NATIONAL : तरुण के नाम पर सोशल मीडिया से दो दिन में जुटाए 37 लाख रुपये, दिल्ली पुलिस ने X और Instagram से साधा संपर्क

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दिल्ली के उत्तम नगर में तरुण हत्याकांड के बाद सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाकर कुछ लोग उसके परिवार के नाम पर पैसा इकट्ठा कर रहे थे. पुलिस जांच में पता चला कि एक बैंक खाते में दो दिनों में करीब 37 लाख रुपये जमा हो गए. द्वारका जिला पुलिस ने तुरंत खाते को फ्रीज कर दिया और अफवाह फैलाने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है. अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

दिल्ली के उत्तम नगर के चर्चित तरुण मर्डर केस पुलिस की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. कुछ लोग इस संवेदनशील घटना का सहारा लेकर तरुण के परिवार के नाम पर आम लोगों से पैसे इकट्ठा कर रहे थे. पुलिस के अनुसार ऐसे ही एक बैंक खाते में महज दो दिनों के भीतर करीब 37 लाख रुपये जमा हो गए थे. मामले की जानकारी मिलते ही द्वारका जिला पुलिस हरकत में आ गई और तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंक खाते को फ्रीज करा दिया. साथ ही इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संवेदनशील घटना के बाद सोशल मीडिया पर झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि इससे समाज में तनाव भी बढ़ सकता है. इसलिए इस तरह की गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है. उत्तम नगर की घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई तरह की पोस्ट और वीडियो वायरल होने लगे थे. इनमें से कई पोस्ट में अपुष्ट और भड़काऊ दावे किए जा रहे थे. द्वारका जिला पुलिस ने इन पोस्टों को गंभीरता से लिया और तुरंत उनकी जांच शुरू की. जांच में सामने आया कि कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स जानबूझकर भ्रामक सामग्री फैला रहे थे. पुलिस का कहना है कि ऐसी पोस्ट से न सिर्फ लोगों को गुमराह किया जा रहा था, बल्कि इससे इलाके में माहौल भी बिगड़ सकता था.

जांच के दौरान पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ समन्वय करते हुए कार्रवाई शुरू की. अब तक आईटी एक्ट की धाराओं के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को 14 कंटेंट टेकडाउन अनुरोध भेजे गए हैं, ताकि भड़काऊ और भ्रामक सामग्री को हटाया जा सके. इसी तरह फोटो और वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म Instagram को भी 8 टेकडाउन अनुरोध भेजे गए हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिन अकाउंट्स से अफवाहें फैलाई जा रही थीं, उन्हें चिन्हित कर लिया गया है और उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

जांच के दौरान पुलिस के सामने एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया. 10 मार्च 2026 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक क्यूआर कोड दिखाते हुए लोगों से आर्थिक मदद की अपील की जा रही थी. वीडियो में दावा किया गया था कि यह पैसा तरुण के परिवार की मदद के लिए जमा किया जा रहा है. लेकिन जब पुलिस ने इस मामले की जांच की तो पता चला कि यह फंड जुटाने की कोशिश संदिग्ध थी. जांच में सामने आया कि महज दो दिनों के भीतर उस बैंक खाते में करीब 37 लाख रुपये जमा हो चुके थे.

जैसे ही पुलिस को इस संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिली, तुरंत संबंधित बैंक शाखा के प्रबंधक से संपर्क किया गया. पुलिस ने बैंक को निर्देश दिया कि उस खाते में होने वाले सभी क्रेडिट और डेबिट लेनदेन को तुरंत रोक दिया जाए. इसके साथ ही खाते में जमा पूरी राशि को फ्रीज कर दिया गया. पुलिस का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि आम लोगों द्वारा भेजा गया पैसा सुरक्षित रह सके और किसी भी तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सके.

द्वारका जिला पुलिस ने साफ शब्दों में कहा है कि सोशल मीडिया पर अपुष्ट या झूठी जानकारी फैलाना कानूनन अपराध है. पुलिस के अनुसार जो लोग जानबूझकर गलत जानकारी फैलाकर समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा उन लोगों पर भी नजर रखी जा रही है जो इस घटना के नाम पर ऑनलाइन फंड इकट्ठा करने की कोशिश कर रहे हैं. पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें. अधिकारियों का कहना है कि बिना पुष्टि के कोई भी पोस्ट या वीडियो शेयर करना कई बार अनजाने में अफवाह फैलाने का कारण बन सकता है. इसलिए लोगों से कहा गया है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करें.

दरअसल, होली के मौके पर पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में दो अलग-अलग समुदायों के परिवारों के बीच झगड़ा हो गया था. बताया जाता है कि विवाद की शुरुआत एक मामूली घटना से हुई थी, लेकिन देखते ही देखते मामला हिंसक झड़प में बदल गया. इस झगड़े में 26 वर्षीय तरुण नामक युवक की हत्या कर दी गई. जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया. पुलिस जांच के अनुसार घटना के दौरान एक महिला सायरा पर गुब्बारा फेंका गया था. आरोप है कि इसके बाद उसने अपने परिवार के लोगों को बुला लिया. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई और देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुंच गया. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि हिंसा में तरुण की हत्या कर दी गई.

इस मामले में पुलिस अब तक कुल 14 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. घटना के बाद तीन महिलाएं फरार हो गई थीं और कथित तौर पर ख्याला इलाके में छिपी हुई थीं. पुलिस उनकी तलाश में भी जुटी रही. जांच के दौरान पुलिस ने कई संदिग्धों से पूछताछ की और धीरे-धीरे पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की. तरुण की मौत के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई थी. कुछ हिंदू संगठनों ने इस घटना के विरोध में प्रदर्शन भी किया. प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने तरुण की हत्या में शामिल संदिग्धों से जुड़े एक घर में तोड़फोड़ की और कथित तौर पर आग भी लगा दी.

फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है. सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले अकाउंट्स, संदिग्ध फंडिंग और हिंसा की घटना इन सभी पहलुओं को जोड़कर जांच की जा रही है. पुलिस का कहना है कि अगर जांच में और लोग शामिल पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.

द्वारका जिला पुलिस ने साफ कहा है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर अफवाह फैलाने या लोगों को गुमराह करने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. कानून के तहत ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान है. पुलिस ने दोहराया है कि सार्वजनिक शांति भंग करने या लोगों को भड़काने वाली किसी भी ऑनलाइन गतिविधि को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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