WORLD : पश्चिम एशिया संकट: वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों से भारत चिंतित; ईरान-अमेरिका से की संयम बरतने की अपील

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पश्चिम एशिया में व्यापारिक तेल टैंकरों पर हमलों और अमेरिका-ईरान के बीच शुरू हुई सीधी सैन्य भिड़ंत से महायुद्ध का खतरा बढ़ गया है। भारत ने इस पर कड़ी चिंता जताते हुए साफ कहा है कि वैश्विक व्यापार, कच्चे तेल की सप्लाई और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए सभी देशों को तुरंत युद्ध रोककर कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए।

पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में व्यापारिक जहाजों पर ताजा हमलों के बाद स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। इस बिगड़ते हालात पर भारत ने गहरी चिंता जताई है। भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर दुनिया को आगाह किया है। भारत ने सभी पक्षों से तुरंत युद्ध का रास्ता छोड़ संयम बरतने की अपील की है।

क्या ठप हो जाएगा दुनिया का व्यापार?
इस बार तनाव की शुरुआत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन कमर्शियल तेल टैंकरों पर हुए हमलों से हुई। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बड़े हवाई हमले कर दिए। जवाब में ईरान ने भी कुवैत और बहरीन पर मिसाइलें दाग दी हैं। इस सैन्य टकराव से पूरे इलाके की सुरक्षा और स्थिरता दांव पर लग गई है।

मामले से जुड़े पांच मुख्य बिंदु
तनाव में भारी उछाल: अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद पश्चिम एशिया सुलग उठा है।
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शांति को बड़ा खतरा: भारतीय विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इन हमलों से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पूरी तरह खत्म हो सकती है।
भारत की चिंता: भारत इस पूरे घटनाक्रम और बढ़ते सैन्य हमलों पर बारीकी से नजर रखे हुए है।
आपूर्ति शृंखला संकट: यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक और ऊर्जा मार्गों में से एक है।
वैश्विक मंदी का डर: जहाजों पर हमलों से कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई पूरी तरह ठप होने का खतरा मंडरा रहा है।

क्या कूटनीति से निकलेगा इस संकट का समाधान?
भारत ने साफ किया है कि हिंसा से कभी शांति नहीं आ सकती। भारत सरकार ने दोनों महाशक्तियों और क्षेत्रीय देशों से तुरंत कूटनीतिक मेज पर लौटने की अपील की है। ट्रंप ने जहां एक और रात भारी हमलों की धमकी दी है, वहीं भारत युद्ध रोकने के लिए लगातार बातचीत की वकालत कर रहा है।

संकट टालने के लिए भारत के चार बड़े सुझाव
तुरंत संयम बरतें: सभी संबंधित देश अपनी सैन्य कार्रवाइयों को रोकें और जमीनी तनाव को तुरंत कम करें।
नागरिकों की सुरक्षा: युद्ध के इस माहौल में आम नागरिकों की जान की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए।
व्यापार को रखें मुक्त: अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में कमर्शियल जहाजों का आवागमन बिना किसी डर या बाधा के जारी रहना चाहिए।
ऊर्जा आपूर्ति न रुके: वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए तेल और ऊर्जा संसाधनों की सप्लाई लाइन पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए।

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