Saturday, September 19, 2026
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NATIONAL : पंजाब कांग्रेस में कलह: अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को हटाने की मांग पर अड़े चरणजीत सिंह चन्नी, हाईकमान की बढ़ी मुश्किलें

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी घमासान का समाधान निकालने की कोशिशें पार्टी हाईकमान ने तेज कर दी हैं। मगर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अपने समर्थकों के साथ जिस गोलबंदी के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को हटाने की मांग पर अड़े हुए हैं, उसे देखते हुए सुलह की राह आसान नजर नहीं आती।

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और पंजाब कांग्रेस के प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल घमासान थामने के लिए मैदान में उतर गए हैं। इसके लिए बघेल सोमवार को चंडीगढ़ पहुंच भी गए, लेकिन पार्टी महासचिव के पंजाब पहुंचते ही चन्नी के दिल्ली आने की खबरें गरम हैं। इससे साफ है कि प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व बदलने की मांग पर विरोधी खेमा हथियार डालने के मूड में नहीं है।

हाईकमान के फैसले के खिलाफ पंजाब में लामबंदी
कांग्रेस हाईकमान की ओर से पिछले हफ्ते पंजाब चुनाव के लिए अलग-अलग समितियों के गठन के बाद से भड़के इस अंदरूनी विद्रोह की सबसे बड़ी वजह प्रदेश अध्यक्ष वडिंग को नहीं हटाया जाना है। चन्नी के साथ ही सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे पंजाब कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता हाईकमान के फैसले के विरुद्ध गोलबंद होकर पिछले पांच दिनों में दो बड़ी बैठकें कर चुके हैं।

आलाकमान ने भूपेश बघेल को चंडीगढ़ भेजा
विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में आए इस भूचाल को थामने के लिए हाईकमान के इशारे पर राजा वडिंग दो दिन में दो बार खुद के मुख्यमंत्री पद का दावेदार नहीं होने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन चन्नी, रंधावा और उनके समर्थक इसका संज्ञान नहीं ले रहे। समझा जाता है कि वेणुगोपाल ने इसके मद्देनजर ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से संवाद करने के बाद सोमवार को भूपेश बघेल को चंडीगढ़ भेजा।

चन्नी समर्थकों को हाईकमान का फैसला मंजूर नहीं
बघेल ने वहां पहुंचकर चुनाव के लिए गठित समितियों की मंगलवार से बैठकें शुरू करने की बात कहते हुए उम्मीद जताई कि आपसी चर्चा के जरिये विवाद का हल निकाल लिया जाएगा और कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी। बघेल के इस बयान को चन्नी समर्थकों ने दरकिनार कर साफ संकेत दिया कि हाईकमान का मौजूदा फैसला उन्हें स्वीकार्य नहीं है।

प्रदेश अध्यक्ष बनना चाहते थे चन्नी
नेतृत्व की दौड़ में अपना दावा पेश कर रहे चन्नी प्रदेश अध्यक्ष बनना चाहते थे, मगर हाईकमान ने उन्हें चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया। बताते हैं कि चन्नी और रंधावा अब इस बात के लिए राजी हैं कि भले ही उन्हें अध्यक्ष नहीं बनाया जाए, मगर वडिंग को हटाकर किसी तीसरे व्यक्ति को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपी जाए। इन तेवरों से साफ है कि पंजाब कांग्रेस की कलह थामनी है तो पार्टी आलाकमान को अपने वर्तमान फैसले में संशोधन या बदलाव करना ही पड़ेगा।

NATIONAL : ममता बनर्जी गुट ने TMC के बागी नेताओं पर दर्ज करवाई FIR, नाम और लोगो का गैरकानूनी इस्तेमाल करने का लगाया आरोप

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) दो खेमों में बंट गई है। बागी गुट द्वारा नई राष्ट्रीय कार्य समिति के गठन के बाद, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली एआईटीसी ने बागियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है।

कोलकाता: विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस दो खेमों बंट चुकी है। ममता बनर्जी की अगुवाई वाली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने बागी नेताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि इन नेताओं ने पार्टी के नाम, लोगो और संगठनात्मक पहचान का गैरकानूनी इस्तेमाल किया। उन्होंने खुद को पार्टी का असली प्रतिनिधि बताया और फर्जी दस्तावेजों व इलेक्ट्रॉनिक संदेशों के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश की। यह शिकायत तृणमूल कांग्रेस की सांसद डोला सेन की ओर से दर्ज कराई गई है।

शिकायत में कहा गया है कि कुछ बागी नेताओं ने बिना पार्टी नेतृत्व की अनुमति के बैठकें आयोजित कीं और संगठन के आधिकारिक ढांचे को चुनौती देने की कोशिश की। पार्टी का कहना है कि यह कदम न सिर्फ अनुशासनहीनता है, बल्कि कानूनी तौर पर भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। दरअसल, 22 जून को तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बागी गुट ने खुद को असली TMC बताते हुए अपनी राष्ट्रीय कार्य समिति के गठन की घोषणा कर दी। इस नई समिति का अध्यक्ष वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को बनाया गया। साथ ही, ममता बनर्जी को संरक्षक की भूमिका निभाने का प्रस्ताव भी दिया गया।

खास बात यह है कि नई घोषित राष्ट्रीय कार्य समिति में TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को शामिल नहीं किया गया। इस कदम से पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेदों और बदलती निष्ठाओं को लेकर अटकलें तेज होने की संभावना है। बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि समिति का गठन पार्टी के संविधान के अनुसार किया गया है। उन्होंने कहा कि विशेष सत्र की कार्यवाही की जानकारी चुनाव आयोग को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह गुट जल्द ही अपने संगठनात्मक विस्तार के तहत जिला समितियां, एक राज्य इकाई और प्रवक्ताओं का एक पैनल गठित करेगा।

TMC के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह का इस तरह इस्तेमाल करना विश्वासघात है। घोष ने आरोप लगाया कि कुछ नेता बाहरी दबाव में काम कर रहे हैं और पार्टी की एकता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी के नेतृत्व में भरोसा रखती है और ऐसे प्रयासों को कभी स्वीकार नहीं करेगी।

NATIONAL : हाथ जोड़े, भीड़ को साइड किया, फिर जड़ा पीली टी- शर्ट वाले के गाल पर थप्पड़, ममता बनर्जी को क्यों आया गुस्सा?

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पश्चिम बंगाल के कोलकाता में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस की एक रैली के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा एक व्यक्ति को थप्पड़ मारे जाने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। इसके बाद भाजपा ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी ही पार्टी के एक कार्यकर्ता के साथ मारपीट की। तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को निराधार बताया।

कोलकाता : ममता बनर्जी के नेतृत्व में निकाले गए विरोध मार्च के दौरान कथित तौर पर अंडे फेंके गए और रैली में चोर-चोर के नारे भी लगाए गए। इस दौरान ममता बनर्जी ने अपना आपा खो दिया और एक पार्टी कार्यकर्ता को थप्पड़ मार दिया। बारुईपुर में 11 साल की बच्ची के कथित रेप और हत्या के विरोध में तृणमूल कांग्रेस ने बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ तक एक मार्च निकाला। रैली के दौरान बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई, जिसके बाद हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

रैली शुरू होने की जगह के पास शुरू हुई यह झड़प लगभग तीन किलोमीटर लंबे रास्ते पर रुक-रुक कर जारी रही और ममता बनर्जी के घर के पास हाजरा क्रॉसिंग पर अपने चरम पर पहुंच गई। तनाव बढ़ने और हालात के बेकाबू होने के खतरे के बीच पुलिस को हिंसा रोकने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

जुलूस के आगे बढ़ते ही बढ़ा तनाव
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट ने बारुईपुर घटना के विरोध में जुलूस निकालने का आह्वान किया था। कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद यह मार्च बालीगंज आउटपोस्ट से दक्षिण कोलकाता में हाजरा क्रॉसिंग की ओर शुरू हुआ। हालांकि, जुलूस के आगे बढ़ते ही तनाव बढ़ गया। जुलूस के दौरान चोर-चोर के नारे लगाए गए और खबर है कि बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच मामूली झड़पें हुईं। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उसके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई।

सुकांत मजूमदार बरसे
बाद में, ममता बनर्जी कालीघाट स्थित अपने आवास से बाहर निकलीं, जहां भारी भीड़ जमा थी। उन्होंने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन जैसे-जैसे हंगामा बढ़ा, उन्होंने अपना आपा खो दिया और सबके सामने एक पार्टी कार्यकर्ता को थप्पड़ मार दिया। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि सत्ता से बेदखल होने के बाद ममता बनर्जी मानसिक रूप से भ्रमित हो गई हैं। हालांकि यह सारा व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन उन्होंने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है। वह अभी भी यह स्वीकार नहीं कर पा रही हैं कि बंगाल की जनता ने उन्हें सत्ता से हटा दिया है।

पुलिस पर बरसीं ममता बनर्जी
इस बीच, कालीघाट स्थित अपने आवास से बाहर निकलने के बाद, ममता बनर्जी ने पुलिस की भूमिका की कड़ी आलोचना की और बारुईपुर में प्रदर्शनकारियों को दंगाई भी कहा। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं ने हाई कोर्ट की अनुमति से जुलूस निकाला है। सभी को लोकतांत्रिक अधिकार हैं। बीजेपी के गुंडे मेरे घर के सामने घूम रहे हैं। उन्होंने नारेबाजी की। उन्होंने मुझे डराया। सरकार ठीक से चलाओ।

मैं BJP को दोष नहीं देती। पुलिस इसके लिए जिम्मेदार है। सुरक्षा देना उनकी जिम्मेदारी थी। उन्होंने BJP कार्यकर्ताओं को जुलूस में शामिल होने की इजाजत क्यों दी? कानून कहां है? उत्तर प्रदेश में और ज़्यादा अशांति है। यह अदालत की अवमानना ​​के बराबर है। हम इसकी निंदा करते हैं।

तृणमूल कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि उन्होंने हमें नज़रबंद कर दिया है। पुलिस हम पर नजर रख रही है। उन्होंने हमारे हाथ वाले माइक्रोफ़ोन छीन लिए हैं। वे सुबह 6 बजे से डीजे बजा रहे हैं। वे किराए के गुंडे लाए हैं और हंगामा कर रहे हैं। मेरे घर से लेकर बालीगंज आउटपोस्ट तक, उन्होंने लड़कियों के साथ बदसलूकी की है। मैं उन्हें बचाने के लिए घर से बाहर निकली। मैंने लड़कियों के गालों और छाती से खून निकलते देखा। क्या बंगाल की जनता यही बदलाव चाहती थी? हम चाहते हैं कि बलात्कार की घटनाएं कम हों। अत्याचार कम हों।

NATIONAL : नीट यूजी एग्जाम में बहुत बड़ा बदलाव, 2027 से 5-6 दिन में होगी यह परीक्षा; एनटीए घटाएगा सेंटर्स की संख्या

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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने अगले साल यानी 2027 में होने वाले नीट यूजी परीक्षा को सीबीटी मोड में कराने का फैसला पहले ही कर लिया था। अब परीक्षा को लेकर और भी कई बदलाव किए गए हैं।

नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले के बाद इस परीक्षा में रिफॉर्म करने में जुटी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने अगले साल यानी 2027 में होने वाली नीट यूजी परीक्षा को लेकर कुछ बड़े बदलाव किए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 में होने वाली नीट यूजी परीक्षा 5-6 दिन में आयोजित होगी। साथ ही एनटीए एग्जाम सेंटर्स में भी कमी करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, नीट यूजी 2027 एग्जाम पहली बार कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट आधारित होगा जो कि 500 शहरों में करीब 1000 सेंटर्स पर होगा। अभी तक यह परीक्षा 1 ही दिन लगभग 5 हजार सेंटर्स पर आयोजित होती थी।

हर दिन 5 लाख कैंडिडेट्स होंगे परीक्षा में शामिल
एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने बताया है कि एनटीए 2027 से नीट यूजी परीक्षा को 5-6 दिन में आयोजित कराएगी और जिन सेंटर्स पर यह परीक्षा होगी उनमें मुख्य रूप से केंद्रीय विद्यालय जैसे सरकारी इंस्टीट्यूशन्स शामिल होंगे। हर दिन लगभग 5 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल होंगे। एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि एजेंसी बहुत जल्द इन बदलावों को लागू कर सकती है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी नीट के अलावा अन्य दूसरे हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स के लिए एंट्रेंस एग्जाम कंडक्ट कराती है।

सूत्रों ने बताया है कि अगले साल के NEET-UG एग्जाम की प्लानिंग के मुताबिक, अधिकतर परीक्षा केंद्र केवी और नवोदय विद्यालय जैसे सरकारी स्कूल होंगे। एजेंसी की ओर से कुछ जाने-माने प्राइवेट संस्थानों को ही सेंटर बनाया जाएगा। NTA में प्रस्तावित बदलाव पूरा होने के बाद शिफ्ट टाइमिंग, टेस्ट शहरों की लिस्ट और दूसरी डिटेल्स के साथ एक डिटेल्ड नोटिफिकेशन जारी होने की उम्मीद है।

एजेंसी से जुड़े सूत्रों ने एक्सप्रेस को बताया है कि NTA के पूरे ऑर्गनाइजेशन को ऊपर से लेकर नीचे तक बदलने की तैयारी है। एजेंसी में यह काम इसी साल अक्टूबर से पहले पूरा किए जाने की उम्मीद है। एनटीए में लगभग 150 पोस्ट पर उम्मीदवारों का चयन होना है। बता दें कि एनटीए में और नीट यूजी एग्जाम में यह बदलाव इस साल की नीट यूजी परीक्षा के लीक होने के बाद किए जा रहे हैं। पेपर लीक की घटना को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने ये प्रस्ताव दिए हैं। 03 मई को आयोजित हुई परीक्षा पेपर लीक की वजह से रद्द कर दी गई थी जिसको लेकर देशभर में युवाओं के अंदर आक्रोश है।

सूत्रों ने यह भी बताया है कि यह जो बदलाव किए जा रहे हैं यह के राधाकृष्णन की अगुवाई वाली सात सदस्यों वाली हाई-पावर्ड कमेटी की सिफारिशों पर आधारित है। इस कमेटी को केंद्र सरकार ने साल 2024 के पेपर लीक मामले के बाद गठित किया था। नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले के बाद शिक्षा मंत्रालय ने सबसे पहले यह घोषणा कर दी थी कि अगले साल यानी 2027 से इस पेपर को पेन एंड पेपर मोड की जगह सीबीटी मोड में आयोजित किया जाएगा। यह फैसला भी राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिश के आधार पर ही लिया गया था।

NATIONAL : सुप्रीम कोर्ट पहुंचा अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी का मामला, 13 जुलाई को हो सकती है सुनवाई

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राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान की कथित चोरी पर सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को कर सकता है सुनवाई. याचिका में जांच सीबीआई को सौंपने और विशेष SIT के गठन के मांग की गई है.

अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चंदे की कथित चोरी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इस मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को सुनवाई कर सकता है. याचिका में आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए मामले को सीबीआई को सौंपने और एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की गई है.

चंदा चोरी की ‘सुप्रीम’ सुनवाई

इससे पहले 29 जून को सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन बेंच ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था. अदालत ने कहा था कि गर्मी की छुट्टियों के बाद इस मामले को नियमित बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा.

गौरतलब है कि 13 जुलाई को कोर्ट की नियमित कार्रवाई शुरू होने जा रही है. मामले में दाखिल याचिका का सिस्टम जेनरेटेड स्टेटस इसके 13 जुलाई को सूचीबद्ध होने की संभावना जता रहा है. हालांकि, अभी 13 जुलाई की सुनवाई सूची सामने नहीं आई है. इसलिए, उसी दिन सुनवाई होगी, ऐसा जरूरी नहीं है.

एसआईटी रिपोर्ट में क्या कहा गया?

इस मामले की जांच कर रहे एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला को मुख्य आरोपी बताया गया है. जांचकर्ताओं को शक है कि 40 दिनों तक चली इस चोरी में मंदिर के दान की रकम की गिनती के दौरान चोरी के लगभग 70 मामले शामिल थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कथित चोरी का पूरा प्रकरण शुक्ला के इर्द-गिर्द केंद्रित था और उसकी निशानदेही पर ही जांचकर्ताओं को पांच अन्य आरोपियों की पहचान करने और मंदिर के दान राशि गणना कक्ष के अंदर संदिग्ध काम करने के तरीके को समझने में मदद मिली.

रिपोर्ट में बताया गया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दान राशि गिनती के लिए जिन लोगों को रखा है, उन्हें कटौती के बाद हर महीने 15 हजार से कुछ ही ज्यादा तनख्वाह मिलती है, जबकि गिरफ्तारी से पहले शुक्ला की बैंकिंग गतिविधियों में शामिल की गयी रकम उसकी ज्ञात आमदनी से काफी ज्यादा थी.

UGC NET exam row: नीट के बाद अब यूजीसी-नेट पर उठे सवाल, राहुल गांधी ने लगाए पेपर लीक के गंभीर आरोप; क्या कहा?

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग- राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट)में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कई बार ‘घोटाले’ होने के बावजूद सरकार आंखें मूंदे बैठी है और आराम से सो रही है। उसके लिए लाखों छात्रों की वर्षों की मेहनत की कोई कीमत नहीं है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, पूरे देश को पता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से किसी जवाबदेही या कार्रवाई की उम्मीद करना बेकार है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच पर एक मीडिया रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि हरियाणा के रोहतक में छात्र नेताओं ने जून 2026 में यूजीसी-नेट को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। यह परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने आयोजित कराई थी।

राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, पिछले सप्ताह हुई यूजीसी-नेट को लेकर सामने आए गंभीर आरोप बेहद चौंकाने वाले हैं। नीट प्रश्न पत्र लीक के कुछ हफ्तों बाद अब खबरें सामने आ रही हैं कि यूजीसी-नेट से ठीक पहले 100 पन्नों का एक पीडीएफ वितरित किया गया था।

उन्होंने कहा कि यह पीडीएफ प्रश्न पत्र तैयार करने से जुड़ा था। यह सिर्फ राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के पास होता है। राहुल गांधी ने दावा किया कि इस पीडीएफ में दिए गए करीब 90 सवाल असली समाजशास्त्र के प्रश्न पत्र से मिल रहे थे।

राहुल गांधी ने आगे आरोप लगाया कि बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में प्रश्न पत्र को 2.25 लाख रुपये में बेचा जा रहा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी गिरोह ने सीएसआईआर-नेट, एचटीईटी और एडीए जैसी आने वाली परीक्षाओं के प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने का दावा किया था।

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, नीट और नेट में बार-बार घोटालों के बाद भी मोदी सरकार आंखें मूंदे बैठी है और आराम से सो रही है, क्योंकि लाखों छात्रों की वर्षों की मेहनत की उनके लिए कोई कीमत नहीं है, जो रात-दिन मेहनत करते हैं।

एनटीए ने नहीं दी कोई प्रतिक्रिया

एनटीए की ओर से राहुल गांधी के आरोपों पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। राहुल गांधी ने कहा कि कोई जांच नहीं होगी और छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि बदलाव का एकमात्र रास्ता लोगों की सामूहिक आवाज है। पूरे देश में छात्रों की गूंज ही भारत में शिक्षा क्रांति लेकर आएगी। उन्होंने कहा कि छात्रों की यह आवाज बदलाव लाएगी।

NATIONAL : अगले वर्ष तक सभी राज्य मुख्यालयों पर शुरू होंगे FRRO कार्यालय, 62 एयरपोर्ट पर बढ़ेंगी यात्री सुविधाएं

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगरतला और जेवर हवाई अड्डों पर अधिकृत आव्रजन जांच चौकियां जल्द चालू करने को भी कहा। साथ ही, फास्ट ट्रैक इमिग्रेशन–ट्रस्टेड ट्रैवलर प्रोग्राम को बढ़ावा देने के लिए एयरलाइंस के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय टिकट बुक करने वाले यात्रियों को व्हाट्सएप के जरिए पंजीकरण का संदेश भेजने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजरापु ने प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्री सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था एवं आप्रवासन प्रणाली की समीक्षा की। सभी हवाई अड्डों पर चरणबद्ध तरीके से स्वचालित एक्स-रे ट्रे रिटर्न प्रणाली लागू की जाएगी। अगले वर्ष तक सभी राज्य मुख्यालयों पर एफआरआरओ कार्यालय स्थापित होंगे। केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने अगरतला एवं जेवर हवाई अड्डों पर अधिकृत आप्रवासन जांच चौकियां शीघ्र प्रारम्भ करने के निर्देश दिए हैं।

स्वचालित एक्स-रे ट्रे प्रणाली और यात्री आवाजाही को बेहतर बनाने पर जोर
अमित शाह ने मानव संसाधन लागत को कम करने के उद्देश्य से देश के सभी एयरपोर्टों पर चरणबद्ध तरीके से स्वचालित एक्स-रे ट्रे प्रणाली स्थापित करने का निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नये हवाईअड्डों में स्वचालित एक्स-रे ट्रे प्रणाली ही स्थापित करने के उचित मापदंड तय किये जाएं। उन्होंने एयरपोर्ट में प्रवेश के लिए एंट्री लेन, चेक-इन काउंटर, सुरक्षा जांच लेन और आप्रवासन काउंटर के मध्य आपसी पारस्परिक निर्भरता को ध्यान में रखते हुए एक समीकरण तैयार किया जाने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी टचपॉइंट पर पैसेंजर प्रवाह में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न न हो। यात्रियों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए एयरपोर्ट के प्रत्येक टचपॉइंट पर समन्वित योजना तैयार की गई है।

62 एयरपोर्ट पर सुविधाओं के विस्तार
गृह मंत्री अमित शाह ने निर्देश दिया कि नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) के सुरक्षा मापदंड अनुसार यात्री-सुविधा बढ़ाने और वाणिज्यिक क्षेत्र को निर्धारित मानक में ही रखने के लिए 21 प्रक्रियाधीन तथा शेष 41 एयरपोर्ट को विकसित करने के लिए पैसेंजर्स ट्रैफिक के अनुसार प्राथमिकता निर्धारित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इन 62 एयरपोर्ट पर अगले दो वर्ष में कार्य पूर्ण किया जाए।

नागरिक विमानन मंत्रालय पैसेंजर ट्रैफिक और एयर ट्रैफिक के आधार पर सभी एयरपोर्ट्स के लिए एरोब्रिज की संख्या संबंधी मानदंड निर्धारित करे। बैगेज ड्रॉप की सुविधा प्रमुख 16 हवाई अड्डों के अतिरिक्त अन्य उच्च पैसेंजर आवागमन वाले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर भी उपलब्ध कराई जाए।

जेवर-अगरतला में जल्द शुरू होंगी इमीग्रेशन चौकियां
उन्होंने कहा कि एक्स-रे स्क्रीनिंग के लिए प्रायोजित केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) स्टाफ की शैक्षणिक योग्यता में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। साथ ही उपयुक्त शैक्षणिक योग्यता रखने वाले उपलब्ध अधिकारी और कर्मचारियों को एक्स-रे स्क्रीनिंग कार्य में नियोजित किया जाए। अगरतला और जेवर एयरपोर्ट पर अधिकृत आप्रवासन चौकी शीघ्रता से प्रारंभ की जाए। फास्ट ट्रैक इमीग्रेशन – ट्रस्टेड ट्रैवलर प्रोग्राम को लोकप्रिय बनाने के लिए एयरलाइंस के साथ समन्वय कर अंतरराष्ट्रीय टिकट बुकिंग होने पर संबंधित यात्री को फास्ट ट्रैक इमीग्रेशन – ट्रस्टेड ट्रैवलर प्रोग्राम पर पंजीकरण करने का अनुरोध करते हुए व्हाट्सएप संदेश भेजने की व्यवस्था स्थापित की जाए।

शाह ने कहा कि नागरिक विमानन मंत्रालय और केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल द्वारा पृथक-पृथक स्वतंत्र तृतीय पक्ष के माध्यम से वर्ष के पीक सीजन में प्रमुख एयरपोर्ट्स के सभी टचपॉइंट्स पर यात्री विलंब में कमी का अध्ययन करवाया जाना चाहिए। बैठक में केन्द्रीय गृह सचिव, निदेशक, आसूचना ब्यूरो, सचिव, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, महानिदेशक, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और अध्यक्ष, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण सहित गृह मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनेक वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

NATIONAL : DRDO को बड़ी कामयाबी: पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण, स्वदेशी रक्षा तकनीक में अहम उपलब्धि हासिल

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डीआरडीओ ने ओडिशा के चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण किया है। बता दें कि, इसे कई प्रयोगशाला की तरफ से संयुक्त रूप से तैयार किया गया है। वहीं, इसके सफल परीक्षण पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ को बधाई दी है।

भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बुधवार, 8 जुलाई 2026 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर) में पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल उड़ान परीक्षण किया। यह परीक्षण उपयोगकर्ता (भारतीय सेना) द्वारा तय की गई 60 किलोमीटर की न्यूनतम मारक दूरी के लिए किया गया।

‘रॉकेट सटीकता के साथ पहुंचने में सक्षम’
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस सफल परीक्षण ने साबित किया कि पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट तय लक्ष्य तक सटीकता के साथ पहुंचने में सक्षम है। परीक्षण के दौरान रॉकेट को सेना में पहले से इस्तेमाल हो रहे पिनाका लॉन्चर से दागा गया। इससे यह भी साबित हुआ कि एक ही लॉन्चर से अलग-अलग दूरी तक मार करने वाले पिनाका रॉकेटों को दागा जा सकता है।

कई डीआरडीओ प्रयोगशालाओं ने मिलकर किया विकास
पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट को डीआरडीओ की आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (एआरडीई) ने विकसित किया है। इसमें हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (एचईएमआरएल) की प्रमुख भूमिका रही। इसके अलावा डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (डीआरडीएल) और रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई) ने भी तकनीकी सहयोग दिया। वहीं, उड़ान परीक्षण का समन्वय इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर) और प्रूफ एंड एक्सपेरिमेंटल एस्टैब्लिशमेंट (पीएक्सई) ने किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर डीआरडीओ, भारतीय सेना और इससे जुड़ी उद्योग इकाइयों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह लंबी दूरी के गाइडेड रॉकेट के स्वदेशी डिजाइन और विकास क्षमता के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि इस सफलता से भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और मजबूत होगी।

डीआरडीओ प्रमुख ने भी की सराहना
रक्षा सचिव तथा रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने परीक्षण की पूरी प्रक्रिया पर करीबी नजर रखी। उन्होंने सफल परीक्षण से जुड़े सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी टीमों की सराहना करते हुए उन्हें इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

क्यों अहम है यह परीक्षण?
पिनाका पहले से ही भारतीय सेना की प्रमुख मल्टी बैरल रॉकेट प्रणाली है। अब इसके लॉन्ग रेंज गाइडेड संस्करण के सफल परीक्षण से सेना को अधिक दूरी तक सटीक निशाना साधने की क्षमता मिलेगी। साथ ही, मौजूदा पिनाका लॉन्चर से ही नए रॉकेट दागे जा सकेंगे, जिससे अलग लॉन्चिंग सिस्टम की जरूरत नहीं पड़ेगी और संचालन भी आसान होगा। यह सफलता भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भरता को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

WORLD : पश्चिम एशिया संकट: वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों से भारत चिंतित; ईरान-अमेरिका से की संयम बरतने की अपील

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पश्चिम एशिया में व्यापारिक तेल टैंकरों पर हमलों और अमेरिका-ईरान के बीच शुरू हुई सीधी सैन्य भिड़ंत से महायुद्ध का खतरा बढ़ गया है। भारत ने इस पर कड़ी चिंता जताते हुए साफ कहा है कि वैश्विक व्यापार, कच्चे तेल की सप्लाई और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए सभी देशों को तुरंत युद्ध रोककर कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए।

पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में व्यापारिक जहाजों पर ताजा हमलों के बाद स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। इस बिगड़ते हालात पर भारत ने गहरी चिंता जताई है। भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर दुनिया को आगाह किया है। भारत ने सभी पक्षों से तुरंत युद्ध का रास्ता छोड़ संयम बरतने की अपील की है।

क्या ठप हो जाएगा दुनिया का व्यापार?
इस बार तनाव की शुरुआत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन कमर्शियल तेल टैंकरों पर हुए हमलों से हुई। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बड़े हवाई हमले कर दिए। जवाब में ईरान ने भी कुवैत और बहरीन पर मिसाइलें दाग दी हैं। इस सैन्य टकराव से पूरे इलाके की सुरक्षा और स्थिरता दांव पर लग गई है।

मामले से जुड़े पांच मुख्य बिंदु
तनाव में भारी उछाल: अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद पश्चिम एशिया सुलग उठा है।
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शांति को बड़ा खतरा: भारतीय विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इन हमलों से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पूरी तरह खत्म हो सकती है।
भारत की चिंता: भारत इस पूरे घटनाक्रम और बढ़ते सैन्य हमलों पर बारीकी से नजर रखे हुए है।
आपूर्ति शृंखला संकट: यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक और ऊर्जा मार्गों में से एक है।
वैश्विक मंदी का डर: जहाजों पर हमलों से कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई पूरी तरह ठप होने का खतरा मंडरा रहा है।

क्या कूटनीति से निकलेगा इस संकट का समाधान?
भारत ने साफ किया है कि हिंसा से कभी शांति नहीं आ सकती। भारत सरकार ने दोनों महाशक्तियों और क्षेत्रीय देशों से तुरंत कूटनीतिक मेज पर लौटने की अपील की है। ट्रंप ने जहां एक और रात भारी हमलों की धमकी दी है, वहीं भारत युद्ध रोकने के लिए लगातार बातचीत की वकालत कर रहा है।

संकट टालने के लिए भारत के चार बड़े सुझाव
तुरंत संयम बरतें: सभी संबंधित देश अपनी सैन्य कार्रवाइयों को रोकें और जमीनी तनाव को तुरंत कम करें।
नागरिकों की सुरक्षा: युद्ध के इस माहौल में आम नागरिकों की जान की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए।
व्यापार को रखें मुक्त: अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में कमर्शियल जहाजों का आवागमन बिना किसी डर या बाधा के जारी रहना चाहिए।
ऊर्जा आपूर्ति न रुके: वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए तेल और ऊर्जा संसाधनों की सप्लाई लाइन पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए।

WORLD : भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान का त्रिकोण: बदलेगा हिंद-प्रशांत, PM मोदी की यात्रा में अहम होगी खनिज कूटनीति

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पीएम मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरे में भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच सहयोग को रक्षा, आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर जोर रहने की संभावना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सामरिक समीकरणों में बदलाव के बीच हो रही है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने के अलावा इस दौरे का एक उद्देश्य भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच आपसी रणनीतिक तालमेल गहरा करना भी है।

दरअसल भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी भूमिका को एक सक्रिय साझेदार के तौर पर आगे बढ़ा रहा है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साझा मंच कवॉड में भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच सहयोग को अगले स्तर पर ले जाना एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।

त्रिपक्षीय साझेदारी: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव, समुद्री सुरक्षा चुनौतियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं की अनिश्चितता ने समान विचार वाले देशों के बीच सहयोग की जरूरत बढ़ाई है। यह देखा जा सकता है कि भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक लचीलेपन और तकनीकी सहयोग पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह सहयोग एक औपचारिक सैन्य गठबंधन की दिशा में जाने की बजाय क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्र संबंधी कानून के सम्मान और आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने का प्रयास है।

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