई न होने तक हड़ताल जारी रखने की बात कही है। कुछ देर में उनके स्वास्थ्य की फिर से जांच की जाएगी। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने एक्स हैंडल पर एक वीडियो साझा किया है। उन्होंने कहा कि उनकी हालत बहुत अच्छी नहीं है, लेकिन बहुत खराब भी नहीं है।

स्वास्थ्य स्थिति पर निगरानी
डॉक्टर सतीश लांबा ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उपवास के कारण ब्लड शुगर का स्तर कम हो रहा है। यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरी हो सकती है। डॉक्टरों की टीम उनकी शारीरिक स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। वांगचुक अभी भी काफी सक्रिय बने हुए हैं।

GUJARAT : अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की 148वीं रथ यात्रा आज, गृह मंत्री अमित शाह करेंगे मंगला आरती, जानें सबकुछ

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गुजरात के अहमदाबाद में आज ऐतहासिक भगवान जगन्नाथ मंदिर से रथ यात्रा निकलेगी। रथ यात्रा के रूट पर सुरक्षा के तगड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। गुजरात पुलिस बेंगलुरु में भगदड़ की घटना के बाद 23000 पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर लगाया है। 41 ड्रोन से यात्रा की निगरानी की जाएगी।

अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद में भगवान श्री जगन्नाथ की 148वीं रथ यात्रा सुबह 7 बजे शुरू होगी। बेंगलुरु में भगदड़ की घटना के बाद रथयात्रा की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं। रथयात्रा में पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जमालपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुंचेंगे और मंगला आरती करेंगे। इसके बाद गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल आलिंद विधि के करेंगे और फिर यात्रा आगे बढ़ेगी। अहमदाबाद पुलिस आयुक्त जी एस मलिक के अनुसार यात्रा की सुरक्षा के लिए 23 हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि रथयात्रा से पहले तीन रिहर्सल कर ली गई हैं। में जगन्नाथ रथ यात्रा गुजरात का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है।

कहां से शुरू होगी यात्रा?
अहमदाबाद में रथ यात्रा जमालपुर में ऐतिहासिक 400 साल पुराने जगन्नाथ मंदिर से सुबह 7 बजे के बाद शुरू होगी। शहर के पुराने इलाकों से तकरीबन 18 किलोमीटर का रूट तय करेगी। इसमें भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर सवार होकर हजारों भक्तों को आशीर्वाद देते हुए दिखाई देंगे। पुलिस के अनुसार, रथयात्रा के 148वें संस्करण में 14-15 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

क्या है यात्रा का रूट?

  1. (प्रस्थान) जमालपुर जगन्नाथ मंदिर-मुनिसिपल ऑफिस (AMC)-रायपुर चकला-अस्टोडिया चौराहा, कालुपुर सर्किल-मोसल सरसपुर
  2. (वापसी) मोसल सरसपुर-कालुपुर सर्किल-प्रेम दरवाजा-दिल्ली चकला, शाहपुर दरवाजा-आरसी हाई स्कूल-घीकांटा-माणेक चौक-जगन्नाथ मंदिर

25 वाॅच टावर, 152 संवेदनशील केंद्र
अहमदाबाद पुलिस आयुक्त ज्ञानेंद्र सिह मलिक ने कहा कि यात्रा में लाखों श्रद्धालु आते हैं। उन्होंने कहा रथयात्रा में एआई कैमरे लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि 152 संवेदनशील जगहों की पहचान की गई है। हमने 25 अतिरिक्त वॉच टावर बनाए हैं। 240 ऊंचे स्थानों की पहचान की गई है। व्यापक व्यवस्था की गई है। मलिक ने इस बार की रथयात्रा में तकनीक का सक्रिय रूप से इस्तेमाल हो रहा है। 41 ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। एआई आधारित प्रणाली आग लगने की स्थिति में पुलिस और अग्निशमन विभाग को सूचित करेगी तथा मार्ग पर भीड़भाड़ के बारे में पुलिस नियंत्रण कक्ष को चेतावनी देगी। मलिक ने कहा कि 130 अतिरिक्त CCTV कैमरे लगाए हैं, जिससे कुल संख्या 3,500 हो गई है। 15 QRT (क्विक रिस्पॉन्स टीम) तैनात किए गए हैं। 17 जन सहायता केंद्र बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग रणनीतिक जगहों पर आठ छोटे कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।

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