Saturday, September 19, 2026
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Wimbledon 2026: यानिक सिनर ने फिर जीता विंबलडन, ज्वेरेव को हराकर लगातार दूसरी बार बने चैंपियन

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यानिक सिनर ने अलेक्जेंडर ज्वेरेव को चार सेटों में हराकर लगातार दूसरी बार खिताब अपने नाम किया. पहला सेट हारने के बावजूद सिनर ने शानदार वापसी करते हुए अपने करियर का पांचवां ग्रैंड स्लैम खिताब जीता.

विंबलडन 2026 के पुरुष सिंगल्स फाइनल में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी यानिक सिनर ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित की. सेंटर कोर्ट पर खेले गए खिताबी मुकाबले में उन्होंने जर्मनी के अलेक्जेंडर ज़्वेरेव को 6-7(7), 7-6(2), 6-3, 6-4 से हराकर लगातार दूसरी बार विंबलडन का ताज अपने नाम कर लिया. यह ऑल इंग्लैंड क्लब में सिनर का लगातार दूसरा खिताब है, जबकि ग्रैंड स्लैम स्तर पर यह उनके करियर की पांचवीं ट्रॉफी रही. इस जीत के साथ उन्होंने ज़्वेरेव के खिलाफ अपना दबदबा भी बरकरार रखा और उनके खिलाफ लगातार 10वीं जीत दर्ज की. हालांकि, मुकाबले की शुरुआत आसान नहीं रही क्योंकि पहला सेट टाई-ब्रेक में हारने के साथ ही ज़्वेरेव ने सिनर की लगातार 14 सेट जीतने की लय भी तोड़ दी.

पहले सेट के बाद बदला मैच का रुख
पहले सेट में कड़ा संघर्ष देखने को मिला और टाई-ब्रेक में ज़्वेरेव बाजी मारने में सफल रहे. लेकिन दूसरे सेट से सिनर ने मुकाबले पर पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी. उन्होंने टाई-ब्रेक जीतकर मैच बराबर किया और फिर अगले दोनों सेट अपने नाम करते हुए खिताब पर कब्जा जमा लिया. पूरे मुकाबले में सिनर की बेसलाइन से लगातार आक्रामक खेल, बेहतरीन सर्विस रिटर्न और दबाव में संयम उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुई.

ज्वेरेव ने दी टक्कर, लेकिन निर्णायक मौकों पर चूके
जर्मन खिलाड़ी ने मैच में 17 ऐस लगाए और पहली सर्विस पर 80 प्रतिशत सफलता हासिल की. इसके बावजूद अहम मौकों पर वह सिनर के सामने टिक नहीं सके. सिनर ने अपनी पहली सर्विस पर 80 प्रतिशत अंक जीते, जबकि दूसरी सर्विस पर भी 68 प्रतिशत अंक अपने नाम किए. उन्हें मिले पांच ब्रेक प्वाइंट में से दो को उन्होंने भुनाया और रिटर्न गेम में भी बढ़त बनाए रखी. रिसीविंग प्वाइंट्स में भी उन्होंने 43-34 से बढ़त हासिल की.

शानदार अंदाज में खत्म किया मुकाबला
चैंपियनशिप प्वाइंट पर सिनर ने ज़्वेरेव के ड्रॉप शॉट का शानदार जवाब देते हुए क्रॉसकोर्ट बैकहैंड विनर लगाया. इसके बाद अगले ही प्वाइंट पर दमदार फोरहैंड विनर के साथ मैच खत्म कर दिया. जीत के बाद वह खुशी से घास पर गिर पड़े और नेट के पास जाकर ज़्वेरेव को गले लगाया. मुकाबले के अंत तक सिनर ने कुल 145 अंक जीते, जबकि ज़्वेरेव 130 अंक ही जुटा सके. तीन घंटे से ज्यादा चले फाइनल में उन्होंने 25 गेम अपने नाम किए और लगातार दूसरे साल विंबलडन ट्रॉफी उठाने का गौरव हासिल किया.

दूसरी ओर, ज़्वेरेव का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने का इंतजार अभी भी जारी है. दुनिया के नंबर एक खिलाड़ियों के खिलाफ ग्रैंड स्लैम मुकाबलों में उनका रिकॉर्ड अब 0-7 हो गया है.

Bangkok Pub Fire News: बैंकॉक के पब में आग लगने से 27 की मौत, म्यूजिक की धुन पर मस्त थे लोग, तभी हुआ धमाका

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Bangkok Fire News: बैंकॉक के ना लाडप्राओ पब में भीषण आग लग गई, जिसके बाद कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई. 63 लोग घायल हो गए. शुरुआती जांच में स्टेज के पास सर्किट ब्रेकर से धुआं निकलने के बाद धमाके की बात सामने आई है. थाईलैंड में यह कोई पहला हादसा नहीं है. लेकिन लगातार ऐसे बड़े हादसे दिखाते हैं कि अभी भी कोई सबक नहीं लिया जा रहा है.

बैंकॉक: थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में सोमवार तड़के एक पब में लगी भीषण आग ने 27 लोगों की जान ले ली और 63 लोग अस्पताल पहुंच गए. लेकिन यह सिर्फ एक दर्दनाक हादसे की कहानी नहीं है. असली सवाल यह है कि आखिर थाईलैंड हर कुछ साल बाद नाइट क्लबों में होने वाली ऐसी भयावह आग से सबक क्यों नहीं ले पा रहा है. 2009 में सैंतिका नाइटक्लब में 66 लोगों की मौत हुई, 2022 में एक म्यूजिक पब में 14 लोगों की जान गई थी. अब 2026 में ना लाडप्राओ
न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक थाई पीएम अनुतिन चार्नवीराकुल मौके पर पहुंच गए. उन्होंने बताया कि शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि पब में एक म्यूजीशियन ने सबसे पहले स्टेज के पास लगे सर्किट ब्रेकर से धुआं निकलते देखा. कुछ ही सेकंड बाद बिजली चली गई, फिर धमाके जैसी आवाज आई और पूरा हॉल काले धुएं से भर गया. अंधेरा इतना घना था कि लोग एक-दूसरे को देख तक नहीं पा रहे थे. बाहर निकलने की कोशिश में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग रास्ता भटक गए.

इस अग्निकांड के बाद जब शवों को निकाला गया तो एक ऐसा पैटर्न दिखा, जिसने और भी सवाल खड़े कर दिए. अधिकारियों ने बताया कि सबसे ज्यादा शव पब के पिछले हिस्से में बने वॉशरूम के पास मिले. इससे माना जा रहा है कि कई लोग धुएं और अंधेरे से बचने के लिए वहां भागे, लेकिन बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल पाया. इससे सवाल उठ रहा है कि क्या इस बिल्डिंग का इमरजेंसी एग्जिट सिस्टम और फायर सेफ्टी इंतजाम फेल हो गए.

इस आग लगने की घटना में फायर ब्रिगेड ने तेजी दिखाई है. करीब आधे घंटे में ही आग पर काबू पा लिया गया. हादसे के बाद 63 लोगों को अस्पताल ले जाया गया, जिनमें 22 की हालत गंभीर बताई गई है. कई पीड़ितों के पास पहचान से जुड़ा कोई डॉक्यूमेंट नहीं था. कई लोग बेहोश मिले, जिनकी पहचान करने में भी प्रशासन को दिक्कत आ रही है. घटनास्थल के बाहर परिजनों के लिए अलग से सहायता केंद्र बनाया गया, जहां लोग अपने लापता रिश्तेदारों को खोज रहे हैं.

थाईलैंड अपनी नाइटलाइफ के लिए मशहूर है. भारत समेत दुनिया भर से करोड़ों पर्यटक हर साल यहां जाते हैं. यह हादसा इसलिए चिंता बढ़ाने वाली बात है. लेकिन सबसे ज्यादा टेंशन की बात यह है कि थाईलैंड में पब से जुड़ी आग के पहले भी मामले आ चुके हैं और इससे लगता है कि कोई सबक नहीं सीखा गया है.
2009: बैंकॉक के सैंतिका नाइटक्लब में न्यू ईयर पार्टी के दौरान इनडोर आतिशबाजी से आग लगी. इस घटना में 66 लोगों की मौत हुई और 200 से ज्यादा घायल हुए.

WORLD : टल सकती थीं 15 मौतें, क्या लापरवाही की वजह से हुआ हादसा? 5 सवाल और उसके जवाब

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वियतनाम में स्पीडबोट हादसे में 15 भारतीयों की मौत हो गई है. इस हादसे में 21 लोगों को बचा लिया गया. शुरुआती जांच में लापरवाही के संकेत मिले हैं. बोट में क्षमता से अधिक यात्री, खराब मौसम और तकनीकी खामियां की आशंका से कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास शनिवार को हुआ हादसा क्या टल सकता था? शुरुआती जांच रिपोर्ट से ऐसा लगता है कि यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं थी. इसमें कई तरह की लापरवाहियां बरती गई और इस कारण 15 भारतीयों को अपनी जान गंवानी पड़ी. इस हादसे में 15 भारतीय पर्यटकों की मौत हो गई, जबकि 21 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया. सभी भारतीय एक कॉरपोरेट कंपनी की ओर से आयोजित रिवॉर्ड ट्रिप पर वियतनाम गए थे.
स्पीडबोट में कुल 36 लोग सवार थे. इनमें 32 भारतीय पर्यटक और चार क्रू मेंबर शामिल थे. हादसा होन मे रुट नगोआई द्वीप से करीब 400 मीटर दूर हुआ, जब अचानक स्पीडबोट पलट गई. मृतकों में 13 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल हैं. ज्यादातर पीड़ित तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल के रहने वाले थे. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर इतनी बड़ी दुर्घटना कैसे हुई. शुरुआती जांच में पांच ऐसे सवाल सामने आए हैं, जिनके जवाब पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकते हैं.

पहला सवाल- क्या स्पीडबोट में क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे?
जांच का सबसे अहम पहलू यही है कि जिस स्पीडबोट का रजिस्ट्रेशन नंबर AG 26751 था, उसमें कितने लोगों को ले जाने की अनुमति थी. हादसे के समय उसमें 36 लोग मौजूद थे. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी स्पीडबोट पर तय सीमा से ज्यादा भार हो जाए तो ऊंची लहरों के बीच उसका संतुलन तेजी से बिगड़ सकता है. ऐसे में जांच एजेंसियां बोट की आधिकारिक क्षमता, यात्रियों की संख्या और वजन के वितरण का पूरा गणित खंगाल रही हैं.

बचाव अभियान में शामिल स्थानीय नाव चालकों ने बताया कि कई लोगों को बाहर निकालना बेहद मुश्किल था, क्योंकि वे उलट चुकी नाव के अंदर फंस गए थे. अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या बोट का केबिन ऐसा था, जिससे पलटने के बाद बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया. यह भी देखा जा रहा है कि क्या आपातकालीन निकास स्पष्ट रूप से चिन्हित थे और क्या रवाना होने से पहले यात्रियों को सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई थी. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाएंगी कि क्या सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनने के निर्देश दिए गए थे. विशेषज्ञों का कहना है कि बंद केबिन में कुछ परिस्थितियों में लाइफ जैकेट भी लोगों को बाहर निकलने में बाधा बन सकती है, क्योंकि वह व्यक्ति को ऊपर की ओर धकेल देती है और वह छत से टकराकर फंस सकता है.
तीसरा सवाल- क्या कप्तान ने खराब मौसम की चेतावनी को नजरअंदाज किया?

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि हादसे के समय समुद्र में तेज हवाएं और ऊंची लहरें थीं. हालांकि प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि उसी इलाके में दूसरी पर्यटन नौकाएं भी चल रही थीं और उनके साथ कोई हादसा नहीं हुआ. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्पीडबोट के कप्तान ने मौसम विभाग या तटरक्षक बल की चेतावनी के बावजूद यात्रा जारी रखी. जांच में उस दिन के मौसम के रिकॉर्ड, समुद्री परिस्थितियों और कप्तान के फैसलों की विस्तार से समीक्षा की जाएगी.

चौथा सवाल- क्या स्पीडबोट तकनीकी रूप से सुरक्षित थी?

जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बोट की तकनीकी स्थिति भी है. अधिकारी यह पता लगाएंगे कि स्पीडबोट का रखरखाव समय पर हुआ था या नहीं. इसके लिए मेंटेनेंस रिकॉर्ड, निरीक्षण प्रमाणपत्र और इंजन से जुड़ी तकनीकी रिपोर्ट की जांच होगी. यह भी देखा जाएगा कि हादसे से ठीक पहले कहीं इंजन बंद तो नहीं हुआ या स्टीयरिंग सिस्टम ने काम करना बंद तो नहीं कर दिया. साथ ही यह भी जांच होगी कि बोट के ढांचे में पहले से कोई दरार या कमजोरी तो मौजूद नहीं थी, जिससे पानी तेजी से अंदर भर गया.

पांचवां सवाल- क्या पर्यटन बढ़ने के साथ सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ गई?
फु क्वोक द्वीप पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में यहां 13 लाख से ज्यादा विदेशी पर्यटक पहुंचे हैं. इतनी तेजी से बढ़ते पर्यटन के बीच अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या स्थानीय समुद्री प्रशासन सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन करवा पा रहा था. जांच एजेंसियां यह भी देखेंगी कि स्पीडबोट संचालित करने वाली कंपनी ‘ओशन पर्ल आइलैंड कंपनी’ के पास सभी जरूरी लाइसेंस थे या नहीं. साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या नियमित सुरक्षा निरीक्षण किए जा रहे थे या केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी की जा रही थीं.
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WORLD : युद्ध के 1250 दिन… यूक्रेन पर जारी है रूस का प्रहार, जेलेंस्की को मिलेंगे अमेरिका से 33000 हथियार

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रूस और यूक्रेन युद्ध को अब 1250 दिन हो गए हैं, बावजूद इसके यहां हालत सुधरने की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही है. न तो रूस की तरफ से हमले रुक रहे हैं और न ही वो शांतिवार्ता के लिए तैयार है. वहीं अमेरिका यूक्रेन को इस साल के अंत तक नए-नए हथियार देने का भी प्लान बना चुका है.

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के इतने दिन बीतने के बाद भी दोनों के बीच सुलह होने के आसार नहीं दिख रहे हैं. यूक्रेन के राष्ट्रपति के शांतिवार्ता वाले प्रस्ताव पर पुतिन ने साफ कह दिया कि वो अपने लक्ष्य से भटकने वाले नहीं हैं. इसके बाद रूसी सेना ने एक बार फिर सोमवार को यूक्रेन की राजधानी कीव पर हमला किया, जिसमें 5 लोग घायल हो गए और एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचा. यह जानकारी शहर की सैन्य प्रशासन के प्रमुख तिमुर त्काचेंको ने दी.
रविवार को पूर्वी यूक्रेन के सुमी क्षेत्र में रूस की सीमा के पास, रूसी ड्रोन ने एक यूक्रेनी बस पर हमला किया जिसमें 39 लोग सवार थे. इस हमले में 3 लोगों की मौत हो गई और 19 अन्य लोग जख्मी हो गए. शनिवार को सुमी के एसमान इलाके में एक बारूदी सुरंग विस्फोट में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग फ्रंटलाइन डोनेत्स्क क्षेत्र में रूसी हमलों में मारे गए. अधिकारियों के मुताबिक उस दिन पूरे यूक्रेन में हुए हमलों में कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई.

रविवार को यूक्रेन ने भी रूस पर ड्रोन हमले किए. लेनिनग्राद क्षेत्र के गवर्नर ने बताया कि सेंट पीटर्सबर्ग के आसपास के इलाकों में यूक्रेन के कम से कम 10 ड्रोन मार गिराए गए. गिरे हुए मलबे की चपेट में आकर एक महिला घायल हो गई. हमले के दौरान सेंट पीटर्सबर्ग के पुलकोवो हवाई अड्डे को बंद करना पड़ा और 57 उड़ानों में देरी हुई और 22 उड़ानों को अन्य हवाई अड्डों की ओर मोड़ा गया.

इस बीच, क्रेमलिन ने पुष्टि की कि सेंट पीटर्सबर्ग में हर साल आयोजित होने वाली बड़े पैमाने पर टेलीविज़न पर प्रसारित होने वाली नेवी डे परेड को सुरक्षा कारणों से रद्द कर दिया गया है. हालांकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग के नेवी हेडक्वार्टर्स से प्रशांत महासागर, आर्कटिक, बाल्टिक और कैस्पियन सागर में 150 जहाजों और 15,000 सैन्य कर्मी अभ्यास करते हुए दिखे. रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रविवार को हवाई रक्षा इकाइयों ने यूक्रेन के कुल 291 ड्रोन मार गिराए, जो 7 मई को हुए रिकॉर्ड 524 ड्रोन हमलों से कम है. ये हमले 9 मई को रूस के विक्ट्री डे परेड से पहले हुए थे.

अमेरिका देगा यूक्रेन को 33,000 ड्रोन
वहीं अमेरिका यूक्रेन को इस साल के अंत तक 33,000 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित ड्रोन किट्स मिलेंगी. यह आपूर्ति अमेरिकी रक्षा विभाग और अमेरिका-जर्मनी की सॉफ्टवेयर कंपनी ऑटेरियन के बीच हुए नए समझौते के तहत की जाएगी. Financial Times की रिपोर्ट के अनुसार, यह अब तक की सबसे बड़ी ड्रोन डिलीवरी होगी. कंपनी के सीईओ लोरेन्ज मेयर ने बताया कि पहले की तुलना में यह आपूर्ति दस गुना ज्यादा है. हाल ही में रूस ने ईरानी-डिजाइन किए गए शाहेद ड्रोन की बड़ी संख्या यूक्रेन की ओर छोड़ी जा रही है. केवल 9 जुलाई को ही रूस ने 700 से अधिक हवाई हथियार दागे, जो कई महीनों के कुल हमलों से भी अधिक थे. ऐसे में यूक्रेन अपनी तैयारी मजबूत करना चाहता है.
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WORLD : होर्मुज में हमलों के बाद तनाव, अमेरिकी स्ट्राइक के जवाब में ईरान ने दागी मिसाइलें, पश्चिम एशिया में लौटा युद्ध?

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दुनिया का ध्यान बीते कुछ दिनों से ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार पर लगा हुआ था लेकिन मंगलवार से चीजें एक अलग दिशा में मुड़ती हुई दिख रही हैं।

तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बनी नाजुक शांति खतरे में पड़ गई है। मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान पर हवाई हमले किए हैं। होर्मुज के पास ईरान के द्वीपों पर हमले किए गए। इसके कुछ घंटे बाद ही ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दाग दिए। इस बीच अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने पर दी गई छूट भी वापस ले ली है। अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्मों के बीच हुए इस घटनाक्रम से पश्चिम एशिया में युद्ध लौटने की आशंका गहरा गई है।

फर्स्टपोस्ट के मुताबिक, ये हमले ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कई दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार के दौरान हुए हैं, जिनकी युद्ध की शुरुआत में मौत हो गई थी। इन हमलों से उन बातचीत में भी मुश्किलें बढ़ेंगी जिनका मकसद जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलना, तेहरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम को रोकना और युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करना है।

अमेरिका के ईरान पर हमले
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि बुधवार सुबह ईरान पर हमले होर्मुज में जहाजों पर किए गए अटैक के जवाब में हैं। मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन टैंकरों पर हमले हुए थे। ईरान ने इन हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है लेकिनअमेरिका ने इसके लिए रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को दोषी ठहराते हुए हवाई अटैक किए हैं।

हमलों में अमेरिकी सेना ने ईरान के केशम और बंदर अब्बास में एयर-डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी सिस्टम, मिसाइलों और एंटी-शिप क्रूज मिसाइल साइटों, ड्रोन लॉन्च साइटों और बंदरगाह सुविधाओं को निशाना बनाया। अमेरिकी आर्मी ने ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है। आईआरजीसी की छोटी नावों पर भी हमला किया गया है।

अमेरिका के कदम इस्लामाबाद MoU के आर्टिकल 1, 2 और 10 का खुला उल्लंघन हैं। अमेरिका की ओर से समझौते के उल्लंघन के नतीजों को लेकर गंभीर मानते हुए ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाएगा।
काजेम गरीबाबादी

ईरानी तेल पर प्रतिबंध
अमेरिका ने हमलों के साथ ही जून में जारी ईरान के तेल की बिक्री की अनुमति देने वाले अपने सामान्य लाइसेंस को रद्द कर दिया है। यह सामान्य लाइसेंस युद्ध को समाप्त करने के लिए एक रूपरेखा के रूप में काम करने वाले युद्धविराम समझौते के हिस्से के रूप में जारी किया गया था।

ईरान को तेल पर छूट ना देने का यह फैसला 17 जुलाई से पूरी तरह लागू हो जाएगा। इस कदम का तेहरान पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा, जिसकी अर्थव्यवस्था लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों से प्रभावित रही है। इससे ईरान की विश्व बाजार में कच्चा तेल बेचने की क्षमता कम हो जाएगी।

ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने अमेरिकी हमलों की निंदा की है और जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और कुवैत को निशाना बनाया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। ईरानी सेना ने कहा है कि अमेरिकी आक्रामकता का करारा जवाब दिया जाएगा।

ईरानी सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि किसी भी परिस्थिति में होर्मुज जलडमरूमध्य के मामलों या प्रबंधन में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी ईरानी तेल निर्यात पर छूट को रद्द करने और देश पर हालिया हमलों के अमेरिकी फैसले की निंदा की है।

MoU वास्तव में ईरान और अमेरिका के बीच सभी मोर्चों पर लड़ाई रोकने का एक समझौता है। इसलिए जब तक हमारे पास वह शांति समझौता नहीं हो जाता, तब तक ना सिर्फ इस तरह की झड़पें बल्किपूरे क्षेत्र में संघर्ष भड़काने की गुंजाइश है।
जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी की सीना अजादी

युद्धविराम का क्या होगा?
ईरान पर अमेरिकी हमलों से उस नाजुक युद्धविराम पर खतरा मंडरा रहा है, जिस पर दोनों देश सहमत हुए थे। इससे पश्चिम एशिया में युद्ध लौटने का खतरा बढ़ गया है। सीएनएन के मुताबिक, कुछ क्षेत्रीय सहयोगियों ने तनाव बढ़ने से रोकने और युद्धविराम बनाए रखने के लिए अमेरिका और ईरान को संदेश भेजे हैं। खाड़ी के देशों को डर है कि एक बार फिर लड़ाई छिड़ी तो उनको अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।

WORLD : ओमान तट के पास कमर्शियल शिप पर बड़ा हमला, 11 भारतीय थे सवार, एक लापता

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विदेश मंत्रालय (MEA) ने ओमान तट पर एक कमर्शियल जहाज ‘GFS गैलेक्सी’ पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है. विदेश मंत्रालय ने रविवार को जारी बयान में बताया कि जहाज पर सवार 11 भारतीय नागरिकों में से 10 को बचा लिया गया है, जबकि एक भारतीय नागरिक अभी लापता है.

विदेश मंत्रालय (MEA) ने ओमान तट पर एक कमर्शियल जहाज ‘GFS गैलेक्सी’ पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है. विदेश मंत्रालय ने रविवार को जारी बयान में बताया कि जहाज पर सवार 11 भारतीय नागरिकों में से 10 को बचा लिया गया है, जबकि एक भारतीय नागरिक अभी लापता है.

विदेश मंत्रालय के अनुसार, ओमान के तट पर वाणिज्यिक जहाज ‘जीएफएस गैलेक्सी’ को निशाना बनाकर किए गए इस हमले के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था. जहाज पर सवार 11 भारतीयों में से 10 को तो बचा लिया गया, लेकिन एक लापता भारतीय की तलाश अभी-भी जारी है. ओमान में मौजूद भारतीय दूतावास स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और चल रहे सर्च-रेस्क्यू ऑपरेशन में ओमान के अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है. भारत ने संकट के इस समय में सहयोग देने के लिए ओमान के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है.

मंत्रालय ने अपने बयान में इस बात पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है कि इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं जो बेहद चिंताजनक हैं. भारत सरकार ने वैश्विक मंच से एक बार फिर दोहराया है कि क्षेत्र में तनाव को तुरंत कम (डी-escalate) किया जाना चाहिए. इसके साथ ही जारी राजनयिक वार्ताओं को किसी तार्किक और शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचाया जाना बेहद जरूरी है, ताकि पूरे क्षेत्र में फिर से शांति और स्थिरता लौट सके.

भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने का ये सिलसिला अब हर हाल में बंद होना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सिद्धांतों के अनुरूप, क्षेत्र के सभी अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से मुक्त और बेरोकटोक नौवहन तथा वाणिज्यिक गतिविधियों को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए, ताकि वैश्विक व्यापार सुरक्षित तरीके से चल सके.

Rupee vs Dollar: नई थम रही रुपये की गिरावट, डॉलर के मुकाबले फिर पहुंचा ऑल टाइम लो पर, जान लीजिए वजह

रुपये में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रहा है। डॉलर के मुकाबले यह आज नए ऑल टाइम लो पर चला गया। रुपया इस साल एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया है और इसमें अब तक छह प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है।

नई दिल्ली: भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रुपया आज शुरुआती कारोबार में 20 पैसे टूटकर अब तक के सबसे निचले स्तर 95.86 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया संकट को लेकर चिंताओं से रुपये पर भारी दबाव है। रुपया इस साल एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है और इसमें अब तक छह प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है। महंगा कच्चा तेल, मजबूत अमेरिकी डॉलर और पश्चिम एशिया संकट को लेकर बढ़ती चिंताएं इसकी मुख्य वजह हैं।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.74 प्रति डॉलर पर खुला। फिर टूटकर 95.86 प्रति डॉलर पर पहुंच गया जो पिछले बंद भाव से 20 पैसे की गिरावट दर्शाता है। रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 95.80 पर पहुंचने के बाद 95.66 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। रुपये की गिरावट को थामने के लिए आरबीआई अब तक अरबों डॉलर झोंक चुका है। जानकारों का कहना है कि अगर केंद्रीय बैंक ऐसा नहीं करता तो रुपये की हालत और बदतर होती।

क्यों आ रही है गिरावट?
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.48 पर रहा। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ 106.10 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को शुद्ध बिकवाल रहे थे और उन्होंने 4,703.15 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

डॉलर के मुकाबले रुपये में इस हफ्ते 1.4% गिरावट आई है। पिछले तीन दिन इसने हर सेशन में ऑल टाइम लो छुआ है। भारत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल और 50 फीसदी गैस बाहर से आती है। लेकिन ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल की कीमत में 50 फीसदी तेजी आई है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ने की आशंका है। इसे देश का ट्रेड डेफिसिट बढ़ सकता है।

ECI New Rule: चुनाव आयोग का नया नियम, वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए अब लोगों को देनी होगी माता-पिता की SIR डिटेल

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ECI New Rule: ऑनलाइन वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए नए आवेदकों को अब पिछली SIR प्रक्रिया के दौरान अपने माता-पिता की स्थिति के बारे में जानकारी देनी होगी. चुनाव आयोग के अधिकारियों ने ये जानकारी दी है.

चुनाव आयोग ने ऑनलाइन वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए एक नया नियम लागू किया है, जिसके तहत वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए नए आवेदकों को पिछली स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान अपने माता-पिता की स्थिति के बारे में जानकारी देनी होगी. अधिकारियों ने बताया कि ये शर्त फॉर्म 6 में जोड़ी गई है.

ये वो फॉर्म है जिसका इस्तेमाल पहली बार वोट देने वाले लोग करते हैं जिनके नाम लिस्ट से हटा दिए गए थे और जो दोबारा अपना नाम जुड़वाना चाहते हैं. हालांकि, गैजेट नोटिफिकेशन के जरिए फॉर्म में औपचारिक रूप से कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि यह घोषणा प्रशासनिक निर्देशों के जरिए लागू की गई है और ऑनलाइन सबमिशन के लिए जरूरी कर दी गई है.

अधिकारियों के अनुसार, आवेदक तब तक ऑनलाइन फॉर्म 6 नहीं भर सकते, जब तक वे घोषणा वाला हिस्सा पूरा न कर लें. इस हिस्से में यह जानकारी मांगी जाती है कि क्या आवेदक या उनके माता-पिता का नाम पिछली SIR प्रक्रिया के दौरान तैयार की गई वोटर लिस्ट में शामिल था या नहीं.

नई घोषणा में 3 में से 1 विकल्प चुनना होगा
ECINET पोर्टल पर उपलब्ध ऑनलाइन फ़ॉर्म 6 के भाग J और K के बीच नई घोषणा में आवेदकों से 3 में से 1 विकल्प चुनने के लिए कहा गया है कि क्या उनका अपना नाम पिछली SIR वोटर लिस्ट में था, क्या उनके माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी का नाम पिछली SIR लिस्ट में था, या फिर आवेदक और उनके माता-पिता में से किसी का भी नाम पिछली लिस्ट में नहीं था.

बिहार SIR के दौरान लागू हुआ था ये नियम
अधिकारियों ने बताया कि यह घोषणा पिछले साल जून में शुरू हुई और बिहार SIR प्रक्रिया के दौरान लागू की गई थी. तब से जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया हुई है, वहां इसे वोटर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रियाओं में शामिल कर लिया गया है. EC के एक अधिकारी ने कहा, “बिहार के रोजाना के SIR बुलेटिन में घोषणाओं के साथ भरे हुए फ़ॉर्म दिखाए गए थे.” उन्होंने कहा कि इससे वोटरों की पहचान करने में मदद मिलती है और नए वोटरों को आवेदन के साथ जमा करने वाले जरूरी दस्तावेजों की संख्या भी कम हो जाती है.

कई राज्यों में SIR पूरा
इस अभियान का मकसद योग्य मतदाताओं की पहचान करना और मतदाता सूची से डुप्लीकेट, मृत, दूसरी जगह चले गए और विदेशी मतदाताओं के नाम हटाना है. पश्चिम बंगाल, बिहार, केरल और तमिलनाडु सहित कई राज्यों में SIR अभियान पूरा हो चुका है और अन्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में ये अभी चल रहा है.

NATIONAL : चलने जा रही है भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: स्पीड, रेंज, तकनीक और सुरक्षा…जानिए हर बड़ी बात

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं. भारतीय रेलवे के लिए यह सिर्फ एक नई ट्रेन की शुरुआत नहीं, बल्कि क्लीन और हरित परिवहन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. इस ट्रेन का पिछले करीब ढाई महीनों से सोनीपत, जींद और नई दिल्ली के बीच अलग-अलग परिस्थितियों में ट्रायल किया गया है. हाइड्रोजन से चलने वाली यह ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजन की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण अनुकूल मानी जाती है क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन नहीं होता और केवल पानी की भाप निकलती है. रेलवे के मुताबिक यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है, जो हाइड्रोजन को बिजली में बदलकर मोटरों को ऊर्जा देती है. आइए इस ट्रेन के बारे में डिटेल से समझते हैं.

हाइड्रोजन ट्रेन को शुरुआत में हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलाया जाएगा. यह रोजाना दो राउंड ट्रिप पूरी करेगी और करीब 356 किलोमीटर का सफर तय करेगी. ट्रेन में कुल 10 कोच हैं, जिनमें दो ड्राइविंग पावर कार और आठ यात्री कोच शामिल हैं. इसमें 682 सीटें हैं, जबकि कुल 2,600 यात्रियों के सफर करने की क्षमता है. रेलवे ने इसके लिए जींद में हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग स्टेशन भी तैयार किया है, जिससे ट्रेन को स्थानीय स्तर पर ही ईंधन उपलब्ध कराया जा सकेगा.

यह ट्रेन दो ड्राइविंग पावर कार और आठ पैसेंजर कोच से मिलकर बनी है. हर ड्राइविंग पावर कार 1,200 किलोवाट बिजली पैदा करने में सक्षम है, जो लगभग 1,600 हॉर्सपावर के बराबर है. ट्रेन में करीब 440 किलोग्राम कंप्रेस्ड हाइड्रोजन स्टोर की जा सकती है. अधिकतम डिजाइन स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है, हालांकि जींद-सोनीपत सेक्शन पर इसे 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जाएगा. अधिकतम लोड पर यह रोजाना करीब 300 किलोग्राम हाइड्रोजन की खपत करेगी. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने रेलवे के सूत्रों के हवाले से बताया है कि शुरुआती चरण में इसका संचालन केवल तय रूट पर ही होगा और मेंटेनेंस के लिए इसे डीजल इंजन की मदद से दिल्ली के शकूरबस्ती वर्कशॉप ले जाया जाएगा.

इस ट्रेन में इस्तेमाल की गई हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रक्रिया के जरिए बिजली पैदा करती है. यही बिजली ट्रेन की मोटरों को चलाती है. इस प्रक्रिया में धुआं या कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती, बल्कि केवल पानी की भाप बनती है. यही वजह है कि इसे पारंपरिक डीजल ट्रेनों की तुलना में अधिक स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक माना जाता है. भारतीय रेलवे ने इस परियोजना के लिए जींद में स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग सुविधा विकसित की है. इसके संचालन और रखरखाव से जुड़े सभी मैनुअल को रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) की मंजूरी मिल चुकी है.

रेलवे ने इस ट्रेन की सुरक्षा को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी है. ट्रेन की डिजाइन और सुरक्षा का परीक्षण अंतरराष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी TUV SUD ने किया है, ताकि यह वैश्विक सुरक्षा मानकों पर खरी उतर सके. हाइड्रोजन स्टोरेज स्टेशन पर हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, फ्लेम डिटेक्टर और अन्य सुरक्षा सेंसर लगाए गए हैं, जिनकी नियमित जांच होगी. रिफ्यूलिंग सिस्टम की 24 घंटे निगरानी की जाएगी और प्रशिक्षित व प्रमाणित कर्मचारी पूरे ऑपरेशन की जिम्मेदारी संभालेंगे. शुरुआती दिनों में तकनीकी विशेषज्ञ भी ट्रेन के साथ मौजूद रहेंगे.

इस परियोजना के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जो रेल परिवहन में हाइड्रोजन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे देशों के बाद भारत का यह कदम क्लीन एनर्जी आधारित रेल नेटवर्क विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारतीय रेलवे का मानना है कि यह पहल भविष्य में कार्बन उत्सर्जन कम करने और नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी.

WORLD : कौन थे कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन, जिनके लिए भारत में 13 जुलाई को मनाया जाएगा शोक?

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कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा की मृत्यु 74 साल की उम्र में हुई थी. उनके निधन के बाद भारत ने 13 जुलाई को एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा किया है. आइए जानते हैं अमीर शेख हमद बिन के निधन पर क्यों शोक मनाया जा रहा है?

शेख हमद के नेतृत्व में कतर ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई. वैश्विक मीडिया नेटवर्क अल जजीरा को नई पहचान मिली और कतर ने खेल, कूटनीति तथा निवेश के क्षेत्र में भी अपनी छाप छोड़ी. उनके कार्यकाल में ही कतर को फीफा विश्व कप 2022 की मेजबानी का अधिकार मिला, जिसने देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को और बढ़ाया. कतर के पूर्व शासक शेख हमद बिन खलीफा अल थानी ने शिक्षा से लेकर कच्चे तेल की खोज में बड़ा योगदान रहा है. उनके निधन के बाद भारत सरकार ने 13 जुलाई को एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है.

ये फैसला दोनों देशों के मजबूत रिश्तों और शेख हमद के योगदान को सम्मान देने के लिए लिया गया है. आखिर शेख हमद कौन थे और उन्होंने ऐसा क्या किया कि उनके सम्मान में भारत भी राष्ट्रीय शोक मना रहा है?

शेख हमद बिन खलीफा अल थानी कतर के पूर्व शासक थे. उन्होंने 1995 में देश की सत्ता संभाली और करीब 18 सालों तक कतर का नेतृत्व किया. उनके शासनकाल में कतर ने विकास की ऐसी रफ्तार पकड़ी कि वो दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में शामिल हो गया. साल 2013 में उन्होंने स्वेच्छा से सत्ता अपने बेटे शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सौंप दी, जो वर्तमान में कतर के अमीर हैं.

छोटे देश को बनाया वैश्विक ताकत
जब शेख हमद ने सत्ता संभाली, तब कतर एक छोटा खाड़ी देश था मगर उन्होंने प्राकृतिक गैस और ऊर्जा संसाधनों का बेहतर उपयोग कर देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. आज कतर दुनिया के सबसे बड़े तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यातकों में गिना जाता है. इसका बड़ा श्रेय शेख हमद की दूरदर्शी नीतियों को दिया जाता है.

शेख हमद ने सिर्फ आर्थिक विकास पर ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आधुनिक बुनियादी ढांचे पर भी बड़े पैमाने पर निवेश किया. उनके कार्यकाल में ग्लोबल यूनिवर्सिटी, अस्पताल, सड़कें और अन्य सुविधाएं विकसित की गईं. इसी वजह से कतर ने कुछ ही वर्षों में वैश्विक स्तर पर अलग पहचान बनाई.

भारत ने क्यों घोषित किया राष्ट्रीय शोक?
भारत सरकार ने शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर 13 जुलाई को राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है. इस दिन पूरे देश में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुक दिया गया है और सरकारी स्तर पर कोई आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा. ये कदम भारत और कतर के बीच दशकों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों और शेख हमद के योगदान के सम्मान में उठाया गया है.

शेख हमद बिन खलीफा अल थानी को आधुनिक कतर का निर्माता माना जाता है. उन्होंने अपने नेतृत्व, दूरदर्शी सोच और विकास की नीतियों से कतर को दुनिया के सबसे प्रभावशाली और समृद्ध देशों में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. ये कारण है कि उनके निधन पर सिर्फ कतर ही नहीं, बल्कि भारत समेत कई देशों ने भी गहरा शोक व्यक्त किया.

भारत के साथ रहे मजबूत रिश्ते
शेख हमद के शासनकाल में भारत और कतर के संबंध लगातार मजबूत हुए. ऊर्जा, व्यापार, निवेश और रोजगार जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा. कतर भारत के लिए एलएनजी का प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा है, जबकि वहां बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था में खास भूमिका निभाते हैं.

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