BUSINESS : ईरान वॉर के बीच स्टॉक मार्केट क्रैश, लेकिन सोना-चांदी खरीदने वालों की हो गई मौज, जानें आज कितनी बड़ी गिरावट

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ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात के बीच हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन, गुरुवार की शुरुआत में एक ओर जहां शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली और सेंसेक्स करीब 1800 अंक तक लुढ़क गया, वहीं दूसरी ओर सोना-चांदी खरीदारों के लिए राहत भरी खबर आई. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को फिर गिरावट दर्ज की गई.

सोना-चांदी में बड़ी गिरावट

यूएस स्पॉट गोल्ड 1.22 प्रतिशत गिरकर 4836 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि स्पॉट सिल्वर 2.25 प्रतिशत टूटकर 75.75 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया. वहीं घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर सोना करीब 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी गिरकर लगभग 2.50 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई.

लेमन मार्केट डेस्क के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग के अनुसार, सोना और चांदी में हालिया उतार-चढ़ाव की बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले निवेशकों की सतर्कता है.

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, जिससे निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं. गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में तनाव को करीब तीन हफ्ते हो चुके हैं और फिलहाल शांति की कोई स्पष्ट उम्मीद नजर नहीं आ रही है. वहीं, उम्मीद के मुताबिक फेडरल रिजर्व ने लगातार दूसरी बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, हालांकि इससे पहले लगातार तीन बार 0.25 प्रतिशत की दर से कटौती की गई थी.

कैसे तय होती है सोने और चांदी की कीमत?

सोना और चांदी के दाम रोज़ाना आधार पर तय किए जाते हैं और इसके पीछे कई कारक जिम्मेदार होते हैं. इनमें मुख्यतः निम्नलिखित कारण शामिल हैं: चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें अमेरिकी डॉलर में तय होती हैं, इसलिए डॉलर-रुपया विनिमय दर में बदलाव का सीधा असर इन धातुओं की कीमत पर पड़ता है. अगर डॉलर की कीमत बढ़ती है या रुपया कमजोर होता है, तो भारत में सोने की कीमतें बढ़ जाती हैं. भारत में सोने का अधिकांश हिस्सा आयात किया जाता है. ऐसे में सीमा शुल्क (Import Duty), GST और अन्य स्थानीय टैक्स सोने की कीमतों को प्रभावित करते हैं.

वैश्विक बाजार में उथल-पुथल (जैसे युद्ध, आर्थिक मंदी या ब्याज दरों में बदलाव) का सीधा असर सोने की कीमत पर पड़ता है. जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक शेयर या अन्य अस्थिर संपत्तियों की बजाय सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों को चुनते हैं. भारत में सोना केवल निवेश ही नहीं, बल्कि परंपरा और सांस्कृतिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है.

शादी-ब्याह, त्योहार और शुभ अवसरों पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है. इसलिए मांग अधिक होती है, जिससे कीमतें प्रभावित होती हैं. सोना लंबे समय से महंगाई के मुकाबले बेहतर रिटर्न देने वाला विकल्प रहा है. जब महंगाई बढ़ती है या शेयर बाजार में जोखिम होता है, तो लोग सोने में निवेश करना पसंद करते हैं. यही कारण है कि इसकी मांग और कीमत हमेशा बनी रहती है.

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