सांस फूलना हो सकता है जानलेवा बीमारी का संकेत, ये 5 लक्षण न करें कभी भी Ignore!

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 सांस फूलना सिर्फ अस्थमा जैसी बीमारी का संकेत नहीं है। कई बार यह चिंता या तनाव के कारण भी हो सकता है। जब आप किसी डर या घबराहट महसूस करते हैं तो आपका शरीर शारीरिक और मानसिक रूप से तनावपूर्ण स्थिति में प्रतिक्रिया करता है जिससे सांस फूलने की समस्या हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार यह चिंता का एक सामान्य लक्षण हो सकता है।

क्या हैं इसके संकेत?

अगर आपको अचानक सांस लेने में तकलीफ महसूस हो तो यह चिंता या तनाव का लक्षण हो सकता है। खासकर जब आप बहुत ज्यादा स्ट्रेस महसूस करते हैं तो आपकी शारीरिक और मानसिक स्थिति इससे प्रभावित होती है। डॉक्टरों के अनुसार चिंता और सांस फूलने के बीच एक मजबूत संबंध होता है।

➤ दिल की धड़कन बढ़ना – अचानक से दिल की धड़कन तेज होना।
➤ बहुत ज्यादा डर लगना – मानसिक तनाव के कारण डर की भावना का बढ़ना।

➤ जी मिचलाना – मानसिक परेशानी के कारण शारीरिक असुविधा महसूस होना।
➤ पसीना आना – घबराहट और तनाव के कारण अधिक पसीना आना।
➤ सांस की तकलीफ – घबराहट में सांस का भारी या असमर्थ महसूस होना।

कब होती है यह समस्या?

यह समस्या तब अधिक होती है जब आप किसी तनावपूर्ण या डरावनी स्थिति का सामना करते हैं जैसे कि भीड़-भाड़ वाले रास्ते पर गाड़ी चलाना या लंबी यात्रा के दौरान। ऐसे में आपका शरीर तनाव के जवाब में लड़ाई या भागने की स्थिति में आता है जिससे सांस फूलने लगती है।

कैसे करें बचाव?

अगर आपको तनाव या घबराहट के कारण सांस फूलने की समस्या होती है तो आप कुछ आसान श्वास प्रबंधन तकनीकों का पालन कर सकते हैं:

1. डायाफ्रामिक सांस (Diaphragmatic Breathing) – इस तकनीक में आप अपनी पेट की मांसपेशियों का उपयोग करते हुए गहरी सांस लेते हैं। इससे आपके शरीर को आराम मिलता है और सांस लेने में मदद मिलती है।

2. बॉक्स ब्रीदिंग (Box Breathing) – इसमें चार तक गिनते हुए सांस अंदर लें फिर चार तक गिनते हुए सांस रोके रखें फिर चार तक गिनते हुए सांस बाहर छोड़ें और फिर चार तक गिनते हुए सांस को रोके रखें। इसे 5 से 6 बार दोहराएं। इस प्रक्रिया से तनाव कम होता है और सांस को नियंत्रित किया जा सकता है।

बता दें कि सांस फूलने की समस्या केवल शारीरिक कारणों से नहीं होती बल्कि मानसिक स्थिति भी इस पर असर डाल सकती है। अगर आपको अक्सर सांस फूलने की समस्या होती है तो यह चिंता का संकेत हो सकता है। ऐसे में ध्यान और श्वास तकनीकों का अभ्यास कर आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं।

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