महाराष्ट्र सरकार ने सोशल मीडिया पर बिना सबूत छवि खराब करने और फेक पोस्ट डालने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। इसके लिए DGP की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया।
डिजिटल युग में सोशल मीडिया जहां सूचना का सशक्त माध्यम बना है, वहीं इसका दुरुपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। किसी की भी छवि धूमिल करना, बिना प्रमाण के आरोप लगाना और भ्रामक जानकारी फैलाना अब आम बात हो गई है। इसी गंभीर समस्या को देखते हुए महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार अब सोशल मीडिया पर बिना किसी ठोस सबूत के बदनामी फैलाने वालों पर नकेल कसने के लिए नया कानून बनाने की तैयारी में है।
महाराष्ट्र सरकार सोशल मीडिया पर बिना सबूत बदनामी और गलत खबर फैलाने के मामलों को लेकर गंभीर हो गई है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर लोगों की छवि खराब करने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने कानून में बदलाव या नई कानूनी व्यवस्था की संभावना की जांच के लिए एक समिति गठित करने का फैसला लिया है।

सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (DGP) की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया गया है। यह समिति सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली बदनामी, फेक पोस्ट और बिना प्रमाण के लगाए जाने वाले आरोपों पर कानूनी प्रावधानों की समीक्षा करेगी। साथ ही यह भी जांच करेगी कि मौजूदा कानूनों में संशोधन या नई धाराओं की आवश्यकता है या नहीं।
सरकार ने समिति को यह जिम्मेदारी भी सौंपी है, कि वह राज्य स्तर पर नया कानून बनाने या मौजूदा कानून में संशोधन की संभावनाओं की कानूनी और तकनीकी जांच करे। साथ ही सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कानून को और मजबूत बनाने संबंधी सिफारिशें सरकार को सौंपे।
बता दें पिछले कुछ समय में साेशल मीडिया का उपयोग किसी की बदनामी करने और राजनीतिक हस्तियों की छवि धूमिल करने के लिए बढ़ा है। ऐसे में लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी को ध्यान में रखते हुए इस पर कानून बनाने की जरुरत महसूस हुई है। बिना किसी आधार के लगाए गए आरोपों से न केवल व्यक्तिगत जीवन प्रभावित होता है, बल्कि समाज में अशांति भी फैलती है।

