झारखंड में JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन 11वें दिन भी जारी है. पांच और प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. सरकार ने बातचीत के लिए चार मंत्रियों की समिति बनाई, लेकिन छात्रों ने साफ कहा कि वे केवल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से ही बात करेंगे. छात्र परीक्षा रद्द करने, JPSC-JSSC में सुधार और मामले की CBI या स्वतंत्र समिति से जांच की मांग कर रहे हैं.
ख़बरेंझारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. आंदोलन अब 11वें दिन में पहुंच गया है. छात्रों का आरोप है कि परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है. इसलिए वे परीक्षा रद्द करने और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे हैं. इसके साथ ही छात्र झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) में भी सुधार की मांग कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि वे 25 जुलाई से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया. उनका कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि कार्रवाई चाहिए. छात्र सीधे मुख्यमंत्री से बात करना चाह रहे हैं.

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में कई छात्र पिछले कई दिनों से धरना दे रहे हैं. झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के सदस्य देवेंद्र नाथ महतो भी लगातार अनशन पर बैठे हैं. बुधवार को उनके अनशन का चौथा दिन था. इसी बीच पांच और प्रदर्शनकारी भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए. इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं. अब अनशन करने वालों की संख्या बढ़कर छह हो गई हैसीधे सीएम से करेंगे बात
आंदोलन तेज होने के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया है. रांची के उप-संभागीय अधिकारी कुमार रजत और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट धनंजय कुमार प्रदर्शन स्थल पहुंचे. उन्होंने छात्रों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री आवास पर बातचीत के लिए बुलाया. हालांकि छात्रों ने यह प्रस्ताव तुरंत स्वीकार नहीं किया. उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे बात करना चाहते हैं. छात्र नेताओं का कहना है कि बातचीत बंद कमरे में नहीं होनी चाहिए. अगर बैठक होती है तो उसका सीधा प्रसारण किया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे. एक छात्र नेता प्रेम सागर ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद ‘सरकार आपके द्वार’ अभियान चलाते हैं. ऐसे में उन्हें खुद आंदोलन स्थल पर आकर छात्रों की बात सुननी चाहिए.
क्या बोले सीएम
उधर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि पेपर लीक सिर्फ झारखंड की समस्या नहीं है. यह पूरे देश के युवाओं के सामने खड़ी एक बड़ी चुनौती बन चुकी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि सरकार छात्रों की हर चिंता को गंभीरता से ले रही है. उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी हो रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल जांच करना नहीं, बल्कि छात्रों को स्थायी समाधान देना है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार के दरवाजे सभी छात्रों और अभ्यर्थियों के लिए खुले हैं. कोई भी अपनी बात सरकार के सामने रख सकता है और हर सुझाव पर गंभीरता से विचार किया जाएगा. हेमंत सोरेन ने यह भी बताया कि उन्होंने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर उन्हें छात्रों के आंदोलन और राज्य की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी है.


