Saturday, September 19, 2026
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BUSINESS : टाटा ग्रुप को वापस लाएंगे सिंगूर, 1000 दिन में बदलेगा बंगाल का माहौल, बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य का दावा

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पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि टाटा समूह को राज्य में वापस लाने के प्रयास शुरू हो चुके हैं। सरकार ने बेहतर औद्योगिक माहौल और निवेश बढ़ाने का भरोसा दिया।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार औद्योगिक विकास को गति देने के लिए बड़ा प्रयास किया है। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बताया कि टाटा समूह को सिंगूर या राज्य के किसी अन्य हिस्से में वापस लाने के लिए बातचीत शुरू हो चुकी है। उनका मानना है कि टाटा की वापसी बंगाल की औद्योगिक छवि को मजबूत करेगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ाएगी। मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित ‘रीइग्नाइटिंग बंगाल्स इंडस्ट्रियल फॉर्च्यून’ कार्यक्रम में बोलते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि सिंगूर से टाटा मोटर्स के जाने के बाद देशभर में यह संदेश गया था कि पश्चिम बंगाल उद्योगों के लिए अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार इस धारणा को बदलने के लिए प्रतिबद्ध है और टाटा समूह की वापसी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

भट्टाचार्य ने कहा कि टाटा वापस आएंगे। अगर ऑटोमोबाइल क्षेत्र में नहीं, तो किसी अन्य उद्योग में निवेश करेंगे। यह हमारे लिए जिम्मेदारी भी है और चुनौती भी। उनकी वापसी से पूरे औद्योगिक क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बनेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सिंगूर की जमीन की स्थिति पहले जैसी नहीं रही है, लेकिन सरकार टाटा समूह के साथ लगातार संपर्क में है। यदि सिंगूर में परियोजना स्थापित करना संभव नहीं हुआ तो राज्य के किसी अन्य हिस्से में निवेश की संभावनाएं तलाश की जाएंगी।

महाराष्ट्र को भारत के कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का लगभग 13.6 प्रतिशत मिलता है, जबकि बंगाल की हिस्सेदारी सिर्फ लगभग 0.6 प्रतिशत है। ये आंकड़े खुद बहुत कुछ कहते हैं।

बता दें कि साल 2008 में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन के बाद टाटा मोटर्स को अपनी नैनो कार परियोजना सिंगूर से हटाकर गुजरात के सानंद ले जानी पड़ी थी। उस समय कंपनी सिंगूर परियोजना में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर चुकी थी। बाद में एक मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम को टाटा मोटर्स को 766 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया था।
हम चाहते हैं कि टाटा समूह वापस आए और वह भी सिंगूर में। हम पूरे देश और दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल निवेशकों के लिए अनुकूल है और निवेश का स्वागत करने के लिए तैयार है

समिक भट्टाचार्य ने उद्योगपतियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार के कार्यकाल में व्यापारिक गतिविधियों में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होगा। यदि कोई व्यक्ति पार्टी का नाम लेकर कारखानों में दबाव बनाने या अनुचित मांगें करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि अगले 1,000 दिनों में राज्य का कारोबारी माहौल पूरी तरह बदल जाएगा। बीजेपी सरकार उद्योग, निवेश और रोजगार को प्राथमिकता देते हुए पश्चिम बंगाल को फिर से देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल करने की दिशा में काम करेगी।

WORLD : ‘हर मुमकिन मदद दे रहा दूतावास’, वियतनाम नाव हादसे में 15 भारतीयों की मौत पर PM मोदी ने जाहिर किया दुख

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वियतनाम की खूबसूरत वादियों में छुट्टियां मनाने गए भारतीय पर्यटकों का सफर एक झटके में काल बन गया. गहरे समंदर की लहरों ने हंसते-खेलते 15 भारतीयों की जिंदगी हमेशा के लिए छीन ली. फू क्वोक के पास 32 भारतीय पर्यटकों को ले जा रही एक तेज रफ्तार स्पीडबोट अचानक पलट गई.

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वियतनाम में हुई एक नाव दुर्घटना में भारतीय नागरिकों की मौत पर शनिवार को गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि भारतीय दूतावास तथा अन्य भारतीय मिशन प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं. वियतनाम मीडिया की खबरों के अनुसार शनिवार को हुए इस हादसे में 15 भारतीय पर्यटकों की मौत हो गई. पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर कहा, “वियतनाम में फू क्वोक के निकट भारतीय नागरिकों को ले जा रही नाव के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर से बहुत दुख हुआ.”

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय दूतावास और भारतीय वाणिज्य दूतावास हरसंभव सहायता प्रदान कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “हमारे अधिकारी भी वियतनाम के अधिकारियों के साथ करीबी संपर्क में हैं.” अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह दुर्घटना में घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं.

वियतनामी समाचार पोर्टल ‘वीएन एक्सप्रेस इंटरनेशनल’ के अनुसार, यह स्पीडबोट 32 भारतीय पर्यटकों और चालक दल के चार सदस्यों को लेकर हॉन मे रुत से अन थोई बंदरगाह जा रही थी, तभी हॉन मे रुत नगोई से लगभग 400 मीटर दूर यह पलट गई, जिससे नाव पर सवार सभी लोग समुद्र में गिर गए. प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को न्यूजीलैंड की दो दिवसीय यात्रा पूरी करने के बाद स्वदेश के लिए रवाना हो गए.

WORLD : वियतनाम बोट हादसे में बड़ा खुलासा! कंपनी ट्रिप पर गए थे सभी भारतीय, कर्मचारी-डीलर्स समेत 15 की मौत

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वियतनाम के फू कुओक द्वीप पर टूरिस्ट बोट समुद्र में पलट गई, जिसमें 15 भारतीय पर्यटकों की मौत हो गई. ये सभी लोग एक भारतीय मोबाइल कंपनी के कर्मचारी और चैनल पार्टनर्स थे जो कंपनी के रिवॉर्ड ट्रिप पर गए थे.

वियतनाम के फू कुओक द्वीप पर शनिवार को भारतीय पर्यटकों को ले जा रही एक टूरिस्ट बोट समुद्र में पलट गई. इस हादसे में 15 भारतीय पर्यटकों की मौत हो गई. अब खुलासा हुआ है कि ये सभी लोग कंपनी ट्रिप पर गए थे. ये लोग एक स्मार्टफोन बनाने वाली भारतीय कंपनी के कर्मचारी और चैनल पार्टनर्स थे.

दरअसल कंपनी ने अपने डीलर्स और वितरकों के लिए इस ‘रिवॉर्ड ट्रिप’ का आयोजन किया था. कंपनी ने एक बयान जारी करते हुए बताया कि जान गंवाने वालों में 14 चैनल पार्टनर्स और एक कंपनी का कर्मचारी शामिल है. ये सभी लोग तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरलम के रहने वाले थे.

मोबाइल कंपनी ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है. कंपनी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता पीड़ित परिवारों की मदद करना और शवों को जल्द से जल्द भारत लाना है.

इस हादसे में तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के रहने वाले शेख अब्दुल्ला अब्दुल मजीद (54) की भी मौत हो गई. वो मोबाइल कंपनी के चैनल पार्टनर थे. उनके परिजनों ने बताया कि नाव पर सवार होने से कुछ समय पहले ही अब्दुल्ला ने अपनी पत्नी, बेटे और पोती से वीडियो कॉल पर बात की थी. उन्होंने कहा था कि वो एक ऐसे द्वीप पर जा रहे हैं जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं रहेगा और लौटकर दोबारा फोन करेंगे. लेकिन वो उनकी आखिरी बात बन गई.

हादसे में बचे तमिलनाडु के पलानी निवासी निर्मल कुमार ने बताया कि समुद्र की ऊंची लहरों और ओवरलोडिंग के कारण स्पीडबोट महज कुछ सेकेंड में पलट गई. वहीं, आंध्र प्रदेश के गुंटूर के मोबाइल कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर आशीष कुमार ने बताया, ‘दोपहर करीब 1:30 बजे नाव होन मे रुत नगोई द्वीप से कुछ ही मीटर आगे बढ़ी थी. हम सब तस्वीरें ले रहे थे कि अचानक नाव एक तरफ झुक गई और पलट गई. हर तरफ चीख-पुकार मच गई.’

इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और कई मुख्यमंत्रियों ने शोक जताया है. तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल की सरकारें केंद्र सरकार के साथ मिलकर शवों को वापस लाने की कोशिशों में जुटी हैं. वहीं वियतनाम प्रशासन हादसे के कारणों की जांच कर रहा है.

हैनोई में भारतीय दूतावास के मुताबिक, नाव पर कुल 36 लोग सवार थे. इनमें 32 भारतीय पर्यटक और चार स्थानीय क्रू मेंबर शामिल थे. हादसे के बाद 21 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि 15 भारतीयों की जान चली गई. मृतकों में 10 लोग तमिलनाडु के, 3 आंध्र प्रदेश के और 2 केरलम के रहने वाले हैं.

NATIONAL : राम मंदिर मामले में कांग्रेस ने खोला मोर्चा, एक दिन में की 26 प्रेस कॉन्फ्रेंस, SC की निगरानी में जांच की मांग

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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं के मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के अलग-अलग नेताओं ने कई राज्यों में 26 प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच, ट्रस्ट को भंग करने और पूरे चढ़ावे की स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग उठाई है।

इसके साथ ही शनिवार को कांग्रेस ने देश के प्रधानमंत्री से इस मामले पर चुप्पी तोड़ने की मांग भी की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जब मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा का राजनीतिक श्रेय लिया गया था, तो अब कथित गड़बड़ियों पर जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता।

‘चढ़ावा चोरी में BJP-RSS के लोग शामिल’
कांग्रेस ने वीडियो शेयर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, ‘देश के करोड़ों लोगों ने आस्था से राम मंदिर में दान किया, लेकिन उनके साथ विश्वासघात हुआ। ‘चढ़ावा चोरी’ महापाप है, इसमें BJP-RSS के लोग शामिल हैं, लेकिन सिर्फ लीपापोती की जा रही है। इतना ही नहीं- राम मंदिर से जुड़ा सारा श्रेय लेने वाले नरेंद्र मोदी आज इस चोरी पर खामोश हैं।’

अभिषेक सिंघवी ने की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंघवी ने इस मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच कराने की भी मांग की और कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में राज्यसभा सदस्य सिंघवी ने कहा कि लोगों का भरोसा बहाल करने के लिए इस मामले की स्वतंत्र और विश्वसनीय जांच आवश्यक है।

उन्होंने दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई, मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन में प्रतिष्ठित और स्वतंत्र व्यक्तियों को शामिल करने तथा ट्रस्ट की स्थापना से अब तक के खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराने की भी मांग की।

सिंघवी ने कहा, ‘यदि उद्देश्य जनता का विश्वास बहाल करना है, तो उच्चतम न्यायालय के किसी ऐसे वरिष्ठ व्यक्ति की अध्यक्षता में न्यायिक जांच होनी चाहिए, जिनका नाम ही लोगों में भरोसा पैदा करता हो। साथ ही, ट्रस्ट की स्थापना से लेकर अब तक के खातों का फोरेंसिक ऑडिट भी कराया जाना चाहिए।’ उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक की गई गिरफ्तारियां केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित हैं और सवाल किया कि किसी वरिष्ठ अधिकारी की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई।

पीएम मोदी और गृहमंत्री की चुप्पी पर उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने कहा, ‘हम इस मुद्दे को पूरे देश में उठा रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। इस लूट ने देश के करोड़ों श्रद्धालुओं को प्रभावित किया है। लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री इस मामले पर चुप हैं। केवल उत्तर प्रदेश पुलिस की एक एसआईटी गठित की गई है और इसके पीछे असली दोषियों को बचाने की मंशा है।’

दिल्ली कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि गहरी धार्मिक आस्था से जुड़े स्थल से संबंधित इतने गंभीर मामले पर देश के नेतृत्व की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आना अस्वीकार्य है।

हिमाचल कांग्रेस ने भी खोला मोर्चा
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एचपीसीसी) ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व न्यासी अनिल मिश्रा के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। प्रदेश कांग्रेस ने कहा कि ‘चढ़ावा चोरी’ के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

NATIONAL : चढ़ावा विवाद में SIT जांच पूरी, ट्रस्ट के अधिकारियों को अयोध्या न छोड़ने के निर्देश

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अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद में जांच का पहला चरण पूरा हो गया है। तीन सदस्यीय एसआईटी अपनी छह दिन की
पड़ताल पूरी कर अयोध्या से लखनऊ लौट आई है। टीम ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए हैं। टीम अब प्रारंभिक रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में जुटी है। इसे जल्द ही सीएम योगी आदित्यनाथ को सौंपे जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, जांच का शुरुआती चरण बेहद अहम माना जा रहा है। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा तय होगी।

एसआईटी रिपोर्ट में चढ़ावे की काउंटिंग, रेकॉर्ड, सीसीटीवी निगरानी और आभूषणों के प्रबंधन से जुड़े पहलुओं पर शुरुआती निष्कर्ष शामिल होंगे। टीम ने मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों और बैंक से जुड़े लोगों समेत 140 से ज्यादा व्यक्तियों से पूछताछ की है और दान प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया को खंगाला है। कई बिंदुओं पर गहन जांच अभी बाकी बताई जा रही है। रविवार को एसआईटी के सीएम से मिलने की भी चर्चा थी। हालांकि, सरकार के प्रवक्ता ने किसी भी मुलाकात एवं रिपोर्ट सौंपे जाने से इनकार किया है।

अयोध्या में राम मंदिर के दान और वित्तीय प्रबंधन में कथित हेराफेरी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए। राम मंदिर से जुड़े सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने रविवार को लखनऊ रवाना होने से पहले यह निर्देश दिए।

सूत्रों ने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ सहित रोजाना की जांच रिपोर्ट डिजिटल रूप में सुरक्षित की जा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करने से पहले अंतिम रूप दिया जाएगा। एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रही है।

सूत्रों के मुताबिक, सबसे बड़ी कथित अनियमितता महाकुंभ मेले के दौरान सामने आई, जब करीब दो महीने की अवधि में रोजाना लगभग 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे। दान पेटियां दो घंटे के भीतर ही नोटों से भर जाती थीं। यही वजह है कि एसआईटी इस दान की निगरानी एवं हिसाब-किताब की गहराई से जांच कर रही है।

सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी सामने आई है। सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट के पदाधिकारी सोने, चांदी और अन्य आभूषणों तथा कीमती पत्थरों से संबंधित रिकॉर्ड पर एसआईटी को संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

अन्य खरीदों की भी जांच
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की जांच केवल धन के कथित दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच में ट्रस्ट की ओर से अलग-अलग चरणों में की गई जमीन की खरीद और मंदिर के लिए निर्माण सामग्री की खरीद को भी शामिल किया गया है। ट्रस्ट ने बाजार भाव से लगभग 500 से 800 प्रतिशत अधिक कीमत पर करीब 71 एकड़ जमीन खरीदी है। समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत कई राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को उठाया था।

तीन सदस्यीय कमिटी हुई गठित
राम मंदिर चढ़ावे में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया था। कमिटी में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। जांच के दौरान एसआईटी ने कैश काउंटिंग प्रक्रिया, बैंकिंग चैनल, गर्भगृह में चढ़े आभूषणों के रेकॉर्ड और सीसीटीवी निगरानी प्रणाली की विस्तृत समीक्षा की है।

बताया जा रहा है कि एसआईटी अपनी रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट करेगी कि किन मामलों में विस्तृत जांच की जरूरत है और क्या समय-सीमा बढ़ाना जरूरी होगा। माना जा रहा है कि जांच के बाद मंदिर प्रबंधन की प्रक्रिया को पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने को लेकर बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं। (इनपुट: भाषा)

NATIONAL : विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक की राह आसान नहीं; चढ़ावा चोरी मामले पर मचेगा घमासान

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संसद के मानसून सत्र में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के संकेत हैं। विपक्ष और कुछ राज्यों ने विधेयक की कई धाराओं पर आपत्ति जताते हुए इसे राज्यों के अधिकारों और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता से जुड़ा मुद्दा बताया है। दूसरी ओर, कांग्रेस अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता के मामले पर सरकार और प्रधानमंत्री से जवाब मांगने की तैयारी में है।

संसद के मानसून सत्र में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) 2025 विधयेक प्रस्ताव के पास होने की राह मुश्किल होगी। सरकार को विपक्ष के तीखे सवालों का जवाब देना होगा। इसमें, धारा 45, धारा 47, धारा 11 पर सबसे अधिक आपत्तियां हैं। विपक्ष समेत कई राज्यों का मानना है कि वीबीएसए में उनके अधिकार व शक्तियां कम हो जाएंगी। इसके अलावा, आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को इस विधेयक में जोड़ने पर भी आपत्ति है।

विपक्ष का आरोप है कि इससे, इन दिग्गज संस्थानों की स्वायत्तता का हनन होगा। वे अपनी मर्जी से फैसले नहीं ले पाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा सांसद डी पुरंदेश्वरी की अध्यक्षता में संसद की 31 सदस्यीय संयुक्त समिति की सात और आठ जुलाई को अहम बैठक हुई थी। विपक्ष समेत आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और मेघालय जैसे कई राज्यों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।

चढ़ावा चोरी में सरकार से जवाब मांगेगी कांग्रेस
अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा के पैसों में हुई कथित हेराफेरी को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने संसद सत्र में उनसे जवाब मांगने का एलान किया। कांग्रेस नेताओं ने देश के 26 अलग-अलग स्थानों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाए।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और वरिष्ठ प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि चढ़ावे में हेराफेरी की जांच करने वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट बड़ी समस्या का बस एक छोटा सा हिस्सा है। उन्होंने कहा कि असली दोषियों को बचाने की कोशिश हो रही है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के जज की देखरेख में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। चढ़ावा चोरी के साथ ही नीट पेपर लीक जैसे मुद्दे पर भी संसद के मानसून सत्र में सियासी बवाल होने की आशंका है।

WORLD : 20 मिलियन डॉलर की डील, भारत-न्यूजीलैंड के बीच FTA पर पीएम मोदी ने दोस्त लक्सन को यूं दी बधाई

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दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों जैसे आपसी सहयोग के दूसरे क्षेत्रों में हुई प्रगति का भी स्वागत किया, और इस साझेदारी को और मजबूत करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर मुहर लग गई है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीऔर न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इस सिलसिले में टेलीफोन पर बातचीत की और दोनों नेताओं ने मिलकर एक अहम भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की घोषणा की। दोनों देशों के बीच 20 मिलियन डॉलर का निवेश होगा।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘भारत और न्यूजीलैंड के रिश्ते में एक बड़ा पल आया है। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को लेकर जोरदार कोशिशें हुई हैं। मेरे दोस्त प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन और मैंने कुछ देर पहले ऐतिहासिक भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के पूरा होने के बाद बहुत अच्छी बातचीत की। यह समझौता सिर्फ 9 महीनों में पूरा हो गया। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह दिखाता है कि दोनों देश आर्थिक रिश्ते को मजबूत करना चाहते हैं।’

पीएम मोदी ने आगे लिखा, ‘इस FTA से ये फायदे होंगे: बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, निवेश बढ़ेगा, व्यापारियों, किसानों, छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs), छात्रों और युवाओं के लिए ढेर सारे मौके खुलेंगे।’

भारत और न्यूजीलैंड के बीच दोस्ती और मजबूत होने वाली है। दोनों देशों के बीच एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हुआ है, जिससे अगले 5 सालों में व्यापार दोगुना होने की उम्मीद है। न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश कर सकता है। यह निवेश कई अलग-अलग क्षेत्रों में होगा। भारत के युवा, स्टार्टअप्स और सरकार की नीतियों से भरे सुधार, इस साझेदारी को और मजबूत बनाएंगे। इसके अलावा, खेल, शिक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।

भारत का 7वां एफटीए
ओमान, ब्रिटेन, ईएफटीए देशों, यूएई, ऑस्ट्रेलिया और मॉरीशस के बाद पिछले कुछ वर्षों में यह भारत का 7वां एफटीए है। दोनों देशों के नेता इस बात पर सहमत हुए कि एफटीए दोनों देशों के बीच ज्यादा व्यापार, निवेश, नवाचार और मिले-जुले मौकों के लिए एक मोटिवेशन का काम करेगा। दोनों देशों के बीच रक्षा, खेल, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों सहित द्विपक्षीय क्षेत्र के दूसरे क्षेत्र में भी विकास का स्वागत किया।

दोनों देशों का जोश हाई
बातचीत के दौरान, दोनों नेताओं ने अगले पांच सालों में आपसी व्यापार को दोगुना करने और अगले 15 सालों में न्यूजीलैंड से भारत में 20 बिलियन डॉलर के निवेश का भरोसा जताया। इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से बयान भी जारी किया गया है। बयान के अनुसार, बातचीत इस साल मार्च में शुरू हुई और दोनों नेताओं ने 9 महीने के रिकॉर्ड समय में एफटीए को पूरा किया। यह दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहरा करने की साझा महत्वाकांक्षा और राजनीतिक इच्छाशक्ति को दिखाता है।

NATIONAL : पीएम मोदी की खेल कूटनीति से ओलंपिक दावेदारी को मिलेगी धार, वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने का प्रयास

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान खेल सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया। दोनों देशों के साथ हुए समझौतों का उद्देश्य कोचिंग, खेल विज्ञान, उच्च प्रदर्शन केंद्र, शोध और प्रतिभा विकास के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाना है। भारत इसे अपनी खेल क्षमता मजबूत करने और वैश्विक खेल आयोजनों की मेजबानी की तैयारियों से जोड़कर देख रहा है।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आमतौर पर रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दे सुर्खियों में रहते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया यात्रा में इस स्थापित परंपरा में खेल कूटनीति का नया अध्याय जुड़ गया। भारत अब खेल को केवल प्रतिस्पर्धा या मनोरंजन के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक प्रभाव बढ़ाने के जरिए के तौर पर देख रहा है।

इन दोनों देशों के साथ खेल नीति का जो रोडमैप तैयार किया है, वह आने वाले दशक में भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने का एक सोचा-समझा प्रयास है। सॉफ्ट पावर के इस नए इस्तेमाल का सीधा संबंध भारत की वैश्विक साख से है। भारत 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और उसके बाद ओलंपिक की मेजबानी की पुख्ता दावेदारी पेश कर रहा है। खेलों में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों को साझेदार बनाकर भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह केवल ढांचागत व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समूचे खेल पारितंत्र और पदक जीतने की संस्कृति के मामले में भी वैश्विक मानक छूना चाहता है।

प्रधानमंत्री मोदी की न्यूजीलैंड के पीएम लक्सन के साथ गाला लंच, महज रस्मी मुलाकात नहीं थी
न्यूजीलैंड में गाला लंच के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने अत्याधुनिक खेल उपकरणों का मुआयना किया और दिग्गज एथलीटों से बात की। यह एक रस्मी मुलाकात नहीं थी। यह साल भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल संबंधों की सौवीं वर्षगांठ का साल है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सौ साल पहले 1926 में मेजर ध्यानचंद के नेतृत्व में भारतीय हॉकी टीम ने न्यूजीलैंड की धरती पर जो इतिहास रचा था, वह आज भी हमारी खेल साझेदारी की प्रेरणा है। क्रिकेट से आगे बढ़कर दोनों देशों ने स्पोर्ट्स जॉइंट एक्शन प्लान पर मुहर लगाई है। इसका असर जमीन पर दिखने भी लगा है। हाल ही में भुवनेश्वर में न्यूजीलैंड रग्बी और रग्बी इंडिया के संयुक्त कोचिंग प्रोग्राम के जरिए भारतीय कोचों को तराशने की शुरुआत हो चुकी है। इसका बड़ा मकसद भारत की कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी की तैयारियों को धार देना है।

West Bengal : टीएमसी के 15 साल के शासन पर भाजपा सरकार लाएगी श्वेत पत्र, मंत्रियों के समूह ने शुरू किया काम

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पश्चिम बंगाल सरकार टीएमसी के पिछले 15 साल के शासनकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार पर श्वेत पत्र लाएगी। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता के नेतृत्व में मंत्रियों के समूह ने अब इसकी तैयारी शुरू कर दी है। यह रिपोर्ट सरकारी धन के दुरुपयोग की जांच करेगी।

पश्चिम बंगाल सरकार ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पिछले 15 साल के शासनकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय कुप्रबंधन पर एक श्वेत पत्र (व्हाइट पेपर) जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में गठित मंत्रियों के एक उच्च-स्तरीय समूह (जीओएम) ने राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में अपनी पहली बैठक की। इस बैठक की अध्यक्षता राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने की।

सरकारी पैसों की बर्बादी और हेरफेर की होगी जांच
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बैठक में एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्णय लिया गया। इस रिपोर्ट में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, हेरफेर और बर्बादी के मामलों को दर्ज किया जाएगा। विशेष रूप से केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत मिले पैसों के इस्तेमाल की जांच होगी। रिपोर्ट में उन मामलों की पहचान की जाएगी जहां किसी खास योजना के लिए मंजूर किए गए फंड को दूसरे कामों में लगा दिया गया, या फिर उसका इस्तेमाल ही नहीं हुआ। सरकार ने सभी विभागों को अपने रिकॉर्ड की जांच करने और जरूरी दस्तावेज सौंपने का निर्देश दिया है।

मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी जाएगी शुरुआती रिपोर्ट
मंत्रियों के समूह ने श्वेत पत्र के ढांचे, विभिन्न विभागों से जानकारी जुटाने के तरीकों और समय-सीमा पर चर्चा की। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद एक शुरुआती रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) को सौंपी जाएगी। इसके बाद श्वेत पत्र को अंतिम रूप देकर जनता के सामने लाया जाएगा। इस बैठक में वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता के अलावा मंत्री दिलीप घोष, तापस रॉय, अरूप दास और दीपक बर्मन भी शामिल हुए

यह कदम राज्य सरकार की उस घोषणा के बाद उठाया गया है, जो उसने हाल ही में विधानसभा के बजट सत्र के दौरान की थी। मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने बार-बार कहा है कि उनकी सरकार टीएमसी के 15 साल के कार्यकाल के वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार का पूरा हिसाब तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर विभाग-वार निष्कर्ष पेश करेगा। वित्त मंत्री दासगुप्ता ने भी बजट भाषण में कहा था कि सरकार जनता के सामने वित्तीय प्रबंधन का पूरा ब्योरा रखने के लिए प्रतिबद्ध है। भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए टीएमसी सरकार पर कल्याणकारी और बुनियादी ढांचा योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

ENG vs IND, 4th T20I: ब्रिस्टल में बरपा हैरी ब्रूक का कहर, इंग्लैंड ने भारत को 9 विकेट से रौंदा; टी20 सीरीज की अपने नामहैरी ब्रूक को उनकी तूफानी पारी के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।

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गुरुवार, 9 जुलाई को ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड में खेले गए चौथे टी20आई मैच में कप्तान हैरी ब्रूक और ओपनर फिल सॉल्ट की जबरदस्त बल्लेबाजी की बदौलत इंग्लैंड ने भारत पर 9 विकेट से शानदार जीत हासिल की। ​​इस बड़ी जीत के साथ ही मेजबान टीम ने 3-0 की अजेय बढ़त बना ली और भारत के खिलाफ दो या उससे ज्यादा मैचों की अपनी पहली टी20आई सीरीज जीत पक्की कर ली।

पहले बल्लेबाजी करने का फैसला करते हुए, भारत का शीर्ष क्रम एक बार फिर इंग्लैंड की तेज गेंदबाजी के आगे ढह गया। विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी (15), इशान किशन (4), और अभिषेक शर्मा (16) सभी पहले सात ओवरों के भीतर शार्ट बॉल्स का शिकार हुई, जिससे मेहमान टीम का स्कोर 48/3 हो गया था।

टीम के लड़खड़ाने के बीच, भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने शानदार पारी खेलकर टीम को संभाला। अय्यर ने सिर्फ 49 गेंदों पर नाबाद 80 रन बनाए, जो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर था। उन्होंने अपनी पारी में चार चौके और पांच छक्के लगाए। उन्होंने अनुभवी स्पिनर आदिल रशीद के खिलाफ आक्रामक खेल दिखाया और उनकी 16 गेंदों पर 44 रन बनाए। शिवम दुबे ने भी 22 रनों का योगदान दिया, जिससे भारत 158/7 का ठीक-ठाक स्कोर बना पाया। इंग्लैंड के गेंदबाजों में जोफ्रा आर्चर सबसे सफल रहे, जिन्होंने 20 रन देकर 2 विकेट लिए।

हैरी ब्रूक ने तोड़ी भारतीय गेंदबाजों की कमर
टारगेट डिफेंड करते हुए भारत की शुरुआत शानदार रही, जब अर्शदीप सिंह ने तीसरे ओवर में खतरनाक जोस बटलर को 8 रन पर आउट किया। हालांकि, वापसी की कोई भी उम्मीद हैरी ब्रूक की जबरदस्त बैटिंग से जल्द ही खत्म हो गई। इंग्लैंड के कप्तान ने सिर्फ 21 गेंदों में हाफ-सेंचुरी पूरी की और निडर होकर खेलते हुए सिर्फ 35 गेंदों में शानदार 79* रन बनाए। फिल सॉल्ट ने उनका बेहतरीन साथ दिया और नाबाद 59* रन बनाए।

इस जोड़ी ने 151 रनों की अटूट साझेदारी की और भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त करते हुए 159 रनों के लक्ष्य को महज 13.5 ओवर में, 37 गेंदें शेष रहते हुए हासिल कर लिया। जहां इंग्लैंड ने सीरीज जीतते हुए ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, वहीं भारत 2019 के बाद पहली बार लगातार दो द्विपक्षीय टी20आई सीरीज हार का सामना करना पड़ा।

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